अल्ज़ाइमर रोग (Alzheimer’s Disease, AD) : एक परिचय

अल्जाइमर रोग (Alzheimer’s Disease, AD) सबसे ज्यादा पाया जाने वाला डिमेंशिया है (50-75%)। इस पर जानकारी अन्य डिमेंशिया रोगों से ज्यादा आसानी से मिलती है। इस पृष्ठ पर प्रस्तुत है इस पर एक सरल परिचय और कुछ उपयोगी चित्र, और हिंदी साइट और वीडियो के लिंक भी हैं|

डिमेंशिया के अन्य तीन मुख्य प्रकारों पर प्रकाशित पोस्ट  के लिए ये लिंक देखें : संवहनी डिमेंशिया (वैस्कुलर डिमेंशिया, Vascular dementia), लुई बॉडी डिमेंशिया (Lewy Body Dementia), और फ्रंटो-टेम्पोरल डिमेंशिया (Frontotemporal Dementia, FTD) |

अल्ज़ाइमर रोग क्या है (What is Alzheimer’s Disease)|

अल्ज़ाइमर रोग सबसे ज्यादा पाया जाने वाला डिमेंशिया है*1 |

  • इस डिमेंशिया में मस्तिष्क में हुई हानि को दवा से वापस ठीक नहीं किया जा सकता| यह इर्रिवर्सिबल (irreversible) है|
  • Dementia India Report 2010 के अनुसार इर्रिवार्सिब्ल डिमेंशिया के केस में से 50 – 75% लोगों को अल्ज़ाइमर रोग होता है|
  • अल्ज़ाइमर रोग अन्य डिमेंशिया के साथ-साथ भी पाया जाता है, जैसे कि वैस्कुलर डिमेंशिया के साथ। इस को मिश्रित डिमेंशिया (मिक्स्ड डिमेंशिया) कहते हैं|
Table 1.1 from Dementia India Report 2010

अल्ज़ाइमर रोग सबसे पहले डॉक्टर अलोइस अल्झाइमर ने पहचाना था| इस लिए यह रोग उन के नाम से जाना जाता है। पर यह रोग नया नहीं है। इस के लक्षण तो हम सदियों से देखते आ रहे हैं, बस हम यह नहीं जानते थे कि ये लक्षण मस्तिष्क में हो रहे बदलाव के कारण हैं।

Alzheimer's disease-neuron death
  • अल्ज़ाइमर रोग में मस्तिष्क में हो रही हानि की खास पहचान हैं बीटा-एमीलायड प्लैक और न्यूरोफिब्रिलरी टैंगल| सरलता के लिए इन्हें अकसर सिर्फ प्लैक और टैंगिल  भी बुलाया जाता है|
  • इन असामान्य खण्डों की वजह से मस्तिष्क के सेल (कोशिकाएं, न्यूरोन) मरने लगते हैं|
  • सेल एक दूसरे को सन्देश ठीक से नहीं पहुंचा पाते|
  • मस्तिष्क सिकुड़ने लगता है|
  • हानि अकसर मस्तिष्क के हिप्पोकैम्पस भाग में शुरू होती है, और धीरे धीरे सभी भागों में फैलने लगती है|
  • जैसे-जैसे हानि बढ़ती है, मस्तिष्क के अनेक भाग भी ठीक काम नहीं कर पाते|

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अल्ज़ाइमर रोग के लक्षण (Symptoms of Alzheimer’s Disease)|

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अकसर हिप्पोकैंपस क्षेत्र अल्ज़ाइमर में सबसे पहले प्रभावित होता है। इस क्षेत्र का सम्बन्ध सीखने और याददाश्त से है।
  • अल्ज़ाइमर रोग में शुरू का आम लक्षण है याददाश्त की समस्या। इस लिए इस रोग को कई लोग भूलने की बीमारी कहते हैं|
  • यह स्मृति-लोप की समस्या बहुत धीरे-धीरे बढ़ती हैं| यह विशेष तौर से हाल में हुई बातों को याद करने की कोशिश करते वक्त नजर आती है|
  • अन्य शुरू के लक्षण हैं डिप्रेशन (यानि कि अवसाद), अरुच और उदासीनता|

मस्तिष्क ठीक काम नहीं कर पाता, इसलिए अन्य लक्षण भी नजर आते हैं| कुछ उदाहरण पेश हैं:

  • जगह और समय क्या है, यह ठीक से मालूम नहीं होना| भटकने की समस्या आम है|  |
  • साधारण रोज-रोज के काम करने में दिक्कत होना, काम बहुत धीरे-धीरे करना या उन में मदद की जरूरत होना|
  • ध्यान लगाने में दिक्कत|
  • नई चीजें न सीख पाना |
  • अपनी बात बताने में दिक्कत|  दूसरों की बातें समझने में दिक्कत| भाषा की दिक्कत,| लिखने में दिक्कत|
  • चीजें पहचानने में दिक्कत| चित्रों को पहचान ना पाना| दूरी का अंदाजा ठीक से नहीं लगा पाना|
  • सोचने में और तर्क करने में दिक्कत| हिसाब करने में दिक्कत| समस्याएँ ना सुलझा पाना|  निर्णय लेने में दिक्कत |
  • व्यक्तित्व और मूड में बदलाव, जैसे कि दूसरों से दूर रहने लगना, चिड़चिड़ा होना |
  • भ्रम होना|

अल्ज़ाइमर रोग में कई उप-प्रकार हैं, जिन में कुछ असामान्य अल्ज़ाइमर रोग (Atypical Alzheimer’s Disease) भी हैं, और इन में लक्षण सामान्य अल्ज़ाइमर रोग से कुछ अलग होते हैं।
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समय के साथ अल्ज़ाइमर रोग का बढ़ना (Progression of Alzheimer’s Disease)|

