डिमेंशिया देखभाल और कोविड 19 (COVID 19) (भाग 1): व्यक्ति को वायरस से बचाएं

कोविड 19 (नोवल कोरोनावायरस) एक नया संक्रमण (इनफ़ेक्शन) है जो महामारी का रूप ले चुका है – विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे “पैनडेमिक” (वैश्विक महामारी) के रूप में पहचाना है। भारत में भी कोविड 19 के फैलाव को सीमित करने के लिए और संक्रमित लोगों को इलाज दे पाने के लिए बहुत से कदम उठाए गए हैं। इनमें शामिल हैं स्वास्थ्य संसाधनों का क्षमता निर्माण, कोविड 19 के रोगियों को जल्द पहचान पाना और अलग रखकर उनका इलाज करना। इस इनफ़ेक्शन से बचने के लिए उचित आदतें अपनानी होंगी, जैसे मास्क पहनना और एक दूसरे से दूरी रखना। गतिविधियों और आवागमन पर प्रतिबंध भी लागू करे गए हैं। इन सब से लोगों के दैनिक जीवन में अनेक बदलाव हुए हैं और चुनौतियाँ भी पैदा हो रही हैं। लोगों को जानकारी और सुझावों की जरूरत है।

कोविड 19 (नोवल कोरोनावायरस) एक नया वायरस है जिसके बारे में जानकारी अभी भी बहुत कम है। वैज्ञानिक इसे समझने के लिए, इसका फैलाव रोकने के लिए और उचित इलाज कर पाने के लिए भरपूर प्रयास कर रहे हैं। कोविड 19 के क्या लक्षण हैं, डॉक्टर के पास कब और कैसे जाना होगा, इसका इलाज क्या है, इस से कैसे बचें, इस के लिए हेल्पलाइन कौन सी हैं, यह भारत में कितना फैल रहा है, इत्यादि, इन सब विषयों पर जानकारी का सबसे विश्वसनीय स्रोत है स्वास्थ्य मंत्रालय का वेबसाइट। इस साईट पर हिंदी के डॉक्यूमेंट, पोस्टर और वीडियो के लिंक भी हैं।

अब तक उपलब्ध सभी जानकारी के अनुसार कोविड 19 वायरस बुजुर्गों के लिए ज्यादा खतरनाक है, ख़ास तौर से उन बुजुर्गों के लिए जो पहले से ही अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं, जैसे कि उच्च रक्तचाप, दमा, दिल की समस्याएं या मधुमेह। इसलिए जिन परिवारों में बुज़ुर्ग हैं, उनको बहुत सावधान रहना होगा। डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति अकसर बड़ी उम्र के होते हैं और उन्हें अन्य बीमारियाँ भी हो सकती हैं। इसलिए कोविड 19 होना उनके लिए अधिक खतरनाक है। ऊपर से, यदि किसी डिमेंशिया वाले व्यक्ति को कोविड 19 हो जाए (या उन्हें क्वारंटाइन की जरूरत हो), तो अस्पताल में रहना उनके लिए अधिक समस्या पैदा कर सकता है। उन्हें अस्पताल के माहौल से तालमेल बिठा पाने में अधिक दिक्कत होगी। उनके प्रियजन उनके साथ नहीं रह पायेंगे। व्यक्ति के आस-पास सब स्वास्थ्य कर्मचारी मास्क और PPE (personal protective equipment, व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण) पहने होंगे, और उनके चेहरे भी ठीक से नजर नहीं आ रहे होंगे। कल्पना कीजिये कि पहले से ही अपने माहौल में दिक्कत महसूस करने वाले लोगों के लिए यह सब कितना डरावना होगा! वे समझ नहीं पायेंगे कि उनके चारों ओर यह सब क्यों हो रहा है, और न ही अपनी परेशानी बता पायेंगे। पूछ भी पाए तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिल पायेगा। वे अपनी ज़रूरतें और समस्याएं व्यक्त करने में भी दिक्कत महसूस करेंगे।

