डिमेंशिया देखभाल और कोविड 19: कुछ सुझाव, चित्रों द्वारा


कोविड 19 की स्थिति के कारण डिमेंशिया देखभाल में परिवारों को अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। नीचे दिए गए स्लाइड-शो में कुछ मुख्य पहलुओं के लिए सुझाव दिए गए हैं। एक स्लाइड से दूसरे स्लाइड पर जाने के लिए दायें या बाएं तरफ के तीर पर क्लिक करें। स्लाइड की सूची:

  • डिमेंशिया वाले व्यक्ति को कोविड से बचाएं
  • देखभाल को कोविड स्थिति के लिए एडजस्ट करें
  • कोविड के दौरान चिकित्सीय सहायता प्राप्त करें
  • ऐसे देखभाल के तरीके अपनाएं जो संतुलित हैं और कम तनावपूर्ण हैं
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इन पहलूओं पर अधिक विस्तार में चर्चा के लिए ये चार पोस्ट भी उपलब्ध हैं: भाग 1: व्यक्ति को वायरस से बचाएं, देखभाल के बदलाव पर चर्चा: भाग 2: देखभाल कैसे एडजस्ट करें, चिकित्सीय सलाह पर चर्चा: भाग 3: दवा खरीदना, टेस्ट करवाना, टेलीमेडिसिन से सलाह लेना, अस्पताल जाना और भाग 4: कारगर देखभाल और तनाव मुक्ति के लिए अन्य सुझाव, सहायता के लिए संसाधन, इत्यादि

डिमेंशिया देखभाल और कोविड 19 (COVID 19) (भाग 4) : कारगर देखभाल और तनाव मुक्ति के लिए अन्य सुझाव, सहायता के लिए संसाधन, इत्यादि

डिमेंशिया देखभाल और कोविड 19 पर इस सीरीज में अब तक हमने इन विषयों पर बात करी है: वायरस से डिमेंशिया वाले व्यक्ति को कैसे बचाएं, और देखभाल के तरीकों में किस तरह के बदलाव की जरूरत हो सकती है, दवा खरीदना, टेस्ट करवाना, टेलीमेडिसिन से सलाह लेना, अस्पताल जाना। सीरीज की इस आख़िरी पोस्ट में देखें कारगर व्यवस्था बनाने के लिए कुछ अन्य सुझाव। तनाव बढ़े नहीं इस के लिए स्व-देखभाल (आत्म-देखभाल, सेल्फ-केयर) बहुत जरूरी है, और इस के लिए भी कुछ सुझाव हैं। और देखभाल करने के लिए किस तरह के संसाधन हैं, उन्हें कैसे ढूँढें, इस विषय पर भी सामग्री है।

इस पृष्ठ पर:

ऐसी व्यवस्था बनाएं जो बिना थकान के लम्बे अरसे तक अपना सकें।

कोविड 19 और सम्बंधित बदलाव की वजह से घर का वातावरण काफी बदल सकता है। कार्यस्थलों के लिए जारी दिशानिर्देशों के कारण काम करने के तरीके बदल गए हैं, और कुछ प्रकार की गतिविधियाँ और आवागमन अब भी वर्जित हैं। इन सब के कारण अब कई लोग घर पर हैं। घर में अधिक लोग होने की वजह से प्राइवेसी कम हो सकती है। ऊब के कारण कुछ लोग दिन भर आवाज़ तेज करके टीवी या नेटफ्लिक्स पर लगे हों, या फ़ोन पर। दूसरों को घर से काम करने या पढ़ाई करने के लिए संघर्ष करना पड़ सकता है। घरेलू काम और खाना पकाने का कार्यभार अधिक हो जाता है, खासकर अगर काम करने वाली बाई और खाना पकाने वाले नहीं आ रहे हैं। पसंदीदा, और कुछ केस में जरूरत की, खरीदारी के लिए अधिक प्रयास की जरूरत है। लोग चिड़चिड़ाहट महसूस करते हैं । कुछ रिपोर्ट के अनुसार कोविड 19 स्थिति के कारण बहस, गुस्सा, और घरेलू हिंसा और उत्पीड़न में वृद्धि हुई है।

ऐसे वातावरण में डिमेंशिया वाले व्यक्ति के लिए और उनकी देखभाल करने वालों के लिए चुनौतियां कई गुना बढ़ जाती हैं। अच्छा होगा यदि परिवार के सदस्य घर और देखभाल के बारे में सलाह-मशवरा कर के कार्यों को आपस में बाँट लें। व्यक्ति किस देखभाल कर्ता के साथ सहज महसूस करते हैं, देखभाल के कार्यों को बांटते समय इस का ख़याल रहे। देखभाल के तरीकों में इतने बदलाव न करें जिस से व्यक्ति घबरा जाएँ या उन्हें असुविधा हो। अगर देखभाल का कार्यभार एक देखभाल कर्ता पर ज्यादा है, तो परिवार वाले बाकी कामों में अधिक सहायता दे सकते हैं। देखभाल और अन्य कार्यों को आपस में ऐसे बाँटें जो सब के अनुकूल हो और व्यावहारिक भी।

अधिकांश डिमेंशिया देखभाल संबंधी सुझाव इस बात पर केंद्रित होते हैं कि डिमेंशिया वाले व्यक्ति का जीवन कैसे बेहतर बनाया जाए। कुछ हद तक देखभाल करने वाले के तनाव को कम करने के लिए युक्तियाँ भी शामिल होती हैं। उदाहरण के लिए, एक आम सुझाव है कि परिवार वाले व्यक्ति को अनेक संज्ञानात्मक क्षमता बढ़ाने वाली गतिविधियों में शामिल करें। पर सच तो यह है कि परिवार वाले देखभाल के साथ-साथ अनेक दूसरे काम भी संभालते हैं। और कोविड 19 में उनका कार्यभार और तनाव काफी बढ़ गया है। अगर वे गतिविधियाँ बढ़ाएंगे तो कार्यभार संभालना मुश्किल होगा, पर यदि वे ऐसा नहीं करेंगे तो क्या उन्हें अपराध-बोध होगा?

