आवाज़ें: भारत के ब्लॉग और साइट्स से (Voices: From Indian blogs and sites)

भारत में डिमेंशिया (मनोभ्रंश) की देखभाल करने वाले अपने अनुभव खुल कर औरों के साथ नहीं बांटते, क्योंकि लोग डिमेंशिया और सामान्य वृद्धावस्था का अंतर नहीं समझ पाते और सुनने वाले सोचते हैं कि ये देखभाल करने वाले बेकार में छोटी-छोटी बातों को बढ़ा कर अपने कर्तव्य से मुकरने की कोशिश कर रहे हैं. डिमेंशिया की देखभाल इसलिए अकसर घर की चार-दीवारी में, चुपचाप होती है. इस चुप्पी का एक नतीजा यह है कि देखभाल करने वाले एक दूसरे के साथ समस्याएं और सुझाव नहीं बाँट पाते, और एक दूसरे से सीख नहीं पाते. परन्तु अब भारत के भी कुछ परिवार अपने अनुभवों के बारे में मीडिया से बात करने लगे हैं, और कुछ देखभाल की कहानियाँ अब ब्लॉग, वेबसाइट, और अख़बारों में नज़र आती हैं.

डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति की देखभाल के अनुभव के कई विस्तृत इंटरव्यू हमारे अँग्रेज़ी साईट पर हैं. इनकी सूची, हिंदी में संक्षिप्त विवरण, और लिंक देखें: आवाज़ें: देखभाल करने वाले, स्वयंसेवक, विशेषज्ञ या सीधे अँग्रेज़ी में इंटरव्यू सूची देखें: Voices: Interviews with dementia caregivers, volunteers, and experts.

हिंदी समाचार पत्रों में हिंदी में प्रकाशित कुछ डिमेंशिया-सम्बंधित अनुभव देखें: आवाज़ें: हिंदी समाचार पत्रों से (Voices: Dementia stories from Hindi newspapers).

अँग्रेज़ी में उपलब्ध कुछ भारतीय देखभाल कर्ताओं की आपबीती आप नीचे दिए गयी लिंक पर देख सकते हैं:

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