डिमेंशिया देखभाल और कोविड-19 (COVID-19) (भाग-2) : देखभाल कैसे एडजस्ट करें

COVID 19 महामारी से उत्पन्न स्थिति में डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति को इस वायरस से बचाना परिवार वालों के कार्यों का सिर्फ एक पहलू है (इस के लिए भाग 1 देखें)। व्यक्ति को देखभाल की जरूरत होती है, जैसे कि दैनिक कार्यों में सहायता देना, और उनको स्वस्थ और सक्षम रखने के लिए कदम उठाना, जैसे कि गतिविधियों का कारगर इस्तेमाल। पर COVID 19 महामारी और सम्बंधित प्रतिबन्ध के कारण देखभाल में कुछ बदलाव की जरूरत है।

व्यक्ति की देखभाल सुचारू रूप से चलती रहे, इस के लिए अकसर परिवार वाले अपनी स्थिति के अनुसार एक व्यवस्था का इस्तेमाल करते हैं, पर COVID-19 महामारी के कारण यह पुराना दिनचर्या अस्त-व्यस्त हो गया होगा। एक तरफ व्यक्ति को COVID 19 से बचाने के लिए कई बदलाव जरूरी हैं, और ऊपर से प्रतिबंधों के कारण घर के सभी लोगों के आने-जाने और काम करने के तरीके बदल गए हैं। और ये बदलाव एक-दो दिन की बात नहीं। COVID 19 से व्यक्ति को बचाना तो तब तक चलता रहेगा जब तक या तो COVID 19 का खतरा ख़त्म हो जाए या कोई टीका उपलब्ध हो। और प्रतिबंधों के कारण और सम्बंधित सामाजिक और आर्थिक निर्णयों के कारण हुए परिवर्तन भी ख़त्म होने में समय लेंगे। हालांकि लॉकडाउन के हर अवतार में बराबर कुछ ढील दी जा रही है, पर पहले जैसी स्थिति पर लौटने में समय लगेगा

यह जरूरी है कि परिवार वाले COVID-19 उत्पन्न नई परिस्थिति के अनुसार देखभाल के तरीके को ऐसे बदलें ताकि जरूरी काम ठीक चलते रहें, व्यक्ति और बाकी परिवार वालों को परेशानी न हो, और लम्बे अरसे तक अपनाने पर भी इस नई व्यवस्था से थकान और तनाव न हो

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COVID-19 और सम्बंधित प्रतिबन्ध से उत्पन्न चुनौतियाँ

बदली परिस्थिति के कारण अनेक चुनौतियाँ पेश हो सकती हैं। कुछ उदाहरण:

  • घर में अधिक भीड़ और चहल-पहल: लॉकडाउन और अन्य दिशानिर्देशों के कारण बाहर निकलने पर विभिन्न प्रकार के प्रतिबन्ध हैं। कई लोग अब घर से ही काम या पढ़ाई कर रहे हैं कई परिवार के सदस्य अब दिन भर घर पर ही हैं। घर से काम करने वाले फ़ोन पर जोर जोर से बात कर रहे हैं, या एक दूसरे को चुप रहने के लिए बोल रहे हैं – बिना काम वाले लोग टीवी पर लगे रहते हैं या गप्पें मारते रहते हैं। शोर और गतिविधियों का स्तर बढ़ सकता है।
  • घर में तनाव का माहौल बढ़ सकता है, और प्राइवेसी कम हो सकती है घर का साइज़ तो उतना ही है, पर अब दिन भर उसमें ज्यादा लोग हैं, और सब का पारा आसानी से चढ़ने लगता है। आपस में बात-बेबात बहस हो सकती है काम ज्यादा है, पर काम बांटना शायद ठीक से न हो, औरत इस से भी परेशानी हो सकती है। कुछ हेल्पलाइन और विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह के लॉकडाउन में घरेलू संघर्ष, हिंसा, उत्पीड़न इत्यादि की घटनाएं भी बढ़ती हैं। आर्थिक कठिनाइयाँ भी हो सकती है, जिन के कारण तनाव और भी अधिक होगा।
  • सहायकों और सेवाओं/ साधनों की कमी पहले की व्यवस्था में जिन साधनों और सहायकों का उपयोग होता था, वे साधन और सहायक अब शायद उपलब्ध न हों। जैसे कि, कुछ घरों में विभिन्न प्रतिबन्ध के कारण या वाहन (बस, मेट्रो, ऑटो) न चलने के कारण काम करने वाली बाई या ड्राईवर या डिमेंशिया देखभाल के लिए रखे गए सहायक/ आया अब अन्दर नहीं आ सकते। या जिस डे केयर में व्यक्ति पहले कुछ समय के लिए जाते थे, वह अब बंद है। घर का सामान्य काम और देखभाल का काम, शायद परिवार वालों के लिए दोनों का कार्यभार बढ़ सकता है
  • डिमेंशिया देखभाल के तरीकों में बदलाव सहायकों की कमी, घर में अधिक काम, हल-चल और उथल-पुथल होना, इन सब का असर व्यक्ति के दिनचर्या पर हो सकता है। नियमित गतिविधियाँ बदल सकती हैं। दिन का टाइम-टेबल फर्क हो सकता है। ऊपर से दैनिक कार्यों में मदद करने वाले व्यक्ति को COVID 19 से बचाने के लिए जो सावधानियां लेते हैं (जैसे कि फेस मास्क, बार-बार हाथ धोना, सतहों को बार-बार पोंछना), उन से भी व्यक्ति को उलझन हो सकती है।

डिमेंशिया वाले व्यक्ति के लिए आम तौर पर किसी भी नई परिस्थिति से एडजस्ट करना आमतौर पर कठिन होता है, और इतने सारे बदलावों, डिमेंशिया वाले व्यक्ति परेशान और विचलित हो सकते हैं। उनके मूड में उतार-चढ़ाव हो सकता है। उनका व्यवहार बदल सकता है और उनकी क्षमताएं भी कम हो सकती हैं। इस सब के कारण उनकी देखभाल अधिक मुश्किल हो जाती है, ऊपर से देखभाल करने वाले का कार्यभार और तनाव वैसे भी बढ़ सकता है

एक महत्वपूर्ण चुनौती है कि ऐसे में व्यक्ति की भटकने की संभावना बढ़ जाती है। लॉकडाउन / कर्फ्यू के माहौल में भटकना विशेष रूप से खतरनाक हो सकता है। लोग किसी अजनबी के पास आने में या उसकी मदद करने में संकोच कर सकते हैं। मौजूदा प्रतिबंधों के कारण परिवारों के लिए एक बड़ी खोज का अभियान शुरू करना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि मदद करने वालों को भी शायद इ-पास की जरूरत हो । भटकने वाले व्यक्ति से पुलिस अगर पूछताछ करे तो उससे भी समस्या हो सकती है, क्योंकि व्यक्ति बाहर होने का कोई स्पष्ट और वैध कारण नहीं दे सकता है। अप्रैल के मध्य (भारत) में, कार चला रहे एक वरिष्ठ को पुलिस ने रोका। जब पूछताछ की गई, तो वरिष्ठ को लॉकडाउन या पास के बारे में पता नहीं था। वरिष्ठ के तौर-तरीके, अस्वीकार्य भाषा और प्रतिक्रियाओं के कारण वरिष्ठ के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। यह घटना दर्शाती है कि डिमेंशिया वाले व्यक्ति को विभिन्न प्रतिबंधों का अनुपालन करवाना बहुत चुनौतीपूर्ण है।

