डिमेंशिया (मनोभ्रंश) से प्रभावित हर परिवार के साथ एक कहानी जुड़ी हुई है – घर में डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति पर क्या बीती, परिवार वालों पर क्या बीती, उन्होंने क्या महसूस किया, स्थिति को कैसे संभाला, क्या सीखा, क्या नहीं। आस-पास वालों की भी कहानियाँ हैं, वे कैसे मदद कर पाए, कितने लाचार रहे। नीचे देखें ऐसे कई देखभाल करने वालों के इंटरव्यू, ताकि आप अनेक दृष्टिकोण से डिमेंशिया और उसका परिवार पर क्या असर होता है, यह समझ पायें, और अपनी निजी स्थिति के लिए टिप्स ले पायें।
- एक बेटी ने अपने पिता की देखभाल को अकेले कैसे संबहाल, उनकी दिन-रात की देखभाल का काम, पैसे की दिक्कतें, अकेलापन, पति से टूटता रिश्ता, भाई का रूखापन, इस सब का वर्णन.
- एक बेटी की ज़बानी: पूरी तरह से निर्भर पिता की देखभाल की चुनौतियाँ, घर और अस्पताल में देखरेख, दुविधाएं, निर्णय, अंतिम शोक..
- एक बहु अपनी बिस्तर पर पड़ी सास की देखभाल का हृदय-चीरने वाला वर्णन करती है.
- शुरू के लक्षण, निदान, दवाई और उसका दुष्परिणाम: एक बेटी अपनी माँ के डिमेंशिया के बारे में. .
- मैं अब माँ की देखभाल को ही प्राथमिकता देती हूँ: एक बेटी बनी एक जानकार और सहानुभूतिशील देखभाल कर्ता.
- वह मेरा हाथ थाम कर मेरा सहारा लेती थी: एक पति अपनी पत्नी के डिमेंशिया के बारे में.
- हम देखभाल करने वालों को क्या मदद चाहिए: एक देखभाल कर्ता की आपबीती और उसकी इच्छा सूची .
- दूसरे देश से देखभाल संभालना: एक बेटी अपने पिता की देखभाल के लिए अपनाए गए नुस्खे.
- देखभाल की चुनौतियाँ, प्रशिक्षित आया, देखभाल कर्ता का अवसाद: एक बहु का अपने सास की देखभाल का वर्णन.
- माँ भूलने का सिर्फ बहाना करती थीं: माँ के मरने के बाद भी परिवार उनके डिमेंशिया को नहीं स्वीकारता.
- पिताजी सोचते थे कि मैं उनकी हत्या करना चाहती थी: एक बेटी अपने पिता के डिमेंशिया की कहानी.
- एक परिवार जहां डिमेंशिया के लक्षण को पहचाना जाता है, और परिवार वाले उसके अनुसार अपने जीवन को बदलते हैं: एक समाज सेवक का बयान.
- मुख्य देखभाल कर्ता (पत्नी) का समर्थन और सहायता: एक पति के अनुभव और सुझाव.
- हमारे यहाँ आने से माँ को आराम होता है: एक बेटा, जिसके पिता की देखभाल का भार मुख्यतः बुज़ुर्ग माँ पर है.
- मेरे पति तो एक गुड़िया बन कर रह गए हैं: 78 साल की पत्नी जो 86 साल के पति की देखभाल की कहानी.
- जब हम चक्की में पिस रहे होते है, तो सीधा सोच नहीं पाते: एक डॉक्टर जो देखभाल भी करती थी.
- पिता की हालत का असर मेरे जीवन के हर पहलू पर हुआ: एक बेटे का इंटरव्यू.
- घर में डिमेंशिया से ग्रस्त रोगी की देखभाल पर संघर्ष.
- पन्द्रह साल की उम्र में पता चला कि माँ को डिमेंशिया है: छोटी उम्र में एकता बनीं देखभाल कर्ता.
