दैनिक कार्यों में व्यक्ति की सहायता (Helping Dementia Patients with Activities of Daily Living)

समय के साथ डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति के लिए अपने निजी दैनिक काम करना मुश्किल होता जाता है, और उन्हें साधारण कामों में भी सहायता की जरूरत पड़ने लगती है.

देखभाल करने वाले क्या कर सकते हैं:  जहाँ तक हो सके, व्यक्ति को आत्म-निर्भर रखने की कोशिश करें, पर जब व्यक्ति को दिक्कत महसूस हो रही हो तो जितनी जरूरत हो, व्यक्ति की उतनी मदद करें. व्यक्ति को सुरक्षित रखें.

डिमेंशिया (मनोभ्रंश) वाले व्यक्तियों को उनके रोजमर्रा के कामों में उचित तरह से मदद कर पाना देखभाल करने का एक आवश्यक अंग है. यदि हम ऐसी मदद दे पाएँ जिससे व्यक्ति स्वयं को सक्षम समझे पर यह भी भरोसा कर पाएँ कि उन्हें जितनी जरूरत हो, उतनी मदद मिलती है, तो व्यक्ति अधिक संतुष्ट और खुश रह पाते हैं. उन्हें तनाव कम होता है. चिंताजनक व्यवहार (जैसे उत्तेजना/ उदासीन होना) की संभावना कम हो जाती है.

दैनिक जीवन के कार्य (Activities of daily living, ADL)

ऐसे कई काम हैं जो लोग रोज अपने दैनिक जीवन में करते हैं. डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति इन कार्यों को करने में दिक्कत महसूस करने लगते हैं और उन्हें मदद की जरूरत पड़ने लगती है.

Activities of Daily Living (ADL) का इस्तेमाल उन कार्यों के लिए होता है जो कोई अपने लिए करता है, और यह वाक्यांश डिमेंशिया देखभाल पर चर्चा का एक माना हुआ वाक्यांश है. ये दैनिक कार्य (ADLs, वे कार्य जो हम अपने लिए दिन में करते हें) दो श्रेणी में बांटे जा सकते हैं:

  • अपने निजी काम (Personal activities of daily living, PADL), जैसे कि नहाना, शौच, कपड़े पहनना, बाल बाना, भोजन करना, वगैरह.
  • सहायक निजी काम (Instrumental activities of daily living, IADL), जैसे कि खाना पकाना, खरीदारी करना, कपड़े धोना, घर का हिसाब किताब करना, वगैरह.

यदि व्यक्ति अकेले रह रहे हैं तो उन्हें दोनों श्रेणी के काम संभालने होते हैं, अपने निजी काम भी और सहायक निजी काम भी. यदि वे दोनों नहीं संभाल पाते तो वे अकेले नहीं रह सकते, और उन्हें किसी और के साथ रहना होगा, जैसे कि किसी बच्चे या रिश्तेदार के साथ, या किसी ऐसी जगह जाना होगा जहाँ देखभाल के लिए कर्मचारी हों, जैसे कि assisted living वाली जगह. भारत में ज्यादातर लोग अकेले नहीं रहते, परिवारजन के साथ रहते हैं. जैसे जैसे व्यक्ति की क्षमता घटती है, साथ रहने वाले परिवारजन व्यक्ति के काम अपने ऊपर लेते जाते हैं और व्यक्ति की सहायता भी करते हैं.

देखभाल कर्ता को, व्यक्ति को किस किस तरह की कठिनाई हो रही हैं, इसके प्रति सतर्क रहना होता है. खास तौर से निजी कामों के बारे में, क्योंकि इनमें समस्याएँ शायद नज़र न आएँ. उदाहरण के तौर से, सतर्क न हों तो पता नहीं चल पायेगा कि व्यक्ति ठीक से नहा रहे हैं या नहीं.जब व्यक्ति की क्षमता घटती है, तो जैसे उचित हो, सहायता करनी होती है.

भारत में ज्यादातर बुज़ुर्ग लोग अकेले नहीं रहते. इसलिए सहायक दैनिक कार्य, जैसे कि खाना पकाना, अन्य परिवार के सदस्यों के साथ बांटे जाते हैं. जब डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति को इन्हें करने में दिक्कत होने लगती है, घर के अन्य लोग ये काम अपने ऊपर ले लेते हैं. जैसे के अगर कोई बुज़ुर्ग महिला खाना पहले जैसे नहीं पका पा रही हैं, तो बेटी या बहु पकाने का काम ले लेगी. यह भारत में बढ़ती उम्र में सामान्य समझा जाता है. पर यदि व्यक्ति अकेले रहते हों या वृद्ध पति-पत्नी अलग रह रहे हों, तो काम करने की क्षमता में कमी होने पर ज्यादा मुश्किल होती है.

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सहायता समय के साथ बढ़ती जाती है

डिमेंशिया में, समय के साथ, मस्तिष्क की हानि बढ़ती जाती है, और इस कारण व्यक्ति की क्षमता घटती जाती है. व्यक्ति के हाथ-पैर का तालमेल कम हो सकता है, या उन्हें संतुलन बनाए रखने में दिक्कत हो सकती है. उनको समझने में और ध्यान देने में दिक्कत होने लगती है. किसी काम को पूरा करने के लिए क्या क्या कदम लेने हैं, और किस क्रम में लेने हैं, यह उन्हें याद नहीं रहता. वे औरों के दिए गए निर्देश नहीं समझ पाते. डिमेंशिया जैसे जैसे बढ़ता है, यह दिक्कतें भी बढ़ती हैं और व्यक्ति को अधिक सहायता की जरूरत पड़ती है.

