आवाज़ें: देखभाल करने वाले, स्वयंसेवक, विशेषज्ञ (Voices: Interviews with dementia caregivers, volunteers, and experts)

डिमेंशिया (मनोभ्रंश) से प्रभावित हर परिवार के साथ एक कहानी जुड़ी हुई है. घर में डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति पर क्या बीती, परिवार वालों पर क्या बीती, उन्होंने क्या महसूस किया, स्थिति को कैसे संभाला, क्या सीखा, क्या नहीं. आस-पास वालों की भी कहानियाँ हैं, वे कैसे मदद कर पाए, कितने लाचार रहे. नीचे देखें ऐसे कई देखभाल करने वालों और शुभचिंतकों के इंटरव्यू, ताकि आप अनेक दृष्टिकोण से डिमेंशिया और उसका परिवार पर क्या असर होता है, यह समझ पायें, और अपनी निजी स्थिति के लिए टिप्स ले पायें.

Swapna writes blog भारत में डिमेंशिया-संबंधी विस्तृत ब्लॉग: एक देखभाल कर्ता की ज़बानी: स्वप्ना किशोर की माँ को डिमेंशिया है, और स्वप्ना अनेक बरसों से उनकी देखभाल करती आ रही हैं. इसके अलावा स्वप्ना अन्य देखभाल करने वालों की ट्रेनिंग और मदद भी करती हैं, और डिमेंशिया की जागरूकता फैलाने का काम भी करती हैं. इस (अँग्रेज़ी) ब्लॉग में वे अपने निजी अनुभव विस्तार से बांटती हैं और अन्य देखभाल करने वालों की मदद करते वक्त उन्होंने जो सुना या जो सीखा है, उसके बारे में भी लिखती हैं.

देखभाल करने वालों के इंटरव्यू

एक बेटी, जो पिता की देखभाल अकेले संभाल रही हैं, वे दिन-रात की देखभाल का काम, पैसे की दिक्कतें, अकेलापन, पति से टूटता रिश्ता, भाई का रूखापन, सब कैसे संभाल रही हैं, इसका वर्णन

हैदराबाद में रहने वाली रितिका 48 साल की हैं, और अपने 80 साल के पिता की देखभाल का काम अकेले संभाल रही हैं. रितिका के भाई/ भाभी जम्मू में हैं, और पति (जो आर्म्ड फ़ोर्सेस में हैं) भी दूर किसी दूसरे शहर में हैं. कुछ वर्ष पहले रितिका अनजाने में ही अपने पिता के कुछ निर्णय, और उन पर हुए परिवार में अनबन और झगड़ों के बीच फंस गयीं, और पिता के देखभाल के रोल में पड़ गयीं. अब तीन बरस से रितिका यह काम अकेले संभाल रहीं हैं, न सिर्फ पिता का दिन-रात का काम बल्कि खर्चे के लिए पैसे कमाने का काम, और घर के अन्य सारे काम भी. भाई/ भाभी और पति मदद नहीं कर रहे. रितिका को यह भी नहीं पता कि इतने साल पति के घर से दूर रहने के बाद, पिता के गुजर जाने के बाद क्या रितिका फिर से पत्नी का रोल कायम कर पाएंगी या नहीं. अकेली पड़ी रितिका स्थिति से समझौता कर, दृढ़ता से अपने आप को शांत रखने की कोशिश कर रहीं हैं. उनका कहना है कि ज़रूरत के समय में, तनाव में, हर रिश्ते की आज़माइश हो जाती है. विस्तृत वर्णन के लिए इंटरव्यू यहाँ पढ़ें: Dementia caregiving can create chaos: a solo caregiver describes challenges faced on multiple fronts.

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एक बेटी की ज़बानी: पूरी तरह से निर्भर पिता की देखभाल की चुनौतियाँ, घर और अस्पताल में देखरेख, दुविधाएं, निर्णय, अंतिम शोक

विजया मुंबई में रहती हैं. वे एक अकाउंटेंट हैं, पर उन्होंने पिछले कई सालों से अपन कैरियर अपने पिता की देखभाल के लिए त्याग दिया है. इस इंटरव्यू में विजया अपने पिता के अंतिम कुछ महीनों के बारे में बात करती हैं, जब उन्होंने और उनकी बहन ने पूरी तरह से निर्भर पिता की घर पर देखभाल करी. इंटरव्यू में घर पर देखभाल कैसे करी, दिनचर्या क्या होता था, दिन भर के काम क्या क्या थे, साथ बिताए हुए कुछ कोमल पल कैसे बीते, विजय ये सब बांटी हैं. बार बार बीमार पड़ने की वजह से पिता के अस्पताल के चक्कर, वहाँ पर पेश आयी दिक्कतें, दुविधाएं, इत्यादि भी इंटरव्यू में शामिल हैं. इंटरव्यू यहाँ पढ़ें: Late-stage care, heartbreaks and tender moments, hospitals, dilemmas, decisions: a daughter narrates.