अल्ज़ाइमर रोग एक प्रगतिशील रोग है। इस में समय के साथ-साथ हानि बढ़ती रहती है, और लक्षण भी उसी प्रकार गंभीर होते जाते हैं। शुरू में अकसर सिर्फ हिप्पोकैम्पस में हानि होती है, पर यह हानि  फैलती जाती है।

Alzheimers disease-brain shrinkage and link to wikimedia
अल्ज़ाइमर में मस्तिष्क के सेल (न्यूरोन) में हानि

रोग का व्यक्ति पर असर किस रफ्तार से और किस तरह बढ़ेगा यह हर केस में फर्क होता है। अंतिम चरण तक पहुँचते पहुँचते व्यक्ति सभी कामों के लिए दूसरों पर निर्भर हो जाते हैं। व्यक्ति का चलना फिरना, बोल पाना, यहाँ तक कि खाना निगल पाना, सभी बहुत मुश्किल हो जाता है|  वे पूरे समय बिस्तर पर ही रहते हैं।

अल्ज़ाइमर रोग में मस्तिष्क में किस प्रकार हानि होती है, और समय के साथ यह कैसे बढ़ती है, यह देखने के लिए कुछ चित्रण पेश हैं , National Institute on Aging  USA के सौजन्य से|

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अल्ज़ाइमर रोग: कुछ अन्य तथ्य (Some other facts about Alzheimer’s Disease)|

बढ़ती उम्र और अल्ज़ाइमर  होने की  संभावना में सम्बन्ध है|

  • अल्ज़ाइमर की संभावना उम्र के साथ बढ़ती है, और खास तौर से 65  साल और अधिक होने  के बाद ज्यादा होती है। अधिकांश केस 65 और उससे  ज्यादा आयु  वाले लोगों में पाए जाते हैं|
  • एक जरूरी तथ्य यह है कि अल्ज़ाइमर रोग 65 से कम उम्र के लोगों में भी हो सकता है। इस को यंगर ऑनसेट अल्ज़ाइमर रोग (Younger Onset Alzheimer’s Disease, YOAD) या अर्ली ऑनसेट अल्ज़ाइमर रोग कहते हैं (Early Onset Alzheimer’s Disease, EOAD)|

अल्ज़ाइमर के कारक पर उपलब्ध जानकारी :

  • अल्ज़ाइमर रोग किसी को भी हो सकता है। इस का कोई स्पष्ट कारक नहीं मालूम है।
  • उम्र के साथ-साथ अल्ज़ाइमर रोग की संभावना बहुत बढ़ती है| उम्र बढ़ने को इस रोग का सबसे प्रमुख कारक माना जाता है|
  • यदि परिवार में किसी को अल्ज़ाइमर है, तो बच्चों में अल्ज़ाइमर की संभावना ज्यादा होती है। इस आनुवंशिकता को ठीक से समझने के लिए अभी रिसर्च चल रहा है।

अवधि:

  • यह रोग प्रगतिशील है और ला-इलाज भी, और इस की अवधि शुरू के लक्षण से लेकर व्यक्ति के मौत तक है। यह अवधि हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग है| ये अवधि कुछ साल से लेकर एक या दो दशक तक की हो सकती है।
  • कुछ अनुमान के अनुसार प्रारंभिक लक्षण से अंत तक व्यक्ति को औसतन आठ साल लगते हैं|

बचाव:

  • अल्ज़ाइमर से बचने का कोई पक्का तरीका अब तक मालूम नहीं है। इस पर जोर-शोर से शोध चल रहा है।
  • अब तक की समझ के हिसाब से कुछ चीजें  हैं जिन्हें अपनाने से इसकी संभावना कम होगी|
    • स्वस्थ जीवनशैली अपनाना, जैसे कि नियमित व्यायाम और पौष्टिक भोजन |हृदय स्वास्थ्य में इस्तेमाल तरीके अल्ज़ाइमर रोग से बचाव के लिए भी अपना सकते हैं|
    • सक्रिय और सकारात्मक जीवन बिताना, और अर्थपूर्ण काम करना|
    • अवसाद, यानि कि  डिप्रेसन से बचना|
    • ऐसे काम करना जिन से मस्तिष्क सक्रिय रहे|
    • लोगों से मिलना-जुलना| सामाजिक गतिविधियों में भाग लेना|
    • कुछ स्वास्थ्य समस्याओं से खास तौर बचना, जैसे कि मधुमेह, उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रोल, और हृदय रोग। यह  समस्याएँ हों  तो इन को नियंत्रण में रखना|
    • तंबाकू सेवन बंद करना|
    • मद्यपान सीमित रखना|

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अल्ज़ाइमर रोग-निदान और उपचार (Diagnosis and Treatment of Alzheimer’s Disease)|

अल्ज़ाइमर रोग-निदान के लिए कोई एक विशिष्ट टेस्ट नहीं है। विशेषज्ञ अल्ज़ाइमर का डायग्नोसिस  पूरी चिकित्सीय जाँच के बाद ही दे सकते हैं। वे व्यक्ति के लक्षण समझने की कोशिश करते हैं, व्यक्ति की अन्य बीमारियों की जानकारी प्राप्त करते हैं, फैमिली मेडिकल हिस्ट्री लेते हैं, और परिवार वालों से भी बात करते हैं। खून के टेस्ट, मानसिक अवस्था के लिए टेस्ट, याददाश्त और सोचने-समझने के लिए टेस्ट, ब्रेन स्कैन, इत्यादि,  ये सब इस चिकित्सीय मूल्यांकन का भाग हैं।