ऐसे समय में संतुलन बनाए रखने के लिए यहाँ कुछ सुझाव दिए गए हैं। परन्तु कृपया इन सुझावों को अधिक तनाव का स्रोत न बनने दें। अपने तनाव को कम करने के लिए छोटे छोटे कदम लें जिन से आप को कुछ राहत मिले। अपने साथ सख्ती न करें। अपनी स्थिति को स्वीकारें और यह पहचानें कि आप का कार्यभार अधिक है और थकान स्वाभाविक है। खुद के प्रति सहानुभूति का भाव रखें न कि आलोचना का। बहुत ज्यादा काम करने की कोशिश न करें। आदर्श बनने की कोशिश न करें। कुछ लोग खुद से इतनी उम्मीद रखते हैं और इतना अपराध बोध महसूस करते हैं कि वे अपना कार्यभार हद से ज्यादा बढ़ा देते हैं। इस से उनका तनाव और चिड़चिड़ापन भी बहुत बढ़ जाता है, और घर का माहौल अधिक बिगड़ जाता है।

परिवार के अन्य सदस्यों के साथ काम बांटें। ये देखभाल के काम हों, ऐसा जरूरी नहीं। यदि अन्य परिवार के सदस्य देखभाल करने वाले के बाकी कार्य-भार को अपने ऊपर ले लें तो देखभाल करने वाले को देखभाल के लिए अधिक टाइम और उर्जा मिलेगी।

आवश्यक कार्यों और उद्देश्यों पर ध्यान केंद्रित रखें। कार्य ऐसे चुनें जिन से एक कार्य करने से कई उद्देश्य पूरे हो पायें। जो भी काम किया जा रहा है या करने की जरूरत है, उस पर विचार करें। देखें कि क्या काम एकदम आवश्यक हैं, क्या इतने जरूरी नहीं हैं, और किन कामों की बिलकुल भी जरूरत नहीं है। आवश्यक कार्यों को प्राथमिकता दें, और सोचें कि क्या इन्हें ऐसे संभाला जा सकता है कि एक ही काम करने से कई आवश्यकताएं पूरी हो जाएं। काम ऐसे करें जो व्यक्ति और देखभाल कर्ता, दोनों के लिए कारगर हो। पर ध्यान रहे, क्या कर सकते हैं, क्या अच्छा है और क्या नहीं, यह हर स्थिति और व्यक्ति के लिए अलग है। इस की कोई स्टैण्डर्ड सूची नहीं है।

एक उदाहरण: डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति के हाथ धुलवाते समय व्यक्ति के साथ गपशप करें और खेल भाव अपनाएँ जैसे कि उंगलियों की गिनती वाले कुछ बचपन की कविताएँ कहना, साबुन के बुलबुले बनाना, मज़ाक करना। ऐसा करने से एक आवश्यक काम पूरा हो जाता है और साथ-साथ एक संज्ञानात्मक खेल और मनोरंजन भी।

या मटर छीलते समय व्यक्ति के साथ बैठें, शायद उसे छीलने के लिए कुछ फली भी दें। एक घरेलू काम निपट जाता है, और बातचीत और गतिविधि भी हो जाती है। इस तरह के रचनात्मक तरीकों के बारे में सोचें, पर ध्यान रहे, व्यक्ति की सुरक्षा का ख़याल रहे।

याद रखें, उद्देश्य तनाव को कम करना है। यदि माँ के साथ मटर छीलना तनाव बढ़ाता है, तो न करें। कार्यों का चयन इस बात पर आधारित होना चाहिए कि देखभाल करने वाले और व्यक्ति दोनों के लिए ठीक हों, न कि किसी पुस्तक या संसाधन में उनका उल्लेख हो 🙂 ।

देखभाल का कार्यभार तभी बढ़ाएं अगर बहुत आवश्यक हो। परिवर्तन करते समय, जहां उचित हो, वहां मौजूदा कार्यों की जगह ऐसे कार्य करें जो इस स्थिति में अधिक उपयुक्त हैं। जब देखभाल कार्यों या घर के काम की बात आती है, तो हमेशा ऐसा लगता है कि और काम करने की गुंजाइश है। घर की कुछ और अधिक सफाई हो सकती है, व्यक्ति के साथ कुछ और गतिविधियाँ हो सकती हैं। लेकिन यह नजरिया रहे तो काम का कोई अंत नहीं है। और इस के बगैर भी सब ठीक-ठाक रहता है। दिनचर्या से थकान कम से कम हो। दिनचर्या व्यवहारिक हो। आदर्श देखभाल कर्ता बनने की कोशिश में खुद को न फसायें।

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दूर से देखभाल करने के लिए विशेष तरीके खोजें।

यदि डिमेंशिया वाले व्यक्ति अकेले रहते हैं तो देखभाल कर्ता की भूमिका दूर से देखभाल का प्रबंधन करने वाले की है। यह स्थिति विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण है क्योंकि देखभाल के रोजमर्रा वाले कार्यों के लिए वे दूसरे लोगों और संस्थाओं पर निर्भर है। यदि डिमेंशिया वाले व्यक्ति का घर में सही इंतजाम नहीं है, तो अन्दर क्या हो रहा है यह देखने के लिए स्काइप जैसा कोई वीडियो संपर्क हो सकता है। इस तरह की स्थिति आमतौर पर ऐसे परिवारों में हैं जहां वयस्क बच्चे एक घर में हैं और उनके बुज़ुर्ग माता-पिता अकेले दूसरे घर में हैं, चाहे उसी शहर में हों या दूसरे शहर या देश में।

ऐसी स्थिति में, दूर से देखभाल करने वालों को एक बहुत ही सक्रिय भूमिका निभानी होगी, स्थिति के बारे में सूचित रहना होगा, और सब संभव सहारे के स्रोतों से जुड़ा रहना होगा।

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परिवार वालों के लिए अतिरिक्त सुझाव।

