डिमेंशिया और देखभाल से जुड़ी स्थितियों से संबंधित मीडिया में लेखों से परिवारों के वास्तविक अनुभव जानने में मदद मिल सकती है। अधिकांश उपलब्ध इंटरव्यू, लेख, ब्लॉग, साईट, वगैरह अँग्रेज़ी में हैं। पर कुछ हिंदी समाचार पत्रों में भी कुछ लेख आते हैं जिन में डिमेंशिया संबंधी अनुभव बांटे गए हैं। नीचे पेश है कुछ हिन्दी न्यूज रिपोर्ट / आप-बीती का संकलन, आपको यह अंदाज देने के लिए है कि किस तरह की स्थितियाँ हो सकती हैं। ध्यान दें कि भले ही इनमें से कुछ कहानियाँ पुरानी हों, लेकिन बताई गई स्थितियाँ और चुनौतियाँ आज भी वैसी ही हैं।
चूँकि यह पेज हिन्दी में प्रकाशित आर्टिकल पर आधारित है, इसकी कुछ सीमाएं हैं। जैसे कि, अकसर प्रकाशित रिपोर्ट्स में मेट्रो शहरों, मध्यम और उच्च आय वाले परिवारों और उन स्थितियों पर ज़्यादा ध्यान दिया जाता है। परिवार वालों के निजी इंटेरव्यू जैसे लेख और फीचर आर्टिकल हिन्दी में कम छपते हैं और अधिकांश खबरें तब छपती हैं जब या तो कोई केस हो या किसी के लापता होने की खबर हो या किसी हमले या चोरी का मामला हो। कई विषयों पर शायद ही हिन्दी में कुछ मिले, जैसे कि घर के अंदर हो रहे बुज़ुर्गों के साथ दुर्व्यवहार, संस्थाओं द्वारा अनदेखी, आर्थिक शोषण और कम संसाधनों वाली जगहों में देखभाल की चुनौतियाँ। मीडिया में लेख न होने का मतलब यह नहीं कि ये समस्याएं और घटनाएँ कम होती हैं, बल्कि यह कि ये बातें हिन्दी अखबारों तक नहीं पहुंचतीं।
इस पेज पर हम निम्नलिखित सूची के हर विषय पर अपने अंग्रेजी के पेज से भी कुछ निष्कर्ष बाँट रहे हैं – अंग्रेजी पेज पर अधिक लिंक और चर्चा है, देखें: Dementia caregiving in the news (India) Opens in new window।
इस पृष्ट के सेक्शन :
- डिमेंशिया और देखभाल से जुड़ी अलग-अलग स्थितियाँ, लक्षण, चुनौतियाँ, आदि.
- विषय: डिमेंशिया देखभाल संबंधी और चालू केस संबंधी कानूनी विवाद और कोर्ट के निर्णय .
- विषय: भटकना .
- विषय: कम उम्र में डिमेंशिया की शुरुआत(अर्ली ऑन्सेट डिमेंशिया).
- विषय: जब देखभाल करने वाले बुज़ुर्ग हों.
- विषय: देखभाल करने वाले की सेहत पर देखभाल का असर.
- विषय: डिमेंशिया देखभाल प्रबंधन, सेवाओं और केयर होम संबंधी.
- विषय: दूर से देखभाल करने वालों की समस्याएं – प्रबंधन में चुनौतियाँ, पास न रहने का अपराधबोध.
- विषय: कोविड के दौरान पेश विशेष समस्याएं.
- डिमेंशिया संबंधी अनुभव पढ़ने के लिए कुछ अन्य स्रोत
डिमेंशिया और देखभाल से जुड़ी अलग-अलग स्थितियाँ, लक्षण, चुनौतियाँ, आदि.
