कम उम्र के डिमेंशिया व्यक्ति की देखभाल की योजना बनाएं (Plan care for younger persons with dementia)

कुछ लोगों को कम उम्र में डिमेंशिया हो जाता है. उनकी देखभाल की योजना बनाने में सामान्य डिमेंशिया योजना के अलावा कई अतिरिक्त पहलू पर भी सोचना होता है.

देखभाल करने वाले क्या कर सकते हैं: दोस्तों और रिश्तेदारों को स्थिति समझाएं, और जितना हो सके, उतना समर्थन प्राप्त करें. पैसों के मामले में खास तौर से सावधान रहें. अधिक शारीरिक काम के लिए तैयार हों, और भावनात्मक समझौतों के लिए भी. बढते बच्चों पर माँ-बाप के डिमेंशिया का क्या असर होगा, इस के बारे में सोचें. काउंसेलिंग प्राप्त करने के बारे में सोचें. अन्य तरह से जितना सहारा मिल सके, उसके बारे में सोचें.

65 साल से कम उम्र के लोगों को भी डिमेंशिया (मनोभ्रंश) हो सकता है. इसको early-onset dementia, young-onset dementia, और younger-onset dementia (यंगर ऑनसेट, अर्ली-ऑनसेट) के नाम से जाना जाता है. ऐसी कम उम्र के डिमेंशिया व्यक्ति की देखभाल अत्यंत चुनौतीपूर्ण होती है, और परिवार के लिए कई ऐसी दिक्कतें होती हैं जो डिमेंशिया वाले बुजुर्गों की देखभाल में नहीं होतीं. इसलिए ऐसी देखभाल की योजना बनाने के लिए सामान्य देखभाल योजना के ऊपर कुछ दूसरे पहलूओं के बारे में भी विचार करना होता है. इस पृष्ठ पर इन खास विषयों पर चर्चा है.

(सामान्य डिमेंशिया योजना संबंधी देखभाल के लिए हमारा पिछला पृष्ठ देखें: डिमेंशिया की बढ़ती और बदलती अवस्थाओं के लिए देखभाल की तैयारी करना).

काम कम करने/ बंद करने के लिए/ व्यक्ति की ज़िम्मेदारियाँ कम करने के लिए प्लान करें

कम उम्र के डिमेंशिया के लोगों में जब डिमेंशिया शुरू होता है, उस वक्त वे सक्रिय जीवन बिता रहे होते हैं. हो सकता है वे मैनेजर हों, या पेशेवर हों जैसे कि अकाउंटेंट, डॉक्टर, सर्जन, वकील, इत्यादि. हो सकता है कि परिवार उन की आमदनी से चल रहा है, या वे अन्य कार्यरत परिवार के सदस्यों को घर से सहारा दे रहे हों और घर की भी कई ज़िम्मेदारियाँ निभा रहे हों. उनका अपना बिज़नेस भी हो सकता है. मतलब यह, कम उम्र के डिमेंशिया व्यक्ति अक्सर कई रोल और जिम्मेदारी निभा रहे होते हैं.

काबिलीयत कम होने के कारण व्यक्ति कुछ दिनों में नौकरी की सारी जिम्मेदारी नहीं संभाल पायेंगे, और यदि नौकरी में रहे तो उनके कारण नुकसान भी हो सकता है, जिसके लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाएगा. यदि सह-कर्मचारी या बॉस उनके डिमेंशिया के बारे में जानते हों तो यह भी हो सकता है कि वे उनके काम में और भी प्रॉब्लम देखें.

आपको देखना होगा कि व्यक्ति की क्षमताओं के अनुसार व्यक्ति का काम कम करने के लिए या ज़िम्मेदारियाँ कम करने के लिए क्या क्या कर सकते हैं. यदि निदान जल्दी हो, तो व्यक्ति स्वयं काम कम करने या बंद करने के तरीके सोच सकता है.