इस पोस्ट में डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति को कोविड 19 से बचाने पर फोकस है। अन्य पोस्ट में इस स्थिति के अन्य देखभाल सम्बंधित विषयों पर विस्तार होगा, जैसे कि लॉकडाउन या अन्य प्रतिबंधों की स्थिति में (या लॉकडाउन में ढील से उत्पन्न स्थिति में) देखभाल और दैनिक दिनचर्या की चुनौतियों को कैसे संभालें ( भाग 2: देखभाल कैसे एडजस्ट करें), चिकित्सकीय सलाह और सेवाएं कैसे प्राप्त करें (भाग 3: दवा खरीदना, टेस्ट करवाना, टेलीमेडिसिन से सलाह लेना, अस्पताल जाना), और डिमेंशिया देखभाल समर्थक सेवाएं कैसे प्राप्त करें और सब कार्यों में संतुलन कैसे बैठाएं इत्यादि (भाग 4: कारगर देखभाल और तनाव मुक्ति के लिए अन्य सुझाव, सहायता के लिए संसाधन, इत्यादि । हालांकि यह पोस्ट डिमेंशिया वाले परिवारों पर केन्द्रित है, यह किसी भी ऐसे परिवार के लिए मददगार है जिस में बुज़ुर्ग हैं। (नोट: इस पृष्ठ पर या इस वेबसाइट के किसी भी अन्य पृष्ठ पर सिर्फ देखभाल संबंधी चर्चा और संसाधन हैं – इन पर कोई चिकित्सा सलाह नहीं है)

एक चेतावनी: हर अनलॉक के साथ कोविड संबंधी प्रतिबन्ध कम होते जा रहे हैं। लोग घर से बाहर अधिक कामों के लिए और अधिक समय के लिए निकल रहे हैं। घरों में काम करने वाले और मेहमान भी अधिक आ रहे हैं। कोविड का फैलाव काफी ज्यादा है, और कई लोग, जिन्हें कोविड है, उनमें लक्षण नजर नहीं आते हैं। इस सब को देखते हुए स्पष्ट है कि इन्फेक्शन होने का खतरा अब अधिक है। डिमेंशिया वाले व्यक्ति को कोविड से बचाए रखने के कदम में बिलकुल भी ढील नहीं होनी चाहिए , बल्कि पहले से अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।

इस पृष्ठ पर:

कोविड 19 पर विश्वसनीय जानकारी और बचाव के लिए आधिकारिक स्रोत.

कोविड 19 क्या है, और इस से बचाव के तरीकों को समझने के लिए सबसे अच्छा और विश्वसनीय स्रोत हैं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का वेबसाइट Opens in new window। इस पर अनेक हिंदी संसाधन भी हैं। पेश हैं कुछ ख़ास तौर से उपयोगी संसाधन के लिंक,आपकी सुविधा के लिए।

बुजुर्गों के लिए कोविड 19 अधिक खतरनाक है। इसे पहचानते हुए, भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने एक दस्तावेज़ जारी किया है: कोविड 19 (COVID 19) के दौरान वरिष्ठ नागरिकों के लिए सलाह Opens in new window। अन्य बातों के अलावा, इस में यह सलाह दी गयी है कि वरिष्ठ नागरिकों को घर के भीतर ही रहना चाहिए, आगंतुकों से बचना चाहिए, स्वच्छता बनाए रखने वाली आदतें अपनानी चाहिए, और अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए। यह भी सलाह है कि उनकी देखरेख करने वाले व्यक्तियों को मदद करने से पहले हाथ धोना चाहिए, देखभाल के काम करते समय नाक-मुंह ढके रहना चाहिए, और जिन सतहों का अकसर उपयोग होता है, उन्हें साफ़ करते रहना चाहिए। वरिष्ठ नागरिकों के उचित पोषण और पानी का सेवन सुनिश्चित करना चाहिए। यह डॉक्यूमेंट इस बात पर भी जोर देता है कि देखभाल करने वाले किसी भी लक्षण से पीड़ित हों तो उन्हें वरिष्ठ व्यक्ति के पास नहीं जाना चाहिए। पूरा डॉक्यूमेंट देखें Opens in new window

