घर में व्यक्ति की सुविधा और सुरक्षा के लिए बदलाव (Adapt the home for dementia patients)

डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति घर में चलने में, चीज़ें ढूँढने में, अपने काम करने में दिक्कत महसूस कर रहे हैं.

देखभाल करने वाले क्या कर सकते हैं:  घर में ऐसे बदलाव करें जिनसे व्यक्ति के लिए घर सुरक्षित भी रहे, और व्यक्ति आसानी से इधर उधर जा सकें और अपने काम, जितना संभव हो, खुद या हल्की मदद के साथ कर पाएँ. परिवार वाले व्यक्ति के रोग के बिगड़ने के साथ साथ और क्या बदलना है, यह भी सोचें.

डिमेंशिया (मनोभ्रंश) से ग्रस्त व्यक्ति अपने दैनिक कार्य किस तरह से कर पाते हैं, और उनका व्यवहार कैसा रहता है, इस पर घर और आस पास वे वातावरण का बहुत असर पड़ता है. पर व्यक्ति की क्षमता तो डिमेंशिया के कारण समय के साथ कम होती जाती हैं, पर अकसर घर तो वैसे का वैसा ही रहता है. इससे उन्हें अपने काम करने में और भी दिक्कतें होती हैं. घर में व्यक्ति की क्षमाओं के अनुसार बदलाव करने से हम घर को व्यक्ति के लिए अधिक सुरक्षित बना सकते हैं. व्यक्ति अधिक खुश रहेंगे और अपने काम भी, जिस हद तक हो सके, खुद कर पायेंगे. उनके परेशान होने की, उत्तेजित होने की, या खुद में सिमटने की संभावना कम होगी. वे अधिक संतुष्ट और खुश रहेंगे, उनका और परिवार वालों का तनाव कम होगा.

घर में परिवर्तन के बारे में सोचना

बदलाव व्यक्ति की क्षमताओं के अनुसार चुनें. व्यक्ति की स्थिति समय के साथ बदलती है, और इसलिए घर में परिवर्तन भी उसी हिसाब से बदलने होते हैं. उदाहरण के तौर पर, शुरू में व्यक्ति को शायद कुछ हल्का कन्फ्यूज़न हो क्योंकि कमरे में बहुत ज्यादा चीज़ें हैं, या शायद व्यक्ति भूल जाएँ कि बाथरूम कहाँ है. बेकार की वस्तुएं हटाने से, और कुछ साइन लगाने से व्यक्त को आराम हो सकता है. पर बाद की अवस्था में, जब व्यक्ति को चलने फिरने में दिक्कत होने लगे, तब ग्रैब रेल की जरूरत हो सकती है. और यदि व्यक्ति कुर्सी से भी उठने में दिक्कत महसूस करें, तो हाथ वाली कुर्सी चाहियेगी.

व्यक्ति की तकलीफें देखना और सतर्क रहना घर के बदलाव तय करने का एक अंश है. यह भी ध्यान रखें कि बदलाव घर के अन्य सदस्यों को भी मान्य होने चाहिएं. घर में बदलाव करने में पैसा और मेहनत, दोनों की जरूरत है, और बदलाव की जरूरत पड़ती रहेगी. रचनात्मक तरीके अपनाएँ, उपयुक्त, कारगर और आसानी से करने वाले तरीके चुनें. हो सकता है दूसरों ने भी उसी प्रकार की समस्या का कोई उपाय निकाला हो. मित्रों से सुझाव लें, सपोर्ट ग्रुप से पूछें, ऑनलाइन भी खोजें. लोग शायद आपके विशिष्ट उपकरण और सामग्री के बारे में भी कुछ टिप दे सकें.

डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति की सुविधा के लिए घर में किस तरह के बदलाव करे जा सकते हैं, इसके बारे में सोचने के लिए देखें कि व्यक्ति को किस तरह की कठिनाइयाँ होती हैं, और इन को कैसे कम करें. कुछ मुख्य क्षेत्र, जिनके लिए परिवर्तन करे जा सकते हैं, वे हैं:

वास्तविकता बोध (reality orientation) बढाने के लिए: डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति अकसर जगह और समय/ साल को लेकर कन्फ्यूज हो जाते हैं. वास्तविकता बोध (reality orientation) के लिए कई बदलाव संभव हैं, जैसे कि दीवार पर बड़ी घड़ी लगाना, कैलेंडर लटकाना, खिड़की से रौशनी आने देना (ताकि सूरज की रोशनी से दिन और रात का बोध हो), वगैरह. घर से बेकार की वस्तुएँ हटाने से भी आराम हो सकता है. साईन लगाने से, और रोशनी ज्यादा करने से भी फ़र्क पड़ सकता है.

दैनिक कार्यों को आसान बनाने के लिए: जरूरत की वस्तुएँ आसानी से मिलें, व्यक्ति उनको ठीक से इस्तेमाल कर पाएँ, घर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में जा पायें, इन सब से व्यक्ति को अपने काम करने में आराम हो सकता है. दैनिक कार्य अगर व्यक्ति खुद या कम मदद के साथ कर पाएँ, तो उन्हें आराम रहेगा. इसके लिए भी घर में कुछ बदलाव करे जा सकते हैं.

माहौल के परिवर्तन द्वारा कुछ व्यवहार को बढ़ावा देना, और अन्य व्यवहार को कम करना: घर में वस्तुओं को कहाँ और कैसे रखा है, रंग कैसे चुने हैं, इस तरह के निर्णय से हम वस्तुओं की प्रमुखता बदल सकते हैं, और व्यक्ति का ध्यान किस ओर जाता है, और किस ओर नहीं जाता, यह बदल सकते हैं. इस तरह, व्यक्ति क्या करना चाहेंगे और क्या नहीं, हम इस को प्रभावित कर सकते हैं.

