देखभाल के लिए सहायक की नियुक्ति और सही तरह से सहायता लेना (Using Trained Attendants for Dementia Home Care)

जब डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति की देखभाल का काम बहुत बढ़ जाए या व्यक्ति को निरंतर देखभाल की जरूरत हो, तो घर में अच्छा सहायक रखने से परिवार को आराम हो सकता है.

देखभाल करने वाले क्या कर सकते हैं: समझें कि देखभाल के लिए किस प्रकार के सहायक रखे जा सकते हैं, और सोचें कि उनके परिवार के लिए किस तरह की व्यवस्था ठीक रहेगी. सहायक को प्रशिक्षण दें. घर में सहायक काम कर सके, और घर सुरक्षित रहे, इसके लिए इंतजाम करें. सहायक के काम पर नज़र रखें. सहायक छुट्टी लेगा, इसके लिए तैयार रहें.

दिमेन्हिया (मनोभ्रंश) से ग्रस्त व्यक्ति की देखभाल में मदद करने के लिए परिवार वाले अकसर सहायक ढूंढ़ते हैं. ये “सहायक” आया, नर्स, मासी, अटेंडेंट (attendant) वगैरह के नाम से भी जाने जाते हैं, और अकसर इन्हें एजेंसी द्वारा पाया जाता है. नोट करें कि हालाँकि कई एजेंसी इन्हें “नर्स” कहकर बुलाती हैं, इन्हें कॉलेज से नर्स की शिक्षा नहीं प्राप्त होती, बस कुछ हफ्ते या महीने एजेंसी की ट्रेनिंग मिली होती है, या किसी अस्पताल में इन्होंने आया या अटेंडेंट का काम करा होता है.

भरोसे वाले और ठीक काम करने वाले ईमानदार सहायक को ढूंढ़नाबहुत मुश्किल काम है, और एजेंसी कुछ भी कहें, ऐसे सहायक डिमेंशिया की देखभाल करना जानें, यह कम ही होता है. व्यक्ति की देखभाल के लिए सहायक को इस्तेमाल करने में बहुत चीज़ों का खयाल रखना पड़ता है.

सहायक कब रखें

शुरू के सालों में डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति की देखभाल अकसर परिवार वाले ही करते हैं. इस अवस्था में व्यक्ति चल फिर पाते हैं और अपने काम भी कर पाते हैं, बस कुछ मदद की जरूरत होती है, और कुछ काम वे ठीक से नहीं कर पाते. घर में कुछ बदलाव करने से व्यक्ति को आराम मिल सकता है, और काम में आसानी हो सकती है. कई बार तो ऐसी अवस्था में डिमेंशिया का निदान भी नहीं मिला होता है, और परिवार वाले व्यक्ति को भुलक्कड़ या आलसी या सठियाया हुआ समझते हैं.

डिमेंशिया के बढ़ने पर व्यक्ति को सहायता की ज्यादा जरूरत होने लगती है. गलतियाँ अधिक होने लगती हैं, वे खाना भूल जाते हैं, गैस का स्टीव ऑन छोड़ देते हैं, लोगों से शिकायत करने लगते हैं, भटकने लगते हैं. अब आपका देखभाल का काम बढ़ने लगता है, और आपको ज्यादा सतर्क रहना पड़ता है. व्यक्ति खुद को चोट न लगा लें, यह फिक्र भी ज्यादा रहने लगता है.

जब व्यक्ति की हालत बिगड़ती जाती है, तब शायद आप सोचने लगें कि अब क्या सहायक रखने का समय आ गया है. पर कई केस में हालत इतने धीरे धीरे बिगड़ती है, और आपका काम भी इतने धीरे धीरे बढ़ता है कि शायद आप यह नोटिस न करें कि अब काम बहुत ज्यादा हो गया हो गया है, किसी को मदद के लिए रख लेना चाहिए. फिर कुछ हादसा होता है, जैसे के व्यक्ति का भटकना, या चोट लगना, और आप अचानक यह पहचानते हैं कि आपको तो कई दिन पहले सहायक रख लेना चाहिए था.

सहायक रखने से फायदा होगा या नहीं, इसके लिए इन पाईंट पर सोचें:

  • व्यक्ति कौन कौन से काम बिना मदद के या खुद कर सकते हैं, और उन्हें किस तरह की मदद चाहिए होती है.
  • व्यक्ति को जरूरी काम करने के लिए कितनी बार और कितने जोर के साथ याद दिलाना पड़ता है (जैसे कि खाना ले लें, हाथ धो लें, नहा लें, वगैरह).
  • व्यक्ति अकेले हों तो खुद को किस तरह के खतरे में डाल सकते हैं, या कितना घबरा जाते हैं? बढ़ते डिमेंशिया के कारण व्यक्ति की हालत किस रफ्तार से खराब हो रही है? क्या वे सर्दियों में गरम कपड़े उतार देंगे या घर से बाहर निकल जायेंगे? या बच्चों को नहीं पहचानते इसलिए मारने लगेंगे? या चलने की कोशिश करेंगे, पर क्योंकि अब वे ठीक से चल नहीं पाते इसलिए गिरने का चांस ज्यादा है?
  • आपको व्यक्ति की देखभाल के लिए दिन में कितना टाइम लगाना होता है? क्या आप अन्य काम के लिए टाइम निकाल पाते हैं? क्या जरूरत होने पर आप घर के बाहर जा कर काम कर पाते हैं?
  • अन्य परिवार वालों के साथ आप काम कैसे बाँट पाते हैं? क्या सब इतने व्यस्त हैं कि आप देखभाल के काम को अकेले ही देखते हैं? या क्या देखभाल का काम आप सब बाँट तो रहे हैं, पर सबको अपनी जिंदगी में बहुत समझौते करने पड़ रहे हैं और दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है?

देखभाल के लिए सहायक रखेंगे तो कुछ देखभाल का काम कम हो जाएगा और आप सबको राहत मिलेगी. दिन भर देखभाल के कारण घर में अगर दम घुट रहा है और आप निकल ही नहीं पा रहे हैं, तब भी शायद सहायक रखने से फायदा होगा.

हर कुछ हफ्ते बाद यह सोचें कि क्या अब ऐसी स्थिति आ गयी है जब (कम से कम कुछ कामों के लिए) सहायक रखने से आराम होगा.