एक उदाहरण:

  • शुरू में आपको सिर्फ व्यक्ति को याद दिलाना होगा कि नहाने का टाइम हो गया.
  • कुछ दिनों बाद, आपको शायद यह देखना होगा कि व्यक्ति ने साबुन ठीक से लगाया या नहीं, या साबुन ठीक से धोया या नहीं, और यदि नहीं, तो सिर्फ व्यक्ति को बताना होगा.
  • व्यक्ति नहाने में रुचि भी खो सकते हैं
  • स्थिति और बिगड़ने पर, व्यक्ति को नहाने के अलग अलग कदम भी याद दिलाने पड़ेंगे–कहना होगा, चलिए, साबुन लगा लीजिए, हाँ, बांह पर, अच्छा, अब टाँग पर, चलिए अब पानी डाल कर धो लीजिए, वगैरह. नहाने के लिए जो जो सामान चाहिए, वह निकाल कर रखना होगा.
  • फिर कुछ और दिनों बाद, हो सकता है आपको व्यक्ति के हाथ पर साबुन लगाना शुरू करना हो ताकि देखा-देखी में व्यक्ति बाकी जिस्म पर साबुन लगाना शुरू कर दें. व्यक्ति खुद काम शुरू नहीं कर पायेंगे, पर आप अगर शुरू करवा दें, और हाथ पकड़ करके थोड़ी सहायता करें, तो बाकी काम वे पूरा कर पायेंगे.
  • अधिक कठिन काम, जैसे शैम्पू करना, शायद आपको करने पड़ें.
  • फिर एक स्थिति आयेगी जब व्यक्ति साबुन या तौलिया की तरफ ऐसे देखेंगे जैसे कि यह कोई नई चीज़ है. आपके इशारे पर भी वे साबुन नहीं लगा पायेंगे. अब आपको ही नहलाना होगा.
  • अंतिम स्थिति में व्यक्ति पूरी तरह बिस्तर पर पड़ जाते हैं (बेडरिडेन, bed-ridden) और आपको उन्हें बिस्तर पर ही नहलाना होगा.

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व्यक्ति की मदद कैसे करें

डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति को अक्सर काम करने में दिक्कत होती हैं. वे समझ नहीं पाते उन्हें क्या करना है, और वे काम करने के बीच में आपके दिए हुए निर्देश भूल जाते हैं. वे ठीक से ध्यान नहीं दे पाते. वे वस्तुओं को पहचान नहीं पाते, और उनको कैसे इस्तेमाल करें, वे भूल जाते हैं. हाथ पैर ठीक नहीं चलते, तालमेल बिगड़ जाता है, और संतुलन भी खराब हो सकता है. जब कोशिश के बावजूद वे कुछ नहीं कर पाते तो वे हताश हो जाते हैं.

मदद करने के लिए:

  • पहले से सोच लें कि किस तरह की और कितनी मदद की जरूरत
  • जिस सामान की जरूरत पड़ेगी, उसे तैयार रखें.
  • हर काम को छोटे छोटे कदमों में बाँटें और व्यक्ति से एक समय पर एक ही कदम करने को कहें
  • व्यक्ति को क्या करना है, इसके लिए हर कदम को सरल तरीके से उन्हें बताएं, और उन्हें समझने के लिए समय दें
  • काम क्यों करना है, उससे क्या फायदा होगा, नहीं करने से क्या नुकसान होगा, यह सब बता कर व्यक्ति को कन्फ्यूज न करें. जो करना है, सिर्फ उस पर ध्यान रखें
  • बिना जरूरत सवाल न करें और व्यक्ति से चुनने को न कहें
  • इशारों और संकेतों से काम शुरू करने में व्यक्ति की मदद करें
  • जैसे और जितनी जरूरत हो, उतनी मदद करें
  • व्यक्ति की सराहना करके प्रोत्साहित करें.
  • जल्दबाजी न करें
  • गलतियों पर टिप्पणी न करें. व्यक्ति काम धीरे या गलत करें, इस पर बेचैनी न दिखाएँ, और न ही क्रोधित हों
  • यह समझाने का कोई फायदा नहीं कि यह काम क्यों जरूरी है. व्यक्ति काम करें, इस बात पर केंद्रित रहें; समझाने लगेंगे कि काम क्यों जरूरी है, तो व्यक्ति का काम करने से ध्यान भटक जाएगा.
  • शांत रहें, प्रसन्नचित्त रहें.
  • व्यक्ति को हताश न होने दें, और न ही थकने दें

अगर व्यक्ति से कोई काम नहीं हो पा रहा, तो सोचें, क्या यह काम सचमुच जरूरी है? नहीं हो तो उसे छोड़ दें. जरूरी काम हो तो कुछ देर विराम देने के बाद फिर कराने की कोशिश करें, और ज्यादा मदद भी करें ताकि इस बार काम हो पाए.

धीरे धीरे करने से काम हो पायेगा. जल्दी करने से काम रुक जाएगा, क्योंकि व्यक्ति बात समझ नहीं पायेंगे, घबरा जायेंगे, और परेशान हो जायेंगे, और इन सब से उनकी काम करने की क्षमता और भी कम हो जायेगी. जल्दी करने से काम खिंचता जाएगा और जल्दबाजी में कुल मिलाकर टाइम ज्यादा ही लगेगा.