घर को सुरक्षित बनाना: व्यक्ति घर में सुरक्षित रहें, यह बहुत ज़रूरी है, खास तौर से क्योंकि डिमेंशिया के साथ उनका कन्फ्यूज़न बढ़ता रहेगा और शारीरिक संतुलन और काबिलीयत कम होगी.

अधिकांश घर के परिवर्तन में हम वस्तुओं को नए तरह से लगाते हैं या उन्हें हटाते है. वस्तुओं का इस्तेमाल आसान हो, इसके लिए भी हम बदलाव करते हैं, या नई किस्म की वस्तुएँ लाते है. पर बदलाव करने से पहले यह जरूर देख लें कि व्यक्ति बदलाव से और विचलित तो नहीं हो जायेंगे? डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति अकसर ज्यादा परिवर्तन पसंद नहीं करते. नई वस्तुओं का इस्तेमाल कई व्यक्तियों के लिए बहुत मुश्किल होता है. जैसे कि नए फोन के बटन न समझ पाना, या डिजिटल क्लोक से टाइम न पढ़ पाना. कमरे का नक्शा बहुत ज्यादा बदल देंगे तो व्यक्ति घबरा सकते हैं. बदलाव करते समय इतनी जल्दबाजी न करें कि असर उलटा हो जाय–व्यक्ति की संभावित प्रतिक्रिया का ध्यान रखिये और बदलाव की मात्रा और गति उसी हिसाब से रखिये.

व्यक्ति को किस प्रकार के दिक्कतें हो रहे हैं, यह समझें. जैसे कि, हमें समझना होगा कि डिमेंशिया के कारण कई व्यक्ति चीज़ों को फ़र्क तरह से देखते और महसूस करते हैं. जो वस्तु आपके लिए साधारण है, उनके लिए डरावनी हो सकती है.

दृष्टि ठीक हो भी तब भी डिमेंशिया के बढ़ने पर व्यक्ति को पढ़ने में दिक्कत होने लगती है, क्योंकि वे अक्षर और शब्द नहीं पहचान पाते या शब्दों के अर्थ नहीं जान पाते. चलने में दिक्कतें होती हैं, ताल-मेल खराब होने लगता है, वस्तुओं को पकड़ने और इस्तेमाल करने में भी दिक्कत होने लगती है. इससे उन्हें दैनिक कामों में मुश्किल होने लगती है. पर परिवार वाले कुछ परिवर्तन करके ये समस्याएँ कम कर पाते हैं, और जैसे जैसे डिमेंशिया बढ़ता है, घर में उसके अनुसार और बदलाव करने पड़ते हैं. यह भी पाया गया है कि डिमेंशिया वाले व्यक्ति कभी कभी वस्तु कितनी दूर है, या चीज़ कितनी गहरी है, इसका अंदाजा नहीं लगा पाते. बदलाव करते समय इस समस्या को भी ध्यान में रखें.

टिप्स: वास्तविकता बोध (जगह और समय का बोध, reality orientation) बढाने के लिए

जगह और समय का बोध (reality orientation): कई व्यक्ति यह भूल जाते हैं कि वे कहाँ है (किस शहर में, किस घर में), और कौन सा दिन या साल चल रहा है. कुछ छोटे बदलाव से उन्हें फिर से जगह और समय का बोध होने में आसानी हो सकती है:

  • बड़ी सी घड़ी दीवार पर टाँगें (wall clock), जिसके नंबर स्पष्ट हों और सफेद भूमिका पर काले रंग में हों, और घड़ी के हाथ भी दूर से स्पष्ट नज़र आएँ. यह ध्यान रखें कि डिजिटल घड़ी (digital clock) पढ़ने डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्तियों के लिए अकसर संभव नहीं होता.
  • एक बड़ा सा कैलेंडर भी लगा दें. या एक आज की तारीख दिखाने वाला कैलेंडर लगाएं, ताकि व्यक्ति दिन, महीना और साल जान सके.
reality orientation with clocks calendars labels pads whiteboards
यदि व्यक्ति पढ़ पाते हैं और समझ पाते हैं, तो बड़े कैलेंडर, घड़ी, आसान से नज़र आने वाले नोट, और पैड और पेंसिल से व्यक्ति को आसानी हो सकती है.

व्यक्ति यह जान पाएँ कि वे घर के किस हिस्से और कमरे में हैं, और वहाँ क्या क्या है, इसके लिए कुछ टिप्स:

  • शेल्फ, टेबल, फर्श वगैरह से बेकार की चीज़ें हटा दें. (declutter)
  • अच्छी रौशनी का इस्तेमाल करें, जैसे कि बाथरूम के रास्ते में नाईट लाइट
  • यदि व्यक्ति उन्हें समझ पाते हैं तो साईन का इस्तेमाल करें (शब्द और चित्र)

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टिप्स: दैनिक कार्यों को आसान बनाने के लिए

याद रखने के लिए बनी सूची (Reminder lists):शुरू की अवस्था में डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति को सूची के इस्तेमाल से चीज़ें याद रखने में आसानी होती है.

  • आसानी से नज़र आने वाली जगह पर लगे नोट या व्हॉइटबोर्ड (whiteboard) पर लिखें कि व्यक्ति को क्या करना है, किस समय पर क्या मिलेगा या आप बाजार से कितने बजे लौटेंगी.
  • फ़्रिज में व्यक्ति के लिए क्या खाना रखा है, यह नोट पर लिख कर फ़्रिज पर चुम्बक (मेगनेट) से चिपका दें.
  • जरूरी फोन नंबर और एमरजेंसी के लिए नंबर फोन के पास चिपका दें या लटका दें.
  • व्यक्ति नोट आसानी से लिख सकें इसके लिए पैड और पेंसिल फोन के पास रखे, और अन्य जगह भी रखें. पैड और पेंसिल किसी मेज या अन्य वस्तु के साथ बाँध कर रखें ताकि जरूरत होने पर मिल जाए और इधर-उधर न हो.

