डिमेंशिया देखभाल और कोविड 19 (COVID 19) (भाग 3): दवा खरीदना, टेस्ट करवाना, टेलीमेडिसिन से सलाह लेना, अस्पताल जाना

कोविड सम्बंधित पोस्ट की इस सीरीज में अब तक हम देख चुके हैं कि वायरस से डिमेंशिया वाले व्यक्ति को कैसे बचाएं और उनकी देखभाल के तरीकों में किस तरह के बदलाव की जरूरत हो सकती है

देखभाल करने वालों की चिंता और चुनौती का एक बड़ा हिस्सा चिकित्सा पहलुओं से संबंधित है। जैसे, जरूरत पड़ने पर चिकित्सीय सहायता कैसे प्राप्त करी जाय, बाधाओं और प्रतिबंधों के कारण नए नियमों के अंतर्गत मदद कैसे प्राप्त करें, जैसे परिवहन की व्यवस्था करना, और आपात स्थिति में तुरंत सहायता पाना। इसके अलावा, सब लोगों में आजकल अस्पताल का डर है कि कहीं वहां जा कर वहां से बीमार न पड़ जाएँ! इसलिए देखभाल कर्ताओं के लिए एक चुनौती यह है कि वे किसी भी स्वास्थ्य संबंधी स्थिति को ठीक से समझें। उन्हें सोचना है कि सलाह और चिकित्सा कैसे पायें, और यदि अस्पताल जाना हो, तो अस्पताल से कोविड 19 होने के खतरे से कैसे बचें।

स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं को संभालने के लिए सही जानकारी और उपयुक्त योजना की आवश्यकता होती है। प्रतिबंधों के कारण कुछ नई अड़चनें हो सकती हैं। यह इसलिए क्योंकि सरकारी निर्देश बदलते रहते हैं और क्या संभव है और अनुमति कैसे लें, यह बदलता रहता है। इसलिए देखभाल करने वालों को सूचित रहना चाहिए और बदलते परिवेश के हिसाब से योजना बदलते रहना चाहिए।

बाहर जाने वाले वरिष्ठों के कोविड 19 के जोखिम को विभिन्न दिशानिर्देशों में पहचाना गया है। 65 से ऊपर के लोगों को घर पर ही रहने की सलाह दी गयी है। सुझाव है कि आवश्यक कार्यों और स्वास्थ्य प्रयोजनों की वजह के अलावा वे घर पर ही रहें। डॉक्टर की सलाह के लिए वे टेलीकंसल्टेशन का उपयोग कर सकते हैं।

चिकित्सा सहायता के विभिन्न पहलुओं पर नीचे चर्चा की गई है। ध्यान दें कि यदि किसी डिमेंशिया वाले व्यक्ति को घर से बाहर कुछ जांच या परामर्श आदि के लिए ले जाया जा रहा है, तो सब सावधानियां बरतनी होंगी। व्यक्ति को मास्क पहने रहना होगा और यह भी ध्यान देना होगा कि वे अपनी आँखें, नाक और मुंह को न छूएं। हाथ की सफाई के लिए हाथ धोना या सैनिटाइज़र का इस्तेमाल करना होगा। इसके लिए साथ जाने वालों को बहुत सतर्क रहना होगा। व्यक्ति उन की बात मानें, इस के लिए उन्हें बार-बार प्यार से समझाते रहना होगा।

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दवा और अन्य मेडिकल सामान खरीदना।

दवा की दुकानें खुली हैं। कुछ लोग होम डिलीवरी भी करते हैं, खासकर अगर परिवार नियमित रूप से उनसे दवा खरीदता रहा है। लॉकडाउन के शुरुआती दिनों में दवाएं प्राप्त करने में कई लोगों को दिक्कत हुई थी, पर अब स्थिति लगभग सामान्य है। अनलॉक के चरण लागू हो रहे हैं और इन से स्थिति में और भी सुधार है। पर अब भी कुछ दवाएं स्टॉक में नहीं हैं या उनके लिए कई दिनों तक इंतजार करना पड़ सकता है। कुछ फार्मेसियाँ हाल के नुस्खे के बिना दवा देने को तैयार नहीं होती हैं, खासकर कुछ श्रेणियों की दवाओं के लिए। दवाएं ऑनलाइन भी उपलब्ध हैं। पर सब दवाएं आसानी से उपलब्ध नहीं होंगी। ऑनलाइन दवा खरीदने के लिए नुस्खे आवश्यक हैं।