कुछ देशों के कानून और व्यवस्था के अंतर्गत व्यक्ति काम करते रह सकते हैं, और उनका कार्यभार ऐसे बदला जाता है जिससे वे एक नए रोल में है जो वे निभा सकते हैं. व्यक्तियों को विकलांग (disability) या compassion भत्ता भी मिल सकता है. भारत में ऐसे सिस्टम नहीं हैं. यहाँ मैनेजमेंट नौकरी में व्यक्ति के रोल में इस तरह के बदलाव करना ज़रूरी नहीं समझती जिससे व्यक्ति नौकरी पर कायम रह पाएँ. गलती या नुकसान नहीं सहे जाते. व्यक्ति का व्यवहार ग्राहकों या सहकर्मियों को आपत्तिजनक लगेगा, ऐसा सोचा जाता है. व्यक्ति को नौकरी से निकाल दिया जाता है. बिज़नेस पार्टनर साथ छोड़ देते हैं. आपको देखना होगा कि व्यक्ति को किस तरह के भत्ते मिल सकते हैं, या वे किस तरह की लंबी अवधि की छुट्टी या शीघ्र रिटायरमेंट का फायदा उठा सकते हैं. यदि उनकी कंपनी के मालिक या बिजनेस पार्टनर तैयार हों तो कुछ हद तक रोल अडजस्ट भी हो सकता है, पर यह संभावना कम है. बिज़नेस हो तो व्यक्ति का हिस्सा शायद बेचना पड़े.

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व्यक्ति के जीवन के अन्य पहलूओं के बारे में जानें.

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क्योंकि व्यक्ति सक्रिय और आत्म-निर्भर था, इसलिए परिवार वाले शायद उसकी ज़िंदगी के सब पहलू के बारे में नहीं जानते हों. व्यक्ति के दोस्त कौन हैं, उनके सहयोगी कौन हैं, उन्होंने किस से क्या क्या वादे करे हैं, किस को कुछ दिया है या किसी से कुछ लिया है, वगैरह. पर डिमेंशिया होने पर व्यक्ति अपनी ज़िंदगी के अनेक पहलू भूल सकते हैं या उनमें उनकी रुचि कम हो सकती है. ऐसे में शायद वे अपने कुछ वायदा न निभाएं या अन्य कोई जिम्मेदारी भूल जाएँ, जिससे अन्य लोगों को तकलीफ हो सकती है और आपस के रिश्ता बिगड़ सकते हैं या शरमिंदगी के मौके पैदा हो सकते हैं. अच्छा होगा यदि व्यक्ति के कुछ करीबी मित्रों के साथ खुल कर बात करें और व्यक्ति की सब जिम्मेदारियों को जानें और पता चलायें कि व्यक्ति से अन्य लोगों को क्या क्या उम्मीद है, ताकि आप सोच पाएँ कि आपको क्या करना है.

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पैसे/ मकान/ इन्वेस्टमेंट/ टैक्स इत्यादि के संभालने की क्रिया शुरू करें.

व्यक्ति अकसर पैसे का मूल्य नहीं समझ पाते और पैसों से सम्बंधित निर्णय ठीक से नहीं ले पाते. उनकी इस प्रॉब्लम को यदि बाहर वाला जन जाए तो उनसे फर्जी दस्तावेज पर साइन करवा कर उनके बैंक बैलेंस और जायदाद को हड़प सकता है, या उन को बहका कर सब पैसे और जेवर दान में ले सकता है. व्यक्ति को ऐसे हादसों से बचाना होगा. वैसे भी व्यक्ति गलती करने लगते हैं और पैसे खो सकते हैं. उनसे टैक्स और अन्य जरूरी कार्यवाही में भी चूक हो सकती है, या वे भूल भी सकते हैं कि उनकी ऐसी कोई जिम्मेदारी है. क्योंकि व्यक्ति जवान हैं और अपने पैसों को खुद संभाल रहे हैं, ऐसी गलती का पता भी देर में ही लगता है, जब तक नुकसान बहुत हो चुका होता है.