रोग-निदान में गलतियाँ हो सकती है। कुछ उदाहरण पेश हैं|

  • लक्षण धीरे धीरे बढ़ते हैं| कई बार इन्हें बुढ़ापे की आम समस्या समझ कर नजरअंदाज कर दिया जाता है|
  • यदि व्यक्ति में अल्ज़ाइमर रोग सामान्य तरह से पेश नहीं हो, तो यह शायद न पहचाना जाए| उदाहरण है  कम उम्र में अल्ज़ाइमर होना|
  • क्योंकि अल्ज़ाइमर रोग के बारे में अन्य डिमेंशिया रोगों से ज्यादा जानकारी और जागरूकता है, इसलिए कभी-कभी मिलते-जुलते लक्षण देखने पर, बिना पूरी जाँच करे, व्यक्ति को अल्ज़ाइमर का रोग-निदान मिल सकता है। व्यक्ति को कोई दूसरी बीमारी है, यह शायद पहचाना न जाए। इस स्थिति में:
    • व्यक्ति को अन्य मौजूद बीमारी का इलाज नहीं मिल पाता है|
    • कुछ दवा जो अल्ज़ाइमर रोग में कारगर हैं, वे अन्य रोगों में नुकसान भी कर सकती हैं|

अच्छा यही होगा कि परिवार वाले संतोष कर लें कि रोग-निदान के समय सब जाँच हुई है|

रोग-निदान जितनी जल्दी हो, उतना अच्छा है, ताकि व्यक्ति उपलब्ध दवा का लाभ उठा सकें, और व्यक्ति और परिवार वाले, सब आगे के लिए योजना बना पाएँ|

इसका पूरा उपचार अब तक उपलब्ध नहीं है| 

  • वर्तमान में, दवा से अल्ज़ाइमर रोग न तो रुक सकता है, न ही उसकी प्रगति धीमी करी जा सकती हैं|
  • हालांकि मस्तिष्क में हो रही हानि के लिए कोई दवा नहीं है, पर ऐसी कुछ दवा हैं जिन से अल्ज़ाइमर के रोगियों को कुछ राहत मिल सकती है|
    • ये दवाएं लक्षणों में कुछ सुधार लाने के लिए इस्तेमाल होती हैं। यह कुछ लोगों में कारगर होती हैं, पर सब में नहीं, और यह शुरू की अवस्था में ज्यादा कारगर होती हैं।

दवा के अतिरिक्त, अन्य भी कई तरीके हैं जिन से व्यक्ति की सहायता करी जा सकती है| उदाहरण हैं घर और वातावरण में बदलाव, और देखभाल और बातचीत के बेहतर तरीके इस्तेमाल करना। व्यक्ति की खुशहाली के लिए इन्हें अपनाना बहुत जरूरी है|
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उपलब्ध जानकारी और सपोर्ट पर कुछ कमेन्ट (Available information and resources: some comments)|

डिमेंशिया अनेक रोगों की वजह से हो सकता है, और इन में से अल्ज़ाइमर रोग पर सब से ज्यादा चर्चा होती है। डिमेंशिया समर्थन पर काम करने वाली संस्थाओं के नाम में अकसर अल्ज़ाइमर शब्द होता है, जैसे कि “अल्ज़ाइमर असोसिअशन” या “अल्ज़ाइमर सोसाइटी”। भारत में राष्ट्रीय स्तर के संगठन के नाम में भी अल्ज़ाइमर शब्द है: Alzheimer’s and Related Disorders Society of India (ARDSI)। लेखों में, खबरों में, अन्य जागरूकता के लिए करे गए कार्यक्रमों में, सब में अल्ज़ाइमर और डिमेंशिया दोनों शब्दों का अदल-बदल कर इस्तेमाल होता है। इस कारण यह नाम भी कई लोग पहचानते हैं| पर इस में क्या लक्षण हैं, और उन का व्यक्ति और परिवार पर क्या असर होता है, इस पर जानकारी कम है।

कई लोग अल्ज़ाइमर को भूलने की बीमारी समझते हैं या इसे वृद्धों की बीमारी के रूप में ही जानते हैं। लोग यह नहीं जानते कि व्यक्ति को बहुत तरह की दिक्कतें होती हैं और समय के साथ-साथ व्यक्ति पूरी तरह लाचार हो जाते हैं, या यह कम उम्र में भी हो सकता है। यानि कि, नाम की पहचान तो है, पर इस रोग का किस-किस पर और कितना गंभीर असर होता है, इस के बारे में  कई गलत धारणाएँ हैं।

परिवार में यदि किसी को अल्ज़ाइमर है, तो देखभाल की जरूरत होती है, और व्यक्ति की सहायता का काम समय के साथ बढ़ता जाता है। देखभाल कई साल करनी होती है| इस के लिए परिवार को सही जानकारी, सलाह और सेवाओं की जरूरत होती है। पर भारत में ऐसी बहुत ही कम संस्थाएं और सेवाएं हैं जो उचित जानकारी और सहायता दे सकती हैं।

अफ़सोस, कुछ लोग अल्ज़ाइमर रोग से संबंधित आशंका और भय का फायदा उठाते हैं। वे अपनी संस्था या सेवा के लिए दावा करते हैं कि वे अल्ज़ाइमर रोगियों को उचित सहायता और सेवा प्रदान कर पायेंगे| वे  कभी-कभी यह भी गलत दावा करते है कि वे अधिकृत संस्थाओं से जुड़े हैं। पर वास्तव में उनकी जानकारी बहुत ही सीमित होती है। किसी के भी दावे पर विश्वास करने से पहले ऐसे दावों की पुष्टि करनी जरूरी है।