व्यक्ति की प्रतिक्रिया की तरफ सतर्क रहें, और अपने मदद करने के तरीके को उसके अनुसार बदलते रहें. एक उदाहरण इस वीडियो में है: (यदि वीडियो प्लेयर लोड न हो तो आप वीडियो यूट्यूब पर देख सकते हैं Opens in new window.

आप पायेंगे कि अगर आप सहायता करने की क्रिया में आनंद ले पायेंगे तो व्यक्ति की सहायता करना बोझ नहीं लगेगा. सोचें, माँ जब बच्चे को नहलाती है तो काम कर रही है पर उसमे आनंद उठा पाती है, और इसलिए उसे काम भारी नहीं लगता.

सहायता करने के लिए कुछ टिप्स :

अगर आप व्यक्ति से कुछ करने को कहें और व्यक्ति समझ न पाएँ, या काम न करें.

सरल, छोटे वाक्यों का इस्तेमाल करें, धीरे बोलें, स्पष्ट बोलें, और व्यक्ति को सोचने समझने के लिए टाइम दें. बेकार के सवाल न करें, सामने आकर बोलें ताकि व्यक्ति आपको बिना सर उठाये देख सकें. अपने चेहरे को शांत रखें.

सिर्फ शब्दों का ही नहीं, इशारों का भी इस्तेमाल करें. [See also: बातचीत कैसे करें]

व्यक्ति कोई वस्तु नहीं पहचान पा रहे

प्रदर्शन करके दिखाएँ कि वस्तु को कैसे इस्तेमाल करते हैं (जैसे कि ब्रश क्या है, इसे दाँत ब्रश करने का संकेत कर के दिखाएँ)

सरल शब्दों में बताएं कि आप क्या कर रहे हैं. व्यक्ति को एक शब्द न समझ आये तो आप दूसरा इस्तेमाल करें.

वस्तु को छूकर या सूंघकर भी व्यक्ति को यह समझने/ याद करने में आसानी होगी कि वस्तु क्या है

व्यक्ति वस्तु का इस्तेमाल नहीं जानते

सरल शब्दों में बताएं और प्रदर्शन भी करें

हाथ पकड़ कर काम की शुरुआत करवा दें. अकसर, एक बार व्यक्ति एक क्रिया (जैसे ब्रश करना) शुरू कर देते हैं तो पुरानी आदत याद आ जाती है, और वे फिर बाकी काम कर पाते हैं.

सही तालमेल न होना

व्यक्ति के शरीर का तालमेल गड़बड़ाने लगता है तो पहले जो साधारण लगते थे, वही काम जटिल हो जाते हैं. आपको उसके हिसाब से व्यक्ति के काम को आसान करना होगा. जैसे कि, अगर अम्मा साड़ी पहन नहीं पातीं, और चलते हुए भी उनका पैर उसमें अटक जाता है, तो अम्मा को गाऊन पहनाएं.

कुछ विशेष उपकरण हैं जिनसे व्यक्ति को रोजमर्रा के कामों में आसानी हो सकती है, जैसे कि दो हैंडल वाले कप. पर नए उपकरण से कुछ व्यक्ति अधिक परेशान हो सकते हैं क्योंकि वे इनका इस्तेमाल करना नहीं सीख पाते.

घर में बदलाव करके व्यक्ति के लिए माहौल को अधिक सहूलियत वाला बनाएँ.

कोशिश करें कि कुल मिलाकर व्यक्ति सक्रिय रह पाएँ और जितना संभव हो, उतना काम करें.

व्यक्ति यह नहीं समझ पा रहे कि काम क्यों जरूरी है और व्यक्ति यह नहीं समझते कि काम न करने के क्या दुष्परिणाम हैं

यह बताना बेकार है कि काम क्यों जरूरी है. जैसे कि, व्यक्ति को यह बताना व्यर्थ है कि दाँत ब्रश न करने से दाँत सड़ जायेंगे और कीड़े पड़ जायेंगे. व्यक्ति के लिए इस तर्क को समझने के लिए मेहनत करनी पड़ेगी और काम करने से ध्यान बंट जाएगा.

अगर व्यक्ति कुछ न करना चाहें तो:

  • सोचें क्या काम सचमुच जरूरी है
  • क्या काम करने का कोई अन्य आसान तरीका हो सकता है
  • इस काम में दिक्कत किस वजह से है, और क्या दिक्कत को हटाया जा सकता है
  • कुछ देर रुकें, फिर नए सिरे से कोशिश करें

काम न कर पाने पर व्यक्ति का निराश/ हताश होना

हताश या निराश व्यक्ति के लिए काम और भी मुश्किल हो जाता

व्यक्ति से सिर्फ उतना काम कराएं जितना व्यक्ति बिना हताश हुए कर पाएँ, और जिस काम को खुद कर पाने से व्यक्ति आनंद उठा पायें

आपका शांत रहना बहुत जरूरी है, क्योंकि व्यक्ति आपकी भावनाओं को जल्दी पहचान लेते हैं. वे यह जान जायेंगे कि आप चिड़चिड़ाए हुए है, या गुस्से में हैं (आप कुछ न बोलें, तब भी वे आपके हाव-भाव को पहचान जायेंगे). परन्तु वे यह नहीं समझ पायेंगे कि आप क्यों गुस्सा हैं, और प्रतिक्रिया में उन्हें भी गुस्सा आ जाएगा या वे डर जायेंगे. उनसे कोई काम करवाना और अधिक मुश्किल हो जाएगा.