अफ़सोस, सभी परिवारों के पास हाल के नुस्खे नहीं हैं। वास्तव में, उनके पास कुछ दवाओं के लिए हो सकता है कोई नुस्खा न हो। यह विशेष रूप से सप्लीमेंट या आयुर्वेदिक या इस तरह की गैर-एलोपैथी दवाओं के लिए है, या ऐसी दवाओं के लिए जिनका उपयोग वे वर्षों से कर रहे हैं। कई परिवार डॉक्टरों के साथ नियमित संपर्क में नहीं होते हैं। वे पुराने नुस्खे के साथ ही काम चलाते आ रहे हैं और वर्षों तक एक ही दवा देते जा रहे हैं। अपनी सोच-समझ से वे खुद ही दवा की मात्रा (डोज़) को ऊपर-नीचे एडजस्ट करते रहते हैं। यह चिकित्सकीय रूप से उचित नहीं है, लेकिन फिर भी एक वास्तविकता है।

इसलिए, परिवारों को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि उनके पास अपनी दवाओं के लिए नुस्खे हैं। अगर नहीं हैं और आवश्यकता पड़े तो वे इन्हें टेलीमेडिसिन से प्राप्त कर सकते हैं। टेलीमेडिसिन के लिए नीचे का सेक्शन देखें। दवा कहाँ से खरीद सकते हैं, यह पता चला कर रखें। कुछ हफ्तों के लायक स्टॉक रखें। होम डिलीवरी आजकल “संपर्क-मुक्त” (कांटेक्ट-फ्री) है। लेकिन यदि ऐसा नहीं है, तो डिलीवरी लेते समय फेस-मास्क और सैनिटाइज़र का उपयोग अवश्य करें। इसके अलावा, अलग-अलग लोग डिलीवरी पैकेट प्राप्त करने के लिए अलग-अलग तरीकों का उपयोग करते हैं ताकि उन पर वायरस मौजूद न रहे। इन पर अनेक दिशानिर्देश / लेख हैं। कई लेखों में यह सुझाव है कि किसी भी पैकेट को खोलने से पहले कुछ घंटे धूप में रखें। लेकिन कृपया याद रखें कि अधिकांश दवाओं को घंटों के लिए सीधे धूप में नहीं रखना चाहिए। यह कदम शायद वायरस को मार दे, पर यह दवा को बेकार और बेअसर भी कर सकता है।

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ब्लड टेस्ट और अन्य जांच करवाना।

घर आकर रक्त परीक्षण (ब्लड टेस्ट) के लिए सैंपल लेने वाली सेवाएं उपलब्ध हैं। टेस्ट के लिए तकनीशियन किस दिन आ पायेगा यह सेवा में स्टाफ की उपलब्धी पर निर्भर होगा। अपने शहर में ऐसी सेवाओं के संसाधनों के लिए देखें: हमारे अंग्रेजी वेबसाइट के संसाधन पृष्ठ )। कुछ जगहों में लागू प्रतिबंधों के कारण पुलिस नाकाबंदी हो सकती है, खासकर यदि आप कन्टेनमेंट ज़ोन में हों। आने-जाने के लिए अनुमति की जरूरत हो सकती है। ऐसे में सेवा प्रदाता अपने स्टाफ को सैंपल लेने के लिए शायद नहीं भेज पायेंगे। पड़ोसियों से पूछें कि आपके इलाके के लिए कौन सी सेवा भरोसेमंद है। यदि आप एक अपार्टमेंट परिसर में हों तो पता चला लें कि सैंपल कलेक्ट करने के लिए आने वाले तकनीशियन को अन्दर आने की अनुमति दी जाएगी या नहीं। अनलॉक लागू होने के बाद अधिकाँश परिसर में यह समस्या नहीं है, पर फिर भी पता चला लें। कलेक्शन के समय सुरक्षित रहने के लिए हाथ सैनिटाइज़र, मास्क आदि जैसी सावधानियों का उपयोग करें और तकनीशियन को भी सुरक्षित रखें। बार-बार बुलाने के बजाय, एक बार में ही सब टेस्ट करवाने की सोचें। कुछ जांचों के लिए अस्पताल जाना जरूरी होता है। ये टेस्ट करवाने ज़रूरी हैं या नहीं, इस के लिए डॉक्टर से बात कर लें।

