कुछ विशेष समस्याएँ और उनके लिए सुझाव: घर से निकल कर गुम होना, मल-मूत्र पर नियंत्रण खो देना, बार-बार बात दोहराना, रात भर जाग कर बेचैन रहना (Special tips for challenging behaviours: wandering, incontinence, repetitions, sundowning)

कुछ अकसर परेशान करने वाले व्यवहार हैं: भटकना, मूत्र असंयमता, बात को या व्यवहार को दोहराना, शाम या रात को ज्यादा बेचैन होना (wandering, incontinence, repetitions, sundowning)

देखभाल करने वाले क्या कर सकते हैं:  यह समझें कि ये व्यवहार आम तौर पर क्यों होते हैं, और देखें कि उनकी देखभाल की स्थिति में व्यक्ति के इस व्यवहार का क्या कारण हो सकता है. इस पृष्ठ पर दिए गए सुझाव भी देखें, और सब उपलब्ध जानकारी के बारे में सोच कर अपनी स्थिति के अनुरूप समस्या से जूझने का तरीका सोचें और आजमायें. तरीकों को जैसे जरूरत हो वैसे बदलें, ताकि स्थिति में सुधार हो.

डिमेंशिया (मनोभ्रंश) वाले व्यक्ति के व्यवहार के अनेक कारण हैं, जैसे कि व्यक्ति की स्थिति, उनके आसपास क्या हो रहा है, वे क्या कर रहे हैं और क्या चाहते हैं, उनका माहौल, और अनेक अन्य बातें. देखभाल करने वाले व्यक्ति के बदले व्यवहार से व्यक्ति की स्थिति, क्षमताएं, और जरूरतों के बारे में जान सकते हैं. कारण का अंदाज़ा हो जाए तो व्यवहार संभालने के रचनात्मक हल भी खोजे जा सकते हैं. पिछले पृष्ठ, बदले और मुश्किल व्यवहार को संभालना, पर बदले व्यवहार को समझने और संभालने के लिए एक उपयोगी प्रक्रिया पर चर्चा थी, जिसे किसी भी बदले व्यवहार के लिए अपनाया जा सकता है. इस पृष्ठ पर आइये देखें कुछ ऐसे व्यवहार जिनको लेकर देखभाल करने वाले अकसर परेशान हो जाते हैं, और उनके लिए कुछ सुझाव भी देखें.

नोट: इस पृष्ठ पर सिर्फ गैर-चिकित्सीय तरीकों पर चर्चा है.पर आप यह ना भूलें कि व्यक्ति का व्यवहार किसी दर्द या बीमारी के कारण भी हो सकता है, क्योंकि ऐसी स्थिति में भी डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति अक्सर अपनी तकलीफें बता नहीं पाते. मेडिकल वजह के बारे में पहले जरूर सोच लें, और डॉक्टर से सलाह कर लें. वैसे भी, यदि व्यवहार संभाल न पा रहे हों और वह चिंताजनक हो/ नुकसान पंहुचा रहा हो तो डॉक्टर से सलाह करें.

भटकना/ गुम होना (Wandering)

डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति अकसर भटक जाते हैं, घर से निकल जाते हैं, भीड़ में खो जाते हैं, और फिर वापस घर का रास्ता नहीं ढूंढ पाते. यह एक गंभीर समस्या है, और व्यक्ति कभी कभी कुछ घंटे, दिन, महीना, या सालों के लिए नहीं मिल पाते, या मिलते हैं तो अकसर चोट खाई गंभीर हालत में. इस विषय पर ऊपर दिया हुआ वीडियो देखें, जिसमें विस्तृत जानकारी है और सुझाव भी. (वीडियो प्लेयर लोड न हो तो इस वीडियो को यूट्यूब पर यहाँ क्लिक करके देखें: डिमेंशिया में भटकने और खोने की समस्या: परिवार वालों के लिए सुझाव)

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मूत्र (और मल) असंयमता (Incontinence)

डिमेंशिया के कारण स्थिति बिगड़ने से व्यक्ति के मूत्र और मल पर असंयम भी बढ़ सकता है. इससे देखभाल का काम भी ज्यादा हो जाता है, और बाहर वालों के सामने शर्मिंदगी के मौके भी बढ़ सकते हैं, इसलिए व्यक्ति का आना-जाना भी कम हो जाता है. मध्यम अवस्था में मूत्र असंयमता अधिक आम है, पर धीरे धीरे मल/ मोशन (stool, motion) के मामले में भी असंयमता होने लगती है.