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अल्ज़ाइमर रोग: मुख्य बिंदु (Salient Points of Alzheimer’s Disease)

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  • अल्ज़ाइमर रोग डिमेंशिया का सबसे आम कारण है|  यह डिमेंशिया के करीब 50 से 75% केस के लिए जिम्मेदार है|
    • यह अकेले भी पाया जाता है, और अन्य डिमेंशिया के साथ भी मौजूद हो सकता है (जैसे कि संवहनी मनोभ्रंश या लुई बॉडी डिमेंशिया के साथ)|
  • शुरू में इस का आम लक्षण है याददाश्त की समस्या। अन्य आम शुरू के लक्षण हैं अवसाद और अरुचि।
    • लक्षण धीरे धीरे बढ़ते हैं, और शुरू में पता नहीं चलता कि कुछ गड़बड़ है|
    • समय के साथ लक्षण बढ़ते जाते हैं और मस्तिष्क के सभी कामों में दिक्कत होने लगती है|
    • अंतिम चरण में व्यक्ति पूरी तरह दूसरों पर निर्भर हो जाते हैं|
  • इस को रोकने या ठीक करने के लिए दवा नहीं है, पर लक्षणों से राहत देने के लिए कुछ दवा और गैर-दवा वाले उपचार हैं|
  • इस से बचने के लिए कोई पक्का तरीका मालूम नहीं है| पर यह माना जाता है कि स्वस्थ जीवन शैली से, व्यायाम से, सक्रिय जीवन बिताने से कुछ बचाव होगा
    • हृदय स्वास्थ्य के लिए जो कदम उपयोगी है, वे इस से बचाव में भी उपयोगी हैं (What is good for the heart is good for the brain).

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(नोट्स: अधिक जानकारी के लिए लिंक और श्रेय) (Notes: Links and Credits)|

*1अन्य प्रमुख डिमेंशिया और उनके लिए लिंक हैं  संवहनी डिमेंशिया (वैस्कुलर डिमेंशिया, Vascular dementia), लुई बॉडी डिमेंशिया (Lewy Body Dementia), और फ्रंटो-टेम्पोरल डिमेंशिया (Frontotemporal Dementia, FTD)|

और जानकारी के लिए देखें:
मस्तिष्क में बदलाव पर हिंदी में वीडियो |
एक वीडियो परिचय, डिमेंशिया सलाहकार Atiq Hassan (Bradford,UK)द्वारा:

अल्जाइमर रोग पर एक तीन मिनट का हिंदी “पॉकेट” वीडियो: एल्ज़ाइमर्ज़ रोग क्या है|

इस विषय पर हमारे हिंदी पृष्ठ भी देखें:  डिमेंशिया किन रोगों के कारण होता है (Diseases that cause dementia),निदान, उपचार, बचाव (Dementia Diagnosis, Treatment, Prevention)|
कुछ अन्य हिंदी लिंक हैं भारत में स्थित “वाइट स्वान फ़ाउंडेशन फ़ॉर मेंटल हेल्थ”के वेबसाइट पर दो पृष्ठ: अल्ज़ाइमर रोग की समझ Opens in new window और अल्ज़ाइमर रोग Opens in new window, और अमरीका में स्थित Alzheimer’s Association, USA का पृष्ठOpens in new window.
कुछ अंग्रेज़ी लिंक:
What Is Alzheimer’s?(Alzheimer’s Association, USA) Opens in new window और Alzheimer’s disease? (Alzheimer’s Society, UK) (अंग्रेज़ी PDF डाउनलोड उपलब्ध) Opens in new window|

अल्ज़ाइमर रोग और संबंधित विकारों के लिए कुछ शब्द/ वर्तनी पेश है:

  • अल्ज़ाइमर रोग, अल्जाइमर, अल्जाइमर्ज़, अलजाइमर, अलज़ाइमर, एलसायमरस, अलज़ाईमर, एल्ज़ाइमर्ज़, एल्ज़ाइमर, बीटा-एमीलायड प्लैक, न्यूरोफिब्रिलरी टैंगिल|
  • Alzheimer’s Disease, beta amyloid plaque, neurofibrillary tangles, young onset Alzheimer’s Disease, early-onset Alzheimer’s Disease, mixed dementia, Atypical Alzheimer’s disease, Posterior cortical atrophy (PCA), Logopenic aphasia, Frontal variant Alzheimer’s disease.
श्रेय: (Public domain pictures) neuron death picture: 7mike5000 [CC BY-SA 3.0], via Wikimedia Commons, hippocampus: By Derivative work: Looie496 (File:Gray739.png) [Public domain], via Wikimedia Commons, Pictures of brain changes in AD, and brain shrinkage: By National Institute on Aging [Public domain], via Wikimedia Commons, brain lobes image: Henry Vandyke Carter [Public domain], via Wikimedia Commons.

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डिमेंशिया किन रोगों के कारण होता है (Diseases that cause dementia)

डिमेंशिया (मनोभ्रंश) के लक्षण अनेक रोगों के कारण पैदा हो सकते हैं. कुछ लोग इन डिमेंशिया के कारणों (causes of dementia) को डिमेंशिया के प्रकार या डिमेंशिया के किस्म भी कहते हैं (types of dementia), या कभी कभी विशेष रोग के नाम की जगह, “डिमेंशिया” शब्द को रोग के नाम की तरह इस्तेमाल करते हैं. वास्तव में ऐसे अनेक रोग हैं जिनसे डिमेंशिया के लक्षण पैदा हो सकते हैं (लगभग 100). प्रमुख रोग हैं अल्ज़ाइमर (Alzheimer’s Disease), संवहनी मनोभ्रंश (नाड़ी-संबंधी डिमेंशिया, vascular dementia), फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया (fronto-temporal dementia, FTD), लुई बॉडी डिमेंशिया (Lewy Body dementia, LBD), मिश्रित डिमेंशिया (mixed dementia), इत्यादि.

