डिमेंशिया में बदले और मुश्किल व्यवहार को संभालना

डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति उत्तेजित और आक्रामक हो जाते हैं और दूसरों को हानि पहुंचा सकते हैं, या वे गुमसुम हो अपने में सिकुड़ने लगते हैं।

देखभाल करने वाले क्या कर सकते हैं: यह समझें कि यह घटनाएं व्यक्ति की किसी परिस्थिति पर प्रक्रिया है। यदि कारण कोई बीमारी है, तो उसका इलाज कराएं। यह समझने की कोशिश करें कि व्यक्ति किस बात पर, और क्यों ऐसा कर रहे हैं, और कारण को कम करें। व्यक्ति जब अजीब तरह से पेश आएँ, तो उनकी भावनाओं की कद्र करके, उनकी जरूरत पूरी करके, उनका ध्यान बांटकर, या उनसे चिकित्सीय झूठ बोलकर स्थिति को काबू में करें।

इस पृष्ठ के सेक्शन:

डिमेंशिया (मनोभ्रंश) वाले व्यक्ति के व्यवहार में कई बदलाव होते हैं। कुछ बदले व्यवहार चिंताजनक होते हैं।

डिमेंशिया के कारण व्यवहार का बदलना आम है। बदले व्यवहार के कई कारण हो सकते हैं। डिमेंशिया के कारण, व्यक्ति अपनी जरूरतें और तकलीफें बता नहीं पाते हैं, और उन्हें अपनी भावनाओं को संभालने में भी दिक्कत होती है। जैसे के अगर गुस्सा आ रहा हो, तो वे स्वयं को काबू में नहीं कर पाते। काम करने में उन्हें अनेक दिक्कतें होती हैं, जिसकी वजह से उन्हें दिन भर ठीक से रह पाने के लिए मेहनत करती पड़ती है, तो जाहिर है वे जल्दी थक सकते हैं और चिड़चिड़ा भी सकते हैं। उनके आसपास का माहौल सामान्य व्यक्ति को ठीक लग सकता है, पर शायद उनके लिए अनुकूल न हो, और उनकी दिक्कत बढ़ा रहा हो। लोगों की उनसे उम्मीदें भी उन पर दबाव डालती हैं, और उनके काम न कर पाने पर लोगों की प्रतिक्रिया उन्हें और दुखी कर सकती है या उतावला कर सकती है। मस्तिष्क में हानि उन भागों में भी हो सकती है जो व्यवहार जो सभ्य और उचित रखने के लिए जरूरी है, और इस वजह से व्यक्ति शायद असभ्य और अनुचित/ अश्लील हरकतें भी करें। (अधिक चर्चा के लिए देखें: डिमेंशिया का व्यक्ति के व्यवहार पर असर)।

देखभाल करने वाले यह तो समझते हैं कि डिमेंशिया की वजह से व्यक्ति को दिक्कतें हो रही हैं, पर वे अनेक प्रकार के बदले व्यवहारों के लिए तैयार नहीं होते।

व्यक्ति का कुछ व्यवहार चिंताजनक हो सकता है क्योंकि उससे व्यक्ति या आसपास वालों को नुकसान हो सकता है। ऐसे व्यवहारों को अक्सर “मुश्किल व्यवहार” कहते हैं (“behavior of concern” या “challenging behavior”)।

कई परिवार वाले सोचते हैं कि चिंताजनक व्यवहार का हल सिर्फ दवाई देना है। पर देखभाल के कई ऐसे तरीके हैं जिनसे बदले और चिंताजनक व्यवहार संभाले जा सकते हैं। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर डिमेंशिया के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं से अनुसार अधिकाँश डिमेंशिया वाले व्यक्ति के व्यवहार में बदलाव होंगे और चिंताजनक व्यवहार को अक्सर बिना दवाई के रोका या संभाला जा सकता है।

देखभाल करने वालों को यह देखना होता है कि व्यक्ति के ऐसे कौन से व्यवहार हैं जिनसे व्यक्ति को, या आसपास के लोगों को हानि हो सकती है। यह सोचना होता है कि इन व्यवहारों को कैसे रोकें। यदि व्यवहार रोक न पाएँ तो कम से कम स्थिति को ज्यादा बिगड़ने न दें और तबाही के हद तक न जाने दें (“catastrophic” level पर न पहुंचने दें) और व्यवहार से हो रही हानि को भी कम ही रखें।