व्यक्ति कहीं भी कुछ याद आने पर नोट लिख सकें, इस को आसान बनाएँ.

  • जगह जगह पैड और पेंसिल रखें
  • पैड और पेंसिल खोये नहीं, इसके लिए उन्हें बाँध कर रखें

काम करने के कदम चार्ट पर प्रदर्शित करें: शुरुआती डिमेंशिया में व्यक्ति काम कर सकते हैं, पर अकसर उन्हें काम के सब कदम ठीक से याद नहीं रहते. अगर ये कदम एक चार्ट पर स्पष्ट लिखे गए हों, तो व्यक्ति चार्ट के चित्र देख कर और लिखे हुए निर्देश पढ़कर सही तरह से सब कदम कर सकते हैं. इस तरह से वे कुछ दैनिक काम ठीक से कर पायेंगे, जैसे कि चाय बनाना.

  • चार्ट ऐसे रखें ताकि वह काम करते हुए स्पष्ट नज़र आये.
  • काम को अधिक आसान बनाने के लिए वस्तुएँ पर लेबल लगाएं, जैसे कि किस डब्बी में चाय-पत्ती है, और किस में चीनी है. लेबल में शब्द और चित्र, दोनों का इस्तेमाल करें.

चीज़ें आसानी से मिलनी चाहियें: जरूरत की चीज़ें आसानी से नजर आएँ, इसके लिए कमरों में उचित परिवर्तन करें.

  • कमरों से बेकार की वस्तुएँ और फर्नीचर हटा दें (Declutter rooms)
  • व्यक्ति के कमरे और बाथरूम की शेल्फ और अलमारी में सिर्फ वे चीज़ें रखें जो व्यक्ति इस्तेमाल करते हों. ज्यादा कपड़े, जूते, प्रसाधन, साबुन वगैरह न रखें–ज्यादा वस्तुएं देख कर व्यक्ति कंफ्यूस हो सकते हैं और उन्हें चुनाव करने में दिक्कत हो सकती है.
  • उपयोगी वस्तुएं आसानी से नज़र आएँ, इसके लिए ऐसे रंग इस्तेमाल करें (contrasting colors) जिनसे उपयोग वाली वस्तु अन्य वस्तुएं के मुकाबले उभरी हुई लगे और आसानी से नजर आये.
  • सीधे-साधे सुकून पंहुचाने वाले रंग इस्तेमाल करें, अधिक पेचीदा डिजाईन या पैटर्न का इस्तेमाल न करें. उत्तेजित करनेवाले रंग न इस्तेमाल करें.
  • वातावरण में शोर कम करें, क्योंकि शोर से व्यक्ति का कन्फ्यूजन बढ़ेगा और उन्हें बातों पर या काम पर ध्यान देने में भी मुश्किल होगी.

वस्तुओं को पकड़ने और इस्तेमाल करने की दिक्कतें: व्यक्ति कोई वस्तु पकड़ सकें, इसके लिए व्यक्ति वस्तु को कैसे पकड़ सकते हैं यह स्पष्ट करें और वस्तु को पकड़ना भी आसान बनाएँ. जैसे कि:

  • अगर आप चाहते हैं कि व्यक्ति दरवाज़ा खोल पाएँ तो बड़ा, साफ़ नजर आने वाला, आसान सा हैंडल लगाएं
  • बड़े चम्मच दें, और सपाट प्लेट की जगह किनारे वाली थाली का इस्तेमाल करें
  • बड़े हैंडल वाले मग या दो हैंडल वाले मग का इस्तेमाल करें

रोज के सामान्य कामों के लिए इधर उधर जाना आसान बनाएं: व्यक्ति घर में अपने काम करने के लिए इधर उधर जा पाएँ, इसको आसान करें.

  • पहले देखें कि व्यक्ति को किन कामों के लिए इधर उधर जाने की जरूरत पड़ती है. हर ऐसे काम के लिए देखें कि व्यक्ति को जो चाहिए, वह वस्तु आराम से मिल पाए.
  • देखें कि व्यक्ति किस किस रास्ते से अकसर गुजारते हैं (बाथरूम जाने के लिए, टीवी के स्विच के लिए, बिस्तर से पसंदीदा कुर्सी तक, वगैरह).ये सब रास्ते साफ़ रहें और इनमें रोशनी पर्याप्त रहे.(“clearing pathways of travel)

व्यक्ति मदद मांग पाएँ/ लोगों से सम्पर्क कर पाएँ, इसको आसान बनाएं.:

  • उपयोगी फोन नंबर की सूची ऐसे रखें कि व्यक्ति की नजर में रहे. इस से उन्हें नंबर याद रखने की जरूरत नहीं होगी, और वे आसान से फोन कर पायेंगे. यदि व्यक्ति मोबाइल फोन का इस्तेमाल जानते हों, तो मोबाइल में नंबर कोड करके रखिये.
  • बिस्तर/ कुर्सी के पास बेल (bell) रखिये. ऐसी अन्य जगह भी बेल रखिये जहाँ जरूरत पड़े, जैसे कि बाथरूम. पर यह तरकीब ऐसे व्यक्तियों के लिए बेकार है जो यह नहीं समझ पाते कि बेल क्यों रखी गयी है, और या तो उसका इस्तेमाल ही नहीं करते या जरूरत हो या नहीं, उसे बार बार बजाते ही रहते हैं/.
  • अपना नाम, फोन नंबर और अन्य सम्पर्क के डिटेल पता प्रमुखता से प्रदर्शित करिये. यह सिर्फ व्यक्ति के लिए ही नहीं, अन्य लोगों के लिए भी उपयोगी है, जैसे कि अगर व्यक्ति को कुछ प्रॉब्लम है और कोई पड़ोसी/ रिश्तेदार आपको सूचित करना चाहता है.
  • ज़रूरी मेडिकल सामग्री प्रमुखता से प्रदर्शित करिये, जैसे कि डॉक्टर का नाम और फोन, एम्बुलेंस का नंबर, और ऐसे लोग जिन्हें एमरजेंसी में बुलाया जा सकता है.