अकसर लोग पूछते हैं कि डिमेंशिया और अल्ज़ाइमर में फ़र्क क्या है. अल्जाइमर एक ऐसा रोग है जिससे मस्तिष्क में हानि होती है, और डिमेंशिया के लक्षण होते हैं. यह डिमेंशिया का सबसे आम कारण है, पर डिमेंशिया अन्य रोगों के कारण भी हो सकता है. डिमेंशिया लक्षणों के समूह का नाम है, और अल्जाइमर एक ऐसा रोग है जिससे ये लक्षण हो सकते हैं.

  • डिमेंशिया और उसके लक्षण पैदा करने वाले रोगों के बारे में कुछ प्रमुख तथ्य.
  • डिमेंशिया के ठीक हो सकने वाले कारण (reversible causes)
  • डिमेंशिया के ठीक न हो सकने वाले कारण (irreversible causes)
  • इन्हें भी देखें

पूरे पोस्ट के लिए यहाँ क्लिक करें : डिमेंशिया किन रोगों के कारण होता है (Diseases that cause dementia)

डिमेंशिया (मनोभ्रंश) के लक्षण अनेक रोगों के कारण पैदा हो सकते हैं. कुछ लोग इन डिमेंशिया के कारणों (causes of dementia) को डिमेंशिया के प्रकार या डिमेंशिया के किस्म भी कहते हैं (types of dementia), या कभी कभी विशेष रोग के नाम की जगह, “डिमेंशिया” शब्द को रोग के नाम की तरह इस्तेमाल करते हैं. वास्तव में ऐसे अनेक रोग हैं जिनसे डिमेंशिया के लक्षण पैदा हो सकते हैं (लगभग 100). प्रमुख रोग हैं अल्ज़ाइमर (Alzheimer’s Disease), संवहनी मनोभ्रंश (नाड़ी-संबंधी डिमेंशिया, vascular dementia), फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया (fronto-temporal dementia, FTD), लुई बॉडी डिमेंशिया (Lewy Body dementia, LBD), मिश्रित डिमेंशिया (mixed dementia), इत्यादि.

अकसर लोग पूछते हैं कि डिमेंशिया और अल्ज़ाइमर में फ़र्क क्या है. अल्जाइमर एक ऐसा रोग है जिससे मस्तिष्क में हानि होती है, और डिमेंशिया के लक्षण होते हैं. यह डिमेंशिया का सबसे आम कारण है, पर डिमेंशिया अन्य रोगों के कारण भी हो सकता है. डिमेंशिया लक्षणों के समूह का नाम है, और अल्जाइमर एक ऐसा रोग है जिससे ये लक्षण हो सकते हैं.

इस पृष्ठ के सेक्शन:

डिमेंशिया और उसके लक्षण पैदा करने वाले रोगों के बारे में कुछ प्रमुख तथ्य

  • व्यक्ति में डिमेंशिया के लक्षण एक या एक से ज्यादा रोगों के कारण पैदा हो सकते हैं
  • डिमेंशिया एक संलक्षण (लक्षणों के समूह) का नाम है. हर मरीज में सब लक्षण नहीं होंगे; किसी व्यक्ति में कुछ लक्षण नज़र आ सकते हैं, तो किसी अन्य व्यक्ति में कोई और लक्षण नज़र आ सकते हैं. यह तो डॉक्टर ही बता पायेंगे कि व्यक्ति को डिमेंशिया है या नहीं
  • व्यक्ति में डिमेंशिया के कौन से लक्षण प्रकट होते हैं यह इस पर निर्भर है कि रोग के कारण मस्तिष्क के किस भाग में हानि हुई है
  • व्यक्ति को डिमेंशिया है या नहीं, यह तय करने के लिए डॉक्टर प्रश्न पूछेंगे और उचित जांच और टेस्ट करेंगे, और फिर बताएँगे कि व्यक्ति को डिमेंशिया है या नहीं. जांच के दौरान वे तय करेंगे कि व्यक्ति के लक्षण किस रोग के कारण हैं.
  • कुछ रोग इलाज से ठीक हो सकते हैं, और इस इलाज के बाद व्यक्ति स्वस्थ हो जाता है और उसके डिमेंशिया लक्षण पूरी तरह से चले जाते हैं. इसे रिवर्सिबल डिमेंशिया (reversible dementia) कहते हैं.
  • बाकी रोग (जिनके कारण डिमेंशिया होता है) लाइलाज हैं. इन्हें इर्रिवर्सबिल डिमेंशिया (irreversible dementia) कहते हैं. इलाज से इनमे से कुछ रोगों के प्रकट लक्षण तो काम हो सकते हैं, पर रोग मूल रूप से ठीक नहीं हो पाता. मस्तिष्क में जो हानि हो चुकी है, वह दवाई से वापस पलटती नहीं है, और दवाई का फोकस होता है प्रकट लक्षणों को कम करना और कुछ राहत देना. डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्तियों को आराम पंहुचाने के लिए अधिक कारगर दवाईओं के लिए शोध ज़ारी है.
  • डिमेंशिया के लक्षण किस गति से बढ़ेंगे और कौन से लक्षण ज्यादा गंभीर होंगे, यह इस पर निर्भर है कि उस व्यक्ति का डिमेंशिया किस रोग के कारण है. मस्तिष्क के किस भाग में कितनी हानि हुई है, और हानि किस रफ़्तार से बढ़ रही है, लक्षण इस पर निर्भर होते हैं. कई प्रकार के डिमेंशिया में मस्तिष्क में हो रही हानि बढ़ती जाती है progressive dementia), पर कुछ डिमेंशिया में हानि एक ही स्तर पर काफी अरसे तक रुकी रहती है, फिर शायद कुछ और हानि हो, और फिर कुछ देर उसी नए स्तर पर रुकी रहे. (इसको plateau.या step-wise progression of dementia भी कहते हैं)
  • परिवार वाले इस बात को ले कर भी चिंतित होते हैं कि क्या डिमेंशिया अनुवांशिक है. उनके डिमेंशिया की संभावना के बारे में जानने के लिये यह जानना ज़रूरी है कि डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति को किस रोग के कारण डिमेंशिया है. फिर परिवार वाले उचित शोध की रिपोर्ट देख सकते हैं.
  • अधिकाँश डिमेंशिया और देखभाल सम्बंधित चर्चा ऐसे डिमेंशिया के प्रकारों के इर्द-गिर्द होती है जिन में इलाज से रोग को पलटा नहीं जा सकता (irreversible). चर्चा करने वाले यह मान कर चलते हैं कि डिमेंशिया के लक्षण दिखाने वाले व्यक्ति की सही डॉक्टरी जांच हो चुकी है, और यदि डिमेंशिया पैदा करने वाला रोग इलाज से ठीक हो सकता था, तो इलाज हो चुका है.