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सहायक कहाँ मिल सकते हैं

किस प्रकार का सहायक रखें, यह कई बातों पर निर्भर है, जैसे कि काम क्या कराना है, खर्चा कितना होगा, परिवार में किस तरह का सहायक फिट होगा, वगैरह. यह जरूर याद रखें कि हालाँकि एजेंसी में लोग सहायक/ अटेंडेंट को “नर्स” बुलाते हैं, वे असल में एक ऐसे कर्मचारी की बात कर रहे हैं जिसे कुछ हफ्ते या महीने का देखभाल संबंधी प्रशिक्षण दिया गया है (कभी कभी प्रशिक्षण भी नहीं मिला होता). कुछ ऑप्शन जिनके बारे में आप सोच सकते हैं, वे हैं:

  • साधारण नौकरानी/ आया/ नौकर को आप खुद कुछ प्रशिक्षण दे कर डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति की (पार्ट-टाइम या फुल-टाइम) देखभाल के लिए रखें
  • सिर्फ दिन के काम के लिए प्रशिक्षित सहायक रखें (8 या 12 घंटे की शिफ्ट में)
  • सिर्फ रात के काम के लिए प्रशिक्षित सहायक रखें (अकसर यह 12 घंटे की शिफ्ट होती है)
  • एक प्रशिक्षित सहायक दिन की शिफ्ट के लिए, और एक रात की शिफ्ट के लिए रखें.
  • दिन-रात के लिए एक प्रशिक्षित फुल-टाइम सहायक रखें जो आपके घर में रहकर व्यक्ति का सारा काम करे
  • प्रशिक्षित नर्स को एक या दो शिफ्ट में रखें (अगर व्यक्ति को इस प्रकार की बीमारी है जिस में नर्स का काम करना जरूरी है)

डिमेंशिया देखभाल के लिए अगर ऐसे काम करने वाले को रखें जिस पर पहले से ही भरोसा हो, और जो व्यक्ति को जानता हो और उनका आदर करता हो, तो फिर आपका मुख्य कार्य है इस काम करने वाले को पूरा और उचित प्रशिक्षण देना. आपको सहायक को समझाना होगा कि डिमेंशिया क्या है, और डिमेंशिया का व्यक्ति पर क्या प्रभाव हो रहा है, और आपको देखभाल के तरीके भी समझाने होंगे. व्यक्ति से बात कैसे करने, सहायता कैसे करें, मुश्किल व्यवहार कैसे संभालें, यह सब सिखाना होगा. यह भी सोचें कि क्या यह काम करने वाला डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति की देखभाल के लिए जरूरी सफाई रख पायेगा. अगर व्यक्ति को किसी बीमारी की वजह से तकलीफ हो, तो क्या यह काम करने वाला पहचान पायेगा? क्या यह जरूरी फर्स्ट एड सीख पायेगा?

ऐसी कई एजेंसी हैं जो घर पर मरीजों की देखभाल के लिए सहायक भेजती हैं. इन लोगों को शायद कमज़ोर और बुज़ुर्ग लोगों की मदद करने का कुछ अनुभव हो, पर डिमेंशिया की समझ और उसके लिए उचित देखभाल तरीके नहीं आते हैं, और परिवार वालों को डिमेंशिया संबंधी प्रशिक्षण खुद देना पड़ता है.

Caregiver approaches agency for trained attendant for dementia homecareअधिकतर परिवार वाले किसी एक शिफ्ट के लिए सहायक रखते हैं, और बाकी देखभाल खुद करते हैं. कुछ फुल-टाइम ( दिन-रात का) सहायक रखते हैं. कुछ लोग दिन में एक और रात को दूसरा सहायक रखते हैं.

दिन-रात वाला (फुल-टाइम) सहायक रखें का मतलब है कि आपको उसके रहने का और खाने-पीने का इंतजाम करना होगा. घर छोटा हो तो दिक्कत हो सकती है, और घर में भीड़ सी लग सकती है. आप खाना खुद बनाते हों, तो आपका काम बढ़ जाएगा. अगर इस सहायक को दूसरे तरह के खाने की आदत है, तो या तो आपको उसके लिए खाना अलग बनाना होगा या उसे एडजस्ट करना होगा (जो रोज रोज करना मुश्किल है) या आपको उसके लिए बाहर से डब्बे का इंतजाम करना होगा.

अगर डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति इस हालत में है कि उन्हें दिन में भी देखना होता है और रात को भी, तो फुल-टाइम सहायक शायद इतना काम न संभाल पाए क्योंकि जब वह सोयेगा तो देखभाल कौन करेगा? एक और समस्या यह है कि अगर यह सहायक बीमार पड़ जाए तो आपको उसे उसके घर/ गाँव भेजना पड़ेगा क्योंकि यदि वह आपके घर में रहा तो उसका इन्फेक्शन परिवार वालों को (डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति को भी) लग सकता है. कोई अन्य बीमारी हो तब भी सहायक व्यक्ति की देखभाल तो नहीं कर पायेगा, और यह काम फिर आप पर पड़ेगा. ऊपर से, अगर सहायक घर में रहे, तो आपको सहायक की देखभाल/ दवाई वगैरह भी करनी पड़ेगी, और इन सब कारणों की वजह से बीमार सहायक को उसके घर भेजना ज़्यादातर ठीक रहता है. यह भी हो सकता है कि सहायक अपने किसी जरूरी काम या एमरजेंसी की वजह से छुट्टी ले ले या आपकी नौकरी छोड़कर चला जाए. इन सब स्थितियों में आप फिर बिना सहायक के रह जायेंगे और देखभाल का पूरा काम फिर से आपके जिम्मे होगा, और आपको एजेंसी से दूसरा सहायक माँगना होगा.

पार्ट-टाइम सहायक रखें तो घर में कम एडजस्टमेंट की जरूरत होती है. न तो सहायक के लिए रहने/ सोने की जगह बनानी पड़ती है, न खाना पकाना पड़ता है (वे अपना खाना खुद लाते हैं और आपको बस एक दो बार चाय देनी होती है). कुछ परिवार सिर्फ दिन के लिए या सिर्फ रात के लिए सहायक रखते हैं. कुछ अन्य परिवार दिन के लिए एक, और रात के लिए दूसरा सहायक रखते हैं, और उनका एजेंसी के साथ यह समझौता होता है कि जब तक अगली शिफ्ट का सहायक (या उसका सब्स्टिच्यूट) आपके घर ड्यूटी के लिए न पंहुचे, तब तक पहले शिफ्ट का सहायक काम करता रहेगा.