किसी विशिष्ट व्यवहार के कारण समझना और फिर हल ढूंढ़ना एक उद्देश्य-प्राप्ति वाला, लक्षित तरीका है, क्योंकि यह एक खास समस्या को सुलझाने की कोशिश है, और इसका एक सीधा, केंद्रित लक्ष्य है। यह ध्यान रखें कि यदि परिवार में देखभाल के अन्य तरीके भी अपनाए हों, जिनसे व्यक्ति की स्थिति के सभी पहलुओं में सुधार होता है, तो ऐसे मुश्किल व्यवहार की संभावना कम हो जाती है। आप अगर व्यक्ति को ऐसे माहौल में रख पाएँ जिसमें व्यक्ति शांत और खुश रहें, और अपने काम करने की गिरती क्षमता के कारण निराश न हो, तो व्यक्ति के उत्तेजित होने की संभावना कम होगी। बातचीत का तरीका कारगर हो, एक परिचित दिनचर्या हो जो व्यक्ति के अनुकूल हो, तो व्यक्ति संतुष्ट रहेंगे। व्यवहार की समस्याएँ फिर भी हो सकती हैं, और आपको इन्हें समझने के लिए और जूझने के लिए तरीके चाहियेंगे।

कुछ स्थितियों की वजह से वातावरण में अधिक तनाव हो सकता है, और दैनिक दिनचर्या में और देखभाल के तरीकों में व्यवधान संभव है । मनोभ्रंश से ग्रस्त व्यक्ति भ्रमित हो सकते हैं और भटका सकता हैं और अधिक चुनौतीपूर्ण व्यवहार दिखा सकते हैं। एक उदाहरण है कोविड महामारी के कारण उत्पन्न बदलाव। ऐसी स्थितियों में, परिवारों को व्यक्ति को अपेक्षाकृत स्थिर वातावरण देने के लिए घर और देखभाल के तरीकों को बदलने की आवश्यकता होती है, और बदले हुए व्यवहारों को संभालने के लिए और अधिक तैयार होने की भी आवश्यकता होती है।

नोट-1: इस पृष्ठ पर मुश्किल व्यवहार के लिए एक सामान्य प्रक्रिया पर चर्चा है। यह डाक्टरी सलाह नहीं है; जरूरत हो तो आप डॉक्टर से सलाह जरूर करें।

नोट-2:कुछ विशेष प्रकार के मुश्किल व्यवहार पर चर्चा देखें इस दूसरे पृष्ठ पर: कुछ विशेष समस्याएँ और उनके लिए सुझाव: घर से निकल कर गुम होना, मूल-मूत्र पर नियंत्रण खो देना, बार-बार बात दोहराना, रात भर जाग कर बेचैन रहना

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शांत और सकारात्मक(पॉजिटिव) रहें।

brain damage contrast: image from ADEAR
(सौजन्य: National Institute on Aging/National Institutes of Health).

जब डिमेंशिया वाले व्यक्ति कुछ अजीब हरकत करें, तो शायद आप परेशानी महसूस करें। याद रखें :

  • डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति सचमुच दिक्कतें महसूस करते हैं। डिमेंशिया के कारण उनके दिमाग में जो हानि हुई है, उसके कारण उन्हें हर काम में मुश्किल होती है, चाहे वह आसपास के माहौल समझने में हो, या कुछ याद करने में या सोचने में, या काम करने में या बात करने में। उनका मुश्किल व्यवहार इसकी वजह से है, जिद्द की वजह से नहीं है, और न ही आपको परेशान करने के लिए।
  • जिसको आप मुश्किल व्यवहार समझते हैं, वह व्यक्ति का अपनी स्थिति के बारे में एक प्रकार का सन्देश है। डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति भी कई बार अपनी जरूरत या भावना बता नहीं पाते और शायद यह भी नहीं जानते कि उन्हें क्या चाहिए, और इस निराशा और परेशानी में उनका व्यवहार “मुश्किल” व्यवहार बन जाता है। ऐसा व्यवहार समय के साथ बढ़ता है। अगर हम उनके व्यवहार के उनकी मनःस्थिति के बारे में एक सन्देश समझें तो हम शायद समस्या क्यों है, यह समझ पायेंगे, और हल भी ढूँढ पायेंगे। जैसे कि बच्चे के रोने के तरीके से उसके रोने की वजह का अंदाज़ा लगा पाते हैं, और परेशान होने के बजाय हम हल सोच पाते है, वैसे ही अगर हम घबराएं नहीं और समझने की कोशिश करें तो डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति के व्यवहार जो भी समझ पायेंगे।
  • व्यवहार व्यक्ति का एक स्थिति के प्रसंग में प्रतिक्रिया है, जिसमे डिमेंशिया के अतिरिक्त, वातावरण और अन्य लोगों का भी योगदान है। हम सिर्फ व्यक्ति को व्यवहार के लिए जिम्मेदार नहीं समझ सकते, हमें समझना होगा कि व्यक्ति का व्यवहार अनेक पहलुओं से प्रभावित होता है। कई बातें जो हमें सामान्य लगती हैं वे व्यक्ति के लिए दिक्कतें पैसे कर सकती हैं। हमारी उम्मीदों का, और हमारी प्रतिक्रियाओं का भी व्यक्ति पर असर पड़ता है। बदले व्यवहार की स्थिति में हमें सोचना चाहिए कि यह व्यवहार किस किस बात की प्रतिक्रिया में हुआ है, और हम क्या बदल सकते हैं।
  • क्योंकि आप का दिमाग स्वस्थ है, इसलिए आप इस स्थिति में है कि आप डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति और पूरी स्थिति को समझ पाएँ। डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति खुद को समझने की स्थिति में नहीं है, इसलिए इस समस्या से उभरने का काम आप ही बेहतर कर सकते हैं।