अगर व्यक्ति बात-बेबात लोगों को फोन करने लगेंगे तो ऊपर के कई टिप के इस्तेमाल नहीं हो सकता. ऐसे में सिर्फ एक दो नंबर प्रदर्शित करें, जो बहुत उपयोगी हों, और जिन पर अगर व्यक्ति बिना बात फोन करे तो किसी को नुकसान या तकलीफ न हो. अपना नंबर ज़रूर प्रदर्शित करें

कन्फ्यूज हुए व्यक्ति के इधर उधर जाने की जरूरत कम करें:

यह भी याद रखें कि व्यक्ति को शायद याद ही नहीं हो कि प्रॉब्लम हो तो किसी को आवाज़ दी जा सकती है. खास तौर से रात को, जब व्यक्ति आधी नींद में हों, उस वक्त वे बिना बत्ती जलाए बाथरूम जाने की कोशिश कर सकते हैं और गिर सकते हैं. बिस्तर के पास रात को कमोड रखने की सोचें, अगर लगे कि व्यक्ति कमोड का इस्तेमाल कर पायेंगे. नोट करें कि कई व्यक्ति ऐसे कुस्री वाले कमोड का इस्तेमाल नहीं कर पाते.

उठने और चलने की दिक्कतों के लिए सुझाव

  • सब फर्नीचर ऐसा हो जिसपर अगर व्यक्ति बोझ डाले तब भी फर्नीचर हिले नहीं और गिरे नहीं
  • हाथ वाली कुर्सी का इस्तेमाल करें, तो उठते वक्त व्यक्ति को सहारा मिलेगा
  • पलंग और कुर्सियां अगर थोड़ी ऊँची हों तो उठने बैठने में आसानी होगी. कुर्सी या पलंग को ऊँचा करने के लिए यदि आप फर्नीचर के पैर के नीचे लकड़ी के ब्लाक लगाएं तो ख़याल रखें कि ये ब्लाक बाहर न निकले हों और इन ब्लाक पर व्यक्ति के गिरने की संभावना न हो.
  • पैने कोनों की चीज़ों को हटा दें, या पैनेपन को किसी तरह हटा दें, जैसे कि फोम चिपका कर.
  • व्यक्ति चलते चलते जब दिक्कत महसूस करते हैं तो पास की किसी भी चीज़ को सहारे के लिए पकड़ लेते हैं. इसलिए रास्ते में ऐसी कोई चीज़ न रखें जो गिर सकती हो या टूट सकती हो.
  • ऐसी कोई चीज़ न हो जिससे व्यक्ति का पैर अटके और वे गिर जाएँ.
  • दीवारों पर, और अन्य जगह पर, जैसे उचित हो, हैंड रेल (grab rails) लगाएं
  • घर को ऐसे नियोजित करें कि व्यक्ति को घर के अंदर सीढ़ी चढनी उतरनी न पड़े, और फिर सीढ़ी के प्रवेश पर छोटा गेट लगा दें (safety gate) ताकि व्यक्ति सीढ़ी के इस्तेमाल की कोशिश न करें
  • दरवाजों पर चौखट हो (thresholds ) तो व्यक्ति इनसे भी गिर सकते हैं.
  • कपड़े भी ऐसे पहनाएं कि उनसे व्यक्ति गिरे नहीं
  • यदि उचित लगे तो डॉक्टर से सलाह करें कि क्या व्यक्ति के लिए वाल्कर या वाल्किंग स्टिक (walkers and walking sticks)या व्हीलचेयर (wheelchair) की जरूरत है.

ऐसे बदलाव जिनसे देखभाल कर्ता को देखभाल करने में आराम हो:

घर के बदलाव की अधिकाँश चर्चा ऐसे बदलाव पर होती है जिससे व्यक्ति को फायदा हो, पर देखभाल कर्ता का काम आसान कर सकें, इसके लिए भी घर में बदलाव के बारे में सोचना चाहिए.

  • कमरे में वस्तुएँ ऐसे सजाएं ताकि आप देखभाल करते समय सब ज़रूरी वस्तुओं तक आराम से पहुँच पाएँ.
  • कमरा ऐसे अडजस्ट करें ताकि अगर आपको व्यक्ति के साथ लंबे अरसे तक रहना हो तो आप आराम से बैठ सकते हैं, लेट सकते हैं, खड़े हो सकते हैं.
  • ऐसे तरीकों के बारे में सोचें जिनसे आप, व्यक्ति को डिस्टर्ब करे बगैर, कुछ मनोरंजन पा सकें.
  • घर पर देखभाल की वजह से पूरे वक्त रहना पड़े, तब भी आप कुछ चहल कदमी और व्यायाम कर पाएँ और ताज़ी हवा ले पाएँ, इसके लिए कुछ इंतज़ाम करें.
  • देखभाल के अनेक काम होते हैं–नहलाना, खाना खिलाना, सफाई करना, चलने में मदद करना, कपड़े पहनने में मदद करना, इत्यादि. यह सब थका सकते हैं. इन को आसान करने के लिए उपयोगी सहायक उपकरण/ डिवाइस के बारे में सोचे और उनका इस्तेमाल करें (नीच एक सेक्शन में इस पर अधिक चर्चा है) जैसे जैसे व्यक्ति अधिक लाचार होते हैं और उनका चलना फिरना कम होने लगता है, ऐसे सहायक डिवाइस के जरूरत बढ़ेगी.