अच्छा यही होगा कि आप डॉक्टर से सलाह करें कि किन-किन परीक्षण और जांच की आवश्यकता है, और किन को (और कब तक) स्थगित किया जा सकता है। इस सलाह के लिए आप टेलीमेडिसिन का इस्तेमाल कर सकते हैं।

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टेलीमेडिसिन का उपयोग करके चिकित्सीय सलाह लेना।

ऐसे कई कारण हैं जिन की वजह से डॉक्टर की सलाह की आवश्यकता हो सकती है। उदारहण हैं – नए नुस्खे प्राप्त करने की जरूरत, , कोई नए चिंताजनक शारीरिक या मानसिक लक्षण, मूड की समस्याएँ, व्यक्ति की हालत पहले से खराब होना, और अन्य मौजूदा बीमारियों से सम्बंधित समस्याएं, जैसे कि उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, वगैरह।

अधिकांश अस्पताल और पॉलीक्लिनिक काम तो कर रहे हैं, पर कम कर्मचारियों के साथ। उन्होंने ओपीडी समय को सीमित कर दिया है। स्वास्थ्य संस्थाओं के लिए जारी विभिन्न एसओपी के अनुसार सुरक्षा के लिए बार बार क्लिनिक और अस्पतालों में मशीनों और बाकी जगह को साफ करते रहना होता है, और इस की वजह से हर मरीज़ के लिए अधिक टाइम लगता है। वहां जा कर डॉक्टर से सलाह को पाने में ज्यादा मुश्किल होगी। साथ ही, अस्पताल यात्रा की योजना बनाने में भी चुनौतियाँ हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय गैर-आपातकालीन स्थितियों के लिए टेलीमेडिसिन के उपयोग की सिफारिश करता है। इसके लिए मंत्रालय ने व्यापक दिशानिर्देश भी जारी किए हैं। कई डॉक्टर और अस्पताल अब टेलीमेडिसिन द्वारा सलाह दे रहे हैं। परन्तु डॉक्टर से सलाह करने का यह तरीका नया है। डॉक्टर और मरीज़, दोनों ही इस के आदि नहीं हैं। नीचे देखें टेलीमेडिसिन का कारगर इस्तेमाल करने की लिए कुछ प्रमुख बिंदु। ये परिवारों और डॉक्टरों के अनुभवों पर आधारित हैं।

