डिमेंशिया की बढ़ती और बदलती अवस्थाओं के लिए देखभाल की तैयारी करना (Plan care for various stages of dementia)

डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति को डिमेंशिया की अवस्था के हिसाब से देखभाल चाहियेगी.

देखभाल करने वाले क्या कर सकते हैं: डिमेंशिया की अवस्थाएं समझें और यह भी समझें कि किस अवस्था में देखभाल किस तरह की चाहियेगी. फिर देखभाल करने के लिए उसी हिसाब से प्लान बनाएँ. यह देखें कि घर को कैसे बदलना होगा, देखभाल में कितना टाइम लगेगा और क्या क्या काम करने होंगे. किन सेवाओं की जरूरत पड़ेगी, और आपको देखभाल के कौनसे तरीके सीखने होंगे, यह भी समझें.

जैसे जैसे डिमेंशिया (मनोभ्रंश) का कारक रोग बिगड़ता जाएगा, व्यक्ति के लक्षण चिंताजनक होते जायेंगे, और देखभाल का काम अधिक होता जाएगा. बदलती/बिगड़ती अवस्थाओं के अनुसार देखभाल की जरूरत भी बदलती रहेंगी. देखभाल करने वालों को प्लान करते समय यह ध्यान में रखना होगा कि किस अवस्था में क्या जरूरत होगी. (अवस्थाओं के बारे में पढ़ें: डिमेंशिया के चरण/ अवस्थाएं)

इस पृष्ठ पर:

डिमेंशिया की अवस्था के साथ साथ देखभाल के तरीके बदलते हैं

डिमेंशिया देखभाल सालों साल चलती है. शुरू में डिमेंशिया का असर कम होता है और बाहर वालों को अंदेशा भी नहीं होता कि कुछ प्रॉब्लम है. पर समय के साथ, जैसे जैसे हालत खराब होती है, मदद की मात्रा बढनी होती है. वैसे तो डिमेंशिया कैसे पेश आएगा, यह हरेक व्यक्ति में फ़र्क होता है, फिर भी मोटे तौर पर डिमेंशिया को हम तीन मुख्य अवस्थाओं में बांटते हैं ताकि देखभाल कैसे करें, इस पर चर्चा कर पाएँ. यह तीन अवस्थाएं हैं: आरंभिक, मध्यम, और अग्रिम/ अंतिम अवस्था.

Dr. Jane Tolman (School of Medicine, University of Tasmania) के अनुसार हमें डिमेंशिया अवस्थाओं पर चर्चा करते वक्त यह देखना चाहिए कि हर अवस्था में देखभाल किस पहलू पर केंद्रित होनी चाहिए. यानी कि, देखभाल का उद्देश्य भी डिमेंशिया की अवस्था के साथ बदलना चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया है कि अवस्था के अनुसार देखभाल के उद्देश्य ऐसे हों:

  • आरंभिक अवस्था: व्यक्ति की मर्यादा बनाए रखें. उनके आसपास का माहौल ऐसा रखें जिससे व्यक्ति, जिस हद तक हो सके, अपने निर्णय खुद लें, और अपने काम खुद कर पाएँ. व्यक्ति अपनी जिन्दगी अपनी तरह से जी पायें, इसके लिए उन्हें समर्थन दें. (focus on maintaining independence and enjoyment of the person with dementia)
  • मध्यम अवस्था: व्यक्ति को सुरक्षित रखें. शायद इस स्थिति में व्यक्ति खुद को या दूसरों को खतरे में डालें. देखभाल करते हुए इस बात पर केंद्रित रहें कि व्यक्ति की घटती क्षमता और घटती सोचने-समझने की शक्ति के कारण उन्हें या किसी दूसरे को कोई नुकसान न पंहुचे(focus on ensuring safety)
  • अग्रिम/ अंतिम अवस्था: व्यक्ति चैन और आराम से रह पाएँ, इस पर ध्यान दें. यदि दवाई और अन्य इलाज से व्यक्ति को तकलीफ होती हो, तो ये जरूरत से ज्यादा न करें. व्यक्ति इस अंतिम चरण में गरिमा से जी पाएँ, इस पर फोकस करें (focus on comfort, dignity, and quality of life)

यह याद रखें कि डिमेंशिया को अवस्थाओं में सिर्फ सुविधा के लिए बांटा जाता है, ताकि स्थिति समझने में और देखभाल के बारे में सोचने में आसानी हो. यह कोई सख्त सीमा नहीं हैं. अलग अलग व्यक्ति अलग अलग लक्षण दिखाते हैं और उनको रोग भी अलग अलग तरह से बढ़ता है. परिवारों में भी बहुत अंतर होते हैं, और देखभाल में क्या उचित है, इस पर उनके नज़रिए काफी फ़र्क होते हैं. अपने परिवार की मान्यताओं के हिसाब से, और व्यक्ति के व्यक्तित्व और गरिमा को ध्यान में रख कर निर्णय लें.

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शुरुआती/ प्रारंभिक अवस्था में डिमेंशिया देखभाल

प्रारंभिक अवस्था की देखभाल के लिए योजना व्यक्ति और परिवार वाले दोनों मिल कर बना सकते हैं. इस अवस्था में व्यक्ति अपनी स्थिति को समझ सकते हैं, डिमेंशिया को ज्यादा अच्छी तरह समझ सकते हैं, और लोगों को बता सकते हैं कि आगे के दिनों में वे क्या चाहते हैं. वे उसके अनुसार प्रबंध कर सकते हैं. परिवार काले व्यक्ति को सार्थक, गरिमा-पूर्ण, और आत्म-निर्भर जिंदगी बिताने में मदद कर सकते हैं. वे आगे की अवस्था के लिए भी तैयार हो सकते हैं, जब उन्हें व्यक्ति की अधिक सहायता करनी होगी.

early dementia patients can plan finances for later stages

व्यक्ति डिमेंशिया की सच्चाई समझ सकते हैं और उसे स्वीकार सकते हैं. वे सुरक्षित और सार्थक जीवन बिताने के तरीके अपना सकते हैं. प्रारंभिक लक्षण मंद होते हैं. डिमेंशिया वाले व्यक्ति इस अवस्था में काफी हद तक आत्म निर्भर रह सकते हैं और अपने काम अकेले या हल्की सी मदद के साथ कर सकते हैं. पर याददाश्त की समस्या बढ़ सकती है या उनके सोचने और निर्णय लेने की क्षमता कम हो सकती है. बोलने और बात समझने में समस्या हो सकती है. मूड अजीब हो सकते हैं. व्यक्तित्व में बदलाव हो सकते हैं. अच्छी बात यह है कि इस अवस्था में कुछ लोगों में दवाइयाँ लक्षण कम करने में ज्यादा कारगर होती हैं, और कई व्यक्तियों में याददाश्त की तकलीफ दवाई से कम हो सकती हैं.