नोट: यहाँ बताई गई स्थितियाँ और अनुभव हर इंटरव्यू देने वाले या टिप्पणी करने वाले व्यक्ति के अपने हैं। इन्हें डिमेंशिया से ग्रस्त लोगों, उनके परिवारों, देखभाल के माहौल या पेशेवरों की सामान्य स्थिति के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। डिमेंशिया वाला हर व्यक्ति और हर परिवार अलग होता है, और उनके अनुभव भी अलग-अलग होते हैं। हालाँकि इनमें से कई कहानियाँ कई साल पुरानी हो सकती हैं, लेकिन देखभाल से जुड़े उनके अनुभव और नज़रिए आज भी उतने ही काम के और प्रासंगिक हैं। फिर भी, उनके बताए गए कुछ खास विवरण — जैसे सेवाएँ, खर्च, या इलाज के तरीके — शायद अब वैसे न हों।
एक बेटी ने अपने पिता की देखभाल को अकेले कैसे संबहाल, उनकी दिन-रात की देखभाल का काम, पैसे की दिक्कतें, अकेलापन, पति से टूटता रिश्ता, भाई का रूखापन, इस सब का वर्णन.
पढ़ें 48 साल की हैदराबाद में रहने वाली रितिका कगग अपने 80 साल के पिता की अकेले देखभाल संभालने का वर्णन। रितिका के भाई/ भाभी जम्मू में थे, और पति (आर्म्ड फ़ोर्सेस में कार्यरत) भी दूर किसी दूसरे शहर में थे। कुछ वर्ष पहले रितिका अनजाने में ही अपने पिता के कुछ निर्णय, और उन पर हुए परिवार में अनबन और झगड़ों के बीच फंस गयीं, और पिता के देखभाल के रोल में पड़ गयीं। इस इंटेरव्यू के समय, तीन बरस से रितिका यह काम अकेले संभाल रहीं थीं, न सिर्फ पिता का दिन-रात का काम बल्कि खर्चे के लिए पैसे कमाने का काम, और घर के अन्य सारे काम भी। भाई/ भाभी और पति से मदद नहीं मिली। रितिका को यह भी नहीं पता कि इतने साल पति के घर से दूर रहने के बाद, पिता के गुजर जाने के बाद क्या रितिका फिर से पत्नी का रोल कायम कर पाएंगी या नहीं। अकेली पड़ी रितिका स्थिति से समझौता कर, दृढ़ता से अपने आप को शांत रखने की कोशिश के बारे में जानें। विस्तृत वर्णन के लिए इंटरव्यू यहाँ पढ़ें: Dementia caregiving can create chaos: a solo caregiver describes challenges faced on multiple fronts Opens in new window.
एक बेटी की ज़बानी: पूरी तरह से निर्भर पिता की देखभाल की चुनौतियाँ, घर और अस्पताल में देखरेख, दुविधाएं, निर्णय, अंतिम शोक.
इस इंटेरव्यू में सुनें मुंबई स्थित विजया की आपबीती। उन्होंने अपने अकाउंटेंट होने का कैरियर कई सालों से अपने पिता की देखभाल के लिए त्याग दिया। देखें उनके पिता के अंतिम कुछ महीनों का वर्णन जब उन्होंने और उनकी बहन ने पूरी तरह से निर्भर पिता की घर पर देखभाल करी। जानें कि उन्होंने घर पर देखभाल कैसे करी, दिन भर के काम क्या क्या थे, साथ बिताए हुए कुछ कोमल पल कैसे बीते, आदि। बार बार बीमार पड़ने की वजह से पिता के अस्पताल के चक्कर, वहाँ पर पेश आयी दिक्कतें, दुविधाएं, इत्यादि भी इंटरव्यू में शामिल हैं। इंटरव्यू यहाँ पढ़ें: Late-stage care, heartbreaks and tender moments, hospitals, dilemmas, decisions: a daughter narrates Opens in new window.
एक बहु अपनी बिस्तर पर पड़ी सास की देखभाल का हृदय-चीरने वाला वर्णन.