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डिमेंशिया के ठीक हो सकने वाले कारण (reversible causes)

डिमेंशिया के ठीक हो सकने वाले कारणों में शामिल हैं अवसाद (depression), थाइरोइड हार्मोन में कमी (hypothyroidism), कुछ प्रकार के संक्रमण (infections), और विटामिन B12 की कमी (vitamin B12 deficiency). जांच से सही कारण पता चलाने के बाद डॉक्टर इलाज कर सकते हैं और व्यक्ति के डिमेंशिया लक्षण चले जायेंगे.

क्योंकि डिमेंशिया के लक्षण कभी कभी ऐसे रोगों के कारण पैदा होते है जिनका इलाज संभव है, इसलिए उचित यह है कि यदि कोई डिमेंशिया के लक्षण महसूस कर रहा है तो सही जांच कराई जाए. नाउम्मीद होकर घर बैठे रहने से उस व्यक्ति को, और अन्य परिवार वालों को, नाहक परेशान होती रहेंगे जब कि डॉक्टर के पास रोग का इलाज है.

इस प्रकार के डिमेंशिया के कुछ कारक रोग ऐसे हैं जो कम पाए जाते हैं, और जिनका रोग निदान कई बार ठीक से नहीं हो पाता. ऐसा एक रोग है सामान्य दबाव हायड्रोसेफ़ेलस(normal pressure hydrocephalus, NPH), जिस में मस्तिष्क में अधिक फ्लूइड भर जाता है और इस कारण लक्षण पैदा होते है. पर शंट लगाकर इस फ्लूइड को निकाला जा सकता है, जिस से व्यक्ति को लक्षणों से राहत मिल सकती है. कुछ ऐसे भी रोग हैं जिन में लगता है कि इनका तो मस्तिष्क से कोई सम्बन्ध ही नहीं है, पर फिर भी इन रोगों से डिमेंशिया लक्षण पैदा हो सकते हैं. जैसे कि, कुछ रिसर्च में पाया गया है कि सीलिएक रोग (उदार संबंधी रोग, celiac disease) से भी डिमेंशिया लक्षण हो सकते हैं. एक अन्य उदाहरण है लाइम रोग (Lyme’s disease).

Reversible dementia पर अधिक विस्तृत चर्चा के लिए हमारे अँग्रेज़ी पृष्ठ को देखें (लिंक नीचे “इन्हें भी देखें सेक्शन में है)

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डिमेंशिया के ठीक न हो सकने वाले कारण (irreversible causes)

अधिकाँश डिमेंशिया लाइलाज हैं, यानि कि दवाई से रोग से हुई हानि ठीक नहीं करी जा सकती.अधिकांश रोग प्रगतिशील (progressive) भी होते हैं, और अपकर्षक (degenerative) भी, और समय के साथ मस्तिष्क अधिक नष्ट होता जाता है, और व्यक्ति अधिक लाचार होते जाते हैं.

अल्ज़ाइमर (Alzheimer’s Disease) डिमेंशिया का सबसे आम कारण है. यह अभी लाइलाज है, और इस पर जोर-शोर से शोध चल रहा है. इसमें दिमाग की कोशिकाएं (cells) सिकुड जाती हैं या नष्ट हो जाती हैं, और “प्लाक” के जमा होने के कारण कोशिकाओं के बीच के जोड़ भी नष्ट हो जाते हैं. (यदि हिंदी में इस पर जानकारी ढूढ़ रहे हैं तो ध्यान रखें कि Alzheimer एक जर्मनी के डॉक्टर का नाम था, और देवनागरी लिपि में इसे अनेक तरह से लिखा जाता है, और इससे गूगल खोज के रिजल्ट में फ़र्क पड़ सकता है. उदाहरण: अल्ज़ाइमर, अल्जाइमर, अल्ज़ाईमर, एल्ज़ाइमर्ज़, एलसायमर, एल्सायमर, एलसायमरस, एल्जायमर्स, इत्यादि)

संवहनी डिमेंशिया एक अन्य मुख्य कारण है, खासकर भारत में. इसमें मस्तिष्क की हानि स्ट्रोक, मिनी-स्ट्रोक (TIA), और अन्य नाड़ी-सम्बंधी समस्याओं की वजह से होती है. उक्त रक्तचाप (high blood pressure) और धमनियों का स्थूल होना अकसर इन सब नाड़ी-संबंधी डिमेंशिया का मूल कारण होते हैं.