व्यक्ति जब डिमेंशिया का निदान समझ पाते हैं तो यह भी जान जाते हैं कि उनकी तकलीफें डिमेंशिया के रोग के कारण हैं. वे डिमेंशिया की स्थिति को स्वीकार कर, सोचना शुरू कर सकते हैं कि अब वे किस तरह के काम के लिए और कैसी जिंदगी के लिए अपना टाइम इस्तेमाल करेंगे. सुरक्षित रहते हुए वे क्या क्या कर सकते हैं. वे खुद से अपनी उम्मीदें उसी प्रकार बदल सकते हैं और अपनी गतिविधियां भी बदलना शुरू कर सकते हैं. उन्हें शायद इस काम में कुछ मदद भी लेनी होगी.

शायद कुछ व्यक्ति अपनी पसंद की गतिविधियों पर ज्यादा काम करें और दूसरे काम छोड़ दें. शायद कुछ लोग कुछ ऐसा करें जो वे चाहते थे और जिसके लिए उन्हें पहले टाइम नहीं मिला था. या शायद वे जिंदगी की गति धीमी करना छाते हैं, और प्रियजनों के साथ ज्यादा समय बिताने चाहते हों. कुछ को डिमेंशिया जागरूकता के क्षेत्र में काम करने लगते हैं. इस अवस्था में निदान हो, तो शायद व्यक्ति अपनी पसंद से अपनी दिशा का चयन कर पाएँ और आगे के लिए अपनी इच्छा भी दूसरों को बता पाएँ.

व्यक्ति अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए कदम उठा सकते हैं.डिमेंशिया के कारण क्षमताएं कम होंगी और निर्भरता बढ़ेगी. इसके बारे में जानने पर, व्यक्ति अपने भविष्य का लिए जरूरी बदलाव कर सकते हैं. जैसे कि, अगर वे नौकरी कर रहे हैं या उनका कोई कारोबार है, तो वे अपने कारोबार या करियर की गति कम करके अन्य लोगों को काम सोंपना शुरू कर सकते हैं. अकेले रह रहे हों तो सोच सकते हैं कि आगे, जब उनकी निर्भरता बढ़ेगी, तब वे बच्चों के साथ रहेंगे या कुछ और रहने का प्रबंध करेंगे. इसके लिए वे जानकारी प्राप्त करना और इंतजाम करना शुरू कर सकते हैं. परिवार वालों से सलाह कर सकते हैं. जरूरी कानूनी कागज भी तैयार कर सकते हैं, पैसों, बैंक, टैक्स, और पूंजी निवेश के मामलों को सरल कर सकते हैं/ सुलझा सकते हैं, वसीयत बना सकते हैं, वगैरह. वे परिवार वालों से खुल कर चर्चा कर सकते हैं कि आगे की देखभाल वे किस तरह की चाहते हैं, खास तौर से जीवन-अंत वाले निर्णय.

शुरुआती डिमेंशिया में व्यक्ति को सक्षम रहने में मदद करें, ताकि वे जितना हो सके, अपने काम खुद कर सकें.इस अवस्था में सहायता की जरूरत कम होती है. देखभाल करने वाले व्यक्ति को सार्थक और खुशहाल जीवन बिताने में मदद कर सकते हैं.

early dementia patients can use clocks for reality orientation

घर में बदलाव के लिए प्लान करें. घर में ऐसे बदलाव करें जिन से व्यक्ति को जगह और समय का बोध हो, ताकि वे कन्फ्यूज न हों और अपने काम खुद कर पाएँ. शुरुआती डिमेंशिया में समय और स्थान का बोध कराने के लिए वास्तविकता बोध (“Reality orientation”) कारगर रहता है . व्यक्ति इस अवस्था में भिन्न प्रकार के रिमाइनडर इस्तेमाल कर सकते हैं. बड़ी और आसानी से पढ़ी जाने वाली घड़ी लगाएं. कैलेंडर लटकाएं. काम करने में उनकी मदद के लिए चार्ट बनाएँ, जिनमे काम के सभी कदम क्रम में दिए गए हों (जैसे कि चाय कैसे बनाते हैं). कमरों पर, और अन्य चीज़ों पर (जैसे कि बिस्कुट के डब्बे पर) लेबल लगाएं. सूचियाँ बना कर सुविधा के लिए लटकाएं. रोज की दवाई अलग अलग डिब्बियों में रखें, वगैरह. घर को साफ रखें ताकि ज्यादा सामान देख व्यक्ति घबराएं नहीं. दैनिक कार्यों में जरूरी विकल्प कम करें जिस से पसंद का विकल्प चुनना आसान हो. देखें कि व्यक्ति को किस तरह के काम में दिक्कत हो, और उससे सम्बंधित विकल्प कम करें. घर में बेकार का फैला सामान कम करें. दिक्कत होने पर व्यक्ति जिस से सम्पर्क कर सकें, ऐसे लोगों और सेवाओं के फोन नंबर प्रदर्शित करें.

ऐसे बदलाव और तरीके अपनाएँ जिन से व्यक्ति जिस हद तक संभव हो, अपना काम खुद (या थोड़ी सहायता के साथ) कर पाएँ . इस अवस्था में व्यक्ति अपनी तकलीफें समझा सकते हैं. और आप भी देख सकते हैं कि व्यक्ति क्या कर पा रहे हैं और उन्हें किसी भी कार्य के किस कदम पर दिक्कत हो रही है. व्यक्ति कब चकरा या घबरा जाते हैं, कब उनके काम करने की गति धीरे हो जाती है, इस को ध्यान से देखें. इस से आप सोच पायेंगे कि क्या बदलना चाहिए और किस वक्त और कितनी मदद करनी चाहिए. कोशिश यही करें कि व्यक्ति को उतनी ही मदद दें जितनी जरूरी हो, ताकि व्यक्ति खुद को सक्षम समझें और जितना हो सके, उतना आत्म निर्भर रहें.

बाद की देखभाल के लिए तैयारी शुरू कर दें.. शुरुआती अवस्था में देखभाल कम होती है और आपको व्यक्ति के साथ पूरे वक्त नहीं रहना पड़ता. काम भी इतना नहीं होता. आप इस अवस्था में टाइम लगा कर डिमेंशिया और उसके असर को ठीक से समझ सकते है, देखभाल के तरीके सीख सकते हैं, उचित देखभाल योजना बना सकते हैं, और अपनी जिंदगी में कुछ जरूरी परिवर्तन भी शुरू कर सकते हैं.