वरिष्ठ नागरिकों को कोविड 19 का खतरा ज्यादा है, खास तौर पर घर से बाहर जाने पर, इसलिए घर से ही खरीदारी और सब तरह के प्रबंध कर पाने की क्षमता बहुत जरूरी है। परिवार वालों को लोगों से जुड़े रहना चाहिए और जान-पहचान वालों के नेटवर्क का इस्तेमाल कर पाना चाहिए। कई देखभाल करने वाले खुद वरिष्ठ नागरिक होते हैं, और उनकी अपनी भी कई स्वास्थ्य चुनौतयां हैं।

कई वरिष्ठ नागरिक टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल में सहजता नहीं महसूस करते। वे दूसरों से मदद मांगने में भी झिझकते हैं। इस लिए कोविड 19 जैसी स्थिति में वे और भी परेशान हो रहे हैं। उन्हें यह जानकर हिम्मत मिलेगी कि उनके जैसे अन्य लोगों ने पाया है कि टेक्नोलॉजी का उपयोग करना और दूसरों से मदद लेना इतना मुश्किल नहीं था। बस शुरू में हिचकिचाहट की बाधा पार करनी थी। पूछने पर पड़ोसी मदद कर सकते हैं, और दोस्त और उनके बच्चे भी। वरिष्ठों के साथ काम करने वाले संगठन जरूरी कार्य करने में मदद कर सकते हैं, या वे वरिष्ठों को टेक्नोलॉजी और अन्य आवश्यक कौशल सिखा सकते हैं। कोरोना योद्धाओं से संपर्क किया जा सकता है। कुछ ऐसे फ़ोरम हैं जहां लोग विशिष्ट सहायता मांग सकते हैं।

सामान्य तौर पर, दूसरों पर आश्रित होना और असहाय महसूस करना बहुत ही निराश कर सकता है। यह निश्चित नहीं है कि कोविड 19 और संबंधित प्रतिबंध और चुनौतियां कब तक जारी रहेंगी और समय के साथ ये कैसे बदलेंगी। लेकिन कुछ कोशिश करें तो देखभाल करने वाले स्थिति को संभालने के लिए बेहतर तरीके ढूंढ सकते हैं और जरूरी कौशल भी सीख सकते हैं, जैसे कि टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल। वे गिने-चुने लोगों से मदद मांगने के तरीके भी ढूँढ़ सकते हैं।

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स्व-देखभाल और तनाव कम करने के लिए कुछ उपाय।

देखभाल कर्ता के लिए स्व-देखभाल आवश्यक है। ऐसे व्यवहारिक तरीके चुनें जो आप रोज कर पायें। किसी भव्य आदर्श स्व-देखभाल प्रोग्राम की उम्मीद में न बैठे रहें, क्योंकि वह आप शायद न कर पायें।। कोविड 19 और लागू प्रतिबंधों और आवश्यक सावधानियों की स्थिति में देखभाल करने वालों को स्व-देखभाल के लिए ज्यादा टाइम निकाल पाना मुश्किल है। पहले के मुकाबले टाइम कम मिलेगा। फिलहाल बाहर टहलना या जॉगिंग के लिए जाना शायद इतना उचित नहीं है। योग क्लास या जिम जाने के विकल्प उपलब्ध नहीं हैं। घर पर व्यायाम कर पायें, यह कुछ लोगों के लिए तो संभव है पर दूसरों के लिए नहीं है। खुद के लिए ज्यादा लम्बा टाइम निकालना शायद न हो पाए। प्राइवेसी कम है। एक देखभाल करने वाले ने साझा किया कि वह एक भीड़ भरे घर के माहौल में निजी विचारों को अपनी डायरी लिखने में सहज महसूस नहीं करती हैं। एक अन्य महिला ने कहा कि दोस्तों से फ़ोन पर बात कर पाने के लिए उसे बाथरूम में छुपना पड़ता है ताकि और लोग उसकी बात न सुन पायें।

अपनी स्व-देखभाल के लिए ऐसे छोटे-छोटे काम की पहचान करें जिन में अधिक जगह या सामान की जरूरत नहीं है, और जिन्हें आप भरे हुए, शोर वाले घर में भी आराम से कर सकते हैं। कुछ राहत देने वाली चीजों की तलाश करें। ऐसे कार्य चुनें जिन से आपको कुछ राहत मिले और जो आप दिन में कई बार कर सकें। ये छोटी छोटी चीज़ें आपको दिन में कई बार करनी याद रहें, इस के लिए इन्हें अन्य घटनाओं से जोड़ लें।

यहाँ एक उदाहरण है: हर बार जब एक कमरे से दूसरे में जाते हैं, तो तीन गहरी साँसें लें। या हर घंटे हेडफ़ोन पर एक गीत सुनें। फोन अलार्म रिमाइंडर के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।रिंग टोन पर ऐसा गाना लगाएं जो आपके चेहरे पर मुस्कान लाए या जिस से आप शांति महसूस करें। कुछ सोचने से आप ऐसी कई छोटी चीज़ें पहचान पायेंगे जो आप बिना कुछ ज्यादा इंतज़ाम करे और बिना किसी के जाने हुए कर सकते हैं और जिन के लिए अलग अकेले जा कर करने की जरूरत नहीं, जिनमें गोपनीयता की आवश्यकता नहीं है।

दोस्तों के साथ जुड़े रहें। अपने संपर्कों की सूची से रोज कुछ दोस्तों से बात करें, ताकि दोस्तियाँ और रिश्ते बने रहें।

खुद को सूचित रखें पर घबराएं नहीं। आजकल मीडिया में कोविड 19, लॉकडाउन, अनलॉक, परस्पर विरोधी राजनीतिक विचार और विकल्प, और चौंकाने वाले अनुमान भरपूर हैं। खुद को सूचित रखना एक आवश्यकता है, लेकिन खबरों को दिन भर पढ़ते रहने से डर, हताशा, असहाय होने की भावना और तनाव बहुत बढ़ सकता है। अच्छा यही होगा कि आप स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय और राज्य प्रशासन और राज्य पुलिस वेबसाइट जैसे आधिकारिक स्रोतों से सही सूचना प्राप्त करें। एक तरीका यह है कि आप तय कर लें कि दिन में आप ख़बरें पढ़ने के लिए कितना टाइम खर्च करेंगे और इस समय पर आप केवल उपयोगी जानकारी की तलाश करेंगे। यदि आपके पास कुछ अतिरिक्त टाइम है, तो इसे निराशाजनक समाचार बार-बार देखने के बजाय किसी रचनात्मक और सशक्त बनाने वाले काम के लिए उपयोग करें, या कुछ देर आराम करें।