इस इंटेरव्यू में सुनें चार्टर्ड अकाउंटेंट नीना से, जिन्होंने अपनी सास की देखभाल के लिए अपना कैरियर स्थगित किया। नीना की सास को अनेक बीमारियाँ थीं, जिनमें डिमेंशिया भी एक है। इस इंटरव्यू में नीना से जानें कि उनकी सास कैसे बिस्तर पर पड़ीं, नीना ने कैसे इसके लिए घर में सारा इंतजाम करा, देखभाल में किस किस तरह की चुनौतियों का रोज रोज सामना करना पड़ा, घर पर नर्स से कैसे काम कराते थे, वगैरह। नीना की सास के कई जख्म ठीक ही नहीं हो पा रहे घे, और उनके बारे में बात करते हुए नीना ने कहा: “माँ को तड़पता देख कर मैं बहुत परेशान हो जाती हूँ”। इंटरव्यू यहाँ पढ़ें: When I see Ma struggle, I get very disturbed: a daughter-in-law describes the caregiving for a bedridden mother-in-law Opens in new window.
शुरू के लक्षण, निदान, दवाई और उसका दुष्परिणाम: एक बेटी अपनी माँ के डिमेंशिया के बारे में.
इस इंटेरव्यू में माला से उनकी माँ के अल्ज़ाइमर (Alzheimer’s Disease) के निदान और इलाज के बारे में सुने। परिवार वाले कई सालों से माँ की बढ़ती याददाश्त की समस्याओं को देख रहे थे, पर ये किसी रोग के कारण हो रही हैं, इसे जानने में उन्हें समय लगा। देखभाल संभाल रहे माला के वृद्ध पिता ने माला और उसके भाइयों से मदद लेने से साफ इनकार कर दिया। इस इंटरव्यू में माला गुजरे हुए सालों को याद कर, माँ के प्रारंभिक लक्षण, निदान और इलाज, दवाई के दुष्परिणाम, परिवार वालों का मिल-जुल के काम करना, इस सब का वर्णन पढ़ें। माला अपनी उम्मीद और अपने खेद/ दोष-भाव के बारे में भी बात करती हैं। इंटरव्यू यहाँ पढ़ें: Early warnings, diagnosis, medication, side-effects, an elderly father as caregiver: a daughter talks of her mother’s dementia Opens in new window.
मैं अब माँ की देखभाल को ही प्राथमिकता देती हूँ: एक बेटी बनी एक जानकार और सहानुभूति भरी देखभाल कर्ता.
नादिरा एक प्रख्यात अंतर्राष्ट्रीय कंसल्टेंट रह चुकी थीं हैं, पर उन्होंने अपना कैरियर छोड़ कर भारत में अपनी 80+ साल अल्ज़ाइमर से ग्रस्त की माँ की देखभाल का काम संभाला। इस इंटरव्यू में नादिरा से जानें कि उनकी माँ के व्यवहार पर बीमारी के बढ़ने से क्या असर हुआ, और परिवार वालों को यह समझने में समय लगा कि ये व्यवहार के बदलाव बीमारी के कारण हैं, क्योंकि पहला भी माँ कई बार उत्तेजित हो जाती थीं। नादिरा ने स्वयं पढ़ कर बीमारी के बारे में सीखा और माँ की देखभाल करने के लिए अपने स्वभाव को बदला, जिस से वे ज्यादा शांत और स्नेहपूर्ण बन पाईं, और माँ की तकलीफ महसूस कर, उसके अनुसार उनकी देखभाल कर पाईं। इंटरव्यू यहाँ पढ़ें: My mother is my top priority now: a daughter describes how she became an informed and empathetic caregiver Opens in new window
वह मेरा हाथ थाम कर मेरा सहारा लेती थी: एक पति अपनी पत्नी के डिमेंशिया के बारे में
रमन्ना राजगोपाल एक सफल मेनेजर थे, पर जब उनकी पत्नी को को कई “cerebral and cardiac infarcts” हुए और उनकी वजह से नाड़ी-संबंधी डिमेंशिया (संवहनी मनोभ्रंश)हुआ, तब रमन्ना ने अपना कामयाब कैरियर को छोड़ कर, देखभाल कर्ता का रोल संभाला। इंटेरव्यू के समय उनकी पत्नी गुजर चुकी थीं, और रमन्ना ने इंटरव्यू में बताया कि उन्होंने पत्नी को कैसे खुश रखने की कोशिश करी, और उनके साथ कैसे समय बिताया। उन्होंने कहा कि देखभाल का काम करने से उनका स्वभाव ही बदल गया है। इंटरव्यू यहाँ पढ़ें: She would simply hold on to me for support: a husband cares for a wife with dementia Opens in new window.