जब आप सोच रहे हों कि (एक) फुल-टाइम सहायक रखें, या (एक या दो) पार्ट-टाइम सहायक रखें, तो यह भी सोच लें कि घर में बाकी काम के लिए कौन कौन है, और कितने नौकर, ड्राईवर, कुक वगैरह हैं, और इन सबमें काम कैसे बांटेंगे. अगर सहायक लेट आये या छुट्टी पर चला जाए, तो इन अन्य लोगों की मदद से अगले सहायक के आने तक आप काम कैसे संभालेंगे.

शायद सबसे जरूरी पहलू यह है कि डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति सहायक के इंतजाम से कैसे एडजस्ट करते हैं. कुछ तो सहायक की मौजूदगी पर बौखला जाते हैं कि मुझ पर क्या जासूस बिठा रखा है. कुछ इस बात से घबरा जाते हैं कि दिन में कोई आ रहा है, रात को कोई और, खासकर अगर इन दो सहायकों का बोलने का और मदद करने का तरीका अलग अलग हो.

एक और निर्णय यह लेना होगा कि पुरुष सहायक को रखें या महिला सहायक को. यदि डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति महिला है, तब तो महिला सहायक उचित है, पर पुरुष रोगी की स्थिति में सहायक पुरुष या महिला, कोई भी रख सकते हैं. घर में यदि महिलायें हैं, तो शायद ये पुरुष सहायक रखना पसंद न करें, परन्तु पुरुष रोगी के लिए महिला सहायक रखने से पहले कुछ बातों पर गौर करना होगा (1) क्या महिला सहायक सब काम कर पायेगी? देखभाल का काम कई बार काफी भारी होता है और उसमें शारीरिक बल की जरूरत हो सकती है, जैसे कि रोगी को उठाना, चलवाना, इत्यादि (2) कुछ प्रकार के डिमेंशिया में रोगी स्वयं पर संयम नहीं रखते और असभ्य भाषा का इस्तेमाल करते हैं और अश्लील हरकतें भी कर सकते हैं. इस स्थिति में महिला सहायक शायद काम करना पसंद न करे, या खतरा महसूस करे.

खर्चा कितना होगा, यह देखते वक्त एजेंसी को जो देना है उसके अलावा सहायक के खाने और उसके रहने के अन्य खर्च जोड़ना न भूलें.

देखभाल के लिए पूरे वक्त कॉलेज से प्रशिक्षित नर्स की जरूरत कम व्यक्तियों को होती है. पर कुछ काम ऐसे हैं जिनके लिए आपको नर्स चाहियेगी, और जो सहायक से नहीं कराने चाहियें, जैसे कि इंजेक्शन, IV, कैथेटर, वगैरह. किसी होम नर्सिंग एजेंसी के सम्पर्क में रहें, जो घर पर नर्स भेजती हो, या पास के किसी नर्सिंग होम से बात कर लें कि जब जरूरत हो तो वे इस काम के लिए नर्स भेज दें. व्यक्ति बहुत बीमार चल रहा हो, तो कुछ दिन शायद नर्स से दिन भर ड्यूटी कराने की जरूरत पड़े, पर आम तौर पर रोज रोज पूरे वक्त नर्स रखना न सिर्फ महंगा है बल्कि नर्स के लिए बोरियत का काम हो जाता है, और फिर वे बेध्यानी से काम करती हैं. देखभाल के अन्य काम (गंदे कपड़े धोना, वगैरह) भी नर्स करना पसंद नहीं करतीं.

प्रशिक्षित सहायक (पार्ट-टाइम या फुल-टाइम) और नर्स भेजने के लिए कई एजेंसी होती हैं, जो आपसे पैसे लेती हैं और अपना कमीशन काट कर सहायक या नर्स को तनखाह देती हैं. कुछ लोग खर्च कम करने के लिए एजेंसी से नहीं, सीधे सहायक से बात करके उसे रख लेते हैं, पर अगर सहायक छुट्टी पर जाए या कुछ गड़बड़ करे, तो फिर समस्या हो जाती है. अगर सहायक को एजेंसी द्वारा लिया हो, तो सहायक के छुट्टी लेने पर आप एजेंसी से सब्स्टिच्यूट मांग सकते हैं.

हालाँकि एजेंसी का फ़र्ज़ है कि वे आपको जो सहायक भेजें वह प्रशिक्षित हो, काम ठीक करता हो, ईमानदार और भरोसे वाला हो, पर अच्छा सहायक मिलना इतना आसान नहीं है. एजेंसी से मिले कुछ सहायक अच्छे निकल सकते हैं, और कुछ खराब. आप उनसे सहायक को ले लें, इसके लिए एजेंसी सहायक के गुण और अनुभव बढ़ा-चढ़ा कर बताती हैं. कई बार एजेंसी के मालिक को खुद ही नहीं पता होता कि जिस सहायक को वे आपके घर भेज रहे हैं वह काम कैसा करता है.

हालाँकि एजेंसी का फर्ज है कि सहायक छुट्टी ले तो वे उसके बदले दूसरा सहायक भेजें (सब्स्टिच्यूट) पर असल में कई बार एजेंसी आपसे “एडजस्ट” करने को कहेंगी, कि एक दो दिन ज़रा आप संभाल लें, आज हमारे पास कोई अच्छा सहायक सब्स्टिच्यूट नहीं है, और यह खिंचता रहता है. डिपोजिट वापस मांगें, तब भी एजेंसी बहाने बनाती है या फोन काट देती हैं. अच्छा यही होगा कि एजेंसी ठीक है या नहीं, यह एजेंसी इस्तेमाल करने से पहले लोगों से पूछ कर पता चला लें.