व्यवहार देखने पर, कुछ सोचने और शांत होने के बाद, यह सोचें कि क्या हुआ था, क्या उससे कुछ नुकसान हो सकता है, और जो हुआ उसकी क्या वजह हो सकती है। सोचें, आगे से इस व्यवहार को कैसे कम कर सकते हैं। मुश्किल व्यवहार संभालने के लिए एक प्रक्रिया का वर्णन नीचे है।

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बदले व्यवहार के लिए एक प्रक्रिया।

अनेक विशेषज्ञों का मानना है कि बदले व्यवहार के लिए दवाई के बारे में सोचने से पहले दूसरे तरीके (non-pharmacological approaches) आजमा लेने चाहियें, क्योंकि अधिकाँश केस में यह पर्याप्त रहते हैं। Alzheimer’s Association, USA के लेख, Treatments for Behavior, में सुझाव दिए गए हैं कि व्यवहार के लिए आप यह ढूँढें:

  • चिंताजनक व्यवहार क्यों शुरू हुआ? यह पहचानें और उसे शुरू करने वाली घटना या वस्तु को समझें (Triggering situations)।
  • व्यक्ति की चिकित्सकीय जाँच करें, कहीं कारण कोई बीमारी तो नहीं? (खास तौर से यदि समस्या अचानक शुरू हुई है)। उचित इलाज करें (Medical evaluation for contributing factors)।
  • व्यक्ति शारीरिक तौर से और भावनात्मक तौर से आराम से हों , इसके लिए बगैर दवाई वाले कदम उठायें (Non-drug approaches)।
  • व्यवहार से उत्पन्न स्थिति से उभरने के लिए कदम उठायें (Using coping tips)।
  • अन्य तरीके बार-बार आजमाने पर भी काम न करें तो व्यवहार के लिए दवाई का इस्तेमाल करें (Medications for behavioral symptoms)।

वर्तमान सोच यह है कि गैर-औषधिशास्त्रीय तरीके (non-pharmacological approaches) पहले आजमाएँ, और दवाई सिर्फ कुछ स्थिति में इस्तेमाल करें।

इस पृष्ठ पर हम गैर-औषधिशास्त्रीय तरीकों पर चर्चा कर रहे हैं। जहाँ तक दवाई का सवाल है, ऐसे कई लिंक हैं जिससे देखभाल करने वाले डॉक्टर के साथ दवाई के फायदे नुकसान के बारे में बात करने लायक जानकारी प्राप्त कर सकें। नीचे के “इन्हें भी देखें” सेक्शन को देखें।

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बिना दवाई के व्यवहार को संभालें।

यह है बिना दवाई वाली एक संभव प्रक्रिया के कदम:

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यह सोचें: क्या यह व्यवहार सचमुच चिंताजनक है?

 dementia behavior that is odd but not dangerous behavior of concern

कभी कभी व्यक्ति अजीब हरकतें करते हैं, जो देखने में अटपटी लगती हैं पर जो किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचातीं। ऐसे व्यवहार को चिंताजनक न समझें।

डिमेंशिया के कारण व्यक्ति की क्षमताऐं कम होती हैं, और व्यक्ति के लिए सामान्य काम भी कठिन होने लगते हैं या अजीब लगने लगते हैं। ऐसे में स्वाभाविक है कि वे कुछ चीजें अलग तरीके से करते हैं। जब व्यक्ति कुछ अजीब हरकत करते हैं(खासकर ऐसी हरकत जो बाहर वाले देख पाते हैं) तो परिवार वाले झेंप जाते हैं और व्यक्ति को बदलने की कोशिश करते हैं। जैसे कि, अम्मा ने नाईटी उलटी पहनी हो, या अप्पा गुलाब जामुन पर सांभर डाल कर खा रहे हों। पर अगर आप सोचें, तो ऐसे व्यवहार से किसी का कोई नुकसान नहीं हो रहा।

डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति तो अनेक तरह की अजीब चीजें करेंगे। उनसे यह उम्मीद रखना कि वे सामान्य व्यक्तियों की तरह व्यवहार करें, यह तो अन्याय है। उन्हें तो वैसे ही डिमेंशिया की वजह से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, उन पर यह बोझ क्यों डालें? उनको बात बात पर ठीक करने की कोशिश करना, उनसे छोटी छोटी बातों पर बहस करना, टोकना, यह सब उनके दिन को और भी तनाव से भर सकता है।