एक अन्य पहलू है प्रतिरक्षक क्षमता (इम्युनिटी) को मजबूत करना, ताकि कोविड 19 होनी की संभावना कम हो। प्रतिरक्षा में सुधार करने के लिए आयुष मंत्रालय के सुझावों को यहाँ पढ़ें Opens in new window। उनके यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध अनेक वीडियो देखें: Opens in new window

कोई भी प्रश्न हो या लगे की शायद आपको या किसी प्रियजन को कोविड जैसे कुछ लक्षण हैं, तो बिना देर करे नि:संकोच राष्ट्रीय हेल्पलाइन: 91-11-2397 8046 या टोल फ्री नंबर: 1075 डायल करें। इ-मेल संपर्क है: ncov2019@gov.in, और ncov2019@gmail.com या अपने राज्य की हेल्पलाइन पर संपर्क करें। सभी राज्यों की हेल्पलाइन की सूची यहाँ देखें Opens in new window

सबसे नवीनतम लॉकडाउन/ अनलॉक दिशानिर्देश Opens in new window में स्पष्ट रूप से यह सलाह दी गयी है कि वरिष्ठ नागरिक घर पर रहें, और आवश्यकता होने पर ही घर से निकलें। निर्देश से एक अंश: “65 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों, अन्य रोगों से ग्रस्त व्यक्तियों, गर्भवती महिलाओं और 10 वर्ष की आयु के बच्चों को, आवश्यक सेवाओं और स्वास्थ्य प्रयोजनों को छोड़ कर, घर पर रहने की सलाह दी जाती है।”

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डिमेंशिया वाले व्यक्तियों को कोविड 19 से बचाने की ख़ास चुनौतियों पर चर्चा

कोविड 19 से डिमेंशिया वाले व्यक्तियों की रक्षा करने में कुछ अतिरिक्त चुनौतियाँ हैं:

  • व्यक्ति को कोविड 19 के बारे में समझना अधिक मुश्किल है: कोविड 19 एक नया संक्रमण (यानि कि इन्फेक्शन) है, अन्य संक्रमणों से अधिक खतरनाक, और इस में अधिक सावधानी की जरूरत है। डिमेंशिया वाले व्यक्ति शायद इसे समझ न पायें या जानकारी याद न रख पायें। वे आस-पास के परिवर्तनों से विचलित या परेशान हो सकते हैं। कोविड 19 की जरूरी जानकारी को सरल तरीके से, बार-बार दोहराने की जरूरत हो सकती है। इसके लिए चित्रों / कार्टूनों के इस्तेमाल के बारे में सोचें। या शायद मोटे तौर पर सिर्फ इतना कहना पर्याप्त हो सकता है कि यह एक ऐसी समस्या है जिसके लिए कुछ अधिक सावधानियों की आवश्यकता है। ध्यान रखें, जानकारी से उन्हें टेंशन नहीं होना चाहिए। आप स्वास्थ्य मंत्रालय के वेबसाइट पर उपलब्ध साधनों में से कुछ ऐसे सरल लेख और चित्र चुन सकते हैं जो व्यक्ति के लिए उपयुक्त हैं। ऊपर दिए गए साधन देखें।
  • देखभाल करने के तरीकों में बदलाव स्वीकारने में दिक्कत – जैसे कि देखभाल कर्ता का मास्क पहनना, बार-बार हाथ धोना, सतह साफ़ करना इत्यादि : व्यक्ति को कोविड 19 से बचाने के लिए पास जाने पर देखभाल कर्ता को मास्क पहनना होगा। ख़ास तौर से दैनिक कार्यों में मदद करते समय – जैसे कि व्यक्ति को नहलाना, खाना खिलाना, इत्यादि। परन्तु मास्क पहनने के कारण देखभाल कर्ता का चेहरा अलग लगता है और शायद पहचाना न जाए, मुस्कराहट और अन्य भाव दिखाई नहीं देते हैं, और मास्क की बाधा के कारण बोली भी अस्पष्ट हों सकती है। इस तरह से ढके चेहरे वाले देखभाल कर्ता के साथ डिमेंशिया वाले व्यक्ति सहज हो पायें, इस के लिए क्या करना होगा, यह एक विषय है जिस पर देखभाल करने वाले अभी भी रचनात्मक समाधान की तलाश में हैं। कुछ सुझाव हैं कि व्यक्ति को बार-बार आश्वस्त करने और तालमेल बिठाए रखने पर अधिक ध्यान देना होगा। कार्य पूरा करने के लिए जल्द-बाज़ी न करें। सब्र रखें और जब-तब जरूरी हो, व्यक्ति को याद दिलाएं कि आप कौन हैं, और अगर वे पूछें तो बताएं कि यह मास्क उन की सुरक्षा के लिए है।
  • पूरे वक्त घर में रहने वाले डिमेंशिया व्यक्ति को कौन सी (और किस हद तक) नई स्वच्छता सम्बंधित आदतों को अपनाना होगा, इस पर विचार करें। : मास्क पहनना, बार-बार हाथ धोना, सतह साफ़ करना, क्या यह सब उन डिमेंशिया वाले व्यक्ति को भी करना होगा जो सिर्फ घर पर ही हैं? क्या वे यह सब समझेंगे और कर पायेंगे? या क्या बाकी परिवार वाले अधिक सतर्क रहें और पूरी सावधानी बरतें तो व्यक्ति को कोविड 19 से बचाने के लिए पर्याप्त होगा? इस विषय पर विशेषज्ञों की अलग-अलग राय है। कई लोगों को लगता है कि घर में सभी लोग अगर सब सावधानियों का पालन करें तो डिमेंशिया वाले व्यक्ति को अतिरिक्त सावधानी की आवश्यकता नहीं है। वैसे भी, डिमेंशिया वाले व्यक्ति मास्क पहनने के लिए शायद ही सहमत हों – क्योंकि यह एक नई बात है और असुविधाजनक भी। कई परिवारों का अनुभव है कि मास्क पहनने पर जोर देने से व्यक्ति उत्तेजित हो जाते हैं। वे बार-बार हाथ धोने से मना कर सकते हैं। इन दिक्कतों को नजर में रखते हुए उतनी ही कोशिश करें जितनी कारगर बचाव के लिए आवश्यक हो और जो व्यक्ति बिना उत्तेजित या परेशान हुए कर पायें। यह जरूर निश्चित करें कि सब परिवार वाले और अन्य घर में आने वाले दूसरे लोग पूरी सावधानी रख रहे हैं।
  • यदि व्यक्ति का घर से बाहर निकलना बहुत जरूरी हो, तो बहुत ही ध्यान रखना होगा। कुछ ऐसी परिस्थितियां हैं जहां डिमेंशिया वाले व्यक्ति को घर के बाहर जाना होगा। हाल में लागू दिशानिर्देशों में यह सलाह दी गयी है कि घर से बाहर तभी निकलें जब कोई जरूरी काम हो, या स्वास्थ्य के लिए निकलना जरूरी हो। फिलहाल लोगों से मिलने के लिए बाहर जाने को उचित नहीं माना जा रहा है। डिमेंशिया वाले व्यक्ति कोविड 19 से अधिक खतरे में हैं, और उनके लिए सावधानी बनाए रखना भी ज्यादा मुश्किल है। इसलिए उनका निकलना कम से कम रहे तो बेहतर है। पर यदि उन्हें बाहर निकलना है, तो बहुत ही सावधान रहना होगा। उनके साथ जा रहे लोगों को पूरे वक्त सतर्क रहना होगा। मास्क ठीक तरह से व्यक्ति के चेहरे पर बना रहे, व्यक्ति बेकार इधर उधर चीज़ें न छूएं, बार-बार उनके हाथों को सैनिटाइज़र से साफ़ करा जाए, इत्यादि। बाहर के माहौल से वे घबरा सकते हैं और उन्हें आश्वस्त करते रहना भी जरूरी होगा।