आपको व्यक्ति के ऐसे सब मामलों को समझना होगा और उनको संभालना शुरू करना होगा. उनके मामलों को समझना शुरू करें, महत्त्वपूर्ण कागजात सुरक्षित ढंग से सहेजना शुरू करें, और मामलों को सुलझाना शुरू करें. यदि व्यक्ति इस काम की जरूरत न समझें या सहयोग न दें, तो आपको किसी भरोसेमंद और जिम्मेदार मित्र आया परिवार के बड़े बुज़ुर्ग की मदद चाहियेगी, जिस पर व्यक्ति का भी भरोसा हो, और जो व्यक्ति का सहयोग पाने में आपकी मदद करे. यदि आपको ऐसे काम की आदत नहीं है, तो ये मामले सुलझाने में भी आपको भरोसेमंद लोगों की मदद लेनी होगी.

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रिश्तेदारों को (माँ-बाप, भई-बहन, अन्य रिश्तेदार) निदान समझाएं.

रिश्तेदार (करीबी और दूर वाले) शायद निदान पर विश्वास न करें. या वे शायद निकटतम परिवार वालों को ही दोषी ठहराएं या कहें कि व्यक्ति के बेटा/ बहु या पति/ पत्नी पैसे/ जायदाद के लालच में व्यक्ति को बीमार घोषित कर रहे हैं ताकि उन्हें लूट सकें. कुछ लोग निदान को व्यक्ति की अपेक्षा करने का एक बहाना समझते हैं. कुछ रिश्तेदार यह भी कह सकते हैं कि वे पारिवारिक मामले के झंझट में नहीं पड़ना चाहते, और वे रिश्ता तोड़ सकते हैं.

दोष देने की प्रॉब्लम आम है. जैसे के, जब बुजुर्ग माँ-बाप के जवान बेटे को डिमेंशिया हो, तो वे बहू को दोष देते हैं. शर्म महसूस करना एक अन्य आम प्रतिक्रिया है, और करीबी परिवार वाले जिद्द कर सकते हैं कि व्यक्ति के निदान को छुपाया जाए ताकि परिवार का समाज में बहिष्कार न हो और जवान बेटा बेटियों की शादी न रुके.ऐसी प्रतिक्रियाओं के कारण, डिमेंशिया से जूझना और उचित जानकारी और सहायता प्राप्त करना और भी मुश्किल हो जाता है.

रिश्तेदार निदान समझें और उसे स्वीकार का पाएँ, इसके लिए पूरी कोशिश कीजिये. हो सकता है कि उनके कुछ आरोप इतना चुभें कि आप सम्बन्ध तोड़ने की सोचें. पर अकेले डिमेंशिया देखभाल करना बहुत मुश्किल होता है, खास कर जब व्यक्ति जवान हो और घर की अनेक ज़िम्मेदारियाँ निभानी हों–बढते बच्चे, लोन का भुगतान, बुजुर्ग माँ-बाप, वगैरह. रिश्तेदारी बनी रहे तो कुछ तो सहायता की उम्मीद रह सकती हैं, खास कर एमेर्जेंसी में. आप धैर्य बनाए रखें और कोशिश करें कि जिस हद तक हो सके, रिश्तेदार निदान भी समझें और यह भी जानें कि आगे आगे क्या होगा. यदि लोग डिमेंशिया के बारे में न जानते हों या आप का विश्वास न करें, तो उन्हें निदान वाला प्रिस्क्रिप्शन दिखाएँ और काऊंसलर या अन्य विशेषज्ञ की और पुस्तकों की मदद भी लें. रिश्तेदार साथ रहें और समर्थन दें तो बाद में कुछ तो राहत होगी.

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बच्चे स्थिति समझें और स्वीकारें, इसपर खास ध्यान दें.

बच्चों की भावनाओं का खास ख़याल रखें. छोटी उम्र के या जवान बच्चों के लिए अपने माँ-बाप का डिमेंशिया देखना बहुत मुश्किल होता है. उन को अपनी तकदीर पर या व्यक्ति पर गुस्सा आ सकता है, या शर्म आ सकती है. वे अपने परिवार से, दोस्तों से, और अपनी पढ़ाई या काम से कट सकते हैं और खुद में सिकुड़ सकते हैं. अकसर यह बच्चे अपनी जिंदगी के किसी अहम पड़ाव पर होते हैं–जैसे कि कालेज में दाखिला, नई नौकरी लगना, इत्यादि, और ऐसे में उन्हें इस तरह अकेला महसूस हो तो उनके भविष्य का उत्साह कम हो सकता है. उन्हें ठीक सलाह और सहायता नहीं मिल पाती, उलटे उन पर देखभाल के काम का एक अंश आ जाता है, जब वे देख रहे हैं कि उनके दोस्तों को माँ-बाप का सहारा मिल रहा होता है.