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एक बहु अपनी बिस्तर पर पड़ी सास की देखभाल का हृदय-चीरने वाला वर्णन करती है

नीना एक चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं, जिन्होंने अपनी सास की देखभाल के लिए अपना कैरियर स्थगित कर दिया है. नीना की सास को अनेक बीमारियाँ हैं, जिनमें डिमेंशिया भी एक है. इस इंटरव्यू में नीना बताती हैं कि उनकी सास कैसे बिस्तर पर पड़ीं, नीना ने कैसे इसके लिए घर में सारा इंतजाम करा, देखभाल में किस किस तरह की चुनौतियों का रोज रोज सामना करना होता है, घर पर नर्स से कैसे काम कराते हैं, वगैरह. नीना की सास के कई जख्म ठीक ही नहीं हो पा रहे हैं, और नीना कहती हैं, “माँ को तड़पता देख कर मैं बहुत परेशान हो जाती हूँ” इंटरव्यू यहाँ पढ़ें: When I see Ma struggle, I get very disturbed: a daughter-in-law describes the caregiving for a bedridden mother-in-law

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शुरू के लक्षण, निदान, दवाई और उसका दुष्परिणाम: एक बेटी अपनी माँ के डिमेंशिया के बारे में

माला की माँ को अल्ज़ाइमर (Alzheimer’s Disease) है. परिवार वाले कई सालों से माँ की बढ़ती याददाश्त की समस्याओं को देख रहे थे, पर ये किसी रोग के कारण हो रही हैं, इसे जानने में उन्हें समय लगा. अब देखभाल संभाल रहे हैं माला के वृद्ध पिता, और वे माला और माला के भाइयों से मदद लेने से साफ इनकार कर रहे हैं. इस इंटरव्यू में माला गुजरे हुए सालों को याद कर, माँ के प्रारंभिक लक्षण, निदान और इलाज, दवाई के दुष्परिणाम, परिवार वालों का मिल-जुल के काम करना, इस सब का वर्णन करती हैं. माला अपनी उम्मीद और अपने खेद/ दोष-भाव के बारे में भी बात करती हैं. इंटरव्यू यहाँ पढ़ें: Early warnings, diagnosis, medication, side-effects, an elderly father as caregiver: a daughter talks of her mother’s dementia

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मैं अब माँ की देखभाल को ही प्राथमिकता देती हूँ: एक बेटी बनी एक जानकार और सहानुभूति भरी देखभाल कर्ता

नादिरा एक प्रख्यात अंतर्राष्ट्रीय कंसल्टेंट हैं, पर इस वक्त वे अपने कैरियर को छोड़ कर भारत में अपनी 80+ साल की माँ की देखभाल कर रही हैं. नादिरा की माँ को अल्ज़ाइमर (Alzheimer’s Disease) है. इस इंटरव्यू में नादिरा बताती हैं कि उनकी माँ के व्यवहार पर बीमारी के बढ़ने से क्या असर हुआ, और परिवार वालों को यह समझने में समय लगा कि ये व्यवहार के बदलाव बीमारी के कारण हैं, क्योंकि पहला भी माँ कई बार उत्तेजित हो जाती थीं. नादिरा ने स्वयं पढ़ कर बीमारी के बारे में सीखा और माँ की देखभाल करने के लिए अपने स्वभाव को बदला. नादिरा अब ज्यादा शांत और स्नेहपूर्ण रह पाती हैं, और माँ की तकलीफ महसूस कर, उसके अनुसार उनकी देखभाल कर पाती हैं. इंटरव्यू यहाँ पढ़ें: My mother is my top priority now: a daughter describes how she became an informed and empathetic caregiver

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वह मेरा हाथ थाम कर मेरा सहारा लेती थी: एक पति अपनी पत्नी के डिमेंशिया के बारे में