मल/ मूत्र असंयम एक कारण है डिमेंशिया, जिससे व्यक्ति या तो बाथरूम का रास्ता भूल जाता है, या उसे समय पर आभास नहीं होता कि उसे बाथरूम जाने की जरूरत है. या बाथरूम को कैसे इस्तेमाल करें, उसे याद नहीं होता. कपड़े टाइम से उतारने में भी दिक्कत हो सकती है.

यह भी ध्यान रखें कि असंयमता अन्य बीमारियों या संक्रमण के कारण भी पैदा हो सकता है और दवाई से दूर हो सकता है, परन्तु परिवार वाले जांच कराने की नहीं सोचते और बेकार ही मुसीबत झेलते हैं.

मूत्र असंयमता के तीन मुख्य प्रकार है: (1) stress/ दबाव असंयम (जिसमें हँसते वक्त या छींकते या खांसते वक्त या व्यायाम करते वक्त कुछ बूँदें निकल जाती हैं) (2) उत्तेजक असंयमता/ urge incontinence (जिसमें व्यक्ति बाथरूम तक पहुंचने तक मूत्र को रोक नहीं पाते) और (3) निरंतर भरे मूत्राशय के कारण असंयमता/ overflow incontinence (जिसमें मूत्राशय/ ब्लैडर इतना भरा रहता है कि कुछ मूत्र उस में से निकलता रहता है). डॉक्टर जांच करके असंयमता का प्रकार पता चला सकते हैं, और यदि संभव और उचित हो, तो उपचार या सर्जरी भी कर सकते हैं.

डॉक्टर की सलाह के अतिरिक्त, इन सुझावों के बारे में भी सोचें:

  • बाथरूम के रास्ते में रोशनी काफी रखें, बाथरूम के दरवाजे पर लेबल लगाएं (कमोड के चित्र के साथ), और रास्ते में हैंड रेल भी लगाएं, ताकि व्यक्ति बाथरूम पहचान पाएँ और आसानी से और जल्दी से पहुंच पाएँ
  • कमोड की सीट ऊँची हो, पास में हैंड रेल हो, और सीट ऐसी हो कि हिले नहीं, ताकि व्यक्ति को बैठने में और उठने में आसानी हो
  • व्यक्ति को ऐसे कपड़े पहनाएं जो जल्दी से उतारे जा सकें
  • पेय कितना और कब दे रहे हैं, इसकी वजह से बाथरूम कब जाना होगा, यह सम्बन्ध समझें. शाम को पीने की चीज़ें या रसे का खाना न दें ताकि रात को बार बार बाथरूम जाने की जरूरत न हो. (रात को व्यक्ति ज्यादा कंफ्यूस हो जाते हैं)
  • कुछ खाने/ पीने की चीजें ऐसी होती हैं जिनसे बाथरूम ज्यादा जाना पड़ता है, जैसे कि कुछ व्यक्ति कॉफी पीने के बाद बार बार बाथरूम जाने की जरूरत महसूस करते हैं. ऐसा हो तो व्यक्ति की खुराक से यह आइटम हटा दें या कम कर दें.
  • व्यक्ति को हर कुछ घंटे बाद खुद बाथरूम ले जाएँ, ताकि बाकी टाइम पर कपड़े गन्दा करने की संभावना कम हो. इस नियमित रूप से बाथरूम ले जाने की प्रक्रिया को स्वाभाविक और सहज रखें, एक आदत की तरह, और इसे लड़ाई का या जोर/ दबाव का मौका न बनाएँ.
  • व्यक्ति के हाव-भाव को देखते रहें, अगर उन्हें बाथरूम जाने की जरूरत होगी तो वे बेचैन लगेंगे या छटपटाने लगेंगे, और आप अंदाजा लगा पाएंगे कि शायद उसको बाथरूम जाने की जरूरत है
  • अगर व्यक्ति तैयार हों, तो रात के वक्त पलंग के पास कमोड कुर्सी (potty chair) और पिस-पॉट (pisspot)रख दें ताकि उन्हें बाथरूम के लिए कहीं दूर न जाना पड़े (यह तरकीब शुरू की अवस्था में ज्यादा कारगर होगी, जब व्यक्ति समझ सकते है कि यह कुर्सी या पिस-पॉट किस लिए है)