सहायक/ एजेंसी ढूंढ़ने के लिए कुछ टिप्स:

  • ऐसे परिवारों से पूछें जहाँ सहायक की मदद से किसी रोगी की देखभाल हो चुकी हो
  • अपने शहर की एल्डर हेल्प लाइन पर फोन करके पूछें.
  • किसी भी अस्पताल के डेस्क पर पूछें, क्योंकि जब कोई डिस्चार्ज होता है तो घर पर देखभाल के लिए परिवारों को कभी कभी सहायक की जरूरत होती है, और इसलिए एजेंसी अकसर अपने कार्ड अस्पताल के डेस्क पर छोड़ जाती हैं. खासतौर पर फ्रैक्चर और कैंसर के अस्पतालों में पूछें.
  • इन्टरनेट पर खोज करें.
    • लोकल सर्विस की सूची इन्टरनेट से सही खोज शब्द दे कर प्राप्त करें. अलग अलग खोज शब्द का इस्तेमाल करें ताकि ज़्यादा से ज़्यादा विकल्प मिल पाएँ. जैसे कि, शहर के भिन्न भिन्न नाम टाइप करके देखें.
    • शहर की कुछ ऑनलाइन डायेरेक्टरी भी शायद मिल पाएँ.
    • कुछ शहरों में टेलिफोन इन्कुइरी सेवाएं भी होती हैं जो शायद मदद कर पाएँ. अगर आपकी पास नाम हो पर सही पता या फोन नंबर न हो, तब भी आप इनसे अधिक जानकारी ले पायेंगे.

सहायक कहीं से भी लें, उसके चरित्र का, और उसकी क्षमता की जांच करें.

(यदि आपको ऐसा सहायक मिल जाए जो डिमेंशिया को समझता है और मरीज से कैसे बात करें और उनकी कैसे मदद करें, यह भी जानता हो, तो बहुत अच्छा है. परन्तु अक्सर परिवार वालों को डिमेंशिया सम्बंधी प्रशिक्षण तो खुद ही देना पड़ता है और इसके लिए वे एजेंसी पर निर्भर नहीं रह सकते)

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अच्छे सहायक के गुण

सहायक क्या कर पाएगा और क्या नहीं, और कितनी अच्छी तरह से देखभाल करेगा, यह समझने के लिए उसके गुण समझना जरूरी है. इनके बारे में सोचें:

  • क्या सहायक प्रिस्क्रिप्शन और दवाई के लेबल पढ़ सकता है, या आप कोई नोट लिखें (किस टाइम पर क्या करना है) तो क्या सहायक उसे पढ़ पायेगा? वह कौन कौन सी भाषाएँ जानता है? क्या उसे लिखना आता है, ताकि वह नोट/ रीडिंग्स (readings, observations) लिख पाए?
  • क्या वह सफाई की जरूरत समझता है, और हाथ धोना, इन्फेक्शन से बचना, ऐसी बातों को समझता है?
  • उसे स्वास्थ्य और दवाइयों के बारे में क्या इतना आता है कि वह डॉक्टर के निर्देशों का पालन कर पायेगा? क्या वह आँख की दवाई डालना जानता है? इंसुलिन के इंजेक्शन दे सकता है?
  • क्या सहायक व्यक्ति के हर काम में मदद करने को तैयार है? जैसे कि नहलाना, शौच और सफाई, उठाना-बिठाना, चलाई करवाना, खाना खिलाना, कुल्ला करवाना, डाएपर बदलना, वगैरह?
  • क्या उसे फर्स्ट एड की जानकारी है?
  • क्या वह सतर्क है कि व्यक्ति को कोई नई तकलीफ तो नहीं, और क्या वह समझता है कि कुछ भी प्रॉब्लम हो तो आपको तुरंत बताना जरूरी है?
  • क्या वह बेडसर (bed sore, pressure sore, शैय्या-व्रण) के बारे में जानता है और सतर्क है? क्या उसे पट्टी करनी आती है?
  • क्या वह व्यक्ति और आपके साथ बाहर आ सकता है? (जैसे कि घूमने के लिए, या डॉक्टर के पास जाने के लिए)
  • जिन उपकरणों को व्यक्ति के लिए इस्तेमाल करना हो, क्या वह उनका इस्तेमाल जानता है या सीख सकता है?

अच्छा यही होगा कि सहायक डिमेंशिया देखभाल के लिए प्रशिक्षित होने. ऐगेंसी अक्सर यह दावा करती हैं कि उनके भेजे हुए सहायक प्रशिक्षित हैं, पर अधिकाँश केस में परिवार वालों कों खुद ही सहायक कों ट्रेन करना पड़ता है, ताकि वे व्यक्ति को समझ सकें और उचित सहायता कर सकें.

सहायक के व्यक्तित्व से देखभाल पर बहुत असर पड़ सकता है. आदर्श सहायक वह है जो ईमानदार हो, कर्मठ हो, जो काम खुशी से करे, और जो व्यक्ति की देखभाल आदर और स्नेह से करे.

सम्भव हो तो जहाँ सहायक पहले काम कर चुका हो उन परिवारों से सम्पर्क करके उसके बारे में जान लें, और सहायक के अनुभव के दावों की पुष्टि कर लें.

सहायक से किस काम की उम्मीद रखें? व्यक्ति के सभी काम सहायक को करने होते हैं, जैसे कि दैनिक कार्यों में मदद, सफाई रखना, गंदे कपड़े धोना, व्यक्ति के बिस्तर और बाथरूम को साफ रखना, वगैरह. व्यक्ति को खाना खिलाना सहायक का काम होता है, पर खाना पकाना नहीं. सहायक क्या करेगा और क्या नहीं, इस पर आप सहायक के साथ बात कर लें.

देखभाल के लिए रखे सहायक घर के काम नहीं करेंगे. आप उनसे घर की सफाई में मदद नहीं मांग सकते, न ही खाना बनाने में मदद ले सकते हैं. छोटे-मोटे कामों में भी मदद नहीं मांगनी होती है–यह न कहें कि खाली बैठे हो, ज़रा मटर छील दो. आप खरीदारी के लिए उन्हें बाहर नहीं भेज सकते. दिन रात के लिए रखे फुल-टाइम अटेंडेंट के लिए खाना बनाना आपकी जिम्मेदारी होती है, पर शिफ्ट पर काम करने वाले सहायक अपने खाने का इंतजाम खुद करते हैं, और उनके लिए आपको सिर्फ चाय बना कर देनी होती है (या यह भी जरूरी नहीं). यह सब शुरू से ही स्पष्ट कर लें, ताकि बाद में प्रॉब्लम न हो.