रमन्ना राजगोपाल एक सफल मेनेजर थे, पर जब उनकी पत्नी को को कई “cerebral and cardiac infarcts” हुए और उनकी वजह से नाड़ी-संबंधी डिमेंशिया (संवहनी मनोभ्रंश)हुआ, तब रमन्ना ने अपना कामयाब कैरियर को छोड़ कर, देखभाल कर्ता का रोल संभाला. रमन्ना की पत्नी अब नहीं हैं. इस इंटरव्यू में वे बताते हैं कि उन्होंने पत्नी को कैसे खुश रखने की कोशिश करी, और उनके साथ कैसे समय बिताया. वे पाते हैं कि देखभाल का काम करने से उनका स्वभाव ही बदल गया है. उन्हें अपनी पत्नी की बहुत याद आती है. इंटरव्यू यहाँ पढ़ें: She would simply hold on to me for support: a husband cares for a wife with dementia

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हम देखभाल करने वालों को क्या मदद चाहिए: एक देखभाल कर्ता की आपबीती और उसकी इच्छा सूची

कल्पना मलानी मुंबई में रहती हैं और अपनी माँ की देखभाल की जिम्मेदारी अपने अन्य रोल के साथ निभाती हैं — उनका रीटेल का कारोबार है, और परिवार की अन्य जिम्मेदारियां भी हैं. इस इंटरव्यू में वे अपनी स्थिति और मुश्किलों के बारे में बात करती हैं, और देखभाल करने वालों की कैसे मदद की जा सकती है, इसके लिए वे अपनी इच्छा सूची भी देती हैं. इंटरव्यू यहाँ पढ़ें: A dementia caregiver shares her story and her caregiver wishlist

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दूसरे देश से देखभाल संभालना: एक बेटी अपने पिता की देखभाल के लिए अपनाए गए नुस्खे बांटती है

सुधा के पिता को डिमेंशिया है. सुधा और उनके पति अमेरिका में रहते हैं, पर अब सुधा साल के कई महीने नॉएडा में अपने माँ-बाप के साथ रहती है, और पिता की देखभाल करने में माँ की मदद करती हैं. इस इंटरव्यू में सुधा बताती हैं कि वे और उनकी बहनें कैसे एक दूसरे से अकसर फोन व ई-मेल द्वारा रोज सम्पर्क में रहते हैं और देखभाल सुचारू ढंग से संभालते हैं. परिवार में मतभेद को कैसे संभालें, इस पर भी सुधा अपने विचार व्यक्त करती हैं. इंटरव्यू यहाँ पढ़ें: Long distance caregiving: a caregiver describes the challenges and her approach

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देखभाल की चुनौतियाँ, प्रशिक्षित आया, देखभाल करता का अवसाद: एक बहु अपने सास की देखभाल का वर्णन करती है

नीना एक 22 साल के अनुभव वाली चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं, जिन्होंने अपनी सास की देखभाल के लिए अपना कैरियर स्थगित कर दिया है. नीना की सास को अनेक बीमारियाँ हैं, और इस इंटरव्यू में नीना देखभाल का वर्णन करती है, और क्या दिक्कतें पैदा होती हैं, यह बताती हैं. इंटरव्यू यहाँ पढ़ें: Caregiving challenges, trained ayahs, depression: a caregiver’s story

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माँ भूलने का सिर्फ बहाना करती थीं: माँ के मरने के बाद भी परिवार उनके डिमेंशिया को नहीं स्वीकारता

रुक्मिणी की नानी को डिमेंशिया था, लेकिन परिवार वालों ने निदान को समझने की कोशिश नहीं करी और वे रोगी को एक जिद्दी और लापरवाह औरत ही समझते रहे. नानी के डिमेंशिया को न स्वीकारने का यह रवैया इतने सालों बाद भी जारी है, और रुक्मिणी बताती हैं कि अब भी परिवार के लोग नानी के डिमेंशिया से उत्पन्न व्यवहार की तरफ शिकायत से देखते हैं, जैसे कि नानी सब को परेशान कर रही थीं. परिवार वालों को अब भी नानी से शिकायत है. इंटरव्यू यहाँ पढ़ें: A family’s denial about a dementia diagnosis

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पिताजी सोचते थे कि मैं उनकी हत्या करना चाहती थी: एक बेटी अपने पिता के डिमेंशिया की कहानी सुनाती है