आप कुछ भी कर लें, कभी कभी तो मूत्र असंयम होगा ही. घर में ऐसे बदलाव करें जिससे ऐसे मौकों पर असुविधा कम हो, जैसे कि पलंग और कुर्सियों के सूती कवर के नीचे प्लास्टिक की चादर लगाएं (यह बच्चों की दुकानों में मिलती हैं). गद्दे और तकिये भी प्लास्टिक से ढक दें, और फिर कवर चढ़ाएं. इससे गंदे होने पर धोना आसान होगा, और फोम और गद्दे गन्दगी से बचे रहेंगे. फर्श पर से कालीन और दरी हटा लें, नहीं तो मूत्र की बूँदें गिरेंगी और बू धोने पर भी नहीं जा पायेगी.

व्यक्ति जब खुद को गन्दा कर देते हैं तो परिवार वालों के लिए काफी दिक्कत हो जाती है. कई बार व्यक्ति यह नहीं समझते/ मानते कि उनको अब कपड़े बदलने होंगे, और वे उल्टा गुस्सा करने लगते हैं. आप यह याद रखें कि डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति से बहस करना बेकार है. व्यक्ति से बार बार कहना कि उन्होंने पेशाब या स्टूल कपड़ों में कर दिया है, और यह सोचना कि व्यक्ति इस “गलती” को मानेंगे, इसका कोई फायदा नहीं, क्योंकि व्यक्ति अधिकतर मानेंगे नहीं. वे उत्तेजित हो जायेंगे तो साफ करना और मुश्किल हो जाएगा. अच्छा यही है कि सहजता से, किसी दूसरे बहाने कपड़े बदलवा दें. कहें, शाम हो गई है, क्यों न ताजा हो जाएँ. या कोई छोटा सा दाग दिखा कर कहें, चलिए साफ कपड़े पहन लें. व्यक्ति को शर्मिंदा करने की कोशिश न करें.

सफाई करते हुए जैसे उचित हो, ग्लव पहने, डेटोल का इस्तेमाल करें, वगैरह. बू हटाने के लिए आप फ्रेशेनेर का प्रयोग भी कर सकते हैं. ऐसे हादसों के बाद, यह भी सोचें कि आगे से ऐसे हादसे किस तरह से कम किये जा सकते हैं.

मल/ मोशन (stool, motion) पर असंयमता संभालना ज्यादा मुश्किल है, पर यह समस्या शुरू में कम और अग्रिम अवस्था में ज्यादा होती है. व्यक्ति अकसर बता पाते हैं कि उन्हें मोशन होने वाला है, और पूछने पर भी सही जवाब दे पाते है. गलतियाँ फिर भी होंगी, इसलिए तैयार रहें. खाने के बाद मोशन की संभावना ज्यादा होती है. व्यक्ति ने कब कब मोशन करा, उन्हें कब्ज (constipation) तो नहीं, इन सब बातों का ख़याल रहे, तो समय पर व्यक्ति को ले जाना ज्यादा आसान हो जाता है. डॉक्टर से पूछ कर खाने में फाइबर (dietary fibre) की मात्र ठीक रखें, और डॉक्टर सलाह दें तो स्टूल सोफेनेर (stool softener) का इस्तेमाल भी करें. व्यायाम से भी कब्ज दूर हो सकता है.

व्यक्ति की स्वच्छता का खयाल रखें. गंदे कपड़े बदलें, हाथ धुलवायें, त्वचा को साबुन से साफ करें और जैसे उचित हो, उस पर पाउडर या क्रीम लगाएं. गंदे कपड़े डिसइन्फेक्ट करें और धोएं और धूप में सुखाएं.