फुल-टाइम सहायक कितनी छुट्टी ले सकते हैं, यह भी एजेंसी के साथ के कांट्रेक्ट में लिखा हुआ होता है, और अकसर महीने में एक या दो दिन होता है, जिसमें सहायक बाजार जा कर अपनी शॉपिंग करते हैं, दोस्तों या रिश्तेदारों से मिलते हैं, या चर्च/ मंदिर/ मस्जिद जाते हैं.

ऊपर दी गयी बातें सिर्फ संकेतक हैं, बेहतर है कि काम क्या क्या होगा, ऐसे विषयों पर बहुत ही स्पष्टता से बात करें. कुछ सहायक घर के कुछ काम थोड़े पैसे के बदले करने को तैयार हो जाते हैं, और ऐसे इंतजाम आप पर और उन पर निर्भर है.

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सहायक को व्यक्ति की देखभाल के लिए प्रशिक्षण दें

सहायक को यह जानना चाहिए कि बुज़ुर्ग व्यक्ति की देखभाल कैसे करें, और कम से कम कुछ देखभाल के तरीके, और फर्स्ट एड के तरीके आने चाहियें (पिछला सेक्शन देखें).

सहायक डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति की देखभाल ठीक से कर सके, इसके लिए आपको उसे ट्रेन करना होगा. शायद सहायक डिमेंशिया के बारे में या अन्य देखभाल के बारे में जानता हो, या शायद नहीं, पर यह आपको देखना होगा कि सहायक को आपके घर में व्यक्ति की देखभाल के लिए और क्या समझना और सीखना है. इसके लिए पहले यह समझें कि सहायक को क्या आता है, और क्या नहीं, और फिर देखें कि उसे आप क्या और कैसे सिखाएंगे.

डिमेंशिया के बारे में जानना सहायक के लिए बहुत जरूरी है. यह जानकारी खोखली नहीं होनी चाहिए, यह कुछ याद करे हुए वाक्यों तक सीमित नहीं होनी चाहिए. डिमेंशिया का व्यक्ति पर किस तरह असर पड़ता है, यह सहायक को बहुत अच्छी तरह से समझना होगा. फिर देखभाल कैसे करें, उसके सब तरीके जानने होंगे, और व्यक्ति की विशेष जरूरतें और आदतें जाननी होंगी. कुछ टिप्स:

  • सहायक को डिमेंशिया पर पत्रिकाएं और वीडियो दिखाएँ ताकि सहायक यह माने कि यह लक्षण वाकई किसी बीमारी के कारण हैं
  • मस्तिष्क की हानि की तस्वीरें बार बार दिखाएँ. डिमेंशिया के लक्षण रोग के कारण होते हैं, यह हठ या सामान्य बुढ़ापा नहीं है, यह तस्वीरें देख कर समझना और याद रखना आसान हो जाता है.
  • हो सके तो सहायक को किसी डिमेंशिया डे केयर पर यह दिखाने ले जाएँ कि डिमेंशिया के अन्य रोगी भी होते हैं, और उनकी देखभाल कैसे खास तरह से होती है (यह देखभाल आम बुजुर्गों की देखभाल से फर्क है)
  • सहायक को सिखाएं कि व्यक्ति के साथ बातचीत कैसे करनी होगी, मदद कैसे करनी होगी, और मुश्किल व्यवहार कैसे संभालना होगा. व्यक्ति के साथ गतिविधियां कैसे करें, यह भी बताएं.
  • कुछ काल्पनिक स्थितियां पेश करके सहायक से पूछें कि वे इन्हें कैसे संभालेगा (role play करें), और अंदाजा लगाएं कि सहायक को और क्या क्या सिखाना है.

यह ध्यान रखें कि अगर सहायक कहे भी कि वो डिमेंशिया के बारे में जानता है, तब भी आप स्वयं यह तय करें कि यह जानकारी सही है या नहीं. कई बार डिमेंशिया की समझ सतह पर ही होती है, सचमुच की नहीं. जैसे ही सहायक डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति को गुस्से में देखता है, या उनकी अजीबोगरीब हरकतें देखता है, तो वह सोचता है कि “डिमेंशिया” सिर्फ व्यक्ति के दुश्चरित्र के लिए एक बहाना है. सहायक सोचता है, घर वाले अपने बुज़ुर्ग की तरफदारी कर रहे हैं. सहायक वाकई डिमेंशिया की सच्चाई समझे, इसके लिए आप उसकी बात किसी बाहर से आये स्वयं-सेवक से करवाएं या उसे प्रकाशित पत्रिकाएं पढ़ने जो दें, ताकि उसे विश्वास हो कि यह बहाना नहीं है.

हर व्यक्ति अलग है, और अगर सहायक को डिमेंशिया देखभाल का अनुभव हो तब भी आपके घर में डिमेंशिया व्यक्ति के काम को संभालने के लिए उसे नई बातें सीखनी होंगी, व्यक्ति की पसंद नापसंद, आदतें और जरूरतें समझनी होंगी. यह समझाने का काम आपको करना होगा, जैसे कि:

  • व्यक्ति को हर काम में कैसे मदद करना होता है, यह सहायक को विस्तार से समझा दें (जैसे कि नहाना, चलना, कपड़े बदलना, खाना, वगैरह)
  • व्यक्ति को जिन शब्दों या बातें से विशेष गुस्सा आता हो, सहायक को बता दें.
  • अगर व्यक्ति की आदत है कि कुछ शब्दों का वह अलग ढंग से प्रयोग करते हैं, तो सहायक को बता दें.
  • व्यक्ति की पसंद नापसंद भी बता दें
  • व्यक्ति को घबराहट है या गुस्सा, यह शुरू में ही पहचानने के तरीके भी सहायक को बताएं
  • व्यक्ति के मुश्किल व्यवहार कैसे हैं और उन्हें कैसे कम कर सकते हैं या संभाल सकते हैं, यह भी बताएं

यह जरूरी है कि सहायक समझे कि अगर व्यक्ति उस पर आरोप लगाए तो उसे डरना नहीं है, और न ही वापस बहस करनी है या अपनी सफाई देनी है, क्योंकि इससे डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति अधिक उत्तेजित हो जाते हैं. ऐसे में सहायक आपसे बाद में बात करके आपको बता सकता है कि क्या हुआ था, सहायक को यह अच्छी तरह समझा दें. अकसर सहायक आरोप सुनकर बौखला जाते हैं या भयभीत हो जाते हैं, और व्यक्ति के साथ लड़ने लगते हैं, जिससे बात बिगड़ जाती है.