अगर व्यक्ति का व्यवहार आपको कुछ अटपटा लगें तो फिक्र करने से पहले स्वयं से पूछें: क्या इस व्यवहार से व्यक्ति को कोई हानि हो सकती है? क्या इस व्यवहार से आसपास के अन्य किसी को कोई हानि हो सकती है? यदि “हाँ”, तो यह व्यवहार चिंताजनक/ मुश्किल व्यवहार है, और यदि उत्तर है “नहीं”, तो उस व्यवहार को लेकर फिक्र न करें।

ऐसे मुश्किल व्यवहार के उदाहरण जिनसे नुकसान हो सकता है :

  • भटकना/ घर से निकल जाना, खो जाना।
  • चिल्लाना, गाली देना, बदतमीज़ी करना, लोगों पर हँसना।
  • किसी को थप्पड़ मारना, धक्का देना।
  • शक करना, इल्जाम लगाना।
  • चीज़ों को छुपाना/ जमाखोरी/ फिर चीजों को खो देना।
  • अश्लील हरकतें करना (जैसे कि कपड़े उतरना, भद्दी हरकतें करना, नर्स से चुम्बन माँगना), महिलाओं को ज़बरदस्ती पकड़ने की कोशिश करना।
  • अनिद्रा और शाम/ रात को अत्याधिक बेचैनी hone।
  • मिथ्या विश्वास (delusions) या विभ्रमित होने (Hallucinations) की वजह से कुछ कहना/ करना।
  • मूत्र/ मल असंयम (Incontinence)।
  • निजी स्वच्छता पर ध्यान न देना (दाँत ब्रश न करना, ठीक से नहीं नहाना)।
  • खाना ठीक से न खाना।
  • भयभीत होना/ दुश्चिन्तित होना, और देखभाल कर्ता से चिपक कर रहना।
  • उदासीनता (Apathy) और अंतर्मुखी हो जाना (withdrawal)।
  • बातों को या हरकतों को दोहराना।
  • अश्लील हरकतें करना, महिलाओं को ज़बरदस्ती पकड़ने की कोशिश करना।

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ABC विश्लेषण (ABC analysis) के इस्तेमाल से समस्या का कारण समझें।

व्यवहार को समझने के लिए एक कारगर उपाय है ABC विश्लेषण (ABC analysis) का इस्तेमाल करना। इसके तीन भाग हैं:

  • A: Antecedent: (पूर्वता) मुश्किल व्यवहार को दिखाने से पहले व्यक्ति क्या कर रहे थे।
  • B: Behaviour: (व्यवहार) व्यक्ति का वह चिंताजनक व्यवहार जो मुश्किल पैदा कर रहा है, और जिसको आप रोकना (या कम करना) चाहते हैं।
  • C: Consequence (परिणाम): चिंताजनक व्यवहार के बाद क्या होता है, व्यवहार का परिणाम।

ABC विश्लेषण में व्यवहार क्यों होता है, यह समझने की कोशिश की जाती है, और फिर व्यवहार के कारक (triggers) को हटाने या कम करने की कोशिश की जाती है। मूल बात यह है कि व्यक्ति के चिंताजनक व्यवहार के पीछे कोई वजह जरूर है, चाहे आप उसे देख पाएँ या नहीं, और जो व्यवहार आपको मुश्किल व्यवहार लग रहा है, वह व्यवहार उस स्थिति के लिए उस व्यक्ति की प्रतिक्रिया (response) है। आप यदि व्यक्ति की दृष्टि से स्थिति को देख पाएँ, तो शायद कुछ हल निकाल पाएंगे।

इन सब पहलुओं के बारे में सोचें:

  • व्यक्ति का इतिहास और उनका स्वभाव। हरेक व्यक्ति की अपनी आदतें होती हैं, अपनी पसंद/ नापसंद, अपनी बीते हुए कल पर आधारित खुशी और दुःख, अपने डर, वगैरह। डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति की कुछ प्रतिक्रियाएं उनके इतिहास और स्वभाव के कारण हो सकती हैं, और आप व्यक्ति के बारे में जो जानते हैं, उसका इस्तेमाल करके शायद यह समझ सकें कि कोई विशेष व्यवहार किस बात की प्रतिक्रिया थी।
  • व्यक्ति किसी स्थिति को कैसे देखते हैं: व्यक्ति पर डिमेंशिया का असर समझें। व्यक्ति की किन क्षमताओं पर कितना असर हुआ है, और यह असर समय के साथ कैसे बदल रहा है, इससे भी व्यक्ति की प्रतिक्रिया पर असर पड़ता है। जो बात पहले व्यक्ति के लिए सामान्य थी, वही बात अब शायद व्यक्ति को उत्तेजित करे, क्योंकि व्यक्ति की बात समझने की शक्ति पहले से कमज़ोर हो गयी है। डिमेंशिया से व्यवहार पर कैसे प्रभाव पड़ता है, इसका खयाल रखें, और व्यक्ति के बदलते व्यवहार के कारण समझने में इसका इस्तेमाल करें।