तनाव के लिए हेल्पलाइन:

स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से मनोसामाजिक टोल-फ्री हेल्पलाइन पर संपर्क करें: 080-46110007।

एक बहुत ही उपयोगी संसाधन iCall साइकोसोशल हेल्पलाइन (iCall Psychosocial Helpline) है, जो मुफ्त परामर्श प्रदान करता है, और 93702 48501, 99202 41248, 83697 99513 या 92929 87821, ईमेल icall@tiss.edu, और nULTA ऐप (चैट) का उपयोग करके पहुँचा जा सकता है: सोमवार से शनिवार सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक।

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डिमेंशिया देखभाल संबंधी संसाधन खोजें।

डिमेंशिया की सेवा प्रदाता संस्थाएं, जो पहले डे केयर, मेमोरी कैफ़े, और ऐसे अन्य प्रोग्राम चला रही थीं, उन सब ने ऐसे सब प्रोग्राम निलंबित कर दिए हैं जिन में डिमेंशिया वाले व्यक्ति या देखभाल कर्ता उनके केंद्र में कुछ गतिविधि करते थे या कुछ सहायता या समर्थन प्राप्त करते थे। शायद ये प्रोग्राम कुछ टाइम बाद फिर से चालू करें, पर परिवार वाले भी अब ऐसी सेवाओं के लिए कोविड होने के भय से शायद जाना पसंद न करें । कुछ संगठन इन सेवाओं की जगह अब ऑनलाइन / फोन के माध्यम से सहायता कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, वे अब स्काइप या ज़ूम या अन्य प्लेटफार्म का उपयोग करके ऑनलाइन सपोर्ट ग्रुप मीटिंग करते हैं, और फ़ोन के माध्यम से अधिक जानकारी और सुझाव देते हैं। कुछ लोग इंटरएक्टिव अभ्यासों आदि के लिए सत्र आयोजित करते हैं। लेकिन अन्य संगठनों ने अभी तक ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर अपना काम नहीं बढ़ाया है। कुछ संगठन ऑनलाइन समर्थन तो प्रदान करते हैं, लेकिन मुख्यतः सिर्फ उन जाने-पहचाने परिवारों के लिए जो उनके केंद्र आया करते थे।

ऑनलाइन / फोन समर्थन का एक फायदा यह है कि समर्थन देने वाली संस्था आपके ही शहर में हों, ऐसा जरूरी नहीं। सहायता ढूँढने वाले परिवार भारत स्थित संस्थाओं के लिए व्यापक खोज कर सकते हैं । अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन सेवाएं भी कुछ प्रकार की जानकारी के लिए उपयोगी होंगी, और अंतर्राष्ट्रीय फोरम में साझा किये गए अनुभव और सुझाव भी मददगार हो सकते हैं।

संक्षेप में, उपलब्ध सहायता भारत से ही हो, यह जरूरी नहीं। सहायता स्काइप, ज़ूम, सिस्को वेबेक्स, फेसबुक लाइव, यूट्यूब लाइव, ऑनलाइन मंचों, फोन हेल्पलाइन आदि जैसे प्लेटफार्म पर मिल सकती है। कुछ वेबिनार / बैठकें सूचना प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करती हैं, और टाइप किए गए प्रश्नों का जवाब देती हैं। अन्य उदाहरण हैं सपोर्ट ग्रुप मीटिंग और व्यायाम कार्यक्रम। कुछ प्रोग्राम सार्वजनिक हैं। इनमें कोई भी शामिल हो सकता है / कोई भी देख सकता है,और रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध होती है।

ऑनलाइन माध्यम पर उपलब्ध सहायता का उपयोग करते समय परिवारों को अपनी गोपनीयता के बारे में सावधान रहने की आवश्यकता है। हो सकता है कि वे अपने नाम को उनके सवालों के साथ नहीं जोड़ना चाहें। इसलिए, उदाहरण के लिए, फेसबुक के मुकाबले वे एक ज़ूम प्रोग्राम पसंद कर सकते हैं, क्योंकि फेसबुक लाइव सेशन पर अगर वे कुछ पूछें तो सब देख पायेंगे कि किसने प्रश्न उठाया है। सामान्य तौर पर परिवार ऐसे सत्रों से भी लाभ उठा सकते हैं जहां अन्य लोग सवाल पूछ रहे हैं और उनके मुद्दे पर भी लोगों के सवाल होंगे।

ऑनलाइन / फोन द्वारा सहायता देने वाले संसाधनों की पहचान के लिए परिवार वाले उन संस्थाओं से पूछ सकते हैं जिनके साथ वे पहले से ही संपर्क में थे। वे अन्य डिमेंशिया सेवा प्रदाता/ संस्था से भी उनकी ऑनलाइन/ फ़ोन सेवाओं के बारे में पूछ सकते हैं। भारत के विभिन्न शहरों में डिमेंशिया संस्थाओं की जानकारी इन पृष्ठों पर उपलब्ध है)। एक पाठक से प्राप्त एक उपयोगी टिप: वरिष्ठ नागरिकों (सीनियर सिटीजन) के लिए उपलब्ध हेल्पलाइन भी डिमेंशिया वाले व्यक्ति की देखभाल संबंधी कठिनाइयों के लिए उपयोगी हो सकती हैं। ये हेल्पलाइन परिवारों को जानकारी दे सकती हैं या उन्हें ऐसी संस्थाओं से जोड़ सकती हैं जो उस समस्या के लिए अधिक उपयोगी हैं। अन्य स्रोतों से सहायता न मिले तो इन्हें भी आजमायें।