टिप्स: माहौल के परिवर्तन द्वारा कुछ व्यवहारों को बढ़ावा देना, और अन्य व्यवहारों को कम करना

रंगों के इस्तेमाल से कुछ वस्तुओं को प्रमुखता दें, और कुछ को छुपाएँ:

  • अलग अलग रंगों के इस्तेमाल से कुछ वस्तुओं को प्रमुख बनाएँ
  • अगर आप चाहते हैं कि व्यक्ति का ध्यान किसी चीज़ पर न जाए, तो उसका रंग वही करें जो आसपास के चीज़ों का है
  • सामने रखी चीज़, और पास रखी चीज़ ज्यादा ध्यान खींचती है (दूर रखी या पीछे रखी चीज़ कम नज़र आती है)
  • जिन वस्तुओं की व्यक्ति को अधिक जरूरत होती हो, उन्हें व्यक्ति के बैठने की जगह के पास रखें, ताकि व्यक्ति खुद उसे ले सकें और दूसरों पर निर्भर न हों

माहौल द्वारा व्यक्ति को कुछ गतिविधियों के लिए उत्साहित करें (जितना उचित हो)

  • रोचक गेम व्यक्ति के पास रखें तो शायद व्यक्ति उनकी ओर आकर्षित हों
  • सुखद पुरानी यादें ताज़ा वाली वस्तुएं नज़र के दायरे में रखे, जैसे कि एल्बम, पोस्टर, ट्राफी, वगैरह
  • दैनिक रूटीन (दिनचर्या) ऐसा हो जिसमे कुछ देर टहलना भी शामिल हो. घर में ऐसी जगह हो जहाँ सुरक्षित रूप से इस तरह के टहलना संभल हो.
  • दैनिक रूटीन (दिनचर्या) ऐसा हो जिसमे कम से कम दिन का कुछ भाग ऐसी जगह बीते जहाँ व्यक्ति स्वयं को समाज का एक अंग महसूस करें, जैसे कि शाम को घर वालों के बीच बैठना, आस-पड़ोस के बच्चों को खेलते देखना, वगैरह. व्यक्ति पर कुछ कहने सुनने का दबाव न डालें, पर उन्हें ऐसा न लगने दें कि वे अकेले पड़ गए हैं और उनका किसी से कोई ताल्लुक नहीं रहा.

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टिप्स: घर को सुरक्षित बनाना

गिरने और चोट लगने की संभावना कम करें:

  • फर्श पर कम चीज़ें रखें, बेकार का फर्नीचर हटा दें
  • पैनी चीज़ें (जैसे कि चाक़ू और कैंची) सामने से हटा दें और ताले में बंद रखें.
  • टूटने वाली चीज़ें हटा दें, जिनसे व्यक्ति को चोट लग सकती है, जैसे कि क्रिस्टल के वाज़, कांच से बर्तन, पोर्सलीन की भारी प्लेट. इन को तभी निकालें जब इस्तेमाल करना हो.
  • पैने कोनों वाले फर्नीचर को हटा दें
  • यदि दरी या कालीन पर व्यक्ति आराम से नहीं चल पाते, या उसकी झालर में व्यक्ति का पैर अटकता है, तो दरी या कालीन को हटा दें.
  • ज़मीन पर बिजली के तार हों तो व्यक्ति का पैर उनमे भी उलझ सकता है, यह ध्यान रखें.
  • फर्श फिसलने वाला नहीं होना चाहिए. व्यक्ति को ज्यादा पालिश करे हुए फर्श पर चलने में तकलीफ हो सकती है, और गीले फर्श पर भी. बाथरूम को सूखा रखें.
  • घर में अगर सीढियां हों तो देखें कि इनपर फिसलन न हो, और हर स्टेप कहाँ शुरू होता है, यह साफ़ नज़र आये.
  • घर में बिजली के सब कनेक्शन सुरक्षित होने चाहियें. इन्सुलेशन ठीक होना चाहिए और तार कहीं भी नंगे नहीं होने चाहियें.

व्यक्ति किसी वस्तु को देख चकरा जाएँ या डर जाएँ, इस संभावना को कम करें

  • शीशे में अपनी शकल देख कर व्यक्ति यह सोच सकते हैं कि यह कोई और है, और इससे व्यक्ति डर सकते हैं या बौखला सकते हैं. यदि आप जिसकी देखभाल कर रहे हैं उस व्यक्ति को यह समस्या है तो शीशे हटा दें या ढक कर रखें
  • कुछ सजावट के सामान (decoration pieces) व्यक्ति को डरा सकते हैं, जैसे कि मुखौटे या सींग वाले हिरन के सर या ऐसे चित्र जो गहरे रंगों के हों या डरावने हों. इन को हटा दें.
  • कभी कभी छपी हुई चादर या परदे के डिजाईन डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति को कन्फ्यूज कर देते हैं या डरा देते हैं. ऐसा हो तो उन्हें बदल दें
  • पास पास विपरीत रंग हों तो व्यक्ति चकरा सकते हैं’है. जैसे कि हलके और गहरे रंग की स्ट्राइप से शायद व्यक्ति सोचें कि जहाँ रंग गहरा है वहाँ गड्ढा है और व्यक्ति चलने से इनकार कर दें
  • गहरे रंग के फर्श या कालीन से डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्तियों को अकसर डर लगता है

रोशनी : अँधेरे से व्यक्ति डर सकते हैं, और कंफ्यूज भी हो सकते हैं. पर आँखें चौंधियाने वाली रोशनी भी ठीक नहीं होती.

  • नंगे बल्ब की जगह फ्रोस्तेड बल्ब (frosted lights) का इस्तेमाल करें
  • रात के वक्त नाईट लाइट (night light) को जलाये रखें
  • एमरजेंसी लाइट लगाएं जो बिजली जाने पर खुद जल जाती हों.

घर में कुछ बदलाव करके व्यक्ति की भटकने की संभावना कम करें.