परिवार में खुल कर डिमेंशिया पर बात करें और मिल कर समस्या से जूझने पर चर्चा करें. बच्चों को भी इस में शामिल करें. इससे शायद उन्हें स्थिति समझने और स्वीकारने में आसानी हो. स्कूल के टीचर और कॉऊँसेलर शायद मदद कर पाएँ, पर अकसर उन को डिमेंशिया और देखभाल की जानकारी नहीं होती, और उन्हें भी स्थिति समझानी पड़ेगी.

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दोस्तों और प्रियजनों से सम्पर्क बनाए रखने के लिए खास कोशिश करें.

दोस्ती और सामाजिक समर्थन कम होगा; कुछ प्रियजनों के साथ सम्बन्ध बने रहें, इसके लिए कदम उठायें. व्यक्ति और परिवार वालों के दोस्त कई बार अपनी जिंदगी और जिम्मेदारियों में इतने व्यस्त होते हैं कि जब डिमेंशिया के कारण व्यक्ति का काम करना या बाहर निकलना घट जाता है, तो दोस्तों से मिलना जुलना भी बंद हो जाता है. एक और बात यह है कि व्यक्ति की कठिनाइयों को देख कर अन्य लोग घबरा जाते हैं, क्योंकि वे भी हम-उम्र हैं और ऐसी बातों के बारे में सोचते हुए उन्हें डर लगता है. या वे समझ नहीं पाते कि इस बदली स्थिति में बात करें भी तो क्या करें. परिवार से इस हालत में मेल-जोल रखना सब के बस की बात नहीं होती. नतीजन, व्यक्ति और परिवार अकेले पड़ जाते हैं.

कम से कम कुछ करीबी दोस्तों को खुल कर समस्याएँ समझाने की कोशिश करें, जिस से कुछ नजदीकी सम्बन्ध बने रहें. इससे आपका अकेलापन कम होगा, और हो सकता है आप कुछ सहारा भी मांग पाएँ.

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पैसे की प्लानिंग पर विशेष ध्यान दें.

पैसों की दिक्कत कम उम्र के डिमेंशिया में एक आम और गंभीर समस्या होती है. यह परिवारों में तनाव और चुनौतियों का एक मुख कारण होता है. भारत में तो इसमें बहुत ही दिक्कत होती है क्योंकि आर्थिक सहायता के लिए संस्थाएं और व्यवस्था नहीं हैं. इस उम्र में अनेक परिवारों में ख़र्चे और ज़िम्मेदारियाँ ज्यादा होती हैं और बचत की रकम कम. यदि व्यक्ति कमा रहे थे तो डिमेंशिया के कारण अब आमदनी कम या बंद हो जाती है. यदि घर संभालने वाले को डिमेंशिया हो, तब कमाने वाले परिवार के सदस्य व्यक्ति की देखभाल में खिंच सकते हैं और उनकी कमाई घट सकती है. देखभाल और इलाज की वजह से खर्च बढ़ जाते हैं. अन्य ज़िम्मेदारियाँ निभा पाने में भी दिककत होती है, जैसे कि बच्चों की पढाई, अन्य परिवार वालों की सेहत वगैरह.

कई तरह के विकल्प के बारे में सोचना होगा. कमाने के नए तरीके ढूँढने होंगे, पैसे ध्यान से खर्च करने होंगे. खर्च और आमदनी समझनी होगी और उसके अनुसार अडजस्ट करने की कोशिश करना होगा. पैसे कहाँ निवेश करें, हाथ में मिटना रखें, यह सोचना होगा. शायद मकान बेचना हो, या पैसे जोड़ने के कुछ नए तरीके सोचने पड़ें. कुछ अन्य शायद लोगों से मदद मांगनी होगी. अकसर रिश्तेदार भी मदद नहीं कर पाते, या करना नहीं चाहते.

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देखभाल के कार्यभार के कठिन शारीरिक पहलू को समझें और उसके अनुसार तैयारी करें.