  • ध्यान दें कि टेलीमेडिसिन कोई मुफ्त हेल्पलाइन नहीं है। सामान्य डॉक्टरी सलाह की तरह इस में भी फीस देनी होती है। परामर्श करने से पहले फीस कितनी है और भुगतान कैसे करना होगा, इस पर स्पष्टता प्राप्त करें। कुछ डॉक्टर सलाह देने के बाद फीस लेते हैं, तो कुछ एडवांस में लेते हैं।
  • कोशिश करें कि टेलीमेडिसिन द्वारा सलाह उसी डॉक्टर से लें जिस के पास आप व्यक्ति के लिए नियमित रूप से जाते हैं और जो आपको जानता है। एक नए डॉक्टर से सलाह करने के मुकाबले यह अधिक अच्छा है। इसके कई कारण हैं।
    • आपके परिचित डॉक्टर को या तो व्यक्ति का केस याद होगा या उन्हें कुछ मुख्य बातें याद दिलाने से केस याद आ सकता है। उनके पास केस की फाइल मौजूद हो सकती है। इसके विपरीत यदि नए डॉक्टर से सलाह करें तो व्यक्ति की केस हिस्ट्री देनी होगी। केस समझाते समय यह सोचना होगा कि किस पहलू को प्राथमिकता दें। यह मुश्किल काम है। हो सकता है आपके पास सारा डेटा भी न हो, खासकर अगर पहले वाले डॉक्टर ने केस फाइल अपने पास ही रखी हो।
    • परिचित डॉक्टर के आपको उपयुक्त सलाह देने की अधिक संभावना है। एक नया डॉक्टर संकोच कर सकता है या केस लेने से मना भी कर सकता है। डॉक्टर कह सकता है कि, “क्या करना है यह तो आपको ही तय करना होगा”, या “मैं ऐसे कुछ नहीं कह सकता। यदि आप चिंतित हैं, तो कृपया अस्पताल जाएँ।”
  • टेलीकंसल्टेशन के लिए तैयार होने के लिए व्यक्ति की केस हिस्ट्री, सबसे नया प्रिस्क्रिप्शन, टेस्ट रिपोर्ट, उनकी वर्तमान समस्या और सवालों को इकट्ठा करने की आवश्यकता है। यह कदम अपने परिचित डॉक्टर से परामर्श कर रहे हों, तब भी फायदेमंद है। यह इसलिए क्योंकि हो सकता है डॉक्टर को केस पूरी तरह से याद न हो और उनके पास केस फाइल न हो। परिवार वाले जितना अधिक तैयार होंगे,उन्हें उतनी ही उपयोगी सलाह मिलेगी।
  • पुरानी हिस्ट्री के मुख्य बिंदु और नए टेस्ट रिजल्ट डॉक्टर के पास सलाह करने से पहले कैसे उपलब्ध करवा सकते हैं, यह पता लगाएं, वर्ना अपॉइंटमेंट का अधिकाँश समय टेस्ट पढ़ कर सुनाने में जा सकता है ।
  • याद रखें कि अगर डॉक्टर को लगता है कि उनके पास केस का पर्याप्त डेटा नहीं है या उन्हें व्यक्ति की शारीरिक परीक्षा करने की आवश्यकता है तो वे केस पर सलाह देने से इनकार कर सकते हैं।
  • “वीडियो” पर परामर्श लेने का प्रयास करें। केवल बोलने या टेक्स्ट करने के मुकाबले यह अधिक कारगर है। वीडियो पर आपको और डिमेंशिया वाले व्यक्ति को देखने पर डॉक्टर को केस पहचानने में आसानी होगी। वे सलाह देने में अधिक सहज होंगे। यदि डिमेंशिया व्यक्ति को वीडियो कॉल में शामिल करना चुनौतीपूर्ण है, तो आप व्यक्ति की तस्वीर साझा कर सकते हैं। या डॉक्टर को व्यक्ति के वीडियो क्लिप दिखा सकते हैं। कुछ डॉक्टर व्हाट्स-अप वीडियो फॉरवर्ड देखने को तैयार होते हैं।
  • एक टेली-कंसल्टेशन का दायरा सीमित है। सरकार ने निर्धारित किया है कि टेलीमेडिसिन के माध्यम से कौन सी दवा दी जा सकती हैं और कौन सी नहीं। गाइडलाइन में बताया गया है कि नया केस है, या मौजूदा परिचित केस है पर उस में नई चिकित्सीय समस्या है तो डॉक्टर क्या दे सकते हैं। यह भी बताया गया है कि पहले से परिचित केस की पुरानी बीमारी का फॉलोअप है, तो उस में डॉक्टर क्या दे सकते हैं।
  • पर डॉक्टर को परिवार को यह बताने में सक्षम होना चाहिए कि जिस समस्या के लिए आपने संपर्क करा है, क्या वह इमरजेंसी स्थिति है और क्या आपको अस्पताल जाना चाहिए।
  • सुनिश्चित करें कि टेली-कंसल्टेशन के बाद परचा ऐसे रूप में मिले जो केमिस्ट या ऑनलाइन फार्मेसी उसे स्वीकार करे। पर्चे में डॉक्टर का नाम, संपर्क और रजिस्ट्रेशन नंबर, रोगी का नाम, पर्चे की तिथि, दवा का नाम और इसके सामान्य (जेनेरिक) नाम और इसकी ताकत और खुराक सब स्पष्ट होने चाहियें।

समय के साथ, जैसे जैसे अधिक लोग टेलीमेडिसिन इस्तेमाल करेंगे, अधिक डॉक्टर भी इसके अभ्यस्त होंगे। शायद उन्हें प्रशिक्षण भी मिले। वर्तमान में, अधिकांश डॉक्टरों को टेलीमेडिसिन इस्तेमाल करने की आदत नहीं है। भले ही वे अपने क्लिनिक में परामर्श के लिए बहुत अच्छे हों, लेकिन टेलीमेडिसिन में कुशल होने में कुछ टाइम लग सकता है। परिवारों के लिए भी यह सब बहुत नया है। इस में अधिक अनुभव होने पर डॉक्टर और परिवार दोनों ही टेलीमेडिसिन में अधिक कारगर होने लगेंगे। परिवार वाले समझने लगेंगे कि टेलीमेडिसिन के लिए तैयार कैसे हों, और प्रश्न कैसे पूछें।