ध्यान दें कि भले ही कोई संसाधन डिमेंशिया के लिए न हो, वहां भी उपयोगी जानकारी और सहायता मिल सकती है, विशेषकर ऐसी संस्थाएं जो वरिष्ठ नागरिकों, पार्किंसंस रोग, विकलांगता या मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों से जूझ रहे व्यक्तियों की मदद करती हैं। इन क्षेत्रों और डिमेंशिया के बीच चुनौतियों और सुझावों/ समाधानों में काफी समानताएं हैं।

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डिमेंशिया देखभाल करने वाले परिवारों की मदद कैसे करें।

परिवारों की मदद करने वाले लोग ऊपर लिखी गयी बातों से मदद करने के लिए क्षेत्रों की पहचान कर सकते हैं। कुछ सुझाव नीचे देखें:

  • उपलब्ध हेल्पलाइन और अन्य ऑनलाइन संसाधनों को प्रचारित किया जाना चाहिए। इन की जानकारी व्याप्त की जानी चाहिए ताकि जिन्हें मदद की आवश्यकता है वे इनसे संपर्क करें।
  • ऑनलाइन सहायता समूह बनाएं, और तनाव के लिए फोन परामर्श दें। विश्वसनीय डॉक्टरों का डेटाबेस उपलब्ध करवाएं। समर्थन सभी परिवारों के लिए उपलब्ध होना चाहिए। सहायता कई भाषाओं में उपलब्ध होनी चाहिए और कई प्रकार के देखभाल करने वालों के लिए उचित होनी चाहिए। यह केवल अंग्रेजी बोलने वाले उच्च-मध्यम वर्गीय शहरी परिवार तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
  • स्वास्थ्य संबंधी सहायता कैसे प्राप्त करें, इस पर परिवारों को जानकारी और सहायता देनी चाहिए।
  • डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों और संसाधनों के नाम और संपर्क की सूचना एकत्रित करके उपलब्ध करवाना एक बहुत उपयोगी कदम होगा। घर पर आकर सलाह देने वाले डॉक्टर की सूची भी बहुत मददगार होगी। और ऐसे डॉक्टर जो टेलीमेडिसिन में नए मरीजों को सलाह देने के लिए तैयार हों। इस तरह की जानकारी से परिवार डॉक्टर की सलाह और अन्य स्वास्थ्य सहायता अधिक आसानी से प्राप्त कर पाएंगे।
  • एक अन्य क्षेत्र है देखभाल करने वालों को ऑनलाइन संसाधनों का उपयोग करने के लिए प्रशिक्षण देना।
  • परिवारों तक पहुँच पाने के तरीके बहुत तकनीकी हों या महंगे उपकरणों और तेज इन्टरनेट पर निर्भर हों, ऐसा नहीं होना चाहिए। रेडियो कार्यक्रम और सस्ते फ़ोन पर चलने वाले सिस्टम भी बहुत कारगर हो सकते हैं।
  • जागरूकता क्षेत्र में कार्यरत लोग डिमेंशिया व्यक्तियों की कोविड 19 स्थिति में होने वाली समस्याओं के प्रति समाज और अन्य संस्थाओं में संवेदनशीलता पर काम कर सकते हैं। वे कोशिश कर सकते हैं कि डिमेंशिया वाले लोग और उनके देखभाल करने वालों को सहायता की जरूरत है, इस बात को भूला न जाए ।

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इस सीरीज के अन्य भाग: कोविड 19 से बचाव पर चर्चा: भाग 1: व्यक्ति को वायरस से बचाएं, देखभाल के बदलाव पर चर्चा: भाग 2: देखभाल कैसे एडजस्ट करें, और चिकित्सीय सलाह पर चर्चा: भाग 3: दवा खरीदना, टेस्ट करवाना, टेलीमेडिसिन से सलाह लेना, अस्पताल जाना

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डिमेंशिया देखभाल और कोविड 19 (COVID 19) (भाग 3): दवा खरीदना, टेस्ट करवाना, टेलीमेडिसिन से सलाह लेना, अस्पताल जाना

कोविड सम्बंधित पोस्ट की इस सीरीज में अब तक हम देख चुके हैं कि वायरस से डिमेंशिया वाले व्यक्ति को कैसे बचाएं और उनकी देखभाल के तरीकों में किस तरह के बदलाव की जरूरत हो सकती है

देखभाल करने वालों की चिंता और चुनौती का एक बड़ा हिस्सा चिकित्सा पहलुओं से संबंधित है। जैसे, जरूरत पड़ने पर चिकित्सीय सहायता कैसे प्राप्त करी जाय, बाधाओं और प्रतिबंधों के कारण नए नियमों के अंतर्गत मदद कैसे प्राप्त करें, जैसे परिवहन की व्यवस्था करना, और आपात स्थिति में तुरंत सहायता पाना। इसके अलावा, सब लोगों में आजकल अस्पताल का डर है कि कहीं वहां जा कर वहां से बीमार न पड़ जाएँ! इसलिए देखभाल कर्ताओं के लिए एक चुनौती यह है कि वे किसी भी स्वास्थ्य संबंधी स्थिति को ठीक से समझें। उन्हें सोचना है कि सलाह और चिकित्सा कैसे पायें, और यदि अस्पताल जाना हो, तो अस्पताल से कोविड 19 होने के खतरे से कैसे बचें।

स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं को संभालने के लिए सही जानकारी और उपयुक्त योजना की आवश्यकता होती है। प्रतिबंधों के कारण कुछ नई अड़चनें हो सकती हैं। यह इसलिए क्योंकि सरकारी निर्देश बदलते रहते हैं और क्या संभव है और अनुमति कैसे लें, यह बदलता रहता है। इसलिए देखभाल करने वालों को सूचित रहना चाहिए और बदलते परिवेश के हिसाब से योजना बदलते रहना चाहिए।

बाहर जाने वाले वरिष्ठों के कोविड 19 के जोखिम को विभिन्न दिशानिर्देशों में पहचाना गया है। 65 से ऊपर के लोगों को घर पर ही रहने की सलाह दी गयी है। सुझाव है कि आवश्यक कार्यों और स्वास्थ्य प्रयोजनों की वजह के अलावा वे घर पर ही रहें। डॉक्टर की सलाह के लिए वे टेलीकंसल्टेशन का उपयोग कर सकते हैं।