अन्य डिमेंशिया के कारण हैं फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया (fronto-temporal dementia), लुई बॉडी डिमेंशिया (Lewy Body dementia) और पार्किंसंस रोग (Parkinson’s Disease). यह भी हो सकता है कि डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्तियों में डिमेंशिया के लक्षण एक से अधिक रोगों के कारण पैदा होते हैं, जिसे मिक्स्ड डिमेंशिया (मिश्रित डिमेंशिया, mixed dementia) कहा जाता है. अकसर मिक्स्ड डिमेंशिया वाले व्यक्ति को अल्ज़ाइमर और संवहनी डिमेंशिया होता है, पर अन्य डिमेंशिया के प्रकारों के सम्मिश्रण भी संभव हैं.

अक्सर डिमेंशिया और अल्ज़ाइमर शब्दों को पर्यायवाची शब्दों की तरह से इस्तेमाल करा जाता है, पर यह गलत है. अल्ज़ाइमर रोग डिमेंशिया के लक्षणों का सबसे आम कारण ज़रूर है (50 – 75%), पर हम अन्य कारणों को नज़रंदाज़ नहीं कर सकते–वे 25 – 50% केस में पाए जाते हैं, जो एक काफी बड़ा हिस्सा है.

इन चार प्रमुख प्रकार के डिमेंशिया पर हिंदी में अधिक जानकारी के लिए नीचे इन्हें भी देखें सेक्शन को देखें)

अगर हम यह जानें कि हमारे प्रियजन को कौन सा डिमेंशिया है, तो उस प्रकार के डिमेंशिया के बारे में पढ कर हम अंदाजा लगा सकते हैं कि रोग के कौन से लक्षण किस अवस्था में ज्यादा प्रमुख होंगे, और हम उसके अनुसार खुद को देखभाल के लिए तैयार कर सकते हैं.

उदाहरण के लिए, लक्षणों को ही लें. अल्ज़ाइमर के रोगिओं में जयादातर याददाश्त संबंधी समस्याएँ पहले नज़र आते हैं, पर फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया वाले लोगों में अकसर व्यवहार का बदलाव एक प्रमुख लक्षण होता है, और याददाश्त संबंधी समस्याएं कम नज़र आती हैं. रोग की प्रगति भी अलग अलग होती है. अल्ज़ाइमर में ज्यादातर प्रगति धीमी रहती है. पर संवहनी डिमेंशिया में, जिसमे मस्तिष्क की हानि नाड़ीयों की समस्याओं के कारण होती है, अगर यह समस्याएँ रोकी जा सकें तो रोगी का डिमेंशिया एक ही स्तर पर कई दिनों तक रह सकता है. फिर अगर व्यक्ति को यदि स्ट्रोक हो जाए तो डिमेंशिया के लक्षण रातों-रात बदतर हो सकते हैं. पर यह भी याद रखें कि निश्चित ढंग से नहीं कहा जा सकता कि किसी एक व्यक्ति में रोग किस गति से और कैसे बिगडेगा.

एक पहलू यह है कि रोग कोई भी हो, व्यक्ति के लक्षण उसी व्यापक लक्षणों के समूह से होते हैं जिन्हें डिमेंशिया कहते हैं. इसलिए परिवार वाले अपने प्रियजन की देखभाल के लिए टिप्स अनेक स्तोत्र से पा सकते हैं. अधिकांश जानकारी देखभाल की जानकारी अल्ज़ाइमर के नाम से मिलती है क्योंकि अधिकाँश रोगी अल्ज़ाइमर से ग्रस्त हैं, और विश्व-भर में शोध और चर्चा भी अल्ज़ाइमर पर ही केंद्रित है. राष्ट्रिय संस्थाएं सभी प्रकार के डिमेंशिया का समर्थन भी अल्ज़ाइमर की छत्री के अंतर्गत करती हैं. इन्टरनेट पर डिमेंशिया सम्बंधी जानकारी ढूंढते हुए यह बात याद रखने से जानकारी ढूँढने में आसानी होगी.

पर यह न समझें कि अल्ज़ाइमर के लिए दी गयी सभी सलाह दूसरे प्रकार के डिमेंशिया में ज्यूं-के-त्यूं काम आ सकती है. व्यक्ति में कौन से लक्षण अधिक पेश है, और रोग किस तरह से बिगड रहा है, उसे न भूलें. भिन्न डिमेंशिया रोगों के लिए उपचार और सलाह भी अलग हो सकती है. अच्छा होगा है कि ऐसे साधन भी ढूँढें जो डिमेंशिया पैदा करने वाले उस रोग से सम्बंधित है जिससे व्यक्ति ग्रस्त है, ताकि अधिक कारगर टिप्स मिलें.