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अस्पताल जाना, जैसे कि आपातकालीन स्थिति में या आवश्यक चिकित्सा प्रक्रिया के लिए।

महामारी के माहौल में किसी क्लिनिक या अस्पताल पर जाना एक कठिन निर्णय हो सकता है। लोग डरते हैं कि अस्पताल में कोविड 19 लग जाने का खतरा ज्यादा है। कई परिवार अस्पताल नहीं जाना चाहते हैं। परन्तु कई परिस्थितिओं में अस्पताल जाना बेहतर है और टालना नहीं चाहिए न ही देरी करनी चाहिए क्योंकि कुछ मामलों में देरी से स्थिति बिगड़ सकती है।

  • यदि ऐसे लक्षण हैं जो कोविड 19 के हो सकते हैं, तो परिवार को कोविड हेल्पलाइन से संपर्क करने में कोई संकोच नहीं करना चाहिए। देर करने से इलाज कम कारगर हो सकता है। हेल्पलाइन सवालों का जवाब देगी और मार्गदर्शन करेगी कि आपको क्या करना चाहिए।
  • यदि कोई चोट लगी है या दुर्घटना हुई है, कोई और आपातकाल स्थिति है, जैसे कि हार्ट अटैक, तो अवश्य अस्पताल जाएँ। देरी न करें, संकोच न करें। हो सके तो ऐसा अस्पताल चुनें जहां सब सुविधाएं और स्पेशलिटी उपलब्ध हैं।
  • कुछ प्रोसीजर आवश्यक हैं, जैसे डायलिसिस, कीमोथेरेपी, आदि। इन के लिए निर्धारित टाइम टेबल के हिसाब से अस्पताल जाने की आवश्यकता होती है। अस्पताल के सम्बंधित विभाग के साथ संपर्क रखें। आने-जाने और ट्रीटमेंट करवाने का इन्तेजाम करें।
  • यदि कोई ऐसे महत्वपूर्ण चेकअप हैं जो सिर्फ अस्पताल में या क्लिनिक में हो सकते हैं, जिनके लिये जरूरी मशीन और उपकरण के लिए अस्पताल जाना जरूरी है, और आप सोच रहें हैं कि अस्पताल जाएँ या नहीं, तो टेलीमेडिसिन से डॉक्टर से सलाह करने से निर्णय में आसानी होगी।

यदि अस्पताल जाना हो तो क्या प्लान करें और खुद को कैसे सुरक्षित रखें? आप किस जगह हैं और वहां किस स्तर के प्रतिबन्ध लागू हैं, आपको इन सब के अनुसार प्लान करना होगा। उदाहरण के तौर पर, कितने देखभालकर्ता व्यक्ति के साथ (वाहन में, या अस्पताल में) जा सकते हैं। अनलॉक शुरू होने के बाद इन सब में पहले के मुकाबले काफी ढील है, पर फिर भी कुछ प्रतिबन्ध हैं। कैसे जाएँ यह भी चुनौती है। सभी के पास निजी वाहन नहीं हैं, या उनके ड्राइवर उपलब्ध नहीं हैं। वे अस्पताल कैसे जाएँ? क्या टैक्सी, ऑटो, सार्वजनिक परिवहन चल रहे हैं? क्या ये सुरक्षित हैं? आने-जाने के वक्त, और अस्पताल में भी कोविड 19 वायरस के संपर्क में आने का खतरा है। यह भी हो सकता है कि आपको अस्पताल जल्दी में जाना पड़े, और उस समय सब नियम और संसाधन ढूँढने का समय न हो, इसलिए पहले से क्या जानना होगा? इमरजेंसी यकायक कभी भी पैदा हो सकती । इसका पहले से नहीं पता। इन पहलूओं के लिए कुछ सुझाव नीचे देखें।