डिमेंशिया के लक्षण पर लेख पढ़ना एक बात है, पर लोगों की आपबीती सुनने से डिमेंशिया की समझ दूसरे ही स्तर की होती है। इस सेक्शन में ऐसे लेख एकत्रित किए गए हैं जिनमें डिमेंशिया से जूझने वालों की ज़िंदगी की अलग-अलग झलक मिलती है।
इस लेख में पढ़ें टीवी अभिनेत्री संगीता घोष की ज़िंदगी के उस दौर का वर्णन जब उनके पिता को हार्ट अटैक हुआ, चलने में वे असमर्थ हो गए, और उन्हें डिमेंशिया भी था। संगीताजी इस लेख में बताती हैं कि पिता का हाल देखना कितना मुश्किल था, और वे खुद को कितना बेबस महसूस करती थीं। संगीताजी बताती हैं कि अपने पिता, और फिर बाद में अपनी माँ के देखभाल कर पाने के लिए उन्होंने किस तरह के बदलाव करे और हिम्मत से काम लिया। लेख यहाँ पढ़ें: उम्मीदों का साथ नहीं छोड़ा संगीता घोष Opens in new window।
डिमेंशिया के प्रारंभिक लक्षण के कुछ उदाहरण और किस्से, और डिमेंशिया पर कुछ जानकारी पर एक लेख है: अपनी यादों को खो चुके लोग Opens in new window। डिमेंशिया सिर्फ बुढापे में ही नहीं होता, पहले भी हो सकता है, इसका भी एक उदाहरण देखें।
अक्सर लोग “डिमेंशिया” को भूलने की बीमारी कहकर यह सोचते हैं कि यह तो कोई छोटी-मोटी समस्या है। वे यह नहीं जानते कि डिमेंशिया का भूलना कुछ अलग किस्म हा है, और डिमेंशिया का असर व्यक्ति की ज़िंदगी के हर पहलू पर होता है। इस लेख, डिमेंशिया सिर्फ भूलने की बीमारी नहीं? Opens in new window, में एक ऐसा वारदात है जिसमे एक व्यक्ति डिमेंशिया के कारण भटक गया और फिर घर वापस आने के लिए रास्ता नहीं ढूंढ पाया। अन्य भी कई लक्षणों के बारे में चर्चा है, और डिमेंशिया के बारे में जानकारी भी।
पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपाई को भी डिमेंशिया था और इसका उनके मिलने-जुलने, बात कर पाने, इत्यादि पर असर होता था। 2015 के एक लेख में पढ़ें उनके उस समय के हाल का वर्णन, और डिमेंशिया पर कुछ जानकारी पढ़ें : राष्ट्रपति के घर आने की खबर सुनकर भी नहीं आई अटलजी के चेहरे पर मुस्कान Opens in new window।
स्थिति न समझने के कारण डिमेंशिया वाले व्यक्ति घबराहट में, अपनी हालत संबंधी परेशानी में या कनफ्यूजन में खुद को हानि भी पहुंचा सकते हैं: घर में चोर घुस आने के भ्रम में 75 वर्षीय महिला ने निगाली सोने की चेन Opens in new window और Kanpur Suicide: कारोबारी ने 16वीं मंजिल से कूदकर दी जान, बेटा बोला- अल्जाइमर की थी बीमरी, भूल जाते थे सबकुछ Opens in new window
विषय: डिमेंशिया देखभाल संबंधी और चालू केस संबंधी कानूनी विवाद और कोर्ट के निर्णय
कुछ स्थितियों में, देखभाल करने वालों को देखभाल के ज़रूरी पहलुओं पर स्पष्टता और नियंत्रण पाने के लिए, या दूसरे संबंधित लोगों/ संस्थाओं के साथ विवादों को सुलझाने के लिए कानूनी सिस्टम का सहारा लेना पड़ता है।
दर्ज किए गए केस की एक मुख्य श्रेणी है देखभाल कौन करेगा (गार्जियनशिप) और डिमेंशिया वाले व्यक्ति के पैसे और संपत्ति का नियंत्रण कौन करेगा। बैंक आदि से जूझने के लिए, और भाई-बहन, माँ-बाप और रिश्तेदारों में से कौन संरक्षक होगा और देखभाल और पैसों का नियंत्रण करेगा, यह तय करने के लिए परिवार वाले अदालत का दरवाज़ा खटखटाते हैं। इसमें आमतौर पर यह साबित करना शामिल होता है कि व्यक्ति के लिए ऐसे कदम की ज़रूरत है, और गार्जियनशिप मांगने वाले लोग ही सही लोग हैं और इस के लिए विभिन्न कानूनों के तहत उचित प्रावधान लागू किए जाने चाहिए। इसमें अन्य संभावित