  • दरवाज़े और दीवार का रंग एक ही रखें या दरवाज़े को परदे से छुपा दें
  • दरवाज़े पर एक बड़ा स्टॉप साईन लगा दें

भटकने के विषय पर अनेक टिप्स हमारे दूसरे पृष्ठ पर देखें (लिंक “इन्हें भी देखें” सेक्शन में है)

रस्ते में और बाथरूम में हैंड रेल

grab rail in corridorgrab rail in bathroomgrab rail in bathroom picture 2

(Nightingales Centre for Ageing and Alzheimer’s, Bangalore में लिया गया)

बाथरूम के लिए खास टिप

  • फर्श गीला न हो, और उसपर फिसलन न हो
  • ऊँचा कमोड इस्तेमाल करें
  • कमोड के पास, और नहाने की जगह के पास हैंड रेल लगवाएं
  • कुछ शहरों में खास बनी हुई हैंड रेल सहित ऊँची टोइलेट सीट भी मिलती है, संभव हो तो लगाने के बारे में सोचें
  • आसान से पकड़ने और खुलने वाले नल इस्तेमाल करें
  • गीज़र की सेटिंग ऐसी रखें कि पानी कभी भी इतना गरम न हो कि व्यक्ति जल जाए
  • नहाते वक्त बैठने के लिए व्यक्ति के लिए एक मज़बूत, न-हिलनेवाला स्टूल रखें
  • बाल्टी ऐसी हो कि आसानी से उलटे नहीं, वरना पूरे बाथरूम में पानी फैल सकता है
व्यक्ति कभी कभी अपने आप को किसी कमरे में या बाथरूम में बंद कर लेते हैं और फिर दरवाज़ा खोल नहीं पाते. दरवाज़ा कैसे खोलें, यह व्यक्ति को बाहर से समझाना मुश्किल होता है. बाहर से दरवाज़ा खोलना भी मुश्किल हो जाता है, और दरवाज़ा तोडें तो व्यक्ति को चोट लग सकती है.
door hook for safetyहुक वाली कुंडी लगाएं तो इसे बाहर से आसानी से खोला जा सकता है.

सामान्य सुरक्षा

  • दवाइयाँ और जहरीले पदार्थ (जैसे कि ब्लीच, चूहे का ज़हर, काक्रोच मारने वाली दवा) ताले में बंद रखें/ व्यक्ति की पहुँच से बाहर रखें.
  • सब पैनी चीज़ें पहुँच से बाहर रखें
  • बिजली के सॉकेट ढक कर रखें, और बिजली के तार ऐसे न फैले हों कि व्यक्ति कंफ्यूस हो कर उन्हें खींचे जिससे उन्हें झटका लगे. किसी स्विच से झटका न लगता हो, यह चेक कर लें.
  • नालों में पानी कभी इतना गरम न हो कि हाथ जल जाए.
  • रसोई का दरवाज़ा बंद रखें ताकि व्यक्ति अकेले रसोई का इस्तेमाल न कर पाएँ.
  • यदि रसोई बंद न रख सकें, तो गैस रेगुलेटर ऑफ रखें और उसे ऐसे रखें कि व्यक्ति उस तक पहुँच न पाएँ.
  • अगर व्यक्ति धूम्रपान करते हैं, तो स्मोक डिटेक्टर के बारे में सोचें, खास तौर से बाथरूम में.
  • माचिस की डब्बी या लाइटर इधर-उधर नज़र नहीं आनी चाहियें
  • बाहर जाने वाले दरवाजों पर ताला लगा दें.
  • अगर आपके दरवाज़े पर ऐसा ऑटोमैटिक ताला है जो दरवाज़ा बंद करने पर खुद लग जाता है (self-locking door) तो अपने पास उसकी चाबी हमेशा रखें ताकि व्यक्ति अगर गलती से बाहर निकल कर दरवाज़ा बंद कर दें तो आप सब घर के बाहर बिना चाबी के न रह जाएँ.
  • घर में ऐसा कीमती सामान हो जो गिरने पर टूट सकता हो (जैसे कि लैपटॉप) तो उसे ऐसे रखें कि व्यक्ति गलती से उन्हें गिरा न दे.

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कुछ विशेष चिंता के क्षेत्र

समय के साथ व्यक्ति अधिक गल्तियाँ करने लगते हैं और यह नहीं पहचान पाते कि वे खतरे में हैं, या यह नहीं सोच पाते कि खतरे से कैसे निकलें. ऐसे में, कुछ गतिविधियों जो पहले उनके लिए सामान्य थीं, वे अब खतरनाक हो जाती हैं. व्यक्ति से यह गतिविधियां कब कम करवाएं, और उन्हें सुरक्षित कैसे रखें, इस पर विशेष रूप से सतर्क रहना होता है.