क्योंकि सहायक घर में काफी समय बिताएगा, और उसे कई कार्य भी करने होंगे, इसलिए उसे घर के विभिन्न उपकरणों का इस्तेमाल आना चाहिए (जैसे कि गीज़र, स्टोव, टीवी और रिमोट, रेडियो, आन्सरिंग मशीन, वगैरह).

सहायक को यह भी बताएं कि एमरजेंसी में क्या करना है, वह किससे सम्पर्क करे, और कैसे.

नीचे “इन्हें भी देखें” सेक्शन में एक ऐसे डाक्यूमेंट का लिंक है जिसे आप अपनी स्थिति के अनुसार बदल कर, सहायक को ट्रेन करने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं.

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परिवार में सहायक के लिए एडजस्टमेंट

सहायक के आने से परिवार का जीवन कैसे बदलेगा, कई लोग इसके बारे में नहीं सोचते. दिन भर या रात भर सहायक की मौजूदगी से परिवार वालों पर असर पड़ता है. बटुआ ध्यान से रखो, घड़ी इधर उधर न छोड़ो, कीमती पेन संभाल कर रखो, यह सब याद रखना पड़ता है. कपड़े बदलते वक्त दरवाजा बंद रखना होता है. बातें करते हुए भी ध्यान रखना होता है कि शायद सहायक सुन रहा होगा. अगर सहायक मर्द है, तो घर में मौजूद औरतों को संकोच हो सकता है, या डर लग सकता है. अगर सहायक औरत है, तो घर के मर्दों को खयाल रखना होता है कि वे ऐसा कुछ न करें जिससे उनके इरादे गलत समझे जाएँ, या इस बात का खयाल रखें कि घर में एक परिवार की औरत हमेशा रहे. बच्चों की सुरक्षा के बारे में भी सोचना होता है.

घर को ध्यान से देखें. सहायक के रहने के लिए उसमें क्या बदलना होगा, यह सोचें. शायद कुछ महंगी चीज़ें हटानी होंगी. शायद कुछ कमरों पर या अलमारी में हमेशा ताला लगाना होगा. या कुछ दरवाजों में चटकनी लगानी होगी ताकि आप कपड़े बदलें तो सहायक गलती से अंदर न आ जाए. अपनी प्रिय वस्तुएँ, जैसे डाईरी भी शायद अंदर रखनी होगी.

एक गलती जो कई परिवार करते हैं वह है कि परिवार वालों में से सहायक को काम कौन देगा, यह निर्णय नहीं लेते. कोई परिवार वाला सहायक से किसी काम के लिए कहता है, और कोई अन्य परिवार वाला कोई दूसरा काम दे देता है. कई बार काम करने के तरीके भी अलग अलग परिवार के सदस्य अलग अलग ही बताते हैं. इससे सहायक चकरा जाता है. बेहतर होगा कि आप लोग आपस में तय कर लें कि सहायक को काम कौन सिखायेगा, और उसके काम पर नज़र कौन रखेगा. इसमें कन्फ्यूज़न न होने दें.

जिन घरों में एक से ज्यादा नौकर हों, उन में यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि कौन सा कर्मचारी किस काम के लिए जिम्मेदार है, वरना उन में झगड़ा हो सकता है, और आरोपों की अदला-बदली हो सकती है. या कोई काम इसलिए रह सकता है क्योंकि सब सोचते रह गए हैं कि वह काम कोई और करेगा.

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सुरक्षा बनाये रखें

घर में व्यक्ति को सहायक के भरोसे छोड़ के जाने से पहले सुरक्षा का पूरा इंतजाम करें.

कुछ सहायक पूरी तरह से ईमानदार होते हैं, पर कई सहायक छोटी मोटी चोरी करते हैं. बड़ी चीज़ न चुराएं तब भी कोई अच्छा पेन नज़र आया, या कोई घड़ी, तो लालच आ जाता है और लगता है कि घर वाले इस चीज़ के गायब होने को नोटिस भी नहीं करेंगे, और वे उसे उठा लेते हैं. पर हर चीज़ ताले में रखना भी मुमकिन नहीं है.

इससे बड़ी समस्या है कि क्या सहायक सोचेंगे कि घर में इतनी कीमती चीजें हैं (या घर में चोरी इतनी आसान है) कि बड़ी चोरी की जाए. अगर सहायक के मित्र बुरे चरित्र के हैं तो इसका खतरा हो सकता है, क्योंकि वे चोरी की भी सोच सकते हैं, और चोरी करते हुए पकडे गए तो घर वालों को चोट भी पहुंचा सकते हैं. डिमेंशिया वाला व्यक्ति तो वैसे ही कई तरह से लाचार है, और इसलिए अगर सहायक के साथ घर में अकेले है, तो उसे ज्यादा ख़तरा है.

अच्छा यह है कि सहायक को लालच न हो, या उसे यह लगे कि इस घर में कुछ गडबड करना बहुत महंगा पड़ सकता है

  • सहायक को यकीन हो कि घर में चुराने लायक कुछ नहीं है, और
  • सहायक यह भी जानता हो कि उसकी फोटो और जानकारी कई लोगों के पास है और वह कुछ करेगा तो जल्दी पकड़ा जाएगा.

घर में कोई कीमती चीज़ नहीं है, यह सहायक को अलग अलग तरह से जता दें. जैसे कि अगर वह पैसे मांगे तो कहें कि आपको उसके लिए बैंक जाना होगा (जिससे लगे कि घर में ज्यादा नकद नहीं है). आप जेवर ताले में रखें, और अगर किसी शादी-ब्याह में जा रहे हों तो बोलें कि आपको लाकर से जेवर निकलने होंगे (जिससे सहायक सोचे कि जेवर साधारण तौर पर लाकर में रहते हैं). पैसे के दिखावे से बचें. महंगी वस्तुएँ, जो सोने-चाँदी की हों, उन्हें डिसप्ले से हटा दें. सहायक को लालच के मौके न दें.