सच तो यह है, इतने सारे बदलावों के साथ,व्यक्ति का परेशान होना और बदले हुए व्यवहार दिखाना स्वाभाविक है परिवारों को चिंताजनक व्यवहार कम करने की कोशिश करनी होगी। उन्हें यह ध्यान देना होगा कि घर में सीमित रहने से और घर के बदले माहौल के कारण व्यक्ति का मूड खराब न हो, बोरियत न हो, और अकेलापन न हो – ये सब डिमेंशिया वाले व्यक्ति के लिए शारीरिक या संज्ञानात्मक गिरावट का कारण बन सकते हैं।

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देखभाल के तरीके एडजस्ट करने के लिए कुछ सुझाव

ऐसी स्थिति में कई स्रोतों से एकत्रित कुछ देखभाल टिप्स:

  • सबसे जरूरी है कि पुराने दिनचर्या और नई परिस्थिति की सच्चाई, दोनों के आधार पर एक नया दैनिक दिनचर्या बनाएं एक नियमित दिनचर्या डिमेंशिया व्यक्ति की देखभाल का एक जरूरी अंग है, क्योंकि इस से व्यक्ति को आगे क्या होगा उसका पूर्वानुमान रहता है और व्यक्ति अधिक सहज महसूस करते हैं। यह नया दिनचर्या व्यावहारिक होनी चाहिए। इस में सब जरूरी कार्य शामिल होने चाहियें। इस का रोज इस्तेमाल करने से व्यक्ति को और देखभाल करने वाले को, किसी को भी तनाव या नाराजगी या थकान नहीं होनी चाहिए। पुराने दिनचर्या से नए दिनचर्या से बदलने का काम ऐसी गति से करें जो व्यक्ति को परेशान न करे और सभी को मान्य हो
  • उपयुक्त शारीरिक और संज्ञानात्मक गतिविधियों को शामिल करें उन चीजों की तलाश करें जो व्यक्ति का मन लगाएं और उन्हें व्यस्त रखे, उनकी बेचैनी कम करे, और उनकी मानसिक क्षमता बढ़ाए। उन गतिविधियों के बारे में सोचें जो उन्हें पहले करने में मज़ा आया था, और जो उनकी वर्तमान रुचि और क्षमता के अनुकूल हैं। ऐसे कार्यों से दूर रहें जिन से उन्हें असहजता हो या चिड़चिड़ाहट हो। खयाल रहे कि ऐसे काम ही चुनें जो देखभाल करने वाले बिना मुश्किल के कर पायें। उदाहरण के लिए, यदि देखभाल करने वालों के पास इसके लिए समय और ऊर्जा है (और यदि व्यक्ति इसे पसंद करता है) तो देखभाल करने वाले व्यक्ति को अपनी पुरानी यादों, व्यंजनों की विधि आदि का टेप करने या लिखने को प्रोत्साहित कर सकते हैं। या कुछ ऑनलाइन व्यायाम प्रोग्राम का चयन करें जहां व्यक्ति वीडियो में उन लोगों के साथ “भाग” कर सकते हैं। कई अन्य उपयोगी ऑनलाइन कार्यक्रम भी हैं जैसे कि कुर्सी ताइ-ची, कुर्सी योग, कुर्सी सूर्यनमस्कार आदि जो वरिष्ठों के लिए बनाए गए हैं, और डिमेंशिया वाले व्यक्ति के लिए भी उपयुक्त हैं। ये वरिष्ठ नागरिकों के साथ काम करने वाले संगठनों या डिमेंशिया या पार्किंसंस रोग सम्बंधित संस्थाओं से मिल सकते हैं। उपयोग करने से पहले जाँच करें कि इन में दिखाए गए व्यायाम सुरक्षित और सरल हैं