संरक्षकों से ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ की ज़रूरत हो सकती है, या विभिन्न संभव संरक्षकों के बीच विवाद हो सकता है जिसे अदालत को सुलझाना होता है। देखभाल पाने वाले व्यक्ति के रहने की व्यवस्था संबंधी निर्णय पर विचार करना भी शामिल हो सकता है। कुछ लिंक: बेटियों को डिमेंशिया से पीड़ित मां का नियुक्त किया संरक्षक Opens in new window एक ऐसी स्थिति जहाँ कानूनी ढांचा पर्याप्त न होने पर भी संरक्षकता दी गई: अदालत परिवार के सदस्य को मानसिक रोग से पीड़ित व्यक्ति का संरक्षक नियुक्त कर सकती है: उच्च न्यायालय Opens in new window। एक केस जिसमें बेटियाँ अपनी माँ से मिल पाने के लिए कोर्ट पहुंचीं सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं बेटियां : 89 वर्षीया मां से नहीं मिलने दे रहा भाई, दिल्ली और बिहार पुलिस को नोटिस Opens in new window
कभी-कभी विभिन्न सरकारी निकायों से बेहतर सहायता पाने के लिए भी अदालतों का रुख किया जाता है। उदाहरण: Delhi News: न याददाश्त, न ही कोई नातेदार हर दिन बढ़ रहा बिल, इस डॉक्टर का कैसे हो इलाज? Opens in new window।
यदि किसी डिमेंशिया वाले व्यक्ति पर कोई आरोप है या उन्हें कोर्ट में हाजिर होने की जरूरत है, तो कोर्ट से यह तय करने के लिए भी संपर्क किया जा सकता है कि क्या डिमेंशिया वाले व्यक्ति को शारीरिक रूप से कोर्ट में पेश होने की ज़रूरत है, या क्या व्यक्ति की डिमेंशिया के कारण की सोचने-समझने की क्षमता कमज़ोर थी और क्या केस को ड्रॉप किया जाना चाहिए। कुछ लिंक: सीआरपीसी की धारा 329(2) – दिमागी रूप से कमज़ोर होने का निर्धारण करने के लिए अभियुक्त का शारीरिक रूप से पेश होना आवश्यक : उड़ीसा हाईकोर्ट Opens in new window
विषय: भटकना.
डिमेंशिया होने पर भटकने की समस्या को एक बड़ी चुनौती माना जाता है। कई परिवार तब तक अपने प्रियजन के डिमेंशिया की गंभीरता तभी समझ पाते हैं जब व्यक्ति भटक जाते हैं और उन्हें खोजना पड़ता है; वहीं कुछ मामलों में, अच्छी प्लानिंग और सावधानी बरतने के बावजूद, व्यक्ति भटक सकते हैं। कुछ मामलों में व्यक्ति जल्दी मिल जाते हैं, तो कुछ में घंटों, दिनों या हफ़्तों का समय लग सकता है। व्यक्ति को चोट लग सकती है, मौत भी हो सकती है, और कभी-कभी तो वे कभी नहीं मिलते।
भटके हुए लोग कुछ ही समय में बहुत दूर पहुँच सकते हैं – पैदल चलकर, बस, ऑटो या ट्रेन पकड़कर। – और समय के साथ उनको ढूँढना मुश्किल होता जाता है। उन्हें गंभीर चोट लग सकती है, कोई उनका सामान छीन सकता है। समाज और पुलिस बल में भटकने की समस्या के बारे में बेहतर जानकारी होने से लापता लोगों को पहचान कर उन्हें उनके घर पहुचाने में मदद मिल सकती है। आजकल टेक्नॉलजी से – मोबाईल और सोशल मीडिया और सीसीटीवी आदि से – भी खोजने में मदद मिलती है।
भटकने से संबंधित कुछ न्यूज आर्टिकल: फल विक्रेता ने 26 दिन से लापता डिमेंशिया मरीज को कश्मीरी परिवार से मिलाया, इसे कहते हैं इंसानियत Opens in new window, एचएएम रेडियो और सेवानिवृत्त शिक्षक ने अलजाइमर से पीड़ित बुजुर्ग को परिवार से मिलाने में मदद की Opens in new window, डिमेंशिया से पीडित 82 वर्षीय वृद्ध लापता, परिजनों में चिंता Opens in new window, यूपी के सुल्तानपुर से बी जे पी विधायक की पत्नी लापता, घर से सुबह निकलीं तो वापस नहीं आईं, पुलिस ऐसे कर रही तलाश Opens in new window।
विषय: कम उम्र में डिमेंशिया की शुरुआत(अर्ली ऑन्सेट डिमेंशिया).