व्यक्ति किसी जरूरी काम को न करना चाहें या उसमें औरों की मदद न लेना चाहें, और वे उत्तेजित हो जाएँ

कुछ ऐसे काम होते हैं जिनमें किसी और की मदद लेने में संकोच होता है, या अपमान महसूस होता है, जैसे कि नहाना, या शौच और सफाई का काम. इस कारण व्यक्ति मदद नकार सकते हैं और उत्तेजित/ आक्रामक भी हो सकते हैं, हालाँकि वे बिना मदद के वह काम नहीं कर सकते.

ऐसी स्थिति में देखभाल करने वालों को ऐसे तरीके चाहियें जिनसे व्यक्ति शांत हो जाएँ और सहयोग करें.

शांत, मधुर संगीत से कई बार व्यक्ति के मूड को बदला जा सकता है, और वे अधिक शांत हो सकते हैं.

धीमी आवाज़ में किसी रुचिकर विषय पर बात करें, जिससे उनका ध्यान काम से हट कर बातों में लगे और वे काम की अप्रियता और मदद न लेने के खयाल को भूल जाएँ और आपकी मदद स्वीकार कर लें.

देखभाल करने वालों को अपना हाव-भाव शांत रखना चाहिए, और प्यार और आदर से बात करनी चाहिए, जिससे व्यक्ति को मदद लेना बुरा न लगे. काम जरूरी हैं, काम व्यक्ति खुद नहीं कर पायेंगे, वगैरह वगैरह, यह विषय न छेड़ें. बस धीरे धीर, बिना अपनी ओर ध्यान खींचे, मदद करें, तो जिस काम में वे मदद नकार रहे थे वो शायद स्वाभाविक ढंग से हो जाए.

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एक उचित दिनचर्या और एक सहायक, सुरक्षित माहौल बनाएँ

डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति के लिए हर काम तनाव पैदा कर सकता है अगर काम थका दे या व्यक्ति की क्षमता से बाहर हो. एक देखने में साधारण दिन व्यक्ति के लिए तनाव-पूर्ण कामों से भरा होता है, इसलिए कोई हैरानी की बात नहीं कि व्यक्ति नाखुश और थके और चिड़चिड़ाए लगते हैं.

तनाव और थकान कम करने का एक बहुत कारगर तरीका है व्यक्ति के लिए एक नियमित दिनचर्या बनाना. इसमें तय होता है कि कौन सा काम किस टाइम पर करा जायेगा, जैसे कि नाश्ता कब दिया जाएगा, नहाना कब है, बाहर टहलने कब जाना है. इस दिन के टाइमटेबल में सब जरूरी काम एक सुनिश्चित ढंग से तय करे होते हैं, और इसका नियमित इस्तेमाल करें तो व्यक्ति जानते हैं कि कब क्या करना है. दिन एक परिचित ढंग से बीतता है और व्यक्ति को आदत पड़ जाती है, और इतना सोचना नहीं पड़ता कि अगला काम क्या होगा. इससे व्यक्ति का तनाव कम होता है और उन्हें एक किस्म की सुरक्षा महसूस होती है.

आप व्यक्ति के लिए स्थिति के अनुसार दिन का एक उचित कार्यक्रम बनाएँ जो रोज इस्तेमाल हो सके. अधिकाँश दिन इसी टाइमटेबल के हिसाब से चलायें, और इससे तभी हटें जब बहुत जरूरी हो.

दैनिक टाइमटेबल के अलावा व्यक्ति को एक ऐसे माहौल में रखें जिसमें वे सुरक्षित महसूस करें, और खुश रहें. व्यक्ति की जरूरतों और क्षमताओं के अनुसार घर में बदलाव करें, और इनको व्यक्ति की बदलती क्षमताओं और जरूरतों के अनुसार एडजस्ट करते रहें, ताकि घर का माहौल व्यक्ति के अनुरूप रहे. व्यक्ति को समय और जगह की बारे में आसानी से पता रहे, इसके लिए कैलेण्डर और घड़ी और साईन भी लगाएं. खुशहाली बढाने के लिए कुछ पसंदीदा तस्वीरें भी टांगें या व्यक्ति के पसंद का संगीत वगैरह बजाएं. व्यक्ति प्रसन्नचित्त हों तो देखभाल आसान होगी.

परिवार वाले देखभाल में अकसर इतने व्यस्त हो जाते हैं कि वे माहौल को आरामदेह बनाने के लिए समय नहीं निकाल पाते. पर अकसर कुछ छोटे छोटे बदलाव से देखभाल के काम में आराम पहुंच सकता है, क्योंकि इनसे व्यक्ति अपने काम ज्यादा अच्छी तरह से कर पाते हैं, और खुश भी रहते हैं. हम सब अनुरूप माहौल में अधिक अच्छी तरह से रह पाते हैं, और यह डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति के लिए भी सच है.

स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए जरूरी दैनिक कार्य (भोजन, व्यायाम)

दिन में कुछ ऐसे भी काम करने होते हैं जिनसे व्यक्ति की सेहत बनी रहे, और ये काम व्यक्ति के दिनचर्या में मौजूद होने चाहियें. इस पर डॉक्टर और अन्य संसाधन से सलाह प्राप्त करें. दिन में शरीर में पर्याप्त हरकत न हो तो कई समस्याएं हो सकती हैं. भोजन पौष्टिक न हो तब भी के प्रॉब्लम हो सकती हैं.