सहायक का पता और फोटो और फोन नंबर अपने पास रखें, और दोस्तों और रिश्तेदारों को भी दे दें. जिस सोसाइटी या मोहल्ले में रहते हैं उसके किसी जिम्मेदार व्यक्ति को भी दे दें, और सहायक को यह जानने दें कि उसकी फोटो और जानकारी अन्य लोगों के पास है. हो सके तो सहायक के राशन कार्ड या ड्राईविंग लाइसेन्स की कॉपी भी रखें और अन्य लोगों को दें. सहायक यह जानता हो कि उसकी पहचान इतने लोगों के पास है तो वह कुछ कुकर्म करने से पहले दस बार सोचेगा, क्योंकि उसे मालूम है कि पुलिस उसे ढूँढ पायेगी या उसके गाँव/ परिवार तक पहुंच पायेगी.

कुछ शहरों में वृद्ध व्यक्तियों के बचाव के लिए पुलिस की स्कीम होती हैं, और पकड़े गए तो जागरूक पड़ोसी स्कीम भी होती हैं, अगर हो सके तो आप उस में भाग लें. ये सब सहायक को कुछ गलत करने से रोकेंगे.

घर में व्यक्ति को सहायक पर अकेला छोड़ें तो दिन में फोन करते रहें या वीडियो लिंक से घर को चेक करते रहें. पड़ोसियों से कहें कि वे दिन में एक दो बार किसी बहाने चक्कर लगा लें.

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सहायक के काम पर नज़र रखें

सहायक कितना भी प्रशिक्षित हो, कितना भी अच्छा हो, आपको उसके काम पर नज़र रखनी होगी. अज्ञान में, या थकान के मारे गलती हो सकती है. या एक गलती को छुपाने के लिए वह झूठ बोल सकता हैं और गलती का असर बढ़ सकता है, जैसे कि डॉक्टर से सलाह में देरी हो सकती है. यह भी हो सकता है कि सहायक किसी गंभीर बात को छोटा समझे और आपको न बताए.

सहायक के किस काम पर कितनी नज़र रखनी है, यह सोच कर रखें. लिस्ट बना लें ताकि भूलें नहीं, और सपोर्ट ग्रुप के अन्य देखभाल करने वालों से भी विचार-विमर्ष कर लें कि क्या क्या देखते रहना चाहिए और सहायक कैसी कैसी गलतियाँ करते हैं.

अकसर परिवार इस पर इतनी नज़र नहीं रखते कि सहायक व्यक्ति की सफाई ठीक कर करता है या नहीं. यह बहुत महंगा पड़ सकता है. जैसे कि, नहाने का समय व्यक्ति के शरीर पर कोई चोट लगी है, यह देखने का एक उम्दा मौका होता है, और इसलिए आपको नहाते वक्त कभी कभी खुद भी चेक कर लेना चाहिए कि व्यक्ति के साथ सब कुशल तो है? सहायक शायद इतना ध्यान न दें.

सहायक से आपको आराम तो होगा, पर यह याद रखें कि सहायक के लिए यह एक नौकरी है, और वह जब चाहे इसे छोड़ सकता है. जिम्मेदारी तो आपकी ही रहेगी. कुछ सहायक दिल लगाकर काम करते हैं, पर वे भी, अगर उनकी कोई निजी समस्या हो, तो आपका काम छोड़ देंगे.

जब दूसरा सहायक रखें, तो उसका प्रशिक्षण फिर से करना होगा. क्या बताना है, क्या दिखाना है, यह अगर आपके पास लिखा हुआ हो, तो आपको आराम रहेगा.

डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति की देखभाल में कई तनावपूर्ण मौके आते हैं, जब व्यक्ति मुश्किल व्यवहार दिखाते हैं और शायद सहायक पर उत्तेजित होते है. यह भी होता हो कि व्यक्ति को किसी दिन तो कुछ बात याद रहती है, पर किसी दूसरे दिन नहीं, और यह देखने पर सहायक को समझ नहीं आता है कि क्या हो रहा है. इस उतर चढ़ाव से सहायक को शक हो सकता है कि व्यक्ति को सचमुच कोई समस्या है या नहीं. क्योंकि व्यक्ति कई तरह से सामान्य लगते हैं, सहायक कई बार यह नहीं मान पाते कि डिमेंशिया एक रोग है और यह सब उसके लक्षण हैं.

आपको सहायक को डिमेंशिया क्या है, उसका व्यक्ति पर क्या असर हो रहा है, यह कई बार बताना पड़ेगा, खासतौर से व्यक्ति के चिल्लाने के बाद! आपको सहायक को यह भी बारबार याद दिलाना होगा कि व्यक्ति से बहस न करें, चाहे व्यक्ति कुछ भी कहें या कोई भी आरोप लगाएं. आपको सहायक को बारबार आश्वस्त करते रहना होगा.

यदि डिमेंशिया के कारण रोगी का व्यवहार अनुचित हो, तब सहायक को बार बार समझाना होगा कि वे इस व्यवहार को लेकर दुखी न हों और बुरा ना मानें क्योंकि यह सिर्फ रोग का एक लक्षण है. यह उनके प्रति निरादर नहीं है. व्यक्ति अगर गालियों का प्रयोग करें, तब भी आपको सहायक को समझाना होगा कि वे बुरा न मानें. यदि कोई महिला सहायक शिकायत करे कि उसके साथ दुर्व्यवहार हुआ है, तो आपको जांच करनी चाहिए कि क्या यह सच है, क्योंकि डिमेंशिया में कुछ लोग इस प्रकार पेश आ सकते हैं. यह उनकी गलती नहीं है, रोग का लक्षण है, पर फिर भी सहायक घबरा सकते हैं या खतरा महसूस कर सकते हैं. यदि पुरुष रोगी महिला सहायक के प्रति अश्लील हरकतें कर रहे हों तो आपको सोचना होगा कि क्या महिला सहायक रखना उचित है, क्योंकि सहायक की सुरक्षा आपकी जिम्मेदारी है.

आप यह न भूलें कि सहायक कितना भी अच्छा हो, यदि उसे काम करते रहना है तो जरूरी है कि वह शांत और खुश रहे और डिमेंशिया की सच्चाई पूरे वक्त याद रखे, ताकि व्यक्ति के अजीब व्यवहार या गुस्से या आरोपों का बुरा न माने और न ही उनसे डरे, बल्कि उन्हें सहजता से संभाल पाए.