एक अन्य ज़रूरी बात यह है कि इलाज करने वाले सभी डॉक्टर को मालूम रहना चाहिए कि डिमेंशिया किस रोग के कारण है, क्योंकि कुछ दवाइयाँ ऐसी हैं जो एक तरह के डिमेंशिया के लिए उपयुक्त हैं, पर दूसरे डिमेंशिया में नुकसान कर सकती हैं और रोगी की हालत और खराब हो सकती है. (उदाहरण देखें कैसे लुई बॉडी डिमेंशिया में अल्ज़ाइमर में दी गयी कुछ दवाइयाँ नुकसान कर सकती हैं; नीचे दिए गए लिंक में इस पर अधिक जानकारी है. उचित सपोर्ट ग्रुप में भी इस प्रकार की जानकारी मिल सकती है)

नोट: जैसे जैसे डिमेंशिया पैदा करने वाले रोगों के बारे में जानकारी बढ़ती है, वैसे वैसे विशेषज्ञ उन रोगों के नाम और उनकी श्रेणियों को बदलते रहते हैं. ये साधारण लोगों को कंफ्यूस कर सकता है, और जानकारी खोजने में दिक्कत पैदा कर सकता है. इस पर कुछ अधिक टिपण्णी देखें हमारे अँग्रेज़ी पृष्ठ पर (लिंक नीचे “इन्हें भी देखें सेक्शन में है).

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इन्हें भी देखें….

चार प्रमुख प्रकार के डिमेंशिया के मुख्य बिंदु यहाँ देखें और विस्तृत पोस्ट (चित्रों सहित) यहाँ देखें:

मुख्य रोगों के अंग्रेज़ी नाम, देवनागरी में:

इस पृष्ठ पर कई बीमारियों के अंग्रेज़ी नाम हैं. इनको देवनागरी में लिखते समय अलग अलग संगठन हिंदी और अंग्रेज़ी में अलग अलग तरह से पेश करते हैं; कुछ प्रचलित स्पेलिंग (वर्तनी) आपकी सुविधा के लिए (गूगल खोज में सहायता के लिए):

  • Dementia: डिमेंशिया, मनोभ्रंश, डिमेन्शिया, डिमेंशिया डिमेंश्या, डिमेंटिया, डेमेंटिया
  • Alzheimer’s Disease: अल्जाइमर, अल्ज़ाइमर, अलजाइमर, अलज़ाइमर, एलसायमरस, अलज़ाईमर, एल्ज़ाइमर्ज़
  • Lewy Body dementia: लुई बाड़िज़, लुई बॉडी रोग, लुई बॉडी़ज़ वाला रोग,लुई बाड़ी रोग, लेवी बॉडीज़
  • Vascular dementia: (इसके लिए और इस से संबंधित विकारों के लिए कुछ शब्द) वास्कुलर डिमेंशिया, वैस्क्यूलर डिमेंशिया, नाड़ी-संबंधी डिमेंशिया, संवहनी मनोभ्रंश, हृदवाहिनी रोग, रक्त-वाहिका रोग,स्ट्रोक, सबकोर्टिकल संवहनी डिमेंशिया, मल्टी-इनफार्ट, मिनी-स्ट्रोक्स, बहु-रोधगलितांश डिमेंशिया, बिंसवान्गर (सबकोर्टिकल वैस्क्यूलर डिमेंशिया), ट्रांसिऐंट इस्कीमिक अटैक्स, अस्थायी स्थानिक अरक्तता दौरे
  • Fronto-temporal dementia: फ्रोंटो-टेम्पोरल डिमेंशिया, फ्रंटोटेम्पोरल लोबार डिजेनरेशन, पिक्स रोग, फ़्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया
  • Mixed dementia:मिश्रित डिमेंशिया, मिक्स्ड डिमेंशिया
  • Parkinson’s Disease: पार्किन्सन-रोग, पार्किंसंस रोग

पृष्ठ पर इस (अँग्रेज़ी) रिपोर्ट का ज़िक्र है: डिमेंशिया इंडिया रिपोर्ट 2010 (The Dementia India Report 2010) (PDF file) Opens in new window

डिमेंशिया और अल्ज़ाइमर में फ़र्क क्या है, इस पर एक छोटा हिंदी वीडियो देखें, जिसमे सरल तरीके से, रेखा चित्र का इस्तेमाल करके डिमेंशिया और अल्ज़ाइमर के बीच का सम्बन्ध समझाया गया है.(यदि वीडियो प्लेयर नीचे लोड न हो रहा हो तो आप इस वीडियो को सीधे यूट्यूब पर भी देख सकते हैं Opens in new window)

हिंदी पृष्ठ, इसी साईट से:

डिमेंशिया रोगों के बारे में और जानकारी: निदान, उपचार, बचाव .

इस विषय पर हिंदी सामग्री, कुछ अन्य साईट पर: यह याद रखें कि इन में से कई लेख अन्य देश में रहने वालों के लिए बनाए गए हैं, और इन में कई सेवाओं और सपोर्ट संबंधी बातें, कानूनी बातें, इत्यादि, भारत में लागू नहीं होंगी.

इस पृष्ठ का नवीनतम अँग्रेज़ी संस्करण यहाँ उपलब्ध है: Diseases that cause dementia Opens in new window. अंग्रेज़ी पृष्ठ पर आपको विषय पर अधिक सामयिक जानकारी मिल सकती है. कई उपयोगी अँग्रेज़ी लेखों, संस्थाओं और फ़ोरम इत्यादि के लिंक भी हो सकते हैं. कुछ खास उन्नत और प्रासंगिक विषयों पर विस्तृत चर्चा भी हो सकती है. अन्य विडियो, लेखों और ब्लॉग के लिंक, और उपयोगी पुस्तकों के नाम भी हो सकते हैं. इस पृष्ठ पर अनेक उपयोगी वेबसाइट के लिंक भी हैं, जो अलग अलग तरह के डिमेंशिया पर जानकारी देते हैं, और डिमेंशिया वाले व्यक्ति और उनके परिवारों को सपोर्ट भी करते हैं.

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