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कुछ जरूरी दैनिक कामों के लिए टिप्स

नीचे कुछ विशेष टिप्स दिए गए है. अच्छा यह है कि आप अन्य देखभाल करने वालों से भी सम्पर्क रखें, और आपस में टिप्स की अदला-बदली कर, कुछ अन्य सुझाव लें. काम करते समय तनाव-मुक्त रहें और इस बात पर जोर न दें कि काम बिलकुल ठीक हो, बल्कि यह देखें कि काम कितना जरूरी है और क्या इसे आपके और डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति के लिए सरल और सुखकर बनाया जा सकता है.

नहाना:

  • डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति अकसर यह ठीक अंदाजा नहीं लगा पते कि पानी कितना गरम या ठंडा है. आपको उनकी मदद करनी होती है.
  • बाथरूम व्यक्ति के लिए एक असुरक्षित जगह है, और कई हादसे (जैसे कि फिसलना और गिरना और चोट लगना) बाथरूम में ज्यादा होते हैं. कोशिश करें कि व्यक्ति को वहाँ अकेला न छोड़ें. व्यक्ति अगर आपकी उपस्थिति से शर्म महसूस करे या गुस्सा हों, तो आप अपनी नज़र घुमा लें, और सिर्फ तब मुड़ें जब मदद करने की जरूरत हो.
  • साबुन लगाते वक्त, व्यक्ति के अंग एक पतले तौलिए से ढक दें ताकि व्यक्ति को शर्म न आये.
  • कुछ व्यक्ति यह भूल चुके होते हैं कि बाथरूम किस काम के लिए है. शायद बचपन में उनके घर का गुसलखाना फ़र्क किस्म का था, या शायद उन्हें नदी में, यह कुंए के पानी से नहाने की आदत थी. उनको याद दिलाना पड़ेगा कि बाथरूम नहाने के लिए होता है. साबुन या तेल सूंघकर, या हाथ में ताजे कपड़े और तौलिया देने से शायद उन्हें याद आ जाए. नल चला दें. बहते पानी को देख और उसकी आवाज सुनने से उन्हें यह समझने में आसानी होगी कि उन्हें नहाना है.
  • खड़े होकर नहाना ज्यादा मुश्किल है. बाथरूम में नहाने के लिए एक स्टूल रख दें जिस पर व्यक्ति नहाते समय आराम से बैठ सकें. पास में सहारे के लिए हैंड रेल भी लगवा दें.
  • व्यक्ति को सुखाते वक्त त्वचा की सलवटों के बीच जरूर सुखाएं. पैर की उँगलियों के बीच सुखाने का भी खयाल रखें.
  • अगर नहलाना आपके और व्यक्ति के लिए थकावट का काम है, तो मौसम और सफाई की जरूरत के अनुसार देखें कि कितनी बार नहलाना चाहिए. रोज रोज पूरा नहाना शायद जरूरी न हो. पर इसका ध्यान रखें कि व्यक्ति साफ रहें, और शरीर पर पसीना और गंद जमा न हो.
  • नहलाते समय व्यक्ति के शरीर को ठीक से देख लें कि कहीं कोई जख्म तो नहीं? कोई खरोंच, कोई दाना, कोई दाग जिससे लगे कि खून कहीं जमा हो रहा है. कुछ हो तो, जैसे उचित हो, डॉक्टर से सलाह करें.

दांतों की देखभाल

  • व्यक्ति को ठीक से दाँत ब्रश करने में और उसके बाद कुल्ला करने में मदद करनी होगी.
  • डेनचर (Denture) की सफाई शायद आपको ही करनी होगी.
  • डिमेंशिया बढ़ने पर आपको डेनचर पहनाने और उतरने में भी मदद करनी होगी. ध्यान रखें कि डेनचर ठीक से फिट होते हों, वरना व्यक्ति के मुंह में छाले पड़ जायेंगे

बनाव-शृंगार

  • साधारण रेज़र (razor) से व्यक्ति अपने आप को काट सकते हैं. बिजली के रेज़र के बारे में सोचें. और अगर व्यक्ति रेज़र इस्तेमाल न कर पा रहे हों तो शेव करने का काम आप कर दें.
  • यदि व्यक्ति बाल ठीक से न बा पाएँ और बाल उलझे रहें तो यह काम भी आपको करना होगा.
  • नाखून काटना व्यक्ति के लिए मुश्किल हो सकता है, क्योंकि यह बारीकी का काम है. यह भी आपको नियमित रूप से करना होगा, वरना बढ़े हुए नाखून से व्यक्ति खुद को खुजा सकते हैं और खरोंच पड़ सकती है.
  • व्यक्ति स्वयं को तैयार न भी कर सकें, पर वो यह पसंद करते हैं कि वे साफ़ सुथरे और अच्छे नज़र आएँ. इस में आपको उनकी मदद करनी होगी, और यह मदद समय के साथ बढ़ती जायेगी.