देखभाल के काम भारी होते हैं और शारीरिक थकान से बचना होता है. कम उम्र वाले डिमेंशिया व्यक्ति ज्यादातर जवान और ताकतवर होते हैं. अकसर जब देखभाल करने वाले उनकी मदद कर रहे होते हैं, तो वे सहयोग नहीं देते, बल्कि उलटा लड़ने लगते हैं. देखभाल कर्ताओं में बहुत ज्यादा शारीरिक थकान होना एक आम समस्या है. उन्हें चोट भी लग सकती है, खासकर यदि पुरुष की देखभाल कोई महिला (पत्नी, बेटी, बहु, अन्य कोई महिला) कर रही हो. यदि बुज़ुर्ग माँ-बाप जवान बेटा-बेटी की देखभाल कर रहे हों, टब भी देखभाल का शारीरिक काम बहुत थकाने वाला हो सकता है.

मदद करने के उचित तरीके सीखें (जिससे आपके शरीर पर कम जोर पड़े)–इसके लिए आपको नर्स और फीजियोथेरेपिस्ट से सलाह मिल सकती है. कमरों को भी ऐसे सजाएं जिससे देखभाल ज़्यादा आसानी से हो, और उपकरणों का यथोचित उपयोग करें. या सहायक का उपयोग करें, या अन्य परिवार वालों के साथ मिल कर व्यक्ति के देखभाल कार्य करें.

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अधिक गंभीर भावनात्मक असर के लिए तैयार रहें.

देखभाल कर्ता को अकसर बहुत तनाव और अकेलापन महसूस होता है; शुरू से ही कदम उठायें. परिवार वालों को बुजुर्गों को देखभाल करनी होगी, वे इसके लिए कुछ हद तक तैयार होते हैं. पर किसी चालीस-पचास वर्ष के व्यक्ति को इस तरह की बीमारी हो सकती है, यह परिवार वालों के लिए एक सदमा होता है. ज़िंदगी के हर पहलू में दिक्कतें पेश आती हैं, और उचित सहायता और समर्थन भी प्राप्त नहीं होता. संस्थाएं भी इस तरह की स्थिति में सहायता/ सलाह कम ही दे पाती हैं.

भावनात्मक तौर से स्थिति से समझौता करना और उसे स्वीकार पाना बहुत मुश्किल होता है. जीवन साथी के लिए व्यक्ति में डिमेंशिया के कारण हो रही गिरावट देखना बहुत मुश्किल होता है. बुज़ुर्ग माँ-बाप अपने बुढापे को सम्भाल रहे होते हैं, उन से तो सोचा ही नहीं जाता कि जिस जवान बेटा/ बेटी से वे बुढापे में मदद की उम्मीद रखते थे उसे इस तरह की बीमारी हो गयी है. बच्चे अभी स्कूल/ कालेज में होते हैं या नए नए करियर में, और इस प्रकार की भारी देखभाल और जिम्मेदारी के लिए तैयार नहीं होते. पूरा परिवार तनाव महसूस करता है.

शुरू से ही अपने व्यक्तित्व के अनुसार अन्य तनाव-मुक्ति के तरीके अपनाएँ–दोस्तों से मिलते रहना, रचनात्मक हॉबी, संगीत, पसंदीदा किताबें पढ़ना, धार्मिक गतिविधियां, वगैरह. हो सके तो काउंसेलिंग सेवा का उपयोग भी करें.

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सहायक सेवा/ संस्था का चुनाव करते समय, यह चेक करें कि क्या वह कम उम्र वाले डिमेंशिया व्यक्ति के लिए उपयुक्त है.