डिमेंशिया को समझें और जानकारी प्राप्त करें, और देखभाल के तरीके सीखें. कुछ बिंदु:

  • डिमेंशिया के बारे में जानकारी प्राप्त करें. विभिन्न किस्म के लक्षण के बारे में जानें, और यह भी समझें कि डिमेंशिया का व्यवहार पर किस तरह का असर हो सकता है. दवाई से किस तरह का फर्क पड़ सकता है, और वे कम कारगर होती हैं, कब नहीं, इस सब के बारे में भी जानकारी प्राप्त करें.
  • व्यक्ति की बीमारियों को और दवाइयों को ठीक से समझें. हो सकता है अब तक आपको इन्हें समझने की जरूरत न पड़ी हो, पर कुछ दिनों में व्यक्ति को अपनी मेडिकल हिस्ट्री याद नहीं रहेगी. जैसे कि, शायद किसी को याद न रहे कि वह उच्च रक्तचाप का मरीज़ है, और उसके लिए दवाई लेता है. यह सब कुछ दिनों बाद आपको ही संभालना होगा.
  • व्यक्ति का निजी इतिहास भी समझें. चाहे आप व्यक्ति को सालों से जानते हों, हो सकता है कि व्यक्ति ने अपनी पुरानी बातें आपको न बतायी हों, पर डिमेंशिया जब बढ़ेगा तो व्यक्ति की कई बातें और यादें उन गुजरे हुए सालों की होंगी. अगर आप उनके बारे में जानते हों तो आप व्यक्ति की जरूरतें और बातें ज्यादा अच्छी तरह से समझ पायेंगे.
  • व्यक्ति के जीवन में ज्यादा शामिल होना शुरू कर दें, ताकि व्यक्ति को आपकी मौजूदगी की आदत पड़ने लगे.
  • व्यक्ति की ज़िंदगी के बारे में ज़्यादा सीखें, ताकि आप जान पाएँ कि उन्हें कहाँ मदद की जरूरत पड़ सकती हैं, और जरूरत पड़ने पर आप उनके कार्यों को उनके लिए संभाल सकें, जैसे कि टैक्स भरना, बिल का भुगतान करना, वगैरह.
  • डिमेंशिया वाले व्यक्ति के कैसे बातचीत करें, यह सीखें. अपने बात करने के तरीके को उस हिसाब से बदलें. दैनिक कार्यों में कैसे मदद करें, और साथ में गतिविधियां कैसे करें, यह भी सीखें. मुश्किल व्यवहार क्यों होते हैं और उन्हें कैसे संभालें, इस पर भी जानकारी प्राप्त करें.

विशेष नोट: डिमेंशिया के बढ़ने पर अधिकांश लोगों को साईन करने में दिक्कत होने लगती है, और मध्य/ अग्रिम डिमेंशिया में आते आते व्यक्ति का हस्ताक्षर (सिग्नेचर, signature) बिगड जाएगा. इससे चेक साईन करने में, और अन्य कागज़ी कार्यवाही में दिक्कत हो सकती है, जैसे कि बैंक डिपोजिट बंद करके पैसे निकालने में. ऐसी दिक्कत से कैसे बचेंगे, यह सोच कर रखिये. अपने कंसल्टेंट से सलाह करके उचित कदम उठायें. जितना हो सके , व्यक्ति का पैसा या कीमती सामान (कागज़, जेवर, वगैरह) जोइंट अकाउंट में रखें, या जोइंट लाकर में. कुछ एक्स्ट्रा चेक भी साईन करवा के रखें, शायद जरूरत पड़े.

आगे की अवस्था की देखभाल के लिए तैयार होना शुरू कर दें. जब डिमेंशिया बढ़ेगा, तो देखभाल भी बढ़ेगी. इसकी तैयारी के कुछ उदाहरण:

  • घर को और करियर को कैसे संभालेंगे, यह सोचें. शायद आपको अपने करियर में कुछ बदलना हो (जैसे पार्ट-टाइम काम करना, या घर से काम करना, या ऐसी नौकरी करना जिसमे शहर से बाहर न जाना पड़े). यह बदलाव शुरू कर दें.
  • व्यक्ति के जीवन के अन्य क्षेत्रों को भी समझें, जो कुछ दिनों बाद आपको संभालने होंगे, जैसे कि टैक्स और इन्वेस्टमेंट. व्यक्ति के टैक्स और इन्वेस्टमेंट संभालने कि लिए उचित तरीके सोच लें, और तैयारी कर लें.
  • व्यक्ति के लिए ऐसा डॉक्टर ढूंढें जो स्थिति समझे, और जो आने वाले सालों में सलाह दे पाए जब व्यक्ति अपनी दिक्कतें बता नहीं पायेगा. ऐसा डॉक्टर हो जो घर आ सके, तो अच्छा होगा.
  • ऐसे सामान इकट्ठे कर लें जो व्यक्ति को बीते दिनों की यादें दिलाने में काम आ सकें, या उसे खुश रख सकें, जैसे के फोटो, उनके स्कूल या ऑफिस में मिले अवार्ड, पुराने गाने और फिल्म, और अन्य जो भी वस्तु काम आ सके.
  • दोस्तों, पड़ोसियों, रिश्तेदारों, सहकर्मियों को व्यक्ति की समस्या के बारे में बताना शुरू कर दें ताकि वे उनकी गलतियों का मजाक न उडाएं, और अनजाने में व्यक्ति पर दबाव न डालें.
  • स्व-देखभाल के लिए भी तैयारी शुरू कर दें. (इस पर इस पृष्ठ के दूसरे सेक्शन में भी चर्चा है)
  • एमरजेंसी के लिए तैयार रहें

व्यक्ति की हालत कैसे बिगड रही है, इसके बारे में सतर्क रहें. शुरुआती अवस्था में व्यक्ति अपने कई काम खुद कर पाते हैं, और मदद चाहिए भी तो बहुत कम. पर उनके डिमेंशिया रोग के कारण उनके मस्तिष्क की हानि बढ़ती रहती है और व्यक्ति की काबिलीयत कम होती जाती है. देखभाल करने वालों को सतर्क रहना होता है, ताकि व्यक्ति की हालत के अनुसार वे देख सकें कि व्यक्ति किस काम को अकेले कर सकते हैं, और किस में उन्हें अब मदद चाहिए. घर में उचित बदलाव करते रहना होगा. व्यक्ति के इर्द गिर्द के लोग भी सतर्क रहें तो अच्छा होगा, ताकि कुछ समस्या हो तो तुरंत देखभाल करने वालों को बता पाएँ. आपको व्यक्ति को खतरों से बचाना होगा. वे कभी कभी जरूरी चीज़ें भूल जायेंगे, या गलतियाँ करेंगे, और उन्हें एहसास नहीं होगा कि कुछ गड़बड़ है.