कपड़े पहनना

  • अलमारी में बहुत ज्यादा कपड़े हों तो उन्हें देख कर व्यक्ति चकरा जाते हैं कि कौन से कपड़े पहनें. अलमारी में कुछ चुने हुए, आरामदेह और पसंद वाले कपड़े ही रखें.
  • जैसे जैसे व्यक्ति के हाथ-पैर का ताल-मेल कम होता जाता है, कपड़े ऐसे चुनें जो आसानी से पहने जा सकें.
  • कपड़े निकाल कर रखते वक्त उसी क्रम में रखें जिसमें उन्हें पहनना होता है.
  • कपड़े इतने लंबे न हों कि चलते हुए या उठते हुए व्यक्ति का पैर फँस जाए और व्यक्ति गिर जाएँ.
  • बिना ज़िप के कपड़े पहनना ज्यादा आसान होता है. बहुत मुश्किल से लगने वाले बटन या बाँधने वाले कपड़े भी पहनने में मुश्किल होते हैं
  • सलवार और पजामा में नाड़े की जगह इलास्टिक का इस्तेमाल करें ताकि पहनना उतारना सिर्फ ऊपर/ नीचे
    खींचने की बात हो.
  • लेस (फीता) वाले जूते न लें, वेल्क्रो वाले जूते लें
  • साड़ी की जगह गाउन पहनाएं

मल/ मूत्र और सफाई रखना

  • डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति समय के साथ अकसर मल/ मूत्र पर सही नियंत्रण नहीं रख पाते और अपने आप को गन्दा कर देते हैं. कभी वे बाथरूम पहुंचने में देर कर देते हैं, कभी भूल जाते हैं कि बाथरूम है कहाँ. कमरे की दीवारों पर, और दरवाजों पर साइन लगा दें, तो उन्हें बाथरूम ढूंढ़ने में आसानी होगी. रात के वक्त नाईट लाइट ऑन रखें. व्यक्ति को ऐसे कपड़े पहनाएं जो जल्दी से और आसानी से उतारे जा सकें
  • कमरे से जुड़ा बाथरूम हो तो आराम हो सकता है. रास्ते में लाइट हो (खासकर रात को), और बाथरूम के लिए रास्ते में और बाथरूम के दरवाजे पर साइन हों तो भी व्यक्ति को बाथरूम ढूंढ़ने में आसानी होगी.
  • कुछ कुछ देर बाद व्यक्ति को बाथरूम ले जाएँ.
  • यह ध्यान रखें कि उन्हें कब्ज (कानस्टिपेशन, constipation) तो नहीं? या शरीर में पानी की कमी तो नहीं (निर्जलता, dehydration). पेशाब का रंग देखें कि गहरा तो नहीं? इसी हिसाब से दिन की खुराक में खाना और पानी बदलें
  • अगर लगे कि व्यक्ति को मल/ मूत्र करते समय दर्द हो रहा है, तो डॉक्टर से सलाह करें
  • इस बात के लिए तैयार रहें कि व्यक्ति कभी कभी नियंत्रण नहीं रख पायेंगे पायेगा और आपको गंदगी साफ करनी होगी. इस काम के लिए जो भी बाल्टी, पोछा, ग्लव, ब्लीच, डेटौल वगैरह चाहिए उसको तैयार रखिये.
  • अगर व्यक्ति ने बचपन में अलग तरह के शौचालय का इस्तेमाल किया है, तो उन्हें नए तरह के बाथरूम का इस्तेमाल अटपटा लगेगा. आप समझाने के लिए तैयार रहें कि कमोड क्या होता है, और उसका कैसे इस्तेमाल करते हैं.
  • कमोड के पास हैंड रेल (hand rail, grab rail) लगाएं, और टोइलेट सीट को ऊँचा कर सकें तो व्यक्ति को आराम रहेगा और गिरने का डर कम होगा.
  • यह ध्यान रखें कि व्यक्ति शौच के बाद अपने आप को ठीक से साफ़ करे और हाथ भी ठीक से धोए. याद न दिलाया तो व्यक्ति यह करना भूल सकते हैं.
  • व्यक्ति को बाहर ले जा रहे हों, तो डाएपर (diaper) के इस्तेमाल के बारे में सोचें, क्योंकि बाहर साफ़ और अच्छा बाथरूम मिलना मुश्किल हो सकता है, और यह व्यक्ति के लिए भी तनाव की बात हो सकती है. डाएपर पहनने और उतरने में व्यक्ति को मदद की जरूरत होगी.

भोजन करना

  • व्यक्ति खाना भूल सकते हैं. अगर आप व्यक्ति के लिए खाना मेज पर छोड़ कर बाहर जाएँ, तो वापस आकर आप शायद यह पाएँ कि व्यक्ति ने खाना नहीं खाया है और उनकी शिकायत है कि किसी ने उन्हें खाना नहीं दिया. हो सकता है व्यक्ति उस स्थिति में पहुंच चुके हैं है जब किसी को साथ बैठकर उन्हें खाना खिलाना हो, व्यक्ति तभी खाना खायेंगे.
  • अगर व्यक्ति पहले चम्मच से खाते था, तो शायद वे अब हाथ से खाएं. खाना भी अब ज्यादा गिरेगा. व्यक्ति बड़े बड़े टुकड़े ठीक से नहीं खा पायेंगे, और हो सकता है आपको खाना छोटे टुकड़ों में काट कर देना पड़े.
  • उठे किनारे वाली थाली का इस्तेमाल करें ताकि खाना गिरे नहीं. भारी थाली दें, ताकि खाते खाते थाली इधर उधर न हो. बड़े हैंडल वाले चम्मच दें. बाकी बर्तन भी ऐसे हों जिनका इस्तेमाल व्यक्ति के लिए, उनकी तालमेल की समस्या के बावजूद, संभव हो.
  • खाना इतना गरम न हो कि व्यक्ति होंठ या गला जला लें. बर्तन भी इतने गरम न हों कि उठाने में हाथ जल जाए. गरम पेय के लिए थर्मस मग का इस्तेमाल शायद ठीक रहे.
  • पानी की बोतल ऐसी दें जिसे सुविधा से पकड़ा जा सके.
  • कई व्यक्ति खाना मिला कर खाना भूल जाते हैं. दाल चावल में मिला कर खाने की बजाए, वे पहले सारी दाल खत्म कर देंगे, फिर दही खत्म कर देंगे, और फिर रूखे चावल को खाना शुरू करेंगे. या सब्जी खत्म करने के बाद, सूखी रोटी खायेंगे. प्लेट पर ज्यादा आइटम होने से वे कन्फ्यूज हो सकते हैं. आपको खाना मिला कर देना पड़ेगा, या आप ऐसे व्यंजन बनाएँ जैसे कि खिचड़ी या संभार-भात या दही भात.
  • डेन्चर ठीक फिट न हों तो चबाने में दिक्कत होने लगेगी, पर व्यक्ति यह नहीं बता पाएंगे कि उन्हें दिक्कत क्यों हो रही है. अगर उनका चलने-फिरना बंद हो चुका है तो नया डेन्चर बनवाना भी मुश्किल होगा. वैसे भी, डेंटिस्ट के सवाल का जवाब देना उनके लिए मुश्किल हो सकता है.
  • उनकी चबाने की दिक्कत बढ़ती जाती है, और बाद की अवस्था में उनका खाना नरम बनाना होगा, और फिर उससे भी आगे की अवस्था में खाने को मिक्सी में चला कर, पनीला करके (liquidised in a mixie) देना पड़ेगा.
  • डॉक्टर से सलाह के अनुसार diet supplements, जैसे कि कैल्शियम और विटामिन (calcium and vitamins) भी व्यक्ति की खुराक में शामिल करें. इंश्योर (Ensure) जैसे संतुलित आहार भी जरूरी हो सकते हैं.