  • पहले से पहचान लें कि कौन से अस्पताल आपकी संभावित जरूरतों के लिए अधिक उपयुक्त हैं, और जिन में जाने से आपको लगता है कि ख़तरा कम है। कुछ अस्पतालों को अब कोविड अस्पताल घोषित कर दिया गया है। वे अन्य केस नहीं ले रहे। कुछ रिपोर्टों ने दावा किया कि कुछ अन्य अस्पताल भी सामान्य इमरजेंसी केस लेने से इनकार कर रहे हैं। कई अस्पताल केस लेने से पहले जिद्द कर रहे हैं कि आप हालिया टेस्ट रिपोर्ट देकर साबित करें कि व्यक्ति को कोविड नहीं है। इसलिए पहले से जानना अच्छा है कि कौन से अस्पताल सामान्य, यानि गैर कोविड आपात स्थिति के केस लेते हैं। यदि संभव हो, तो जाने से पहले अस्पताल को फ़ोन करके पुष्टि कर लें कि वे आपके प्रियजन जैसे केस ले रहे हैं या नहीं।
  • कोविड संबंधित हेल्पलाइन नंबर और गैर कोविड समस्याओं के लिए हेल्पलाइन नंबर को जानें। ये अलग-अलग हो सकते हैं। इसके अलावा, एम्बुलेंस या अस्पताल आने-जाने के लिए अन्य साधन, जैसे कि टैक्सी, भी कोविड और गैर-कोविड के लिए भिन्न हो सकते हैं। कुछ “आपातकालीन” कैब सेवाएं उपलब्ध हैं जो केवल अस्पतालों और घरों के बीच चलती हैं। एंबुलेंस और पुलिस सहायता भी संभव हैं। अस्पताल आने जाने के इन साधनों के बारे में सूचित रहें।
  • कुछ ज़ोन में , खासकर कंटेनमेंट ज़ोन में, आने-जाने के लिए अनुमति की आवश्यकता हो सकती है। यह इस पर निर्भर है कि आप किस जगह हैं और वहां इस समय कौन से प्रतिबन्ध और व्यवस्था लागू हैं। अनुमति लेने की प्रक्रियाएँ बदलती रहती हैं। इस बारे में नई सूचना प्राप्त करते रहें। नगर निगम और पुलिस आयुक्त के ट्विटर और फेसबुक अकाउंट ऐसी जानकारी के लिए विश्वसनीय स्रोत हैं। राज्य के कोविड वेबसाइट पर भी नवीनतम जानकारी मिल सकती है। इस तरह की सूचना खोज को इमरजेंसी के लिए नहीं छोड़ना चाहिए।
  • अस्पताल की तत्काल यात्रा के लिए तैयार रहें। महत्वपूर्ण मेडिकल डेटा अपने साथ तैयार रखें। इसके अलावा, आवश्यक फोन नंबर और हाथ सैनिटाइजर और मास्क जैसे सामान भी तैयार रखें।
  • एम्बुलेंस या टैक्सी या अन्य वाहन में आते जाते वक्त बीमारी न लगे, इस के लिए सावधानी बरतें। उदाहरण हैं, मास्क पहनना, हैण्ड सैनीटाइजर का इस्तेमाल, सतह पूछना, आँख/ मुंह/ नाक न छूना वगैरह। व्यक्ति के लिए भी और देखभाल कर्ता के लिए भी अस्पताल की तत्काल यात्रा के लिए तैयार रहें। महत्वपूर्ण मेडिकल डेटा और आवश्यक फोन नंबर और हाथ सैनिटाइजर और मास्क जैसे सामान ले जाना न भूलें।
  • इस बात पर विचार करें कि प्राथमिक देखभाल कर्ता अस्वस्थ हों तो डिमेंशिया वाले व्यक्ति की देखभाल कौन करेगा। इस के लिए उसे किस जानकारी और सामान की जरूरत होगी।

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इस सीरीज के अन्य भाग हैं: कोविड 19 से बचाव पर चर्चा: भाग 1: व्यक्ति को वायरस से बचाएं, देखभाल के बदलाव पर चर्चा: भाग 2: देखभाल कैसे एडजस्ट करें, और भाग 4: कारगर देखभाल और तनाव मुक्ति के लिए अन्य सुझाव, सहायता के लिए संसाधन, इत्यादि

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