सतर्क रहने के कुछ क्षेत्र (इन सब पर अधिक चर्चा हमारे “घर में बदलाव” पृष्ठ पर है. लिंक नीचे के “इन्हें भी देखें” सेक्शन में देखें):

  • वाहन चलाना: यदि व्यक्ति कोई वाहन चलाते हैं तो सतर्क रहें कि क्या वे अब भी वाहन चलाने के काबिल हैं या नहीं. डिमेंशिया के कारण व्यक्ति रास्ता भूल सकते हैं, या वाहन पर नियंत्रण खो सकते हैं या ट्राफिक साइन मिस कर सकते हैं जिससे उन्हें या अन्य लोगों को खतरा हो सकता है.
  • धूम्रपान करना: यदि व्यक्ति धूम्रपान करते हैं तो सतर्कता बहुत जरूरी है, क्योंकि बेध्यानी / कन्फ्यूज़न में ये आग लगा सकते हैं. व्यक्ति के धूम्रपान को कम या बंद कारण होगा, और यह भी देखना होगा कि यदि व्यक्ति धूम्रपान करें, तो कोई खतरा न हो. इस पर जितनी जल्दी हो सके, सोचना और कदम उठाना शुरू कर दें क्योंकि धूम्रपान एक लत है, और इस तरह के परिवर्तन में समय लगता है.
  • निजी सफाई, दवाई, खाना पीना: अकसर व्यक्ति इन मामलों में गलतियाँ करने लगते हैं, और परिवार वाले इन के बारे में नहीं जानते क्योंकि सतही तौर पर, जब तक समस्या गंभीर न हो, सब ठीक ही लगता है. नहाना ठीक नहीं होता, दवाई बंद कर देते हैं, गलत लेते हैं या दो बार ले लेते हैं, खाना भूल जाते हैं, पानी कम पीते हैं. आपको खास तौर पर ध्यान रखना होगा कि वे खाना ठीक से खा रहे हैं, और अपनी दवाइयाँ भी सही मात्रा में और नियमित रूप से ले रहे हैं. व्यक्ति अकेले रह रहे हों तो इस तरह की प्रॉब्लम और भी मुश्किल से पकड़ में आती है. एक ही घर में हों, तब भी परिवार वाले शायद यह न सोचें कि पापा अब नहाते वक्त सिर्फ चेहरा धो कर बाहर आ रहे हैं, या बीपी की दवाई रोज कूड़ेदान में फ़ेंक रहे हैं. सतर्क रहना जरूरी है.
  • कुछ अन्य तरह की खतरनाक गलतियाँ: कई ऐसे काम है जो हम सामान्य तौर से करते हैं और खतरनाक नहीं समझते, पर सोचने-समझने और याद रखनी के समस्या हो, या शरीर का समन्वय ठीक न हो, तो ऐसी गलतियाँ हो सकती हैं जिन से खतरा हो. एक उदाहरण है खाना बनाना, जिस में आग लगे का दर है, या व्यक्ति खुद को जला सकते हैं, या काट सकते हैं. आप यह सोचें कि व्यक्ति दिन भर में किस किस तरह के काम कर रहे हैं, और उन में कौन से ऐसे काम हैं जिन में डिमेंशिया के घटती क्षमताओं से खतरा पैदा हो सकता है. व्यक्ति इन कामों को कैसे कर रहे हैं, उस पर नजर रखें, और उचित कदम उठायें ताकि व्यक्ति सुरक्षित रहें, और जितना संभव हो, काम भी कर पाएँ.

निदान मिल जाए तो शुरुआती अवस्था की देखभाल कारगर रूप से करी जा सकती है. पर निदान न हो तो व्यक्ति या परिवार को पता नहीं चलेगा कि जो लक्षण हैं, जो अजीब बातें हैं, समस्याएँ हैं, ये किसी रोग की वजह से मस्तिष्क में हो रही हानि की वजह से हैं. योजना नहीं बन पायगी, इंतजाम नहीं हो पायेंगे. अफ़सोस, भारत में शुरू की अवस्था में निदान कम ही हो पाता है, और लक्षण को बढ़ती उम्र की सामान्य तकलीफ समझ कर नजरंदाज कर दिया जाता है. डॉक्टर से सलाह नहीं ली जाती. डॉक्टर के पास जाने पर भी कई बार सही निदान नहीं मिलता. जैसे जैसे भारत में डिमेंशिया के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, उम्मीद है डिमेंशिया से ग्रस्त लोगों को शीघ्र निदान मिल पायेगा.

शुरू की अवस्था में व्यक्ति अपनी देखभाल की योजना बनाने में एक सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं, खास तौर से यदि डिमेंशिया पर अधिक और सही जानकारी मिल पाए और समाज में भी डिमेंशिया की स्वीकृति अधिक हो और लोग शर्म न महसूस करें. व्यक्ति यदि डिमेंशिया पूरे तरह न भी समझ पाएँ, वे कम से कम लक्षण छुपाने की कोशिश नहीं करेंगे. कुछ हद तक अपनी समस्याओं पर खुल कर बात कर सकेंगे और मदद लेंगे, और अपनी पसंद नापसंद बताने की कोशिश करेंगे.

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मध्यम अवस्था में डिमेंशिया देखभाल

डिमेंशिया की मध्यम अवस्था में देखभाल अकसर बहुत तनावपूर्ण होती है. इस अवस्था में व्यक्ति बार बार भूल जाते हैं कि उन्हें डिमेंशिया है, पर आस पास की बातें ठीक से नहीं समझ पाते, इसलिए बहुत परेशान रहते हैं. उनकी क्षमताएं घटती जाती हैं और समस्याएं बढ़ती जाती हैं, और वे खुद को और दूसरों को खतरे में डाल सकते हैं.

यह समझें कि बदले और चिंताजनक व्यवहार डिमेंशिया के मध्यम अवस्था में आम हैं, व्यक्ति को सुरक्षित रखना देखभाल का एक अहम भाग है. अगर व्यक्ति अपने निदान को समझ पाते हैं तो वे अपनी समस्याएं दूसरों को बता सकते हैं, और देखभाल कर्ता पर भरोसा कर सकते हैं. देखभाल कर्ता जब मदद करने की कोशिश करें, तो वे सहयोग देंगे. वे पसंदीदा गतिविधियों में आनंदमय उठाने की कोशिश करेंगे.

देखभाल करने वालों को यह समझना होता है कि व्यक्ति तो कई कठिनाइयों का सामना कारण पड़ रहा है. कुछ डिमेंशिया वाले व्यक्ति अपनी स्थिति समझ पाते हैं और पहचान पाते हैं कि उन्हें खतरे भी हैं और मदद की जरूरत भी–वे फिर देखभाल कर्ताओं के साथ सहयोग कर पाते हैं. पर अधिकांश व्यक्ति ऐसा नहीं कर पाते. वे या तो डिमेंशिया को समझ नहीं पाते या वे भूल जाते हैं कि उन्हें डिमेंशिया है, या वे अपनी समस्याओं की वजह से इतने परेशान हो जाते हैं कि हमेशा उत्तेजित रहते हैं या अपने में सिकुड़ से जाते हैं. चिंताजनक व्यवहार बहुत बढ़ जाता है. भटकने की, भ्रमित होने के कारण शक करने की, चोरी का आरोप लगाने की, इस तरह की समस्याएं आम हैं. याददाश्त की समस्या की वजह से बात बात में कन्फ्यूज भी हो जाते हैं. उन्हें घबराहट हो सकती है, लोगों से भय हो सकता है. वे अपनी तकलीफें नहीं बता पाते. मध्यम अवस्था की देखभाल के बारे में योजना बनाते वक्त, देखभाल कर्ताओं को यह सब समझना होता है, और इस के मुताबिक़ ही योजना बनानी होती है.

मध्यम अवस्था की देखभाल ले लिए तैयार इसके लिए घर में उपयुक्त बदलाव करें, और व्यक्ति की उनके दैनिक कामों में मदद करें और उन्हें सुरक्षित भी रखें.