स्थिति को समझने के लिए आप व्यक्ति के इर्द-गिर्द का माहौल देखें, और देखें कि व्यक्ति क्या कहने या करने की कोशिश कर रहे थे, साथ में कौन कौन थे, बातचीत में दिक्कत थी क्या, वगैरह।

मान लीजिए एक पारिवारिक उत्सव पर डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति जिद्द करने लगें कि उन्हें घर जाना है। जो अन्य परिवार वालों के लिए एक सुखद मिलने झूलने का मौका है, वही अवसर डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति के लिए तनाव पैदा कर रहा है क्योंकि व्यक्ति लोगों को नहीं पहचान पा रहे, बातों को नहीं समझ पा रहे, और यह भूल गए हैं कि बाथरूम कहाँ है। आप अगर स्वयं को व्यक्ति की स्थिति में डालें, तो व्यक्ति का व्यवहार समझना आसान है।

स्वास्थ्य संबंधी कारण इतने स्पष्ट नहीं होते, क्योंकि व्यक्ति आपको अपनी तकलीफ के बारे में बता नहीं पाते। जैसे कि, दर्द होने पर व्यक्ति नहीं कह पाते कि उन्हें दर्द हो रहा है। या अगर वे दवाई लेना भूल गए हैं, तब भी आपको शायद पता न चले। शायद चश्मे का नंबर अब ठीक न काम कर रहा हो। कभी कभी दवाई के दुष्परिणाम की वजह से व्यक्ति को मिथ्या विश्वास (delusions) या विभ्रमण (hallucinations) हो सकते हैं।

खुले दिमाग से, रचनात्मक ढंग से सोचें तो आप मुश्किल व्यवहार के कारण ढूंढ पायेंगे। व्यक्ति को ध्यान से देखें। शायद हॉल में शीशे के पास व्यक्ति उत्तेजित हो जाते हैं, तो हो सकता है कि अपनी शक्ल शीशे में देखने से चकरा रहे हैं कि यह कौन है और यहाँ क्यों है। कुछ सुझाव सपोर्ट ग्रुप में भी मिल सकते है, जहाँ देखभाल करने वाले आपस में किस्से बांटते हैं।

सोचने लायक कुछ बातें (यह सूची संकेतक है, ताकि आप सोचना शुरू कर पाएँ। सूची पूरी नहीं है):

शरीर में तकलीफ महसूस करना/ अस्वस्थ होना (medical reasons):

  • चश्मे या सुनने के यंत्र का ठीक काम न करना (Problems with hearing aid or glasses)।
  • परेशानी/ बेचैनी।
  • दर्द।
  • कब्ज (Constipation)।
  • संक्रमण (Infection)।
  • थकान।
  • अवसाद (Depression)।
  • निर्जलता (निर्जलीकरण, Dehydration), कुपोषण (malnutrition)।
  • दवाई के दुष्परिणाम (Side-effect of medication)।
  • बीमारी।

भावनात्मक समस्या/ विचलित होना (emotionally disturbed)।

  • कोई पुरानी दर्दनाक घटना याद आना।
  • किसी आदमी या वस्तु से डर जाना।
  • किसी की बहुत याद आना ।

बातचीत ठीक से न कर पाने की वजह से निराशा/ गुस्सा।

  • यह न बता पाना कि उन्हें क्या चाहिए।
  • अपनी बात न समझा पाना, अपने ख्याल व्यक्त न कर पाना।
  • औरों की/ आसपास हो रही बात न समझ पाना।
  • अपमानित महसूस करना, या निराश या हताश होना।

आसपास के माहौल की वजह से घबरा जाना।

  • चारों तरफ इतनी चीजें फैली हैं कि घबराहट हो, और जो खोज रहे हों वह वस्तु न मिल रही हो।
  • यह नहीं जान पाना कि बाथरूम कहाँ है।
  • यह नहीं समझ पाना कि यह कौन सा घर है, कौन सा कमरा।
  • शोर से घबराना।
  • यह सोचना कि वे अनजाने लोगों के बीच हैं।
  • अधिक अँधेरा होना।

कुछ ऐसा काम करना जो न हो पा रहा हो, और फिर निराश होना।

  • काम बहुत कठिन है (व्यक्ति के वर्तमान की क्षमता के बाहर)।
  • काम बोरियत वाला है, तुच्छ है, करने में व्यक्ति को लगता है कि उन्हें हीन समझा जा रहा है।
  • काम से वे परिचित नहीं हैं।
  • काम करने का तरीका कठिन है। जरूरी कदम बहुत ज्यादा हैं।
  • व्यक्ति काम करने के लिए अपने हाथ ठीक से नहीं चला पा रहे हैं ।