असंयमता संभालने के लिए बाजार में वयस्कों के लिए डाएपर और पैड (incontinence diapers and pads) मिलते हैं. यह महंगे तो होते हैं, पर इनसे व्यक्ति को साफ रहना आसान हो जाता है. कुछ व्यक्ति तो इनका इस्तेमाल कर पाते हैं, पर कुछ अन्य व्यक्ति इनसे बेचैन हो जाते हैं और पहनने से इनकार कर देते हैं या उतार कर फेंक देते हैं. कुछ ऐसे डाएपर भी आते हैं जो कच्छी (underwear, panties) जैसे होते हैं और उसी तरह पहने-उतारे जा सकते हैं, और शायद इन्हें इस्तेमाल करने में व्यक्ति को ऐतराज़ न हो.

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दोहराना (Repetitive behavior)

दोहराना डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्तियों में एक आम समस्या है. शायद व्यक्ति एक ही बात बार बार कहें, जैसे कि बाथरूम जाना है, और आप बाथरूम ले जाएँ, और वापस कमरे में आते ही व्यक्ति फिर कहें, मुझे जाना है. या शायद वे एक ही सवाल बार बार पूछें, और आपके बार बार जवाब देने पर भी रुकें नहीं. या शायद कोई काम वे बार बार करे, जैसे हाथ धोना.

दोहराना कई वजह से हो सकता है:

  • व्यक्ति शायद भूल गए हों कि यह बात वे एक मिनट पहली ही कह चुके हैं या यह सवाल पूछ चुके हैं
  • उस बात को कहने में, या सवाल पूछने के पीछे व्यक्ति की कोई ऐसी जरूरत है जो पूरी नहीं हो रही है
  • व्यक्ति व्यवहार के एक प्रकार के चक्कर/ लूप में फँस गए हैं, और उससे निकल नहीं पा रहे
  • कोई ऐसी भावना है जो व्यक्ति बता नहीं पा रहे
  • व्यक्ति शायद आसपास की किसी चीज़ से डर गए हैं
  • दोहराना कुछ दवाइयों का भी दुष्परिणाम हो सकता है

बार बार जब व्यक्ति एक ही सवाल करते हैं तो परिवार वाले चिड़चिड़ा जाते हैं और कुछ कह देते हैं, जिससे व्यक्ति उत्तेजित हो जाते हैं, और बात बिगड़ती जाती है. इस चक्र रोकने के लिए यह सुझाव देखें:

  • शांत रहते हुए आप जवाब धीरे से दोहराएँ, सरल शब्दों में, छोटे वाक्यों में.
  • इशारे और संकेत भी जवाब में जोड़ दें, ताकि जवाब समझने में आसानी हो
  • अगर लगे कि व्यक्ति परेशान या दुःखी है, तो इस परेशानी को हटाने के लिए सवाल के नीचे की भावना या फिक्र को समझने की कोशिश करें, और उस भावना या फिक्र को स्वीकारें.(validation)
  • अगर लगे कि व्यक्ति पूछ तो कुछ रहे हैं, पर उन्हें किसी दूसरी ही बात का फिक्र है, तो उस फिक्र को स्वीकारें और हटाने की कोशिश करें
  • शायद व्यक्ति अकेलापन महसूस कर रहे हों और आपको पास रखने के लिए बार बार सवाल कर रहे हों
  • शायद व्यक्ति वही सवाल बार बार पूछने के एक तरह के लूप में चले गए हैं, और आप उनका ध्यान उससे हटा दें तो वे लूप से निकल पायेंगे

उदाहरण के तौर पर, शायद अम्मा बार बार तारीख पूछ रही हैं, पर इसलिए नहीं क्योंकि वे तारीख जानना चाहती हैं, बल्कि इसलिए क्योंकि वे सोच रही हैं कि शायद उन्हें सैर के ले जाने का दिन आ गया है. “आज सोमवार है” कहने के बजाय अगर आप उनके पूछने का मतलब समझें, तो आप कह सकते हैं, “आज सोमवार है. पार्क में घूमने हम कल, यानि मंगलवार को जायेंगे. बड़ा मज़ा आएगा.” इससे उन्हें जो वह चाहती थीं, वह पता चल जाएगा