घर में भी बदलाव करने होंगे.वास्तविकता बोध के लिए पहले करे गए बदलाव इस अवस्था में शायद कारगर न रहें. क्योंकि व्यक्ति चल-फिर सकते हैं, वे अपने को चोट लगा सकते हैं. घर में क्या क्या है जी से उन्हें खतरा हो सकता है, आपको यह ध्यान से देखना होगा, और फिर उसी हिसाब से बदलाव करने होंगे ताकि घर व्यक्ति के लिए सुरक्षित स्थान हो और सुविधाजनक भी. रचनात्मक तौर से सोचें. व्यक्ति के कपड़े आसानी से पहने जाने चाहियें. घर से भटकने की संभावना कम होनी चाहिए. व्यक्ति के इर्द गिर्द बेकार के विकल्प कम करें, बेकार का सामान हटा दें, ताकि व्यक्ति पर तनाव कम हो. देखें कि व्यक्ति को घर में घूमने फिरने और काम करने में किस तरह की दिक्कतें होती हैं और उसी अनुसार बदलाव करें. यदि देखभाल के लिए सहायक रखा है, तो ध्यान दें कि सहायक के लिए भी पर्याप्त जगह हो और सुरक्षा भी बनी रहे.

व्यक्ति से बातचीत के लिए, और उनकी मदद करने के लिए और बदले व्यवहार के लिए उपयुक्त तरीकों का इस्तेमाल करें यह न सोचें कि व्यक्ति के साथ सामान्य बातचीत और मदद के तरीके काम करेंगे. डिमेंशिया के कारण व्यक्ति के सोचने समझने का ढंग फर्क है, और आपको उसके लिए जो उचित है, वैसा तरीका अपनाना होगा, वरना व्यक्ति आपकी बात नहीं समझेंगे और आपको और व्यक्ति को, दोनों को दिक्कत होगी. यह कर पाने के लिए आपको बातचीत करने का, मदद करने का, और मुश्किल व्यवहार संभालने के तरीके सीखने होंगे. मध्यम अवस्था में अधिकांश लोगों में बदले व्यवहार एक बड़ी चुनौती पेश करते हैं, और इन को समझ पाना और संभाल पाना देखभाल का एक बड़ा भाग होता है

व्यक्ति के लिए उचित दैनिक दिनचर्या बनाएँ दिनचर्या ऐसा हो जिसमे दिन के सब जरूरत कार्य हों, और जिससे व्यक्ति को यह आश्वासन मिल पाए कि दिन में क्या क्या और कब कब होगा, यह सुनिश्चित है. व्यक्ति को यह डेली टाइमटेबल याद न भी रह पाए, तब भी उन्हें इसकी आदत सी पड़ जायेगी, और उनका तनाव कम होगा. दिनचर्या ऐसा हो जिससे थकान न हो और व्यक्ति सक्रिय रह पाएँ पर थके नहीं. कुछ व्यायाम (जैसे के घूमना) जरूर शामिल करें, उससे बेचैनी घटती है.

दिनचर्या बनाते समय व्यक्ति की क्षमताओं का, और पसंद-नापसंद का ख़याल रखें. व्यक्ति की क्षमताएं बदलती जायेंगी, और दिनचर्या भी उसके हिसाब से बदलते रहना होगा.

व्यक्ति के साथ, जरूरत हो तो कोई देखभाल के लिए दिन भर मौजूद रहे, यह इंतज़ाम करना होता है. मध्यम अवस्था डिमेंशिया के व्यक्ति अकसर अकेले नहीं छोड़े जा सकते. उन्हें मदद न भी चाहिए हो, पर फिर भी यह खतरा रहता है कि वे खुद को नुकसान पहुँचा लेंगे. पास में कोई और हो, तो नज़र रख सकता है कि ऐसी कोई गड़बड़ न हो. इस का मतलब यह कि चाहे देखभाल के लिए कोई काम कारण हो या नहीं, परिवार में से किसी एक को घर पर रहना होता है. छोटे मोटे बाहर के काम कर पान मुश्किल हो जाता है, जैसे कि सब्जी खरीदना, बैंक से पैसे निकालना, वगैरह. हर काम के लिए सोचना पड़ता है–यह कारण है तो घर में पापा के पास उस वक्त किस को छोड़ें? सहायक के होने से आराम हो सकता है, या फिर परिवार वालों का और मित्रों का इतना बड़ा ग्रुप हो कि सब बारी बारी से काम बाँट सकें. या फिर डे केयर जैसे सेवाओं का इस्तेमाल कारण होता है.

डिमेंशिया बिगड़ता जाता है, और स्थिति बदलती जाती है, इसलिए नियमित समीक्षा (रिव्यू, review) जरूरी है यह सभी पहलुओं के लिए कारण चाहिए.

व्यक्ति अपने कामों को कैसे करते हैं, और निजी सफाई कैसे रह पाते हैं, यह देखते रहें. मदद को स्थिति के हिसाब से बदलते रहें. समय के साथ व्यक्ति की क्षमताएं कम होंगी और मदद की जरूरत बढेगी. व्यक्ति काम कैसे करते हैं, यह ध्यान से देखें, ताकि आप जान पाएँ कि किस काम में ज्यादा दिक्कत हो रही है, और किस तरह के काम में अब खतरा ज्यादा है. मदद करने के तरीके बदलने होंगे, घर में बदलाव करते रहना होगा, बाहर से मदद की जरूरत भी पड़ सकती है.

व्यक्ति की चिकित्सिक स्थिति का रिव्यू (समीक्षा) करते रहें. व्यक्ति को पहले से ही कुछ बीमारियाँ होंगी, उनकी स्थिति देखें. उम्र बढ़ने के साथ साथ कई बीमारियां हो सकती हैं– देखें कि कोई नयी बीमारी तो नहीं हो गयी? चश्मे का नंबर अब भी ठीक है? आँख ठीक है? कैटरैक्ट या ग्लुकोमा तो नहीं? हीअरिंग एड ठीक है? दांतों की हालत कैसी है, डेन्चर ठीक बैठ रहा है या नहीं? यह भी देखें कि किसी दवाई का कोई दुष्परिणाम तो नहीं? इस सब के लिए डॉक्टर से नियमित जाँच और उचित उपचार करवाएं. नियमित चेकअप बहुत जरूरी है क्योंकि व्यक्ति बता नहीं पायेंगे कि कोई समस्या है. कुछ निर्णय भी जरूरी होंगे, जैसे कि कैटरैक्ट का ऑपरेशन अभी करवाएं या बाद में…अभी कैटरैक्ट पका नहीं है और ऑपरेशन जरूरी नहीं हैं पर देर करी तो व्यक्ति शायद ऑपरेशन संभाल नहीं पायेंगे, और फिर कैटरैक्ट की वजह से देखना भी बंद हो जाएगा.