देखभाल वाले की उम्मीद से/ प्रक्रिया से/ चेहरे के हाव-भाव से व्यक्ति का उत्तेजित या निराश होना।

  • देखभाल कर्ता का चिड़चिड़ा जाना/ व्यक्ति पर गुस्सा करना।
  • देखभाल कर्ता का व्यक्ति को काम जल्दी करने के लिए कहना।
  • व्यक्ति के काम में गलती निकालना या गलती पर हंसना।
  • व्यक्ति कोई काम ठीक न कर पायें या कुछ याद न रखें तो देखभाल कर्ता का निराशा दिखाना।
  • देखभाल कर्ता का रोना/ गुस्सा करना/ डांटना/ व्यंग से बात करना।
  • देखभाल कर्ता द्वारा व्यक्ति को नीचा दिखाना/ निरादर दिखाना/ व्यक्ति को नजरअंदाज करना।
  • देखभाल कर्ता के चेहरे पर गुस्सा नज़र आना (चाहे वे कुछ न कहें)।

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मुश्किल व्यवहार के कारणों को हटाएँ, या व्यक्ति की प्रतिक्रिया को बदलें, या व्यवहार से हो सकने वाले नुकसान को कम करें।

मुश्किल व्यवहार का कारण समझ पाने के बाद, आप कारण को हटाने के तरीके सोच सकते हैं। कारण हटाने के लिए व्यक्ति के आस पास बदलाव करें, या अपने बात करने के ढंग को बदलें, दिनचर्या बदलें, वगैरह। मुश्किल व्यवहार की वजह से कितना नुकसान हो सकता है, उसको भी कम करने की कोशिश करें।

इन सब उपाय के बाद देखें कि क्या आपने जो कदम उठाये हैं, वे कारगर रहे हैं? यदि नहीं, तो कुछ और सोचकर आजमायें। व्यक्ति के बारे में जानकारी और रचनात्मक सोच का इस्तमाल करें, और अपने उपायों को, जैसे उचित हो, एडजस्ट करते रहें।

सुझावों के लिए सपोर्ट ग्रुप और अन्य साधनों का भी इस्तेमाल करें, क्योंकि ऐसे फोरम में आप अनेक तरह से स्थिति को देख पायेंगे। पुस्तकें भी उपलब्ध है, और वेबसाइट, वीडियो, और पत्रिकाएँ भी। इन सब से आप को कुछ अंदाज़ा पड़ सकता है कि किस तरह के हल ढूंढ़ें।

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कुछ अन्य सुझाव।

(इस पृष्ठ पर मुश्किल व्यवहार के लिए सामान्य तरीकों की चर्चा की गयी है। कुछ विशेष प्रकार के मुश्किल व्यवहार पर चर्चा देखें इस दूसरे पृष्ठ पर: कुछ विशेष समस्याएँ और उनके लिए सुझाव: घर से निकल कर गुम होना, मूल-मूत्र पर नियंत्रण खो देना, बार-बार बात दोहराना, रात भर जाग कर बेचैन रहना (Special tips for challenging behaviours: wandering, incontinence, repetitions, sundowning) .)

उत्तेजित व्यक्तियों को संभालना कठिन होता है क्योंकि अक्सर डिमेंशिया में व्यक्ति अपनी भावनाओं को नियंत्रित नहीं कर पाते। व्यक्ति कुछ भी कर रहे हों, आपको शांत रहना होगा, वरना स्थिति काबू से बाहर हो जायेगी। आप घबराएंगे या गुस्सा करेंगे तो व्यक्ति आपकी भावना को पहचान जायेंगे पर यह नहीं जान पायेंगे कि आप परेशान क्यों हैं, और इस वजह से वे उल्टा और भी उत्तेजित हो सकते हैं। आप चाहे कुछ कहें नहीं, पर व्यक्ति आपकी भावना को भांप पायेंगे और उसके आधार पर अपनी प्रतिक्रिया दिखाएँगे।

कुछ सुझाव:

  • शांत रहें।
  • व्यक्ति की बात शांत, स्नेहपूर्ण ढंग से सुनें।
  • अपने शब्दों और हाव-भाव से, दोनों से आश्वासन दें।
  • बहस न करें। गलतियाँ न निकालें। यह न कहते रहें कि व्यक्ति गलती पर हैं, और आप उन्हें सुधार रहे हैं, या आपको उनकी वजह से दिक्कत हो रही है, या वे बेतुकी बात कर रहे हैं।
  • अगर लगे कि व्यक्ति आपको मारने वाले हैं तो पीछे हट जाएँ, या व्यक्ति को कुछ देर अकेला छोड़ दें।
  • यदि लगे कि व्यक्ति खुद को हानि पहुंचा सकते हैं, तो बिना गुस्सा किये और बिना चिल्लाये उन्हें रोकें। जरूरत से ज्यादा जोर न लगाएं। मदद के लिए किसी को बुला लें।
  • व्यक्ति की भावनात्मक जरूरत को समझने की, और उसे पूरी करने की कोशिश करें।