  • धूम्रपान (smoking) : धूम्रपान करने वाले व्यक्ति जलती हुई सिगरेट के बारे में सतर्क नहीं रह पाते. आग लगने का दर रहता है. अफ़सोस, धूम्रपान करना एक लत है, और आप मना भी करें, टब भी व्यक्ति किसी न किसी तरह से सिगरेट कहीं न कहीं से ले पायेंगे और स्मोक करते रहेंगे. धूम्रपान की आदत चुदाना बहुत मुश्किल है. व्यक्ति को सिगरेट न मिले, इसके लिए कदम उठाना बहुत ज़रूरी हो. माचिस और लाइटर भी उनके हाथ न आये, क्योंकि इससे भी खतरा है. अगर व्यक्ति धूम्रपान करें, तो किसी के सामने ही करें, और सिगरेट ठीक हे बुझाई जाए, इसका ध्यान रखना होगा.
  • दवाई न लेना या दो बार ले लेना : आम तौर पर लोग अपनी दवाई खुद लेते हैं, और कौनसी दवा कब लेनी है, ली है या नहीं, वे यह जिम्मेदारी खुद संभालते हैं. डिमेंशिया में व्यक्ति जब कन्फ्यूज होने लगते हैं, तो दवाई के बारे में भी गलतियाँ करने लगते हैं. वे दवाई लेना भूल जाते हैं, या दो बार ले लेते हैं. कई बार तो वे यही भूल जाते हैं कि उन्हें कोई ऐसी बीमारी है जिसके लिए उन्हें नियमित, रोज दवाई लेनी होती है और दवाई बिलकुल बंद कर देते हैं. गोलियाँ छुपा देते हैं या फ़ेंक देते हैं. शुरू में उन्हें पिल-बॉक्स देने से गलतियाँ कम करी जा सकती हैं, पर डिमेंशिया बढ़ने लगता है तो पिल बॉक्स कारगर उपाय नहीं. दवाई खरीदना, ठीक से, सुरक्षित तरह से रखना, और समय पर उचित मात्रा देना, यह सब काम देखभाल कर्ता को संभालना होता है.
  • खाना ठीक से न खाना/ पानी कम लेना: खाना बना हुआ रखा हो, सामने ही हो, तब भी कुछ व्यक्ति खाना खाना भूल जाते हैं. शुरुआती अवस्था में फ़्रिज पर या टेबल पर याद दिलाने के लिए नोट रखें तो काम बन जाता है, पर डिमेंशिया बढ़ने पर ऐसे नोट कम काम करते हैं. व्यक्ति तरल पदार्थ और पानी पीना भी भूल जाते हैं. नतीजन, व्यक्ति को सही पोषण नहीं मिलता और शरीर में hydration और nutrition की समस्या होती है. इस पहलू पर ध्यान दें, और व्यक्ति की स्थिति के मुताबिक़ कदम उठायें ताकि व्यक्ति सही पौष्टिक खाना खाते रहें, और जल और तरल पदार्थ भी उचित मात्रा में लें.
  • उपकरणों का इस्तेमाल: समय के साथ आम रोज मर्रा के उपकरण इस्तेमाल करने की क्षमता भी घाट सकती है. इसके प्रति सतर्क रहें. जैसे ही देखें कि व्यक्ति किसी उपकरण का ठीक इस्तेमाल नहीं कर पा रहे, या उन्हें गलत इस्तेमाल से खतरा हो सकता है, उपकरण को हटा दें.
  • गाड़ी चलाना (driving): डिमेंशिया के कारण गाड़ी चलाने में भी गल्तियाँ होने शुरू हो जाती हैं. कुछ तो इस कारण कि व्यक्ति रास्ता भूल जाते हैं और गुम जाते हैं. या वे सड़क पर अन्य गाडियां देख कर घबरा जाते हैं. ट्रैफिक सिग्नल पर रुकने और गाड़ी शुरू करने में भी गलती करने लगते हैं, और सही समय पर ब्रेक नहीं लगा पाते, जिससे उन्हें और अन्य लोगों को खतरा होता है. आपको ऐसी समस्याओं के प्रति सतर्क रहना होगे और खतरा बढ़ने से पहले शायद व्यक्ति को गाड़ी चलाने से रोकने का निर्णय लेना होगा. यह अकसर दिक्कत का काम है क्योंकि व्यक्ति सहमत नहीं होते, या वे भूल जाते हैं कि अब उन्हें गाड़ी नहीं चलानी है, और आदतन गाड़ी लेकर निकल जाते हैं. आपको शायद गाड़ी की चाबी छुपानी पड़े, या गाड़ी दूसरी जगह पार्क करनी पड़े. यह भी ध्यान रखें कि व्यक्ति को जहाँ जाना हो, वे किसी अन्य ज़रिये से जा पाएँ. भारत में ड्राईवर आशनाई से मिल जाते हैं, इसलिए ड्राईवर रखना इस स्थिति के लिए एक विकल्प है.
  • वित्तीय लेन-देन / घोटाले (scams): डिमेंशिया से ग्रस्त कई व्यक्तियों को पैसे की कीमत समझने में, और हिसाब करने में दिक्कत होने लगती है. उनकी वित्तीय लेन-देन को संभालने की क्षमता कम हो जाती है, और लोग उन्हें आसानी से धोखा दे सकते हैं. व्यक्ति संदिग्ध योजनाओं में निवेश करने लगते हैं, अपनी संपत्ति और गहने दान कर देते हैं, बिना समझे कानूनी पेपर पर और चेक पर हस्ताक्षर कर देते हैं. वे ऑनलाइन घोटाले और मोबाइल फोन पर घोटाले के भी शिकार हो जाते हैं. ऐसे तरीके अपनाएँ जिनसे व्यक्ति ऐसी सम्सायों से बचे रहें और धोकेबाज़ लोग उनका फायदा न उठा सकें. धोखेबाज लोगों की नज़र से ज़रूरी चीज़ें छुपाएँ–महत्वपूर्ण कागज़, कीमती गहने लॉकर में रखें, चाबी ध्यान से रखें. ऑनलाइन पासवर्ड और पिन (PIN) सुरक्षित रखें. बैंक स्टेटमेंट और अन्य ज़रूरी चीज़ों पर नज़र रखें ताकि कुछ गड़बड़ हो तो तुरंत पकड़ में आ जाए.
  • खतरे के प्रति सतर्क रहना: डिमेंशिया जैसे जैसे बढता है, व्यक्ति यह नहीं पहचान पाते कि उन्हें अपने लिए या आस पास वालों के लिए मदद कम माँगी चाहिए और कैसे मांगनी चाहिए. कुछ गड़बड़ हुई है, वे यह नहीं पहचान पाते, और न ही वे निर्णय ले पाते हैं कि क्या करें. घर में आग लग जाए, गैस के चूल्हे के गैस लीक हो रही हो, वे शायद नहीं जान पायेंगे. घर में कोई अजनबी घुस जाए और चोरी करने लगे तो वे रोक नहीं पायेंगे और न ही चिल्ला के मदद मांग पायेंगे. गिर के उन्हें खुद चोट लगे, तो चोट लगी है, शायद न जान पाएँ. घर के किसी अन्य सदस्य को चोट लगे या दिल का दौरा पड़े, तब भी शायद वे स्थिति की गंभीरता नहीं जान पायेंगे. अकेले रह रहे हों, या वृद्ध देखभाल कर्ता के साथ रिह रहे हों, तो स्थिति और भी चिंताजनक है.
    घर में ऐसी व्यवस्था करें जिससे आस पास के पड़ोसी और अन्य लोग यह नोटिस कर पाएँ कि कुछ प्रॉब्लम है, और ये मदद कर पाएँ या किसी को इत्तला कर पाएँ. वीडियो कैमरा के बारे में सोचें. पड़ोसियों से कहें कि वे घर पर और व्यक्ति पर नज़र रखें. आपके मोहल्ले में neighborhood watch program है तो उसका भाग बनें. अन्य रिश्तेदारों को भी सतर्क कर दें कि किस किस तरह की समस्या हो सकती है ताकि वे सतर्क रहें. अगर उनके फोन कॉल कोई उठा नहीं रहा है, या कोई दरवाज़ा नहीं खोल रहा है, या कुछ और अजीब बात है, तो वे आपको तुरंत इत्तला कर पाएँ, इस के लिए सब के पास आपका सम्पर्क का नंबर भी होना चाहिए.