नयनतारा के पिता को डिमेंशिया का निदान तो मिला, पर रिश्तेदारों ने उसे नहीं माना और वे कहते रहे कि नयनतारा बात को बढ़ा-चढ़ा कर कहती है और उसकी नज़र पिता के पैसे पर है. इस इंटरव्यू में नयनतारा पिता की देखभाल से सम्बंधित चुनौतियों के बारे में बात करती हैं. इंटरव्यू यहाँ पढ़ें: A daughter describes her father’s dementia behaviour challenges

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एक परिवार जहां डिमेंशिया के लक्षण को पहचाना जाता है, और परिवार वाले उसके अनुसार अपने जीवन को बदलते हैं: एक समाज सेवक का बयान

जब उनकी 83 वर्षीय आंटी अजीब तरह से पेश आने लगीं, तो समाज सेवक भारती को शक हुआ कि शायद आंटी को डिमेंशिया है. भारती ने फिर परिवार वालों को डिमेंशिया की पत्रिकाएं दीं और परिवार वालों ने पढ़ने और सोचने के बाद डॉक्टर से सम्पर्क करा. डिमेंशिया के निदान के बाद, पूरे परिवार ने इस नयी स्थिति में देखभाल के लिए इंतजाम कैसे करा, क्या क्या कदम उठाये, इन सब का वर्णन भारती इस इंटरव्यू में करती हैं. इंटरव्यू यहाँ पढ़ें: A family recognizes dementia and adjusts for it

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मुख्य देखभाल कर्ता (पत्नी) का समर्थन और सहायता: एक पति के अनुभव और सुझाव

राजेश की सास को डिमेंशिया है, और देखभाल का मुख्य रोल राजेश की पत्नी कई सालों से निभा रही हैं. इस नोट में राजेश बताते हैं कि शुरू के सालों में उन्होंने अपनी पत्नी का समर्थन नहीं किया था, क्योंकि वे डिमेंशिया के बारे में ठीक से नहीं समझते थे और देखभाल का कार्यभार नहीं समझ पाए. वे पत्नी की मेहनत और तनाव को नजरअंदाज करते रहे. पर अब वे समझते हैं कि प्रमुख देखभाल करने वाले की अन्य लोग कैसे सहायता कर सकते हैं. नोट में राजेश अनेक सुझाव देते हैं. नोट यहाँ पढ़ें: Supporting the primary caregiver: Mistakes made, lessons learnt, tips shared

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दूर से देखभाल संभालना: एक व्यवस्था, और उसकी दिक्कतें

डेविड की माँ को अल्ज़ाइमर (Alzheimer’s Disease) था. क्योंकि डेविड और उनके भाई-बहन सब दूसरे शहरों में रहते थे, उन्हें दूर से ही देखभाल का प्रबंध और संचालन करना पड़ा. इस इंटरव्यू में डेविड यह बताते हैं कि उन्होंने माँ की देखभाल के लिए इंतजाम कैसे करा और उन्हें क्या क्या दिक्कतें हुईं. इंटरव्यू यहाँ पढ़ें: Remote caregiving: an arrangement, and issues faced

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हमारे यहाँ आने से माँ को आराम होता है: एक बेटा, जिसके पिता की देखभाल का भार मुख्यतः बुज़ुर्ग माँ पर है

यह इंटरव्यू एक पहले करे गए सरस्वती के इंटरव्यू का अनुगामी इंटरव्यू (“follow-up”) है, और इसमें सरस्वती के पुत्र, रंगनाथ बताते हैं कि उन्होंने अपने भाई-बहन के साथ मिलकर माँ के समर्थन के काम को कैसे बांटा है. अब रंगनाथ और उनके भाई और बहन बारी-बारी से बेंगलुरु में माँ और पिता के साथ रहते हैं, और इसके साथ वे अनेक उपलब्ध सेवाओं का भी उपयोग करते हैं, जैसे कि रिस्पाइट केयर, डे केयर, घर पर आ कर काम करने वाले प्रशिक्षित सहायक, इत्यादि, ताकि माँ को कभी पिता की देखरेख का काम अकेले न उठाना पड़े. इंटरव्यू यहाँ पढ़ें: Children of an elderly caregiver make arrangements and take turns to support the dementia care

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मेरे पति तो एक गुड़िया बन कर रह गए हैं: 78 साल की पत्नी जो 86 साल के पति की देखभाल कर रही हैं