व्यक्ति की उत्तेजना को संभालने के लिए व्यक्ति के नजरिए से सोचें, और उसी हिसाब से हल ढूंढ़ें।

डिमेंशिया की शुरू की अवस्था में, जब व्यक्ति यह नहीं समझ पाते कि वे कहाँ है, तो समय और जगह का बोध (reality orientation ) कराने से उनकी घबराहट दूर हो सकती है। पर बाद की अवस्था में ऐसा करना उल्टा पड़ जाता है, क्योंकि व्यक्ति आपका विश्वास नहीं करते और अपनी मिथ्या विश्वास से नहीं उभर पाते। वे आपको झूठा समझते हैं। ऐसे में समझाना या बहस करना उल्टा पड़ जाता है।

आपको ऐसा तरीका ढूंढ़ना होगा जो व्यक्ति की समझ और “सच्चाई” को ध्यान में रखे, और जिससे बिना बहस, बिना व्यक्ति को गलत बोलते हुए, आप व्यक्ति की उत्तेजना को संभाल पाएँ।

एक उपयोगी तरीका है: व्यक्ति की भावनाओं को समझ कर उनको स्वीकारना (validation), जिससे व्यक्ति को लगे कि उनकी भावनाओं की कद्र हो रही है, और वे संतुष्ट हों, और शांत हो जाएँ।

मान लीजिए पापा अपनी बहन सरला से मिलने की जिद्द कर रहे हैं , और वे बार बार सरला की मांग कर रहे हैं । पर सरला को मरे तो बीस साल हो चुके हैं। अगर आप पापा से कहें कि “सरला बुआ तो बीस साल पहले मर चुकी हैं, याद नहीं क्या, भला सरला बुआ कैसे आ सकती हैं!” तो पापा आपको झूठा बोलेंगे, या उन्हें यह वहम होगा कि यह आपका कोई छल है। याद रखें, कि पापा के लिए सरला बुआ जिंदा हैं , और आखिर वे अपनी सच्चाई को छोड़, आपकी बात को सच क्यों मानेंगे!

स्थिति के अनुसार रचनात्मक हल ढूंढ़ें। जैसे, ऊपर की स्थिति में :

  • मूल भावना को स्वीकारें, कि पापा अपनी बहन सरला को याद कर रहे हैं। आप पापा से कह सकते हैं, “आपको सरला बुआ की याद आ रही है?” और फिर आप सरला बुआ की बातें कर सकते हैं, या पापा को पुरानी एल्बम दिखा सकते हैं। इस तरह आप पापा की भावनात्मक जरूरत, बहन की याद, को स्वीकार रहे हैं, और फिर उन्हें बहन के बारे में बात भी करने दे रहे हैं, जिससे शायद पापा की उत्तेजना कम हो सकती है, और वे मधुर यादों में खो सकते हैं।
  • हो सकता है पापा को बहन का इंतजार किसी अन्य काम की वजह से हो। पापा से कहें, “सरला बुआ नहीं आ पायंगे” और पूछें कि कुछ और काम है क्या? शायद पापा इस इंतजार में है कि बहन आयेगी तभी खाना खायेंगे, और उनकी असली जरूरत खाना खाने की है।
  • कभी कभी चिकित्सकीय झूठ(therapeutic lies/ fiblets) की जरूरत भी पड़ती है। कई देखभाल कर्ता झूठ बोलने के खयाल से ही कतराते हैं, पर आप यह सोचें कि व्यक्ति तो किसी और ही दुनिया में, किसी दूसरी ही सच्चाई में हैं , और उनके लिए आपका “सच” समझना बहुत मुश्किल है। पापा के ख्यालों में उनकी बहन जिंदा हैं, और जब तक वे वापस नहीं आयेंगी, पापा खाना नहीं खायेंगे। ऐसे में आपका यह कहना कि बहन बीस साल पहले मर चुकी है पापा के लिए एक सदमा हो सकता है, और उनको शोक में डुबो सकता है, या पापा सोचेगा कि आप झूठ बोल रहे हैं। इसकी जगह यह कहना कि बहन ट्राफिक जैम में फंस गयी हैं शायद मौके के लिए काफी रहे। आप फिर पापा का ध्यान दूसरी तरफ ध्यान बांट दें। पर इतना लंबा लच्छेदार झूठ न बनाएँ कि पापा उसमें ही गलतियाँ ढूंढ पाए!
  • यदि व्यक्ति उत्तेजित न हो और आप उनकी परेशानी दूर कर चुके हैं, तो उनका ध्यान बांटना आसान हो जाता है।
  • कुछ व्यक्तियों को धीमे, मधुर संगीत से सुकून मिलता है और पीछे (बैकग्राऊंड में ) कोई ऐसी धुन हल्के से बजाने से उनकी उत्तेजना कम हो जाती है और वे शांत हो जाते हैं। कुछ व्यक्तियों को खुशबूदार अगरबत्तियों या ऐसे अन्य aromatherapy से फायदा होता है, और कुछ को हौले से छूने से, या मालिश (massage) से। पर ये तरीके काम करेंगे या नहीं और कितने कारगर होंगे, यह व्यक्ति पर निर्भर है।