ध्यान रखें: : डिमेंशिया बढ़ने की वजह से क्या अब फिर से योजना बनानी चाहिए? व्यक्ति में बदलाव धीरे धीरे होते रहते हैं, और शायद आप यह न पहचानें कि अब स्थिति इतनी बिगड गयी है कि कुछ बड़े कदम उठाने होंगे या देखभाल कैसे करें, यह नए सिरे से सोचना होगा. शायद आपको अब सहायक रखना चाहिए, या एक सहायक की जगह दो सहायक की जरूरत है. व्यक्ति की निर्भरता बहुत बढ़ चुकी हो तो एक ही संक्रमण से या एक बार ही गिरने से व्यक्ति पूरे तरह लाचार हो सकते हैं और बिस्तर पर पड़ सकते हैं, और फिर देखभाल बहुत ही फरक किस्म की होगी. या शायद समीक्षा करने पर आप पाएँ कि घर पर देखभाल कारण बहुत ही मुश्किल हो गया है और रिस्पाईट केयर होम (या अस्सिटिड लिविंग होम) के बारे में सोचने का समय आ गया है. स्थिति की नियमित समीक्षा करने पर आप आगे के लिए बेहतर तैयार हो सकते हैं–साधन ढूंढ सकते हैं, जरूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, उचित तरीके सीख सकते हैं.

देखभाल में क्या समस्याएँ आम हैं, यह जानें, और उनसे बचने की, या उन्हें कम रखने की कोशिश करें मध्यम अवस्था की देखभाल परिवार वालों पर बहुत भारी पड़ती है. यह तनावपूर्ण होती है, और बहुत थका देती है. इस देखभाल की वजह से परिवार वालों को अपनी ज़िंदगी में अनेक बड़े परिवर्तन करने पड़ते हैं. किस तरह की समस्याएँ हो सकती हैं, यह जानने से समस्याओं से बचने के लिए या उन्हें कम करने के लिए उपाय सोचे जा सकते हैं.

देखभाल के काम से शारीरिक थकान होगी. व्यक्ति को हर काम में कुछ न कुछ मदद चाहियेगी. व्यक्ति काम खुद कम रहे हों, तब भी खयाल रखना होगा कि काम ठीक हो रहा है और व्यक्ति अपने आप को कोई नुकसान तो नहीं पहुँचा रहे. काम में मदद करते वक्त आपको काम शुरू करवाना होगा, और फिर देखते रहना होगा कि काम ठीक हो रहा है या नहीं, और बीच बीच में मदद करनी होगी. यह सब थका सकता है. अच्छा यह होगा कि आप कार्यों में मदद करने के तरीकों के बारे में फिजियोथैरेपिस्ट से सलाह करें ताकि आप अपनी पीठ पर या हाथों पर ज्यादा जोर न डालें, और अपना नुकसान न कर बैठें.

maid may be accused of theft for something that the dementia patient  does not possess

देखभाल का काम भावनात्मक तौर पर बहुत मुश्किल हो सकता व्यक्ति के बदले और मुश्किल व्यवहार को संभालते संभालते आप शायद मायूस हों या आपको गुस्सा आये. आसपास के लोगों से बात करना भी अकसर नहीं हो पाता है, क्योंकि लोग समझते नहीं, बल्कि उलटा कुछ चुभने वाली बात कह देते हैं, जैसे के यह कहना कि आप देखभाल ठीक नहीं कर रहे, या यह तो आपका फ़र्ज़ है, या आप बुजुर्गों का निरादर कर रहे हैं और माँ-बाप को राहत देने के बजाय बड़ी उम्र में तंग कर रहे हैं. डिमेंशिया वाले व्यक्ति भी भ्रम के कारण औरों से आपकी शिकायत कर सकते हैं. आप शायद अपने को अकेला पाएँ, और निंदा सुन कर दुःखी हो जायेंगे. ऐसी समस्याएँ हो सकती हैं, और आपको इनके लिए तैयार रहना होगा, और इससे कैसे जूझेंगे, यह सोच कर रखना होगा.

देखभाल के कारण अकसर पैसों की दिक्कत हो सकती है डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति को निरंतर देखभाल की जरूरत होती है, और खर्चे भी बढ़ जाते हैं. ऊपर से देखभाल करने वालों को अपनी नौकरी भी शायद छोडनी पड़े. पैसे कम पड़ने की संभावना ऊंची है, और पहले से प्लानिंग करने की जरूरत है. पैसे कमाने के अन्य तरीके ढूँढने पड़ सकते हैं, और इस तरह का करियर में बदलाव तो प्लान करना पड़ता है. शायद भई-बहेनों के साथ खर्च बांटने हों, या रिश्तेदारों से मदद लेनी पड़े.

भारत में सरकार की ओर से देखभाल करने वालों की पैसों से मदद करने की कोई स्कीम नहीं है, पर शायद कुछ तरह का दवाई पर कनसेशन हो–कृपया पता कर लें. टैक्स में सेक्शन 80DDB के अधीन मेडिकल खर्चों पर कुछ राहत है, पर इसे लेने के लिए कुछ औपचारिकताएं हैं: इन्कम टैक्स के वेबसाइट से अधिक जानकारी प्राप्त करें या किसी सलाहकार से पूछें.

इन सब के लिए सोचने के लिए कुछ बिंदु:

  • देखभाल के उचित तरीके सीखें और अपनाएँ. . डिमेंशिया और उसके असर को बेहतर समझने से, और डिमेंशिया वाले व्यक्ति की देखभाल के उचित तरीके सीखने से आप देखभाल कर पाने में अधिक कारगर होंगे. सीखने ले लिए आप वेबसाइट, पुस्तकों, वीडियो, ट्रेनिंग क्लास, इत्यादि का इस्तेमाल कर सकते हैं. सीखने में लगाया समय और मेहनत बाद में बहुत फायदेमंद होगी. काफी मदद फीजियोथेरेपिस्ट से भी मदद करने के सही तरीकों की पुष्टि करें, खास तौर से ऐसे कामों के लिए जिन में शारीरिक ताकत की जरूरत हो, ताकि मदद देते समय आप खुद को, या व्यक्ति को चोट न पहुंचाएं, और आप कम थकें.
  • सहायता के सब उपलब्ध साधन के बारे में सोचें. काम और खर्च परिवार के अन्य सदस्यों के साथ बातें. दोस्तों, सहकर्मियों, रिश्तेदारों, वगौरह से किस तरह की मदद मिल सकती है, इस पर विचार करें. सपोर्ट ग्रुप (समुदाय) का भाग बनें. तनाव के लिए काउंसेलिंग लेने के बारे में सोचें. डिमेंशिया संबंधी सेवाओं के बारे में, और सहायक के इस्तेमाल के बारे में सोचें. अपनी स्थिति के अनुसार चुनें कि आप क्या इस्तेमाल करेंगे.
  • स्व-देखभाल के लिए योजना बनाएं. ऐसी कई छोटी छोटी चीज़ें हैं जो आप अपने लिए प्लान कर सकते हैं और जिन से आपका तनाव कम होगा और स्वास्थ्य में भी फायदा होगा. इस विषय पर पृष्ठ पर अन्य सेक्शन में भी चर्चा है.
  • व्यक्ति के साथ आराम के पल बिता कर, और रोचक गतिविधियां करके देखभाल के काम को सुखद बनाएँ. आप शायद इस अवस्था की बढ़ती देखभाल में इतना व्यस्त हो जाएँ कि यह भूल जाएँ कि व्यक्ति अब भी कई चीज़ें कर सकते हैं और कई बातों से आनंद उठा सकते हैं. व्यक्ति को यदि दिन का कुछ वक्त आप कुछ ऐसी गतिविधियों (activities) में लगाएं जिससे उन्हें लगे कि वे अब भी काम कर सकते हैं, अब भी उपयोगी हैं, तो वे खुश रहेंगे और उनकी उत्तेजना और निराशा कम होगी. पुरानी यादें बांटना और साथ आराम करना भी उनकी जीवन शैली को अच्छा कर सकता है. आपके साथ कुछ देर ऐसे रहेंगे तो वे बाद में आप पर गुस्सा कम करेंगे और सहयोग ज्यादा देंगे. इसलिए, ऐसी गतिविधियों के लिए समय निकालना अच्छा है.