हम देखभाल करने वालों को क्या मदद चाहिए: एक देखभाल कर्ता की आपबीती और उसकी इच्छा सूची.
मुंबई निवासी कल्पना मलानी ने अपनी माँ की देखभाल की जिम्मेदारी अपने अन्य रोल के साथ संभाली– उनका रीटेल का कारोबार, और परिवार की अन्य जिम्मेदारियां। इस इंटरव्यू में उनकी स्थिति और मुश्किलों के बारे में जानें। देखभाल करने वालों की कैसे मदद की जा सकती है, इसके लिए उनकी इच्छा सूची भी देखें। इंटरव्यू यहाँ पढ़ें: A dementia caregiver shares her story and her caregiver wishlist Opens in new window.
दूसरे देश से देखभाल संभालना: एक बेटी अपने पिता की देखभाल के लिए अपनाए गए नुस्खे.
सुधा और उनके पति अमेरिका में रहते हैं। इस इंटेरव्यू में पढ़ें कि डिमेंशिया से ग्रस्त पिता की देखभाल में मदद करने के लिए कैसे सुधा साल के कई महीने नॉएडा में अपने माँ-बाप के साथ रहती हैं। देखभाल के सुचारू प्रबंधन के लिए सुधा और उनकी बहनों ने एक दूसरे से अकसर फोन व ई-मेल द्वारा रोज सम्पर्क बनाए रखा। परिवार में मतभेद को कैसे संभालें, इस पर भी सुधा के विचार पढ़ें: Long distance caregiving: a caregiver describes the challenges and her approach Opens in new window.
देखभाल की चुनौतियाँ, प्रशिक्षित आया, देखभाल कर्ता का अवसाद: एक बहु अपने सास की देखभाल का वर्णन करती है.
इस इंटेरव्यू में पढ़ें कैसे नीना ने अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट होने के कैरियर को अपनी सास की देखभाल के लिए स्थगित किया। उनके अपनी सास की अनेक बीमारियाँ और देखभाल की अनेक चुनौतियों के बारे में पढ़ें: Caregiving challenges, trained ayahs, depression: a caregiver’s story Opens in new window.
माँ भूलने का सिर्फ बहाना करती थीं: माँ के मरने के बाद भी परिवार उनके डिमेंशिया को नहीं स्वीकारता.
रुक्मिणी की नानी को डिमेंशिया था, लेकिन परिवार वालों ने निदान को समझने की कोशिश नहीं करी और वे रोगी को एक जिद्दी और लापरवाह औरत ही समझते रहे। नानी के डिमेंशिया को न स्वीकारने का यह रवैया सालों तक जारी रहा, और रुक्मिणी बताती हैं कि अब भी परिवार के लोग नानी के डिमेंशिया से उत्पन्न व्यवहार की तरफ शिकायत से देखते हैं, जैसे कि नानी सब को परेशान कर रही थीं। परिवार वालों को अब भी नानी से शिकायत है। इंटरव्यू यहाँ पढ़ें: A family’s denial about a dementia diagnosis Opens in new window.
पिताजी सोचते थे कि मैं उनकी हत्या करना चाहती थी: एक बेटीसे सुनें उनके पिता के डिमेंशिया की कहानी.
नयनतारा के पिता को डिमेंशिया का निदान तो मिला, पर रिश्तेदारों ने उसे नहीं माना और वे कहते रहे कि नयनतारा बात को बढ़ा-चढ़ा कर कहती है और उसकी नज़र पिता के पैसे पर है। इस इंटरव्यू में नयनतारा पिता की देखभाल से सम्बंधित चुनौतियों के बारे में पढ़ें: A daughter describes her father’s dementia behaviour challenges Opens in new window.