बेंगलुरु में रहने वाली सरस्वती 78 साल की हैं और वे अपने 86 साल के पति की देखभाल कर रही हैं. पति को पार्किन्सोनियन डिमेंशिया (Parkinsonian dementia) है. इस इंटरव्यू में वे बड़ी-उम्र में देखभाल का काम संभालने की दिक्कतों के बारे में बात करती हैं. सरस्वती के बेटा-बेटी दूसरे शहरों में रहते हैं, और वे माँ के समर्थन और सहायता के लिए प्रबंध करने की कोशिश कर रहे हैं. इंटरव्यू यहाँ पढ़ें: Elderly caregiver overwhelmed caring for her husband who has Parkinsonian dementia]

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जब हम चक्की में पिस रहे होते है, तो सीधा सोच नहीं पाते: एक डॉक्टर जो देखभाल भी करती थीं

विद्या डॉक्टर हैं. उनकी नानी, स्ट्रोक होने के बाद, डिमेंशिया के लक्षण दिखाने लगीं. विद्या की माँ और मौसी ने बारी-बारी से देखभाल का काम संभाला, और विद्या ने उनकी सहायता करी. अब विद्या सोचती हैं कि उन दिनों परिवार में किसी को भी अंदाजा नहीं था कि आगे क्या होगा, और देखभाल कैसे करनी होगी. परिवार वाले कोई भी इस काम के लिए तैयार नहीं थे. इंटरव्यू यहाँ पढ़ें: A family struggles to handle dementia care

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पिता की हालत का असर मेरे जीवन के हर पहलू पर हुआ: एक बेटे का इंटरव्यू

वरुण के पिता को अल्जाइमर (Alzheimer’s Disease) है. शुरू के कुछ साल, जब माँ-बाप उनके साथ रह रहे थे, तब वरुण ने पिता की देखभाल में माँ की मदद करी. वरुण ने पाया कि पिता की हालत और देखभाल की चुनौतियों ने वरुण की जिंदगी के हर क्षेत्र पर असर किया. अब माँ वरुण के पिता को अपने शहर ले गयी हैं क्योंकि वे सोचती हैं कि रिश्तेदारों और दोस्तों के समर्थन से देखभाल ज्यादा आसान होगी. वरुण सोच रहे हैं कि दूर से वे माँ की कैसे मदद कर सकते हैं. इंटरव्यू यहाँ पढ़ें: Father’s Alzheimer’s changes a son’s life

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घर में डिमेंशिया से ग्रस्त रोगी की देखभाल पर संघर्ष

सरला अमरीका में अपने पति के साथ रहती हैं. उनकी सास, जिन्हें अल्जाइमर (Alzheimer’s) था, भारत में थीं और उनका निधन हाल ही में हुआ है. सास की बीमारी कैसे बढ़ी, परिवार वालों ने देखभाल कैसे करी, भाई-बहनों में देखभाल के विषय पर किस प्रकार से मत-भेद पैदा हुए, कुढ़न हुई, झगड़े हुए, और इन सब से देखभाल पर क्या असर हुआ, सरला यह सब खुल कर बताती हैं. इंटरव्यू यहाँ पढ़ें: Overseas caregiving and family conflicts over dementia care

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पन्द्रह साल की उम्र में पता चला कि माँ को डिमेंशिया है: छोटी उम्र में एकता बनीं देखभाल कर्ता

एकता जब 15 साल की थीं तब उनकी माँ (जिनकी उम्र उस वक्त 45 साल थी) का निदान हुआ: “Early-onset Alzheimer’s Disease” (छोटी उम्र में अल्जाइमर का आक्रमण). अगले चार साल, कच्ची उम्र की एकता ने अपनी पढ़ाई और माँ की देखभाल, दोनों को संभालने की कोशिश की. इस इंटरव्यू में वे उन कठिन वर्षों के बारे में बताती हैं. इंटरव्यू यहाँ पढ़ें: A case of early-onset Alzheimer’s Disease

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डिमेंशिया/ देखभाल में कार्यरत समाज-सेवक और विशेषज्ञ के इंटरव्यू

डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति को शांत, संतुष्ट, और खुश कैसे रखें: कुछ उपाय एक नर्स द्वारा