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अग्रिम/ अंतिम अवस्था में डिमेंशिया देखभाल

for late stage dementia, plan home nursing for bedridden व्यक्तिइस अवस्था तक आते आते व्यक्ति हर काम के लिए लगभग पूरी तरह से निर्भर हो जाते हैं. वे अपनी जरूरतें और तकलीफें नहीं बता पाते, और अकसर सवाल का जवाब नहीं देते, या ठीक से नहीं देते. मल-मूत्र असंयमता भी होती है. चलना बहुत खराब हो जाता है, और व्यक्ति बिना मदद नहीं चल पाते. व्हीलचेयर का इस्तेमाल होने लगता है, फिर व्यक्ति बिस्तर पर पड़ जाते हैं, और किसी भी काम के लिए नहीं उठ पाते.

home care requires some medical equipment इस अवस्था की देखभाल पहले की अवस्थाओं से कई तरह से फ़र्क होती है. अब तो बाहर वाले भी समझने लगते हैं कि व्यक्ति सामान्य नहीं है, कुछ तो गड़बड़ है, और उनके तीखे कमेन्ट कम हो जाते हैं. अब देखभाल में होम नर्सिंग की जरूरत होने लगती है, और व्यक्ति को (बातचीत बंद होने के बावजूद) समझते रहना और उनकी जरूरतों को जानना देखभाल का एक बड़ा अंग बन जाता है. आपको कई होम-नर्सिंग तरीके भी सीखने होते हैं, जैसे के व्यक्ति के बिस्तर पर लेते हुए उनकी सफाई करना, उन्हें नहलाना, चादर बदलना, उनका व्यायाम करवाना. अगर उन्हें पलंग से व्हीलचेयर पर और वापस उठाना/ बिठाना हो, तो इसके भी तरीके सीखने होंगे. आपको अनेक समर्थक सेवाओं के बारे में भी जानना होगा. व्यक्ति को डिमेंशिया के इलावा अन्य कई बीमारियां भी होंगी, और इनके लिए कैसे सतर्क रहें, और इन्हें कैसे संभालेंगे, यह सोचना होगा. कुछ कठिन निर्णय भी लेने पड़ेंगे. व्यक्ति की हालत बिगड़ी देखना आसान नहीं है, और आप विचलित या मायूस हो सकते हैं, इसके लिए भी आपको तनाव से मुक्त होने के तरीके अपनाने होंगे.

इस अवस्था की देखभाल पर विस्तृत चर्चा इस वेबसाइट के एक अन्य पृष्ठ पर है. लिंक नीचे “इन्हें भी देखें” सेक्शन में है.

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जल्दी शुरू होने वाले डिमेंशिया (यंग ऑनसेट, young onset, younger onset, early onset) की देखभाल के कुछ विशेष पहलू

डिमेंशिया देखभाल पर चर्चा अकसर यह सोच कर होती है कि रोगी बुज़ुर्ग होगा, रिटायर हो चुका होगा, और देखभाल में हमारा उद्देश्य होगा कि व्यक्ति को रोज के कामों में सहायता दें और उन्हें, जिस हद तक हो सके, संतुष्ट और खुश रखें.

परन्तु डिमेंशिया बुजुर्गों तक सीमित नहीं है, यह कम उम्र में भी शुरू हो सकता है. कभी कभी डिमेंशिया चालीस-पचास की उम्र के लोगों में, या उससे भी कम उम्र में देखा जाता है. WHO (World Health Orgzanization) का अनुमान है कि शायद डिमेंशिया के 6-9% केस 65 साल से कम उम्र में होते हैं. ऐसे केस (65 साल से कम उम्र वाले) को यंग ऑनसेट (young onset या younger onset या early onset या यंगर ऑनसेट या अर्ली-ऑनसेट ) कहते हैं. यंगर ऑनसेट डिमेंशिया अकसर अल्ज़ाइमर (Alzheimer’s Disease) या फ्रंटो-टेम्पोरल डिमेंशिया (Fronto-temporal dementia, FTD) किस्म के होते हैं.

कम उम्र वाले डिमेंशिया के केस में व्यक्ति की देखभाल करने वाले अकसर उन के पति/ पत्नी, बच्चे (जो शायद अभी स्कूल या कालेज में हों या अपना करियर शुरु कर रहे हों), या फिर बुज़ुर्ग माँ-बाप होते हैं. ऐसे कम उम्र वाले डिमेंशिया व्यक्तियों की देखभाल की चुनौतियाँ अन्य सामान्य डिमेंशिया देखभाल से ज्यादा होती हैं, और अलग प्रकार की भी होती हैं.

आम तौर पर डिमेंशिया देखभाल पर चर्चा यह मान कर किये जाते हैं कि व्यक्ति बुज़ुर्ग हैं, रिटायरमेंट हो चुका है, और उनकी ज़िम्मेदारियाँ बहुत ही कम हैं. पर कम उम्र वाले डिमेंशिया व्यक्ति तो अकसर या तो अपने करियर के अहम भाग में होते हैं, या अनेक जरूरी घर-गृहस्ती संबंधी ज़िम्मेदारियाँ निभा रहे होते हैं. शायद व्यक्ति डॉक्टर या इजीनियर हों, शायद टीचर या वकील हों, या अपना बिज़नस चला रहे हों. उन्होंने शायद मकान या बच्चों की पढ़ाई के लिए भारी लोन ले रखे हों. शायद वे वृद्ध माप-बाप की जिम्मेदारी संभाल रहे हों, और बच्चों को उनके करियर चुनने और शुरू करने में सहायता दे रहे हों. शायद घर का खर्चा उनकी ही आमदनी से चल रहा हो. या शायद वे घर की पूरी ज़िम्मेदारी संभाल रहे हों, वृद्धों की, बच्चों की, घर के संचालन कि, ताकि घर के अन्य सदस्य बेफिक्र होकर अपने अपने काम कर सकें. या शायद वे घर और बाहर, दोनों का कार्यभार संभाल रहे हों. इन लोगों का रिटायरमेंट का कोई इरादा नहीं है–वे सक्रिय लोग हैं और उन्हें एक मिनट की भी फुर्सत नहीं होती है. और इनके आस-पास रहने वाले लोग भी नहीं सोच सकते कि यह व्यक्ति डिमेंशिया का शिकार हो सकता है.