एक परिवार जहां डिमेंशिया के लक्षण को पहचाना जाता है, और परिवार वाले उसके अनुसार अपने जीवन को बदलते हैं: एक समाज सेवक का बयान.
जब उनकी 83 वर्षीय आंटी अजीब तरह से पेश आने लगीं, तो समाज सेवक भारती को शक हुआ कि शायद आंटी को डिमेंशिया है। भारती ने फिर परिवार वालों को डिमेंशिया की पत्रिकाएं दीं और परिवार वालों ने पढ़ने और सोचने के बाद डॉक्टर से सम्पर्क करा। डिमेंशिया के निदान के बाद, पूरे परिवार ने इस नयी स्थिति में देखभाल के लिए इंतजाम कैसे करा, क्या क्या कदम उठाये, इन सब का वर्णन भारती इस इंटरव्यू में पढ़ें: A family recognizes dementia and adjusts for it Opens in new window.
मुख्य देखभाल कर्ता (पत्नी) का समर्थन और सहायता: एक पति के अनुभव और सुझाव.
जब राजेश की सास को डिमेंशिया हुआ तो देखभाल का मुख्य रोल राजेश की पत्नी ने संभाला। इस नोट में राजेश बताते हैं कि शुरू के सालों में उन्होंने अपनी पत्नी का समर्थन नहीं किया था, क्योंकि वे डिमेंशिया के बारे में ठीक से नहीं समझते थे और देखभाल का कार्यभार नहीं समझ पाए। वे पत्नी की मेहनत और तनाव को नजरअंदाज करते रहे। पर अब वे समझते हैं कि प्रमुख देखभाल करने वाले की अन्य लोग कैसे सहायता कर सकते हैं। नोट में राजेश अनेक सुझाव देते हैं। नोट यहाँ पढ़ें: Supporting the primary caregiver: Mistakes made, lessons learnt, tips sharedOpens in new window.
दूर से देखभाल संभालना: एक व्यवस्था, और उसकी दिक्कतें.
डेविड की माँ को अल्ज़ाइमर (Alzheimer’s Disease) था। क्योंकि डेविड और उनके भाई-बहन सब दूसरे शहरों में रहते थे, उन्हें दूर से ही देखभाल का प्रबंध और संचालन करना पड़ा। इस इंटरव्यू में डेविड यह बताते हैं कि उन्होंने माँ की देखभाल के लिए इंतजाम कैसे करा और उन्हें क्या क्या दिक्कतें हुईं। इंटरव्यू यहाँ पढ़ें: Remote caregiving: an arrangement, and issues faced Opens in new window.
हमारे यहाँ आने से माँ को आराम होता है: एक बेटा, जिसके पिता की देखभाल का भार मुख्यतः बुज़ुर्ग माँ पर है.
यह इंटरव्यू एक पहले करे गए सरस्वती के इंटरव्यू का अनुगामी इंटरव्यू (“follow-up”) है, और इसमें सरस्वती के पुत्र, रंगनाथ बताते हैं कि उन्होंने अपने भाई-बहन के साथ मिलकर माँ के समर्थन के काम को कैसे बांटा है। समर्थन के लिए रंगनाथ और उनके भाई और बहन बारी-बारी से बेंगलुरु में माँ और पिता के साथ रहना , और इसके साथ अनेक उपलब्ध सेवाओं का भी उपयोग करना शामिल था, जैसे कि रिस्पाइट केयर, डे केयर, घर पर आ कर काम करने वाले प्रशिक्षित सहायक, इत्यादि, ताकि माँ को कभी पिता की देखरेख का काम अकेले न उठाना पड़े। इंटरव्यू यहाँ पढ़ें: Children of an elderly caregiver make arrangements and take turns to support the dementia careOpens in new window.
मेरे पति तो एक गुड़िया बन कर रह गए हैं: 78 साल की पत्नी जो 86 साल के पति की देखभाल की कहानी.