एक अन्य दोहराने का व्यवहार है व्यक्ति का आपसे पूछना कि आपने खाना खाया या नहीं. हो सकता है व्यक्ति स्नेह दिखा रहे हों, या व्यक्ति को भूख लगी है, और वे इसकी ओर इशारा कर रहे हों. यह भी हो सकता है कि व्यक्ति आपकी तरफ ऐसी औपचारिकता दिखा रहे हैं जैसे कि आप मेहमान हैं. कभी कभी अगर आप एक प्लेट की तरह संकेत करके कहें, कि हाँ, मैं खा चुका हों, तो व्यक्ति समझ जायेंगे. या आप कह सकते हैं कि मैं तो खा चुका हूँ, क्या आप खाना चाहते हैं, और ऐसे एक बोलने का रिवाज पूरा हो जाएगा (completes the social ritual) और व्यक्ति को संतोष हो जाएगा. हर परिवार ऐसे सवालों से निबटने के लिए अपने तरीके ढूंढ़ते हैं. शांत जरूर रहें. यह ध्यान रखें कि व्यक्ति से बहस करने से, या गुस्सा करने से बात बिगड़ती है.

व्यक्ति कभी कभी कोई हरकत बार बार करने लगते हैं, जैसे कि मेज़ पर उँगलियों से थपथपाना. ऐसा व्यवहार कुछ प्रकार के डिमेंशिया रोगों में अधिक पाया जाता है. डॉक्टर से सलाह करें कि क्या यह किसी दवाई का दुष्परिणाम तो नहीं? या शायद ऐसे व्यवहार के लिए कोई इलाज हो.

एक अन्य दोहराने वाला व्यवहार जो आम है वह यह है कि व्यक्ति कहेंगे, मुझे बाथरूम जाना है. आप ले जाएँ, पर वापस कमरे में बैठते ही व्यक्ति फिर जिद करेंगे कि बाथरूम जाना है. इसकी कई वजह हो सकती हैं, जैसे कि:

  • शायद व्यक्ति को कब्ज हो (constipation).
  • शायद व्यक्ति ड्राइंग रूम जाना चाहते हैं और “बाथरूम” शब्द गलती से कह रहे हैं
  • शायद वे बेचैन है क्योंकि उन्हें बाथरूम का रास्ता याद नहीं, और सोच रहा है कि जब बाद में जरूरत पड़ेगी तो कैसे जाऊँगा
  • शायद व्यक्ति को डर हो कि बाथरूम नहीं गया तो कपड़े गंदे कर दूंगा, और यह शर्म की बात हो जायेगी
  • कभी कभी व्यक्ति एक काम को बार बार करने के एक तरह के लूप में चले जाते हैं और उससे खुद निकल नहीं पाते. उनका ध्यान किसी दूसरी तरफ खींचें तो यह लूप टूट सकता है.

सिर्फ शब्दों पर न जाएँ. व्यक्ति के हाव-भाव और शारीरिक भाषा (body language) को देखने से व्यक्ति की जरूरतों का ज्यादा अंदाजा पड़ सकता है. फिर अपनी समझ के अनुसार व्यक्ति को उचित जवाब दें, उनकी भावनाओं को स्वीकारें और स्थिति के अनुसार व्यक्ति से बात करें, मदद करें, आश्वासन दें, ध्यान बांटे और किसी ऐसे दूसरे काम में लगा दें (जैसे के हाथ में कुछ पकड़ा दें) कि व्यक्ति का दोहराना बंद हो जाए.

अन्य मुश्किल व्यवहारों की तरह, दोहराने की क्रिया कब और क्यों शुरू होती है, आप यह समझें तो क्रिया रोकने में या कम करने में आराम होगा.