जब कम उम्र वाले लोगों को डिमेंशिया होता है तब उन्हें और उनके परिवार वालों को सोचना पड़ता है कि अब तो क्षमताएं घाट रही हैं, उसके अनुसार वे वे काम कम कैसे करें, वे घर का इंतज़ाम कैसे करें, और डिमेंशिया की चुनौतियों का सामना करने के अपनी अनेक ज़िम्मेदारियाँ साथ साथ कैसे निभाएं. ऊपर, इस पृष्ठ पर सामान्य डिमेंशिया के लिए योजना कैसे बनाएं. पर कम उम्र के डिमेंशिया व्यक्ति के लिए देखभाल की योजना में कई दूसरे, महत्वपूर्ण पहलू भी होते हैं.

यदि आप को कम उम्र के डिमेंशिया व्यक्ति की देखभाल के बारे में सोचना है, तो यह पृष्ठ भी देखें: कम उम्र के डिमेंशिया व्यक्ति की देखभाल की योजना बनाएं .

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देखभाल कर्ता की स्व-देखभाल (अपनी खुद की देखभाल, self-care)

देखभाल कर्ता डिमेंशिया वाले व्यक्ति की देखभाल में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि वे अपनी खुद की देखभाल नहीं कर पाते. उन्हें ख़याल ही नहीं रहता कि उन्हें अपने बारे में भी सोचना है. उनका कार्यभार बढ़ता रहता है, वे और अधिक काम करते रहते हैं, और सारा काम ठीक हो पाए, इसी में लगे रहते हैं. जैसे जैसे डिमेंशिया बढ़ता है, काम भी बढ़ता रहता है, और थकान और तनाव भी. वे शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक तौर पर बिलकुल थके थके रहते हैं, पर आराम के लिए कुछ टाइम कैसे निकालें, उन्हें इसके लिए कुछ नहीं सूझता. घर से निकलना मुश्किल होता है, मित्रों से सम्पर्क नहीं रहता, थकान इतनी होती है कि अपने लिए कुछ करें, यह भी एक काम सा लगता है. शायद वे इतने व्यस्त हों कि उन्हें यह भी आभास न हो कि उन्हें अपने लिए कुछ सहारा चाहिए. सहारा लें तो कहाँ और कैसे, यह भी नहीं सोच पाते.

जैसे कि देखभाल कर्ता डिमेंशिया वाले व्यक्ति की देखभाल के लिए योजना बनाने की कोशिश करते हैं, उन्हें स्व-देखभाल की भी योजना साथ साथ बना लेनी चाहिए. यह जितनी जल्दी करें, उतना अव्छा है, क्योंकि बाद में, जब थकान ज्यादा हो जाती है, तो स्व-देखभाल की योजना बनाना और उस के जरूरी लिए कदम उठाना अधिक मुश्किल हो जाता है. अपना देखभाल का रोल समझें, और यह पहचानें कि समय के साथ डिमेंशिया बिगडेगा और कार्यभार बढ़ेगा. यह सोचें कि इस स्थिति में स्व-देखभाल के लिए किन चीज़ों की जरूरत पड़ेगी और उनका इंतज़ाम आप कैसे करेंगे. अपने स्वास्थ्य और मनोरंजन के लिए आपको क्या करना होगा, इस पर गौर करें. यह उतना ही जरूरी है जितना डिमेंशिया व्यक्ति की देखभाल के लिए तैयार होना. इस वेब्सिते के अन्य पृष्ठों पर इस विषय पर और जानकारी और सुझाव हैं

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इन्हें भी देखें….

हिंदी पृष्ठ, इसी साईट से:

  • अग्रिम/ अंतिम अवस्था में देखभाल .
  • कम उम्र के डिमेंशिया वाले ब्यक्ति की देखभाल के लिए बिशेष पहलू: कम उम्र के डिमेंशिया व्यक्ति की देखभाल की योजना बनाएं.
  • इस विषय पर हमारे अन्य वेबसाइट से सामग्री: ये सब अँग्रेज़ी पृष्ठ भारत में देखभाल के संदर्भ में लिखे गए हैं.

    कुछ उपयोगी इंटरव्यू:

    • परिवार वाले मुख्य देखभाल कर्ता का कैसे समर्थन करें, एक पति कुछ टिप्स बांटते हैं: Mistakes made, lessons learnt, tips shared .
    • समय निकाल कर परिवार वाले उचित देखभाल का इंतज़ाम करते हैं: A family recognizes dementia and adjusts for it .
    • देखभाल के काम से मेरी ज़िंदगी के हर पहलू पर असर पड़ा: एक बेटे का इंटरव्यू: His condition affected every sphere of my life .
    • परिवार वालों को आगे के लिए सोचना चाहिए और प्लान करना चाहिए, वरना देखभाल के कामों के बीच ठीक से सोचने का टाइम नहीं मिलता When you are in the rut of things you can’t think

    इस विषय पर हिंदी सामग्री, कुछ अन्य साईट पर: यह याद रखें कि इन में से कई लेख अन्य देश में रहने वालों के लिए बनाए गए हैं, और इनमें कई सेवाओं और सपोर्ट संबंधी बातें, कानूनी बातें, इत्यादि, भारत में लागू नहीं होंगी.

    इस विषय पर कुछ बहुत उपयोगी अँग्रेज़ी वीडियो, यूट्यूब पर: यह याद रखें कि ये अन्य देश में रहने वालों के लिए बनाए गए हैं, और हो सकता है कि ये पूरी तर्ज भारत में लागू करना मुश्किल हो.

    डिमेंशिया की अवस्थाओं पर, और उनके लिए देखभाल कैसे कैसे बदलती हैं, इस पर दो वीडियो देखें: Progression and staging part 1 और Progression and staging part 2 .

    इस पृष्ठ का नवीनतम अँग्रेज़ी संस्करण यहाँ उपलब्ध है: Plan care for various stages of dementia. अंग्रेज़ी पृष्ठ पर आपको विषय पर अधिक सामयिक जानकारी मिल सकती है. कई उपयोगी अँग्रेज़ी लेखों, संस्थाओं और फ़ोरम इत्यादि के लिंक भी हो सकते हैं. कुछ खास उन्नत और प्रासंगिक विषयों पर विस्तृत चर्चा भी हो सकती है. अन्य विडियो, लेखों और ब्लॉग के लिंक, और उपयोगी पुस्तकों के नाम भी हो सकते हैं.

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    Previous: देखभाल करने वाले का रोल (Understand the dementia caregiver’s role) Next: कम उम्र के डिमेंशिया व्यक्ति की देखभाल की योजना बनाएं (Plan care for younger persons with dementia)

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