इस इंटेरव्यू में पढ़ें बेंगलुरु निवासी 78 साल की सरस्वती के अपने 86 साल के पति (पार्किन्सोनियन डिमेंशिया, Parkinsonian dementia से ग्रस्त) की देखभाल का वर्णन । जानें बड़ी-उम्र में देखभाल का काम संभालने की दिक्कतें। सरस्वती के बेटा-बेटी दूसरे शहरों में थे, वे वहीं से माँ के समर्थन और सहायता के लिए प्रबंध करने की कोशिश कर रहे थे। इंटरव्यू यहाँ पढ़ें: Elderly caregiver overwhelmed caring for her husband who has Parkinsonian dementia Opens in new window.
जब हम चक्की में पिस रहे होते है, तो सीधा सोच नहीं पाते: एक डॉक्टर जो देखभाल भी करती थीं.
विद्या डॉक्टर हैं। उनकी नानी, स्ट्रोक होने के बाद, डिमेंशिया के लक्षण दिखाने लगीं। विद्या की माँ और मौसी ने बारी-बारी से देखभाल का काम संभाला, और विद्या ने उनकी सहायता करी। अब विद्या सोचती हैं कि उन दिनों परिवार में किसी को भी अंदाजा नहीं था कि आगे क्या होगा, और देखभाल कैसे करनी होगी। परिवार वाले कोई भी इस काम के लिए तैयार नहीं थे। इंटरव्यू यहाँ पढ़ें: A family struggles to handle dementia care Opens in new window.
पिता की हालत का असर मेरे जीवन के हर पहलू पर हुआ: एक बेटे का इंटरव्यू.
पिता (अल्जाइमर से ग्रस्त) की देखभाल के शुरू के कुछ साल के लकिए वरुण के माँ-बाप उनके साथ रह रहे थे, और वरुण ने पिता की देखभाल में माँ की मदद करी। वरुण ने पाया कि पिता की हालत और देखभाल की चुनौतियों ने वरुण की जिंदगी के हर क्षेत्र पर असर किया। फिर माँ वरुण के पिता को अपने शहर ले गयी क्योंकि उन्हें लगा कि रिश्तेदारों और दोस्तों के समर्थन से देखभाल ज्यादा आसान होगी। वरुण के इस स्थिति के वर्णन और दूर से मदद के बारे में विचार पढ़ें: Father’s Alzheimer’s changes a son’s life Opens in new window.
घर में डिमेंशिया से ग्रस्त रोगी की देखभाल पर संघर्ष.
सरला अमरीका में अपने पति के साथ रहती हैं। उनकी अल्जाइमर से ग्रस्त सास भारत में थीं – सास की बीमारी कैसे बढ़ी, परिवार वालों ने देखभाल कैसे करी, भाई-बहनों में देखभाल के विषय पर किस प्रकार से मत-भेद पैदा हुए, कुढ़न हुई, झगड़े हुए, और इन सब से देखभाल पर क्या असर हुआ, इस इंटेरव्यू में सरला से विस्तार में सुनें: Overseas caregiving and family conflicts over dementia care Opens in new window.
पन्द्रह साल की उम्र में पता चला कि माँ को डिमेंशिया है: छोटी उम्र में एकता बनीं देखभाल कर्ता.
एकता जब 15 साल की थीं तब उनकी माँ (जिनकी उम्र उस वक्त 45 साल थी) का निदान हुआ: “Early-onset Alzheimer’s Disease” (छोटी उम्र में अल्जाइमर का आक्रमण)। अगले चार साल, कच्ची उम्र की एकता ने अपनी पढ़ाई और माँ की देखभाल, दोनों को संभालने की कोशिश की। इस इंटरव्यू में पढ़ें उनके उन कठिन वर्षों का वर्णन: A case of early-onset Alzheimer’s Disease Opens in new window.
हिंदी समाचार पत्रों में हिंदी में प्रकाशित कुछ डिमेंशिया-सम्बंधित अनुभव, और हिंदी ब्लॉग और साइट्स में बांटे गए अनुभव देखें: डिमेंशिया संबंधी हिंदी समाचार, ब्लॉग, साइट, पुस्तकें .
इस पृष्ठ का नवीनतम अँग्रेज़ी संस्करण यहाँ पढ़ें: Voices: Interviews with dementia caregivers Opens in new window.
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