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अनिद्रा और शाम/ रात की बेचैनी (Sleeplessness and Sundowning)

कुछ डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति शाम होने पर ज्यादा बेचैन होने लगते हैं और ज्यादा कंफ्यूस होते हैं. रात को सोने की बजाय, वे बडबडाते रहते हैं या चहलकदमी करने लगते हैं. देखभाल करने वालों के लिए यह बहुत थका देने वाली बात हो जाती है, क्योंकि उन्हें व्यक्ति पर रात भर नज़र रखनी पड़ती है कि व्यक्ति खुद को चोट न लगा दें. व्यक्ति तो दिन में सो कर अपनी नींद पूरी कर पाते हैं, पर परिवार वालों को तो काम करना होता है, और उनकी नींद पूरी नहीं हो पाती.

डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति sundowning क्यों दर्शाते हैं, यह तो पक्का मालूम नहीं पर इसके लिए कुछ सुझाव:

  • यह चेक करें कि व्यक्ति के इस व्यवहार के पीछे कोई बीमारी या दवाई का असर तो नहीं, और डॉक्टर से सलाह करें
  • व्यक्ति के दिनचर्या को देखें. शायद शाम के वक्त व्यक्ति कुछ ऐसा कर रहे हों जिससे वे ज्यादा सक्रिय हो रहे हैं और उसके बाद उनका आराम कर पाना मुश्किल हो.
  • अगर व्यक्ति रात को इसलिए बेचैन हैं क्योंकि उन्हें बार बार बाथरूम जाने की जरूरत महसूस हो रही है, तो शाम को पानी और अन्य पेय न दें, ताकि बाथरूम जाने की इतनी जरूरत न पड़े.
  • दिनचर्या ऐसा रखें कि व्यक्ति को थकान न हो. ज्यादा थकने पर आराम करना मुश्किल हो सकता है
  • दिन में कुछ देर धूप में चलने या बैठने से शरीर का दिन-रात का चक्र (day-night body cycle) ठीक रहता है.
  • अगर आप व्यक्ति को बाहर ले जा रहे हों, तो सैर का इंतज़ाम ऐसा करें कि शाम तक वापस आ पाए और व्यक्ति इतने जोश में न हो कि आराम न कर पाएँ. उन्हें थकने न दें.
  • शाम के खाने को भी देखें, कि खाना भारी तो नहीं? पचाने में दिक्कत तो नहीं हो रही?
  • शायद व्यक्ति किसी बात पर परेशान हों और उन्हें आश्वासन की जरूरत हो.
  • रात के वक्त घर में इतनी रोशनी जरूर रखें कि व्यक्ति डरे नहीं, और नींद से आँख खुलने पर अपने आप को अंजान जगह में समझ कर घबराए नहीं. रौशनी इतनी हो कि व्यक्ति घर में बेहिचक चल पाएँ, जैसे कि बाथरूम ढूंढ़ना.
  • अगर व्यक्ति को रात में चहलकदमी करने की आदत है, तो ऐसी सब चीजें हटा दें जिनसे व्यक्ति को चोट लग सकती है, या जिनसे व्यक्ति डरे.

व्यक्ति की रात की बेचैनी की वजह से परिवार वालों को सतर्क रहना पड़ता है. यह काम परिवार वाले बारी-बारी से कर सकते हैं, ताकि घर के सब लोग न थकें. या ऐसी कोई घंटी लगाएं (जैसे कि घुँघरू की लड़ी बाँध दें) जिससे व्यक्ति उठे तो आपको पता चल पाए. डॉक्टर से सलाह जरूर लें.

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अन्य अजीब और मुश्किल व्यवहारों पर कुछ टिप्पणी

ऊपर जिन व्यवहारों पर चर्चा है, वे देखभाल करने वालों के परेशान करने वाले मुश्किल व्यवहार में प्रमुख हैं. पर ऐसे अनेक दूसरे व्यवहार हैं जिनके कारण परिवारजन हताश महसूस करते हैं, और समझ नहीं पाते कि करें तो क्या करें. जैसे: आक्रमण, उत्तेजना दिखाना, व्यग्रता, अवसाद (depression), अश्लील व्यवहार, देखभाल करने वालों का पिछोला बन जाना और उन्हें बेबात बुलाते रहना, वस्तुएं बिना बात छुपाना या खोते रहना, बेचैनी, चीखना चिल्लाना, शक करना, इत्यादि. पहले की तरह काम न कर पाने से भी मिलने जुलने वालों के साथ और परिवार में मुश्किल हो सकती है. ये सब बदले व्यवहार अनेक शारीरिक, सामाजिक, और मनोवैज्ञानिक कारणों से हो सकते हैं. व्यक्ति के इर्द-गिर्द का माहौल और उनसे बात करने का और उनकी मदद करने के तरीकों से भी व्यवहार पर असर होता है.