अधिकाँश डिमेंशिया के केस बड़ी उम्र के लोगों में होते हैं पर डिमेंशिया कम उम्र में भी हो सकता है। ऐसे में उस व्यक्ति और उसके परिवार को कई खास चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। वह व्यक्ति अभी भी ज़िंदगी के बहुत सक्रिय दौर में होता है, कमा रहा होता है या बड़ी ज़िम्मेदारियाँ संभाल रहा होता है; बचत कम होती है और बच्चे छोटे होते हैं। क्योंकि डिमेंशिया को अकसर लोग बुजुर्गों की बीमारी समझते हैं इसलिए कम उम्र में डिमेंशिया को पहचानने में भी दिक्कत होती है।
देखें यह लेख जिसमें में डिमेंशिया के कुछ जोखिम कारकों पर चर्चा है, और अंत में दो ऐसे केस का वर्णन है जो कम उम्र वाले व्यक्तियों के हैं (उम्र 43 और 47)। दोनों केस में शुरू में लक्षण नहीं पहचाने गए पर समस्याएं बढ़ने पर डॉक्टर से सलाह करने पर सही निदान मिल पाया। लेख यहाँ देखें: अल्जाइमर दिवस: अब तो कम उम्रवाले युवा भी आ रहे इस बीमारी की चपेट में, जानें क्या है वजह Opens in new window।
विषय: जब देखभाल करने वाले बुज़ुर्ग हों.
कई मामलों में देखभाल करने वाले व्यक्ति बुज़ुर्ग होते हैं (70, 80 या 90 साल की उम्र का) और वे डिमेंशिया वाले अपने जीवनसाथी या डिमेंशिया वाले अपने बच्चे की देखभाल कर रहे होते हैं। अपने जीवनसाथी की स्थिति को बिगड़ते देखना, उनकी यादों को खोटे देखना, उनकी लाचारी देखना, आईऊर खुद कउजुर्ग होने के बावजूद उनकी देखभाल कहर बहुत मुश्किल होता है। और यदि किसी के बच्चे को डिमेंशिया है तो देखभाल की स्थिति और भी मार्मिक हो जाती है। फिलहाल इस पर हमारे पास हिन्दी लिंक उपलब्ध नहीं हैं; हमारा अंग्रेजी का पेज देखें।
विषय: देखभाल करने वाले की सेहत पर देखभाल का असर।
डिमेंशिया वाले व्यक्ति की देखभाल करना अक्सर बहुत तनावपूर्ण होता है और इससे देखभाल करने वाले की शारीरिक और मानसिक सेहत पर असर पड़ सकता है। देखभाल करने वाले को एंग्जायटी अटैक (घबराहट के दौरे) होने लग सकते हैं, और देखभाल में आने वाली चुनौतियों से उनकी सेहत पर असर पड़ सकता है। कभी कभी अत्याधिक तनाव की वजह से वे बेहद दुखद कदम भी उठा सकते हैं। फिलहाल इस पर हिन्दी लिंक उपलब्ध नहीं हैं; हमारा अंग्रेजी का पेज देखें।
विषय: डिमेंशिया देखभाल प्रबंधन, सेवाओं और केयर होम संबंधी
डिमेंशिया वाले व्यक्ति की घर पर देखभाल के लिए सहायक या अन्य सेवाएं मिलन मुश्किल रहता है। व्यक्ति के लिए डे केयर या केयर होम भेजने का निर्णय लेना या अच्छी सुविधा ढूँढता और फिर सुनिश्चित करना कि व्यक्ति वहाँ खुश रहते हैं, यह भी मुश्किल है। साथ ही, डिमेंशिया वाले लोग कई बार मारपीट और चोरी जैसी घटनाओं के शिकार हो सकते हैं और उन्हें सुरक्षित रखने के लिए सावधान रहना और उचित कदम लेने के बारे में सोचना चाहिए। आजकल ऐसी घटनाओं के मामले बढ़ रहे हैं, यहाँ तक कि डिमेंशिया वाले व्यक्ति की मौत का खतरा भी रहता है।
देखें Kerala: पथानामथिट्टा… केरल Kerala: पथानामथिट्टा में देखभालकर्ता द्वारा किए गए हमले के बाद अल्जाइमर रोगी की मौत Opens in new window , मुंबई में 20 साल के लड़के ने 78 साल की बुजुर्ग महिला को बनाया हवस का शिकार, CCTV से हुआ खुलासा Opens in new window, अल्जाइमर पीड़ित बुजुर्ग मां को पीटती है बेटी, जनसुनवाई में पड़ोसी महिला ने दिखाया वीडियो; आयोग ने उठाया सख्त कदम Opens in new window।
विषय: दूर से देखभाल करने वालों की समस्याएं – प्रबंधन में चुनौतियाँ, पास न रहने का अपराधबोध.