शीला एक रजिस्टरड नर्स हैं, जो “Aged Care assisted living facilities” (वृद्ध लोगों के लंबे अर्से के लिए रहने वाले घर) में काम कर चुकी हैं. आजकल वे एक ऐसे अस्पताल में काम करती हैं जहाँ डिमेंशिया के रोगियों की देखभाल एक आम बात है. शीला अपने नर्सिंग के काम के दौरान अनेक डिमेंशिया के रोगियों के साथ काम कर चुकी हैं. इस इंटरव्यू में वे अपने अनुभव पर आधारित ऐसे टिप्स बांटती हैं जो घर पर देखभाल करने वाले आसानी से अपना सकते हैं और जिनसे रोगी व्यस्त रहेंगे और उनकी उत्तेजना और बेचैनी भी कम होगा. इंटरव्यू यहाँ पढ़ें: Keeping persons with dementia peaceful and improving their quality of life: practical tips from a nurse

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डमेंशिया के खिलाफ युद्ध: मुंबई में जागरूकता के प्रोग्राम

मुंबई में रहने वाले शैलेश मिश्रा वृद्धों के साथ काम करते हैं और वृद्धों की जीवन शैली अच्छी बनाने का प्रयास करते हैं. वे डिमेंशिया की जागरूकता फैलाने में भी बहुत सक्रिय हैं और वे इसे एक युद्ध समझते हैं. वे नियमित रूप से जागरूकता के लिए प्रोग्राम (awareness programs) चलाते हैं. इस इंटरव्यू में वे अपने कुछ अनुभव बाँटते हैं. इंटरव्यू यहाँ पढ़ें: Mumbai dementia awareness programs, part of the fight against dementia

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देखभाल करने वाले अदृश्य हैं, इसलिए अकेले हैं: एक कंसल्टेंट के विचार

शिखा आलिया एक कंसल्टेंट हैं जो कुछ सहकर्मियों के साथ एक फ़ोरम बना रही हैं जिससे देखभाल करने वाले एक दूसरे से, और उपयोगी संसाधन व संस्थाओं से सम्पर्क कर सकें. इस इंटरव्यू में वे देखभाल करने वालों के बारे में अपने कुछ विचार पेश कर रही हैं, जैसे कि, उनके हिसाब से देखभाल कर्ताओं की मुख्य समस्याएँ क्या हैं, और उनको किस क्षेत्र में किसी मदद चाहिए. इंटरव्यू यहाँ पढ़ें: Invisibility of caregivers leads to their isolation

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डिमेंशिया से ग्रस्त लोगों को सैर के लिए कैसे ले जाते हैं: एक स्वयंसेवक के अनुभव

डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति रोचक जगहों पर जाने का और सैर करने का मजा उठा सकते हैं, यदि साथ ले जाने वाले लोग सही तरह से सैर का आयोजन करें. सतीश श्रीनिवासन एक डिमेंशिया डे केयर सेंटर में स्वयंसेवक हैं, और डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्तियों को कई जगह सैर के लिए ले जा चुके हैं. उनका कहना है कि सही तरह से सोच कर और आयोजन करके यदि उन्हें बाहर ले जाएँ तो डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति बहुत आनंद उठाते हैं. इस इंटरव्यू में सतीश अपने कुछ अनुभव बांटते हैं. इंटरव्यू यहाँ पढ़ें: Taking patients for outings: a volunteer shares his experience.

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डिमेंशिया डे केयर में देखभाल कैसे होती है: एक समाज सेवक का इंटरव्यू

अधिकांश लोगों को अंदाजा ही नहीं कि डिमेंशिया डे केयर में डिमेंशिया वाले व्यक्ति दिन भर कैसे रहते हैं, क्या करते हैं, वगैरह. जिंसी शीजू बेंगलुरु में एक डिमेंशिया डे केयर में कार्यरत हैं, और वे इस इंटरव्यू में अपने डे केयर का वर्णन करती हैं. वे यह भी बताती हैं कि डे केयर के कर्मचारी किस तरह की समस्याओं का सामना करते हैं, और उनसे कैसे निपटते हैं. इंटरव्यू यहाँ पढ़ें: Care in a dementia day care centre: a social worker explains.

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हिंदी समाचार पत्रों में हिंदी में प्रकाशित कुछ डिमेंशिया-सम्बंधित अनुभव देखें: आवाज़ें: हिंदी समाचार पत्रों से (Voices: Dementia stories from Hindi newspapers).

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