पानी पीना

  • कुछ व्यक्ति बार बार बाथरूम जाने से बचने के लिए पानी पीना बंद कर देते हैं.
  • व्यक्ति पानी पीना भूल भी सकते हैं.
  • आपको ख़याल रखना होगा कि व्यक्ति पर्याप्त मात्रा में पाने लें.
  • अगर व्यक्ति के शरीर में एलेक्ट्रोलायीट (electrolyte, नमक, जैसे सोडियम और पोटेशियम) की कमी है (electrolyte imbalance), जो बढ़ती उम्र में कई लोगों में पायी जाती है, तो डॉक्टर आपसे उनके दिन की खुराक में इसकी पूर्ति करने के लिए electrolyte drinks (ऐसे पेय जिनमें उचित मात्र में सोडियम और पोटेशियम होता है) शामिल करने को कह सकते हैं.

खाना पकाना

  • शरीर के अंगों का तालमेल कम होने की वजह से, और भूलने की समस्या की वजह से, डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति का खाना पकाना खतरनाक हो सकता है. शायद व्यक्ति स्टोव जला छोड़ दें, या गैस ऑन करें पर लाइटर न जलाएं और यह न देखें कि गैस निकल रही है. कपड़ों में आग भी लग सकती है.
  • अगर व्यक्ति खाना बनाना चाहें तो उन्हें रसोई में अकेला न छोड़ें. धीरे धीरे, जैसे जैसे व्यक्ति की क्षमता कम होती है, आग के पास का काम आप खुद पर ले लें.
  • जिन व्यक्तियों को खाना बनानी की आदत है, वे वक्त-बेवक्त रसोई में जाकर गैस ऑन करने की कोशिश कर सकते हैं. रसोई बंद रखें, या गैस के रेगूलेटर को बंद कर दें, या गैस को डिसकनेक्ट कर के रखें ताकि कोई हादसा न हो जाये.
  • अगर व्यक्ति को खाना बनाने का शौक है तो उन्हें ऐसे कामों में व्यस्त रखें जिनमे खतरा न हो, जैसे कि दाल चुगना, मटर छीलना, आटा गूंधना, मेथी के पत्ते साफ़ करना, उबले आलू मसलना. वे यह काम ठीक से नहीं कर पाएंगे, या इधर उधर चीजें गिराएंगे, इस बात के लिए तैयार रहें.

खरीदारी करना

जब व्यक्ति यह भूलने लगें कि वे कहाँ हैं, और हिसाब करने में भी दिक्कत महसूस करने लगें, तब उन्हें खरीदारी के लिए अकेले न जाने दें. आप भी साथ में जाएँ, ताकि उनका लोगों से सम्पर्क बना रहे पर वे सुरक्षित भी रहें. कुछ सुझाव:

  • खरीदारी के लिए व्यक्ति के साथ जाएँ.
  • अगर व्यक्ति बटुआ लेना चाहें तो ध्यान रखें कि उसमें ज्यादा पैसे न हों क्योंकि इसकी काफी ऊँची संभावना है कि व्यक्ति उसे खो देंगे.
  • ऐसी दुकानों पर जाएँ जहाँ व्यक्ति पहले भी जाते थे, जिनसे वे परिचित हैं, और जहाँ दुकानदार उन्हें जानते हों और उनका लिहाज करेंगे.
  • ऐसे समय पर जाएँ जब भीड़ न हो
  • खरीदारी के लिए सूची बनाएँ और व्यक्ति को उसके हिसाब से वस्तुएँ चुनने दें. सूची छोटी रखें और व्यक्ति को वस्तुओं को ढूंढ़ने में मदद करें.
  • व्यक्ति के पास रहें, पर वे जितना भी स्वयं कर सकते हैं, उन्हें करने दें.
  • जब व्यक्ति को बाजार ले जाने मुश्किल हो जाए, तब भी व्यक्ति खरीदारी करने का कुछ मजा उठा सकते हैं:
    • खरीदारी की सूची बनाने के लिए व्यक्ति के साथ बैठें
    • खरीदे हुए सामान को छांटने में व्यक्ति को शामिल करें
    • व्यक्ति को बाजार देखने के लिए कार में या रिक्शा में ले जाएँ. खरीदने के लिए रुकें नहीं, पर बाजार और दुकानों की रौनक साथ में देखें. या पार्क में बेंच पर बैठ कर चहल-पहल और दूसरों को खरीदारी करते देखें.