क्योंकि डिमेंशिया को बुजुर्गों की समस्या समझा जाता है, इसलिए अधिकांश समर्थक सेवाएँ बुजुर्गों के लिए होती हैं, कम उम्र के व्यक्तियों के लिए नहीं. सभी उपलब्ध संस्थाएं बड़ी उम्र वाले लोगों को ध्यान में रख कर बनायी जाती हैं. या सोचा जाता है कि बाद की अवस्था में व्यक्तियों को वृद्धाश्रम में रहना होगा. कम उम्र वालों के लिए सुविधाएँ चाहियेंगी, यह कोई नहीं सोचता. कम उम्र के रोगी को संभालने के लिए कर्मचारी भी अधिक बल वाले चाहियेंगे. एक और बात यह है कि कम उम्र में होने वाले कुछ डिमेंशिया में याददाश्त पर असर नहीं होता, और व्यक्ति सक्रिय रहते हैं, पर अधिकांश सुविधाएँ यह सोच कर बनायी जाती हैं कि रोगी चुप-चाप, बिना ज्यादा कुछ करे हुए बैठे रहेंगे. सक्रिय, जवान लोगों के लिए यह उपयुक्त नहीं रहता. अगर व्यक्ति को फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया (Frontotemporal Dementia, FTD) है, तो बदला और मुश्किल व्यवहार उसका एक मुख्य लक्षण है, और जवान रोगी में तो यह संभालना और भी मुश्किल है.

डिमेंशिया संबंधी सेवाएँ और रहने की जगहों का आकलन करते वक्त इस बात पर गौर करें कि क्या वे कम उम्र के व्यक्ति को सहायता दे सकते हैं. क्या वहाँ के कर्मचारी जवान व्यक्ति को संभाल पायेंगे और सहारा दे पायेंगे. यह भी देखें कि क्या व्यक्ति वहाँ अन्य लोगों के साथ फिट होंगे. यदि व्यक्ति का व्यवहार कभी कभी सामाजिक तौर से निंदनीय होता है, जैसे कि अश्लील व्यवहार, तो क्या सेवा/ संस्था और उसके कर्मचारी संभाल सकेंगे.

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इन्हें भी देखें

हिंदी पृष्ठ, इसी साईट से:

इस वेबसाइट पर अनेक पृष्ठों पर सम्बंधित विषयों पर विस्तार से चर्चा है. विशेष रूप से उपयोगी पृष्ठ हैं:

इस विषय पर हमारे अन्य वेबसाइट से सामग्री: ये सब अँग्रेज़ी पृष्ठ भारत में देखभाल के संदर्भ में लिखे गए हैं.

एक बेटी पन्द्रह साल की उम्र में बनी देखभाल कर्ता: अँग्रेज़ी इंटरव्यू पढ़ें: Ekta Hattangady: Fifteen years old when her mother was diagnosed with Alzheimer’s Opens in new window

इस विषय पर हिंदी सामग्री, कुछ अन्य साईट पर: यह याद रखें कि इन में से कई लेख अन्य देश में रहने वालों के लिए बनाए गए हैं, और इनमें कई सेवाओं और सपोर्ट संबंधी बातें, कानूनी बातें, इत्यादि, भारत में लागू नहीं होंगी.

कम उम्र के डिमेंशिया की झलक, एक केस द्वारा, इस अँग्रेज़ी वीडियो में:

वीडियो को यूट्यूब पर देखें:
Rebecca Doig is 31, Pregnant and has Alzheimer’s Opens in new window
या नीचे के प्लेयर में देखें.

इस पृष्ठ का नवीनतम अँग्रेज़ी संस्करण यहाँ उपलब्ध है: Plan care for younger persons with dementiaOpens in new window . अंग्रेज़ी पृष्ठ पर आपको विषय पर अधिक सामयिक जानकारी मिल सकती है. कई उपयोगी अँग्रेज़ी लेखों, संस्थाओं और फ़ोरम इत्यादि के लिंक भी हो सकते हैं. कुछ खास उन्नत और प्रासंगिक विषयों पर विस्तृत चर्चा भी हो सकती है. अन्य विडियो, लेखों और ब्लॉग के लिंक, और उपयोगी पुस्तकों के नाम भी हो सकते हैं. खास तौर पर अँग्रेज़ी पृष्ठ पर कई लिंक और संसाधन हैं जिन से आप कम उम्र वाले डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्तियों की कहानियाँ पढ़ और सुन सकते हैं, कई उनकी ही ज़ुबानी. अनेक ऐसी संस्थाओं के लिंक भी हैं जो विशेष तौर से कम उम्र वाले डिमेंशिया के क्षेत्र में कार्यरत हैं.

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