सहायक के रहने का इंतजाम भी ऐसा करें कि उसे आराम हो, और वह खुद को व्यक्ति के लिए जिम्मेदार समझे और परिवार को अपना समझे. कुछ छोटी बातों से काफी फर्कपड़ सकता है, जैसे कि सहायक के लिए अख़बार और मैगज़ीन खरीदना, बाजार जाएँ तो उसके लिए भी कुछ लाना, वगैरह.

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सहायक के छुट्टी लेने के लिए तैयार रहें

सहायक का काम पर लेट आना, या बिना बताए और बिना अपने स्थान पर दूसरे सहायक को रखे हुए छुट्टी पर जाना, यह सब आम समस्याएँ हैं. परिवार वाले अपनी किसी अपोइंत्मेंट पर जाने वाले होते हैं जब ज़ाहिर होता है कि आज सहायक काम पर नहीं आ रहा, और एजेंसी दूसरे सहायक (सब्स्टिच्यूट) को भी नहीं भेज रही, और देखभाल की पूरी व्यवस्था बिगड़ जाती है.

इस समस्या को हल करने के लिए कुछ परिवार दो सहायक रखते हैं, एक दिन के लिए, और एक रात के लिए, और जब तक अगली शिफ्ट का सहायक काम पर न आये, वे पहली शिफ्ट के सहायक को जाने नहीं देते. कुछ एजेंसी भी इस अरेंजमेंट के लिए राज़ी हो जाती हैं. पर अगर पिछली शिफ्ट का सहायक रुकने को तैयार न हो (जैसे कि, अगर उसे कुछ निजी काम हो और वह रुक न पाए), तो यह तरीका काम नहीं करता.

कुछ घरों में अलग अलग कामों के लिए कई नौकर होते हैं, और अगर डिमेंशिया देखभाल के लिए नियुक्त सहायक न आये तो दूसरे कर्मचारी काम में मदद कर देते हैं. पर वे शायद सब कामों में मदद न करें (जैसे कि शौच के काम में मदद), और अगर वे मदद करने को तैयार भी हों तो शायद ठीक से मदद करना न जानें.

जिससे भी आप मदद लें, उसको मदद कैसे करनी होगी, यह समझाना पड़ेगा. खास तौर पर ऐसे कामों में जो दिक्कत वाले हों, जिनमें व्यक्ति सहयोग न दे, या जिनके गलत होने से व्यक्ति को नुकसान हो सकता हो. यह जरूरी है कि परिवार वाले सब कार्यों के तरीके जानें, ताकि वह चेक कर सकें कि जो भी डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति की मदद कर रहा है वह काम ठीक कर रहा है.

कुछ काम ऐसे हैं जिनके लिए आप इसका इंतजार नहीं कर सकते कि एजेंसी दूसरा सहायक भेजेगी. उदाहरण हैं, व्यक्ति को खाना देना, उसकी सफाई करना, या उसे बाथरूम ले जाना. आपको ये काम खुद करने आने चाहियें, या घर में अन्य सदस्यों को ये काम आने चाहियें. आप इन्हें ठीक कर पाएँ और खुद को चोट न लगाएं, इसके लिए फिजियोथैरेपिस्ट से सही तरीके सीखें. कुछ काम ऐसे होते हैं जो शायद इतने मुश्किल न हों, पर जिनका खयाल ही थका देता है, खासकर व्यक्ति की सफाई के काम. आपको इस बात से समझौता करना होगा कि शायद ये काम आपको कभी कभी करने पड़ेंगे, और आप पाएंगे कि ये काम इतने कठिन नहीं हैं जितने सोचने पर लगते हैं.

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संक्षेप में…

अच्छा सहायक रख पाएँ तो आपको देखभाल में बहुत राहत मिलेगी, और कार्यभार सीमा में रहेगा. पर सहायक का कारगर इस्तेमाल करना हो, तो प्लान करना होता है.

आप और अन्य परिवार वाले बहुत थक जाएँ उससे पहले ही सहायक रखने के बारे में सोचना शुरू कर दें, क्योंकि ढंग का सहायक मिल पाने में टाइम लगता है. किस तरह का सहायक रखें, उससे क्या उम्मीद करना ठीक है, उसका प्रशिक्षण कैसे करेंगे, उसके काम पर निगरानी कैसे रखेंगे, घर को सुरक्षित कैसे रखेंगे, सहायक के लिए घर में क्या बदलना होगा, यह सब सोचना पड़ेगा. सहायक जो देखभाल करे वह व्यक्ति की क्षमताओं के हिसाब से बदलता रहे, यह भी देखना होगा. पर याद रखें, सहायक कितना भी अच्छा क्यों न हो, देखभाल ठीक हो यह जिम्मेदारी तो आपकी ही रहेगी.

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इन्हें भी देखें…

इस विषय पर हमारे अन्य वेबसाइट से सामग्री: ये सब अंग्रेज़ी पृष्ठ भारत में देखभाल के संदर्भ में लिखे गए हैं.

एक उपयोगी सरल अंग्रेज़ी डाक्यूमेंट जो आप अपनी स्थिति के लिए बदल कर, सहायक के प्रशिक्षण के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं: Trained attendant orientation note for dementia care (PDF file). इस में चित्र भी हैं, जिनसे सहायक मस्तिष्क पर डिमेंशिया का असर ज़्यादा अच्छी तरह से समझ पायेंगे.This document includes pictures to show the attendant.

कुछ उपयोगी इंटरव्यू:

एक भारत में स्थित देखभाल कर्ता बेटी के ब्लॉग पर देखभाल के अनेक अनुभव, जिनमें से सहायक के प्रशिक्षण और इस्तेमाल संबंधी कुछ एंट्री:

इस पृष्ठ का नवीनतम अँग्रेज़ी संस्करण यहाँ उपलब्ध है: Using Trained Attendants for Dementia Home Care. अंग्रेज़ी पृष्ठ पर आपको विषय पर अधिक सामयिक जानकारी मिल सकती है. कई उपयोगी अँग्रेज़ी लेखों, संस्थाओं और फ़ोरम इत्यादि के लिंक भी हो सकते हैं. कुछ खास उन्नत और प्रासंगिक विषयों पर विस्तृत चर्चा भी हो सकती है. अन्य विडियो, लेखों और ब्लॉग के लिंक, और उपयोगी पुस्तकों के नाम भी हो सकते हैं.

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