दवाई लेना

शुरू में आप देखेंगे कि व्यक्ति अपनी दवाई का हिसाब रखने में परेशानी महसूस कर रहे हैं. सुविधा ले लिए उन्हें लेबल लगी छोटी बोतलें दें.

डिमेंशिया के बढ़ने के साथ हम इस पर भरोसा नहीं कर सकते कि व्यक्ति खुद सही दवाई लेंगे. कोई व्यक्ति दवाई लेना भूल जाते हैं, या दो बार ले लेते हैं, या सोचने लगते हैं कि उन्हें तो कोई बीमारी नहीं, तो यह दवाई क्यों, और वे दवाई फेंक देते हैं या छुपा देते हैं. यह आपको देखना होगा कि व्यक्ति सही दवाई सही समय पर लेते रहें. याद रखें कि व्यक्ति कभी कभी दवाई निगलते नहीं और आपके मुंह फेरते ही उसे थूक देते हैं, इसलिए दवाई देते हुए यह भी चेक करें कि व्यक्ति ने दवाई निगल ली है

बाद की अवस्था में गोली सटकना मुश्किल हो जाता है और डॉक्टर से सलाह कर, आपको दवाई मसल कर/ घोल कर देनी होगी.

व्यायाम

  • व्यक्ति के लिए कुछ नियमित शारीरिक हरकत जरूरी है. चलना एक बहुत अच्छा व्यायाम है. व्यक्ति का संतुलन बिगड़ने लगेगा, इसलिए घर में उचित जगह हैंड-रेल लगवाने के बारे में सोचें.
  • शरीर की लचक बनी रहे, और हाथ पैर ठीक काम करें, इसके लिए Range of motion exercises के बारे में फिजियोथैरेपिस्ट या डॉक्टर से पूछें.

अन्य काम

  • पढ़ना व्यक्ति के लिए मुश्किल होने लगता है. बड़े अक्षरों वाली किताबें लाएं, और ज्यादा चित्रों वाली किताबें भी लायें. किताबों के टेप भी मिलते हैं. या आप उनके साथ बैठ कर किताब पढ़ें. इसमें आप दोनों को मजा आ सकता है.
  • लिखना भी डिमेंशिया के बढ़ने पर मुश्किल हो जाता है. आगे की देखभाल के लिए प्लान बनाते हुए इस बात का ध्यान रखें कि ऐसे अकाउंट न हों जहाँ व्यक्ति के साईन (हस्ताक्षर) के बिना काम न चल सके. व्यक्ति से उसके साईन की रोज प्रैक्टिस कराएं. पर प्रैक्टिस कराने के बावजूद व्यक्ति धीरे धीर प्रैक्टिस में ज्यादा गलतियां करेगा और फिर साईन करना भूल जायेंगे. वे अपना नाम भूलने लगेंगे.
  • हिसाब रखना भी व्यक्ति के लिए मुश्किल होने लगता है, और वे गिनती करने में गलती करने लगता है. यह व्यक्ति के लिए तनाव पैदा कर देता है.
  • घूमने के लिए जाना व्यक्ति के लिए मजेदार हो सकता है, पर अगर आप इसके लिए सही आयोजन न करें तो यह मौका तनाव पैदा कर सकता हैं. आपको बाहर जाने के लिए काफी सोच-विचार और प्रबंध करने होंगे, ताकि व्यक्ति सैर का आनंद उठा सकें. भीड़ से बचें, और ट्रिप को ज्यादा लंबा न होने दें. खुला पार्क या खुली सड़क पर ड्राइव करने का आनंद भी उठाया जा सकता है. यह देखते रहें कि व्यक्ति सहज हैं या नहीं, और इस प्रोग्राम के बाद व्यक्ति कितना थके थे या कितना खुश हुए थे, उसी हिसाब से आगे के घूमने के प्रोग्राम बनाएँ
  • पैसे संभालना भी व्यक्ति के लिए मुश्किल हो जाता है क्योंकि व्यक्ति चीज़ों के मूल्य नहीं समझ पाते. दस रुपये और हज़ार रुपये का अंतर व्यक्ति को ठीक से समझ में नहीं आता. डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति कभी कभी अपने सामान को बेच डालते हैं, घर को कम कीमत में बेच डालते हैं, और फिर मिला हुआ पैसा खो देते हैं, वे जेवर खो देते हैं या मुफ्त में बांटते फिरते हैं. इस बेध्यानी की वजह से चोरी या डाके का खतरा भी बढ़ जाता है. उनकी सुरक्षा के लिए अच्छा यही है कि उनके पास ज्यादा पैसे या जरूरी कागजात या जेवर न हों, और अन्य लोग भी यह जानें कि इस बुज़ुर्ग पर हमला करने का कोई फायदा नहीं, इनके पास चुराने लायक कुछ भी नहीं है.

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इनको भी देखें…

हिंदी पृष्ठ, इसी साईट से:

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कुछ उपयोगी इंटरव्यू:

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