चिकित्सा सहायता के विभिन्न पहलुओं पर नीचे चर्चा की गई है। ध्यान दें कि यदि किसी डिमेंशिया वाले व्यक्ति को घर से बाहर कुछ जांच या परामर्श आदि के लिए ले जाया जा रहा है, तो सब सावधानियां बरतनी होंगी। व्यक्ति को मास्क पहने रहना होगा और यह भी ध्यान देना होगा कि वे अपनी आँखें, नाक और मुंह को न छूएं। हाथ की सफाई के लिए हाथ धोना या सैनिटाइज़र का इस्तेमाल करना होगा। इसके लिए साथ जाने वालों को बहुत सतर्क रहना होगा। व्यक्ति उन की बात मानें, इस के लिए उन्हें बार-बार प्यार से समझाते रहना होगा।

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दवा और अन्य मेडिकल सामान खरीदना।

दवा की दुकानें खुली हैं। कुछ लोग होम डिलीवरी भी करते हैं, खासकर अगर परिवार नियमित रूप से उनसे दवा खरीदता रहा है। लॉकडाउन के शुरुआती दिनों में दवाएं प्राप्त करने में कई लोगों को दिक्कत हुई थी, पर अब स्थिति लगभग सामान्य है। अनलॉक के चरण लागू हो रहे हैं और इन से स्थिति में और भी सुधार है। पर अब भी कुछ दवाएं स्टॉक में नहीं हैं या उनके लिए कई दिनों तक इंतजार करना पड़ सकता है। कुछ फार्मेसियाँ हाल के नुस्खे के बिना दवा देने को तैयार नहीं होती हैं, खासकर कुछ श्रेणियों की दवाओं के लिए। दवाएं ऑनलाइन भी उपलब्ध हैं। पर सब दवाएं आसानी से उपलब्ध नहीं होंगी। ऑनलाइन दवा खरीदने के लिए नुस्खे आवश्यक हैं।

अफ़सोस, सभी परिवारों के पास हाल के नुस्खे नहीं हैं। वास्तव में, उनके पास कुछ दवाओं के लिए हो सकता है कोई नुस्खा न हो। यह विशेष रूप से सप्लीमेंट या आयुर्वेदिक या इस तरह की गैर-एलोपैथी दवाओं के लिए है, या ऐसी दवाओं के लिए जिनका उपयोग वे वर्षों से कर रहे हैं। कई परिवार डॉक्टरों के साथ नियमित संपर्क में नहीं होते हैं। वे पुराने नुस्खे के साथ ही काम चलाते आ रहे हैं और वर्षों तक एक ही दवा देते जा रहे हैं। अपनी सोच-समझ से वे खुद ही दवा की मात्रा (डोज़) को ऊपर-नीचे एडजस्ट करते रहते हैं। यह चिकित्सकीय रूप से उचित नहीं है, लेकिन फिर भी एक वास्तविकता है।

इसलिए, परिवारों को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि उनके पास अपनी दवाओं के लिए नुस्खे हैं। अगर नहीं हैं और आवश्यकता पड़े तो वे इन्हें टेलीमेडिसिन से प्राप्त कर सकते हैं। टेलीमेडिसिन के लिए नीचे का सेक्शन देखें। दवा कहाँ से खरीद सकते हैं, यह पता चला कर रखें। कुछ हफ्तों के लायक स्टॉक रखें। होम डिलीवरी आजकल “संपर्क-मुक्त” (कांटेक्ट-फ्री) है। लेकिन यदि ऐसा नहीं है, तो डिलीवरी लेते समय फेस-मास्क और सैनिटाइज़र का उपयोग अवश्य करें। इसके अलावा, अलग-अलग लोग डिलीवरी पैकेट प्राप्त करने के लिए अलग-अलग तरीकों का उपयोग करते हैं ताकि उन पर वायरस मौजूद न रहे। इन पर अनेक दिशानिर्देश / लेख हैं। कई लेखों में यह सुझाव है कि किसी भी पैकेट को खोलने से पहले कुछ घंटे धूप में रखें। लेकिन कृपया याद रखें कि अधिकांश दवाओं को घंटों के लिए सीधे धूप में नहीं रखना चाहिए। यह कदम शायद वायरस को मार दे, पर यह दवा को बेकार और बेअसर भी कर सकता है।

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ब्लड टेस्ट और अन्य जांच करवाना।

घर आकर रक्त परीक्षण (ब्लड टेस्ट) के लिए सैंपल लेने वाली सेवाएं उपलब्ध हैं। टेस्ट के लिए तकनीशियन किस दिन आ पायेगा यह सेवा में स्टाफ की उपलब्धी पर निर्भर होगा। अपने शहर में ऐसी सेवाओं के संसाधनों के लिए देखें: हमारे अंग्रेजी वेबसाइट के संसाधन पृष्ठ )। कुछ जगहों में लागू प्रतिबंधों के कारण पुलिस नाकाबंदी हो सकती है, खासकर यदि आप कन्टेनमेंट ज़ोन में हों। आने-जाने के लिए अनुमति की जरूरत हो सकती है। ऐसे में सेवा प्रदाता अपने स्टाफ को सैंपल लेने के लिए शायद नहीं भेज पायेंगे। पड़ोसियों से पूछें कि आपके इलाके के लिए कौन सी सेवा भरोसेमंद है। यदि आप एक अपार्टमेंट परिसर में हों तो पता चला लें कि सैंपल कलेक्ट करने के लिए आने वाले तकनीशियन को अन्दर आने की अनुमति दी जाएगी या नहीं। अनलॉक लागू होने के बाद अधिकाँश परिसर में यह समस्या नहीं है, पर फिर भी पता चला लें। कलेक्शन के समय सुरक्षित रहने के लिए हाथ सैनिटाइज़र, मास्क आदि जैसी सावधानियों का उपयोग करें और तकनीशियन को भी सुरक्षित रखें। बार-बार बुलाने के बजाय, एक बार में ही सब टेस्ट करवाने की सोचें। कुछ जांचों के लिए अस्पताल जाना जरूरी होता है। ये टेस्ट करवाने ज़रूरी हैं या नहीं, इस के लिए डॉक्टर से बात कर लें।