भारत में लॉकडाउन का सिलसिला मार्च 2020 में शुरू हुआ था इसके अंतर्गत जो प्रतिबन्ध लागू करे गए हैं, वे समय के साथ बदलते जा रहे हैं। शुरू में लॉकडाउन बहुत सख्त था, पर अब ढील दी जा रही है। खास तौर से उन इलाकों में ढील है जहां कोविड 19 संबंधी स्थिति अधिक नियंत्रण में है, जैसे कि कई दिनों से कोई नया केस न नज़र आना। मई 30 के दिशानिर्देश में चरणबद्ध तरीके से गतिविधियोँ को फिर से शुरू करने के लिए अनलॉक निर्देश जारी करे गए थे, और तब से जारी विभिन्न अनलॉक संबंधी निर्देश चरणबद्ध तरह से प्रतिबन्ध ढीले कर रहे हैं। परन्तु यह समझना बहुत जरूरी है कि कोविड 19 होने का खतरा अब भी मौजूद है। कोविड के केस की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। । बुजुर्गों और डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्तिओं को कोरोनावायरस से बचाव के तरीके अपनाना अब भी उतना ही जरूरी है। लॉकडाउन में ढील का मतलब यह नहीं कि अब सावधानी की जरूरत नहीं हैं। बल्कि जैसे जैसे प्रतिबन्ध कम हो रहे हैं और लोग अधिक मिल जुल रहे हैं और काम और अन्य कारणों से बाहर जा रहे हैं, लोग कम सावधान होने लगते हैं। इस से इन्फेक्शन का खतरा बढ़ता है। इसलिए यह न सोचें कि अब रिश्तेदारों, बेटा-बेटी, पोता-पोती, नाता-नाती और मेहमानों के आने जाने का सिलसिला बेझिझक लग सकता है। कृपया अपने सावधानी का स्तर बनाए रखें।

कुल मिलाकर यूं मानिए, डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति को कोविड 19 से बचाए रखना और उनकी उचित देखभाल भी करते रहना एक चुनौती है। अनेक परिवर्तनों की जरूरत है। इन सब बदलाव से व्यक्ति परेशान और उत्तेजित या मायूस न हों, इसके लिए भी कदम उठाने होंगे। दुनिया भर के डिमेंशिया परिवार इस समस्या का सामना कर रहे हैं। वे यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि उनकी स्थिति में क्या कारगर है, और क्या नहीं। अन्य परिवारों के अनुभव जानने के लिए कई फ़ोरम हैं, पर ऑनलाइन फोरम अंग्रेज़ी में हैं। हो सकता है आप किसी स्थानीय फोरम या संसाधन या सेवा से संपर्क कर पायें जो आपकी कुछ सहायता करें। सहायता के लिए सिर्फ डिमेंशिया संसाधन तक सीमित न रहें। वरिष्ठ नागरिकों की या मानसिक तनाव की हेल्पलाइन से भी शायद कुछ मदद मिले।

नोट: यदि डिमेंशिया व्यक्ति अकेले रहते हैं तो उनके लिए यह सब समझना और संभालना बहुत ही पेचीदा है। बेहतर यही होगा कि वे किसी रिश्तेदार के घर में रहें, ताकि वे कोविड 19 से बचे रहें, और साथ ही सम्बंधित प्रतिबंधों का अनुपालन भी कर पायें।

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इस सीरीज के अन्य भाग पढ़ें: देखभाल के बदलाव पर चर्चा – भाग 2: देखभाल कैसे एडजस्ट करें, चिकित्सीय सलाह पर चर्चा – भाग 3: दवा खरीदना, टेस्ट करवाना, टेलीमेडिसिन से सलाह लेना, अस्पताल जाना, और भाग 4: कारगर देखभाल और तनाव मुक्ति के लिए अन्य सुझाव, सहायता के लिए संसाधन, इत्यादि

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