कई परिवारों में बच्चे अपने माता-पिता से दूर रहते हैं और जब माता-पिता में से किसी को डिमेंशिया हो जाता है, तो वे उनके पास रहने के लिए नहीं आ पाते। दूर से देखभाल में मदद करने में प्लानिंग और मैनेजमेंट से जुड़ी कई दिक्कतें आती हैं, और यह भावनात्मक रूप से भी मुश्किल होता है। ऐसे देखभाल करने वालों को अकसर अपराधबोध भी रहता है। फिलहाल इस पर हमारे पास हिन्दी लिंक उपलब्ध नहीं हैं; हमारा अंग्रेजी का पेज देखें।
विषय: कोविड के दौरान पेश विशेष समस्याएं.
वैसे तो अब कोविड चर्चा का विषय नहीं है।, पर जब संक्रमण जोर पर था तो उस के कारण कुछ विशेष दिक्कतें हुई थीं – खासकर लॉकडाउन के दौरान डिमेंशिया वाले व्यक्तियों के भटकने की चुनौतियाँ, या घर में बंद रहने के कारण उनकी बेचैनी आदि की दिक्कतें। एक केस में लखनऊ में एक डिमेंशिया व हृदय रोग वाले रिटायर्ड डिप्टी सीएमओ शाम को घर से बाहर शेविंग कराने निकले पर वापस नहीं लौटे, और उन्हें पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों की मदद से घर से 25 किलोमीटर दूर एक चबूतरे पर थके हुए बैठे पाया। डिमेंशिया से ग्रसित रिटायर डिप्टी सीएमओ को तीन घंटे में ढूंढा Opens in new window।
डिमेंशिया संबंधी अनुभव पढ़ने के लिए कुछ अन्य स्रोत
हिन्दी में डिमेंशिया संबंधी निजी अनुभव पढ़ने के लिए कुछ और स्रोत:
देखें एक हिंदी ब्लॉग भारत में डिमेंशिया-संबंधी विस्तृत ब्लॉग: एक देखभाल कर्ता की ज़ुबानी Opens in new window। यह हिंदी ब्लॉग पूरी तरह डिमेंशिया (मनोभ्रंश) पर है, और इसमें डिमेंशिया और देखभाल पर जानकारी है और माँ की देखभाल से प्राप्त अपने निजी अनुभव भी हैं।
हिन्दी में प्रकाशित पुस्तकों का पेज भी देखें: डिमेंशिया और देखभाल पर हिंदी पुस्तकें
अँग्रेज़ी में उपलब्ध डिमेंशिया-संबंधी आवाज़ें.
डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति की देखभाल के अनुभव के कई विस्तृत इंटरव्यू हमारे अँग्रेज़ी साईट पर हैं। इनकी सूची, हिंदी में संक्षिप्त विवरण, और लिंक देखें: भारत से डिमेंशिया देखभाल करने वालों के इंटेरव्यू या सीधे अँग्रेज़ी में इंटरव्यू सूची देखें: Interviews with dementia caregiversOpens in new window.
हमारे अँग्रेज़ी पेज Voices: Caregiving in the news Opens in new window पर मीडिया द्वारा उपलब्ध भारतीय देखभाल कर्ताओं के अनुभवों पर विस्तृत चर्चा और लिंक हैं, जिन्हें अलग-अलग विषाओं में आयोजित किया गया है।
हमारे अँग्रेज़ी साईट पर डिमेंशिया वाले व्यक्ति की देखभाल के अनुभव के कई विस्तृत इंटरव्यू भी हैं। इनकी सूची, हिंदी में संक्षिप्त विवरण, और लिंक देखें: भारत से डिमेंशिया देखभाल करने वालों के इंटेरव्यू या सीधे अँग्रेज़ी में इंटरव्यू सूची देखें: Interviews with dementia caregiversOpens in new window.
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