अच्छा यही होगा कि आप डॉक्टर से सलाह करें कि किन-किन परीक्षण और जांच की आवश्यकता है, और किन को (और कब तक) स्थगित किया जा सकता है। इस सलाह के लिए आप टेलीमेडिसिन का इस्तेमाल कर सकते हैं।

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टेलीमेडिसिन का उपयोग करके चिकित्सीय सलाह लेना।

ऐसे कई कारण हैं जिन की वजह से डॉक्टर की सलाह की आवश्यकता हो सकती है। उदारहण हैं – नए नुस्खे प्राप्त करने की जरूरत, , कोई नए चिंताजनक शारीरिक या मानसिक लक्षण, मूड की समस्याएँ, व्यक्ति की हालत पहले से खराब होना, और अन्य मौजूदा बीमारियों से सम्बंधित समस्याएं, जैसे कि उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, वगैरह।

अधिकांश अस्पताल और पॉलीक्लिनिक काम तो कर रहे हैं, पर कम कर्मचारियों के साथ। उन्होंने ओपीडी समय को सीमित कर दिया है। स्वास्थ्य संस्थाओं के लिए जारी विभिन्न एसओपी के अनुसार सुरक्षा के लिए बार बार क्लिनिक और अस्पतालों में मशीनों और बाकी जगह को साफ करते रहना होता है, और इस की वजह से हर मरीज़ के लिए अधिक टाइम लगता है। वहां जा कर डॉक्टर से सलाह को पाने में ज्यादा मुश्किल होगी। साथ ही, अस्पताल यात्रा की योजना बनाने में भी चुनौतियाँ हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय गैर-आपातकालीन स्थितियों के लिए टेलीमेडिसिन के उपयोग की सिफारिश करता है। इसके लिए मंत्रालय ने व्यापक दिशानिर्देश भी जारी किए हैं। कई डॉक्टर और अस्पताल अब टेलीमेडिसिन द्वारा सलाह दे रहे हैं। परन्तु डॉक्टर से सलाह करने का यह तरीका नया है। डॉक्टर और मरीज़, दोनों ही इस के आदि नहीं हैं। नीचे देखें टेलीमेडिसिन का कारगर इस्तेमाल करने की लिए कुछ प्रमुख बिंदु। ये परिवारों और डॉक्टरों के अनुभवों पर आधारित हैं।

  • ध्यान दें कि टेलीमेडिसिन कोई मुफ्त हेल्पलाइन नहीं है। सामान्य डॉक्टरी सलाह की तरह इस में भी फीस देनी होती है। परामर्श करने से पहले फीस कितनी है और भुगतान कैसे करना होगा, इस पर स्पष्टता प्राप्त करें। कुछ डॉक्टर सलाह देने के बाद फीस लेते हैं, तो कुछ एडवांस में लेते हैं।
  • कोशिश करें कि टेलीमेडिसिन द्वारा सलाह उसी डॉक्टर से लें जिस के पास आप व्यक्ति के लिए नियमित रूप से जाते हैं और जो आपको जानता है। एक नए डॉक्टर से सलाह करने के मुकाबले यह अधिक अच्छा है। इसके कई कारण हैं।
    • आपके परिचित डॉक्टर को या तो व्यक्ति का केस याद होगा या उन्हें कुछ मुख्य बातें याद दिलाने से केस याद आ सकता है। उनके पास केस की फाइल मौजूद हो सकती है। इसके विपरीत यदि नए डॉक्टर से सलाह करें तो व्यक्ति की केस हिस्ट्री देनी होगी। केस समझाते समय यह सोचना होगा कि किस पहलू को प्राथमिकता दें। यह मुश्किल काम है। हो सकता है आपके पास सारा डेटा भी न हो, खासकर अगर पहले वाले डॉक्टर ने केस फाइल अपने पास ही रखी हो।
    • परिचित डॉक्टर के आपको उपयुक्त सलाह देने की अधिक संभावना है। एक नया डॉक्टर संकोच कर सकता है या केस लेने से मना भी कर सकता है। डॉक्टर कह सकता है कि, “क्या करना है यह तो आपको ही तय करना होगा”, या “मैं ऐसे कुछ नहीं कह सकता। यदि आप चिंतित हैं, तो कृपया अस्पताल जाएँ।”
  • टेलीकंसल्टेशन के लिए तैयार होने के लिए व्यक्ति की केस हिस्ट्री, सबसे नया प्रिस्क्रिप्शन, टेस्ट रिपोर्ट, उनकी वर्तमान समस्या और सवालों को इकट्ठा करने की आवश्यकता है। यह कदम अपने परिचित डॉक्टर से परामर्श कर रहे हों, तब भी फायदेमंद है। यह इसलिए क्योंकि हो सकता है डॉक्टर को केस पूरी तरह से याद न हो और उनके पास केस फाइल न हो। परिवार वाले जितना अधिक तैयार होंगे,उन्हें उतनी ही उपयोगी सलाह मिलेगी।
  • पुरानी हिस्ट्री के मुख्य बिंदु और नए टेस्ट रिजल्ट डॉक्टर के पास सलाह करने से पहले कैसे उपलब्ध करवा सकते हैं, यह पता लगाएं, वर्ना अपॉइंटमेंट का अधिकाँश समय टेस्ट पढ़ कर सुनाने में जा सकता है ।
  • याद रखें कि अगर डॉक्टर को लगता है कि उनके पास केस का पर्याप्त डेटा नहीं है या उन्हें व्यक्ति की शारीरिक परीक्षा करने की आवश्यकता है तो वे केस पर सलाह देने से इनकार कर सकते हैं।
  • “वीडियो” पर परामर्श लेने का प्रयास करें। केवल बोलने या टेक्स्ट करने के मुकाबले यह अधिक कारगर है। वीडियो पर आपको और डिमेंशिया वाले व्यक्ति को देखने पर डॉक्टर को केस पहचानने में आसानी होगी। वे सलाह देने में अधिक सहज होंगे। यदि डिमेंशिया व्यक्ति को वीडियो कॉल में शामिल करना चुनौतीपूर्ण है, तो आप व्यक्ति की तस्वीर साझा कर सकते हैं। या डॉक्टर को व्यक्ति के वीडियो क्लिप दिखा सकते हैं। कुछ डॉक्टर व्हाट्स-अप वीडियो फॉरवर्ड देखने को तैयार होते हैं।
  • एक टेली-कंसल्टेशन का दायरा सीमित है। सरकार ने निर्धारित किया है कि टेलीमेडिसिन के माध्यम से कौन सी दवा दी जा सकती हैं और कौन सी नहीं। गाइडलाइन में बताया गया है कि नया केस है, या मौजूदा परिचित केस है पर उस में नई चिकित्सीय समस्या है तो डॉक्टर क्या दे सकते हैं। यह भी बताया गया है कि पहले से परिचित केस की पुरानी बीमारी का फॉलोअप है, तो उस में डॉक्टर क्या दे सकते हैं।
  • पर डॉक्टर को परिवार को यह बताने में सक्षम होना चाहिए कि जिस समस्या के लिए आपने संपर्क करा है, क्या वह इमरजेंसी स्थिति है और क्या आपको अस्पताल जाना चाहिए।
  • सुनिश्चित करें कि टेली-कंसल्टेशन के बाद परचा ऐसे रूप में मिले जो केमिस्ट या ऑनलाइन फार्मेसी उसे स्वीकार करे। पर्चे में डॉक्टर का नाम, संपर्क और रजिस्ट्रेशन नंबर, रोगी का नाम, पर्चे की तिथि, दवा का नाम और इसके सामान्य (जेनेरिक) नाम और इसकी ताकत और खुराक सब स्पष्ट होने चाहियें।