भावनाओं को समझने और स्वीकारने से व्यक्ति को शांत करना आसान होता है। एक अन्य उदाहरण: मान लीजिए व्यक्ति सोच रहे हैं कि उनकी कोई वस्तु खो गयी है (चाहे यह वस्तु काल्पनिक हो)। आप यह बहस न करें कि अम्मा, वह हार तो दस साल पहले मेले में गुम गया था, आज थोड़े ही गायब हुआ है! इसकी जगह आप अम्मा को हार के महत्त्व के बारे में बोलने दें, और हार के न मिलने पर सहानुभूति दिखाएँ, और उसकी खोज भी शुरू करें। अम्मा को संतोष होगा कि आप उनके दुख को समझते हैं, और वे अकेली नहीं हैं। इससे उनके शांत होने की संभावना ज्यादा है। फिर थोड़ी देर बाद उन्हें किसी दूसरे काम में लगाएं तो शायद वो कुछ देर के लिए हार ढूंढ़ने की जिद्द छोड़ दें।

[ऊपर]  [पृष्ठ की सेक्शन सूची पर]

दवाई और बदला/ मुश्किल व्यवहार।

व्यवहार संभालने के लिए दवाई कुछ स्थिति में उपयुक्त है और कुछ में नहीं। देखभाल करने वालों को डॉक्टर से दवाई देने के फायदे और नुकसान समझ लेने चाहियें, क्योंकि कुछ दवाइयों के दुष्परिणाम (साइड-अफेक्ट, side-effect) भी होते है, और कुछ दवाइयाँ काफी नुकसान भी कर सकती हैं।

कुछ व्यक्तियों को दवा से काफी फायदा हो सकता है, पर यह माना जाता है कि व्यवहार की समस्याओं के लिए डॉक्टर दवाईयों का प्रयोग जरूरत से ज्यादा करते हैं। देखा गया है कि अगर डॉक्टर को लगे कि परिवार व्यक्ति के व्यवहार के बहुत परेशान है, तो कई डॉक्टर ऐसे में दवा लिख देते हैं और यह नहीं कहते कि दवा के बगैर संभालने की कोशिश करें । विशेषज्ञों का विचार है कि व्यवहार की समस्याओं के लिए दवाई देने से पहले अन्य तरीकों को आजमा लेना चाहिए और दवाई देनी भी हो तो सही मात्रा में देनी चाहिए और व्यक्ति की स्थिति पर निगरानी रखनी चाहिए। दवाई कब उचित है और कब नहीं, इसके लिए गाईडलाइन भी हैं।

भारत में लोग डॉक्टर से दवाई के बारे में पूछने में हिचकिचाते हैं, पर अच्छा यहीं है कि देखभाल करने वाले दवाई की कारगरता और साइड-अफेक्ट के बारे में पूछ लें, और यह भी इत्मीनान कर लें कि दवाई की वाकई जरूरत है या अन्य तरीकों से व्यक्ति के व्यवहार में बदलाव किया जा सकता है।

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इन्हें भी देखें.

हिंदी पृष्ठ, इसी साईट से:

इस विषय पर हमारे अन्य वेबसाइट से सामग्री: ये सब अंग्रेज़ी पृष्ठ भारत में देखभाल के संदर्भ में लिखे गए हैं।

कुछ उपयोगी इंटरव्यू:

इस विषय पर हिंदी सामग्री, कुछ अन्य साईट पर: यह याद रखें कि इन में से कई लेख अन्य देश में रहने वालों के लिए बनाए गए हैं, और इनमें कई सेवाओं और सपोर्ट संबंधी बातें, कानूनी बातें, इत्यादि, भारत में लागू नहीं होंगी।

इस पृष्ठ का नवीनतम अँग्रेज़ी संस्करण यहाँ उपलब्ध है: Handling Behaviour Challenges Opens in new window। अंग्रेज़ी पृष्ठ पर आपको विषय पर अधिक सामयिक जानकारी मिल सकती है। कई उपयोगी अँग्रेज़ी लेखों, संस्थाओं और फ़ोरम इत्यादि के लिंक भी हो सकते हैं। पृष्ठ पर कई उपयोगी तरीकों पर भी विस्तार से चर्चा है, और लिंक भी, जैसे कि समर्थन (validation) तकनीक और चिकित्सकीय झूठ (fiblets and therapeutic lies)। दवाईओं का व्यवहार में इस्तेमाल कब करें, कब नहीं, इस के बारे में विशेषज्ञ के क्या राय है–इस पर चर्चा और लिंक हैं।

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