  • व्यक्तियों का मनोरंजन करने के लिए उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करें व्यक्ति को व्यस्त रखने की और उनका मन लगाए रखने की कोशिश करें (पर उन्हें अधिक उत्तेजित न होने दें)। ऐसे तरीके खोजें जिन से देखभाल करने वालों का कार्यभार न बढ़े। उदाहरण के लिए, पुराने टीवी सीरियल जो अब दोबारा दिखाए जा रहे हैं (भारत में कुछ ऐसे टीवी शो प्रसारित किए जा रहे हैं)। या पुरानी फिल्म क्लिप और गाने, भजन आदि। देखभाल कर्ता के पास समय है तो वे व्यक्ति के साथ बैठ कर कुछ पुरानी यादों को ताजा करने वाले काम भी कर सकते हैं, पर उदास या उत्तेजित करने वाली यादों से दूर रहें । ऐसे तरीके चुनें जो व्यक्ति की पसंद के हिसाब से हैं और उन्हें खुश करती हैं पर थकाती नहीं हैं
  • कुछ मेलजोल वाली गतिविधियों को जरूर शामिल करें अपना घर का बाग़ न हो तो बाहर टहलना संभव नहीं (COVID 19 से बचाव के कारण और प्रतिबंधों के कारण) । घर में मेहमान का आना भी नहीं होता। इसलिए व्यक्ति को अकेलापन महसूस हो सकता है। मूड पर भी इस का असर हो सकता है । व्यक्ति को अलगाव न महसूस हो और वे सामाजिक रूप से औरों से जुड़े रहें, इस के लिए उपलब्ध तरीकों का उपयोग करें। परिवार के लोग रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ जुड़े रहने के लिए फेसटाइम, जूम, स्काइप, व्हाट्सएप आदि जैसे प्लेटफार्मों का उपयोग कर रहे हैं – ये डिमेंशिया वाले व्यक्तियों के लिए भी कनेक्शन रखने में मददगार हो सकते हैं। कुछ सरल, गैर-तकनीकी चीज़ें भी कारगर हो सकती हैं, जैसे कि बालकनी में बैठकर आसपास की चहल-पहल देखना।
  • व्यक्ति भटकें नहीं, इस के लिए अधिक सतर्क रहें परिवार के सभी सदस्यों को सावधान रहना चाहिए कि वह व्यक्ति बाहर न भटके और न ही खुद को चोट पहुंचाए
  • व्यक्ति को ज्यादा उत्तेजित न होने दें, अधिक उकसाहट से बचें) व्यक्ति को अधिक शोर से, अधिक गतिविधियों और हलचल से दूर रखें – इस तरह की अत्यधिक चहल-पहल, शोर-शराबे से उनकी उत्तेजना बढ़ सकती है। कुछ उदाहरण जिन से उन्हें बचाना अच्छा होगा: हिंसक फिल्में, टीवी पर लूप करती हुई तनाव-पूर्ण खबरें, परिवार के सदस्यों की जोरदार बातचीत। इस के लिए सभी परिवार के सदस्यों को सहयोग देना होगा क्योंकि घर में कौन कहाँ क्या कर रहा है, उस में सब को कुछ एडजस्ट करने की जरूरत हो सकती है ।
ध्यान दें कि 4 मई, 2020 से लागू लॉकडाउन में स्थानीय प्रशासन के निर्णय के अनुसार, उनकी COVID स्थिति के आधार पर अलग अलग क्षेत्रों में अलग अलग लॉकडाउन छूट दी गई है। दिन-प्रतिदिन के काम को संभालने के लिए यह जानना जरूरी है कि किस क्षेत्र में COVID की क्या स्थिति है और उसे किस प्रकार का “जोन” माना जा रहा है। इस के लिए नगरपालिका और पुलिस साइटों के माध्यम से सूचित रहें ।

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इस सीरीज के अन्य भाग: कोविड-19 से बचाव पर चर्चा: भाग 1: व्यक्ति को वायरस से बचाएं, चिकित्सीय सलाह पर चर्चा: भाग 3: दवा खरीदना, टेस्ट करवाना, टेलीमेडिसिन से सलाह लेना, अस्पताल जाना और भाग 4: कारगर देखभाल और तनाव मुक्ति के लिए अन्य सुझाव, सहायता के लिए संसाधन, इत्यादि

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