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सहायक उपस्कर (ऐसिस्टिव डिवाइस, Assistive devices)

ऐसिस्टिव डिवाइस के इस्तेमाल से डिमेंशिया वाले व्यक्ति के कुछ दैनिक कार्य में कुछ आसानी हो सकती है, और देखभाल के काम में भी आराम हो सकता है. ऐसे डिवाइस अनेक कामों के लिए उपलब्ध हैं, जैसे कि चलने/ फिरने में सहारा और सहायता, व्हील्चैर, स्व-देखभाल के लिए डिवाइस, कपड़े पहनने और उतारने में, बेहतर सुनने और देखने में, खाना आसानी से खाने में, घर सुरक्षित बनाए रखने में, इत्यादि. बाथरूम के लिए भी ऐसिस्टिव डिवाइस मिलते हैं, जैसे कि सेफ्टी रेल, कुर्सी वाला कमोड, आदि.

भारत में अब कुछ कंपनी ऐसे ऐसिस्टिव डिवाइस बनाती हैं, या वे इनकी एजेन्सी लेती हैं. इन पर जानकारी अकसर अख़बारों में, या सीनियर सिटीजन के लिए आयोजित मेलों में या ऑनलाइन स्टोर से मिल सकती है. ये ऐसिस्टिव डिवाइस ऑर्थोपेडिक सामान बेचने वाली दुकानों में भी मिल सकते हैं.

भारत में कोई ज़रूरी ऐसिस्टिव डिवाइस न भी मिले तो आप दूसरे देशों से मंगा सकते हैं, या ऑनलाइन उसका डिजाईन देखकर सुच सकते हैं कि उपलब्ध सामान से इसको किसी कारीगर से कैसे बनवाएं. खरीद रहे हों या बनया रहे हों, यह न भूलें कि जो भी आप व्यक्ति के इस्तेमाल के लिए लें, वे भरोसेमंद , मज़बूत और उपयोगी होना चाहिए.

ऐसिस्टिव डिवाइस प्राप्त करने के लिए कुछ लिंक नीचे “इन्हें भी देखें” सेक्शन में हैं.

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इन्हें भी देखें….

हिंदी पृष्ठ, इसी साईट से:

भारत में सहायक उपस्कर (ऐसिस्टिव डिवाइस, Assistive devices)

  • भारत सरकार के “Old Age Solutions portal” पर सहायक उपस्कर (ऐसिस्टिव डिवाइस) पर एक सेक्शन (हिंदी) हैं: वृद्ध व्यक्तियों के लिए सहायक उपस्कर .
  • Pedder Johnson : वे कई तरह के ऐसिस्टिव डिवाइस बनाते हैं जिनसे बढ़ती उम्र के लोग अपने काम आसानी से कर पाएँ, वेबसाइट पर उनके प्रोडक्ट के चित्र भी हैं, और आर्डर कैसे करें, इसके लिए जानकारी भी.
  • कुछ अन्य कंपनी/ एजेंसी के बारे में जानने के लिए हमारे इस पृष्ठ के अँग्रेज़ी संस्करण को देखें.

कुछ उपयोगी लेख, हमारे अन्य वेबसाइट से: ये लेख हमारे दूसरे वेबसाइट्स से हैं, और भारत की स्थिति को ध्यान में रखते हुए लिखे गए हैं. ये अँग्रेज़ी में हैं (नीचे देखें, हर लेख का छोटा सा हिंदी परिचय)

कुछ उपयोगी इंटरव्यू :

इस पृष्ठ का नवीनतम अँग्रेज़ी संस्करण यहाँ उपलब्ध है: Adapt the home for dementia patients. अंग्रेज़ी पृष्ठ पर आपको विषय पर अधिक सामयिक जानकारी मिल सकती है. कई उपयोगी अँग्रेज़ी लेखों, संस्थाओं और फ़ोरम इत्यादि के लिंक भी हो सकते हैं. कुछ खास उन्नत और प्रासंगिक विषयों पर विस्तृत चर्चा भी हो सकती है. अन्य विडियो, लेखों और ब्लॉग के लिंक, और उपयोगी पुस्तकों के नाम भी हो सकते हैं. खास तौर से कई ऐसे लिंक हैं जिनमे विस्तार से कई घर के बदलाव का वर्णन और चित्र हैं.

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