डिमेंशिया वाले व्यक्तियों में दृष्टिभ्रम/ विभ्रम (Hallucinations) की समस्याएं भी हो सकती हैं, और उन्हें दृश्य और स्थानिक बोध में दिक्कत हो सकती है (visual and spatial perception problems). इससे उनकी कठिनाइयाँ और भी ज्यादा हो जाती हैं, और उनका व्यवहार अधिक चिंताजनक हो सकता है. वे शायद यह न पहचानें कि उन्हें समस्या हो रही है इसलिए खुद और दूसरों को खतरे में डालते रहें. उदाहरण के तौर पर, वे ड्राइव करना बंद न करें, और दुर्घटना हो सकती है. परिवार वालों के लिए भी जानना मुश्किल हो जाता है कि व्यक्ति किस काम को सुरक्षित रूप से कर सकता हैं, और क्या खतरनाक है और बंद कराना चाहिए.

व्यवहार समझने और संभालने के लिए परिवार वाले पिछले पृष्ठ पर दी गयी प्रक्रिया का इस्तेमाल कर सकते हैं (बदले और मुश्किल व्यवहार को संभालना). इसके अतिरिक्त वे व्यवहार के मुताबिक़ विशेष तरीके भी आजमा सकते हैं, जो अनेक संसाधनों में हैं, और वे सपोर्ट ग्रुप, पुस्तकों, फोरम, इत्यादि से भी जानकारी और सुझाव पा सकते हैं.

नीचे के “इन्हें भी देखें” सेक्शन में कुछ लिंक हैं, और हमारे अंग्रेज़ी पृष्ठ का लिंक भी है. इस अंग्रेज़ी पृष्ठ पर अनेक उपयोगी लेखों के लिए लिंक मौजूद हैं. यह सब अंग्रेज़ी में हैं, और अधिकाँश लिंक अन्य देशों में रह रहे परिवारों के लिए हैं, इसलिए भारत में इस्तेमाल करने के लिए स्थिति और माहौल के अनुसार कुछ बदलाव करने होंगे.

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इन्हें भी देखें…

हिंदी पृष्ठ, इसी साईट से:

इस विषय पर हमारे अन्य वेबसाइट से सामग्री: ये सब अंग्रेज़ी पृष्ठ भारत में देखभाल के संदर्भ में लिखे गए हैं.

भारत से कुछ भटकने के किस्से और सुझाव यहाँ भी देख सकते हैं: Where is Mother, or, when a dementia patient walks out.

कुछ उपयोगी इंटरव्यू:

इस विषय पर हिंदी सामग्री, कुछ अन्य साईट पर:

असंयमता के लिए हिंदी लेख: मूत्र असंयतता .

इस विषय पर हिंदी सामग्री, कुछ अन्य साईट पर: यह याद रखें कि इन में से कई लेख अन्य देश में रहने वालों के लिए बनाए गए हैं, और इनमें कई सेवाओं और सपोर्ट संबंधी बातें, कानूनी बातें, इत्यादि, भारत में लागू नहीं होंगी.

इस पृष्ठ का नवीनतम अँग्रेज़ी संस्करण यहाँ उपलब्ध है: Special tips for challenging behaviours: wandering, incontinence, repetitions, sundowning. अंग्रेज़ी पृष्ठ पर आपको विषय पर अधिक सामयिक जानकारी मिल सकती है. कई उपयोगी अँग्रेज़ी लेखों, संस्थाओं और फ़ोरम इत्यादि के लिंक भी हो सकते हैं. कुछ खास उन्नत और प्रासंगिक विषयों पर विस्तृत चर्चा भी हो सकती है. अन्य विडियो, लेखों और ब्लॉग के लिंक, और उपयोगी पुस्तकों के नाम भी हो सकते हैं.

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