समय के साथ, जैसे जैसे अधिक लोग टेलीमेडिसिन इस्तेमाल करेंगे, अधिक डॉक्टर भी इसके अभ्यस्त होंगे। शायद उन्हें प्रशिक्षण भी मिले। वर्तमान में, अधिकांश डॉक्टरों को टेलीमेडिसिन इस्तेमाल करने की आदत नहीं है। भले ही वे अपने क्लिनिक में परामर्श के लिए बहुत अच्छे हों, लेकिन टेलीमेडिसिन में कुशल होने में कुछ टाइम लग सकता है। परिवारों के लिए भी यह सब बहुत नया है। इस में अधिक अनुभव होने पर डॉक्टर और परिवार दोनों ही टेलीमेडिसिन में अधिक कारगर होने लगेंगे। परिवार वाले समझने लगेंगे कि टेलीमेडिसिन के लिए तैयार कैसे हों, और प्रश्न कैसे पूछें।

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अस्पताल जाना, जैसे कि आपातकालीन स्थिति में या आवश्यक चिकित्सा प्रक्रिया के लिए।

महामारी के माहौल में किसी क्लिनिक या अस्पताल पर जाना एक कठिन निर्णय हो सकता है। लोग डरते हैं कि अस्पताल में कोविड 19 लग जाने का खतरा ज्यादा है। कई परिवार अस्पताल नहीं जाना चाहते हैं। परन्तु कई परिस्थितिओं में अस्पताल जाना बेहतर है और टालना नहीं चाहिए न ही देरी करनी चाहिए क्योंकि कुछ मामलों में देरी से स्थिति बिगड़ सकती है।

  • यदि ऐसे लक्षण हैं जो कोविड 19 के हो सकते हैं, तो परिवार को कोविड हेल्पलाइन से संपर्क करने में कोई संकोच नहीं करना चाहिए। देर करने से इलाज कम कारगर हो सकता है। हेल्पलाइन सवालों का जवाब देगी और मार्गदर्शन करेगी कि आपको क्या करना चाहिए।
  • यदि कोई चोट लगी है या दुर्घटना हुई है, कोई और आपातकाल स्थिति है, जैसे कि हार्ट अटैक, तो अवश्य अस्पताल जाएँ। देरी न करें, संकोच न करें। हो सके तो ऐसा अस्पताल चुनें जहां सब सुविधाएं और स्पेशलिटी उपलब्ध हैं।
  • कुछ प्रोसीजर आवश्यक हैं, जैसे डायलिसिस, कीमोथेरेपी, आदि। इन के लिए निर्धारित टाइम टेबल के हिसाब से अस्पताल जाने की आवश्यकता होती है। अस्पताल के सम्बंधित विभाग के साथ संपर्क रखें। आने-जाने और ट्रीटमेंट करवाने का इन्तेजाम करें।
  • यदि कोई ऐसे महत्वपूर्ण चेकअप हैं जो सिर्फ अस्पताल में या क्लिनिक में हो सकते हैं, जिनके लिये जरूरी मशीन और उपकरण के लिए अस्पताल जाना जरूरी है, और आप सोच रहें हैं कि अस्पताल जाएँ या नहीं, तो टेलीमेडिसिन से डॉक्टर से सलाह करने से निर्णय में आसानी होगी।

यदि अस्पताल जाना हो तो क्या प्लान करें और खुद को कैसे सुरक्षित रखें? आप किस जगह हैं और वहां किस स्तर के प्रतिबन्ध लागू हैं, आपको इन सब के अनुसार प्लान करना होगा। उदाहरण के तौर पर, कितने देखभालकर्ता व्यक्ति के साथ (वाहन में, या अस्पताल में) जा सकते हैं। अनलॉक शुरू होने के बाद इन सब में पहले के मुकाबले काफी ढील है, पर फिर भी कुछ प्रतिबन्ध हैं। कैसे जाएँ यह भी चुनौती है। सभी के पास निजी वाहन नहीं हैं, या उनके ड्राइवर उपलब्ध नहीं हैं। वे अस्पताल कैसे जाएँ? क्या टैक्सी, ऑटो, सार्वजनिक परिवहन चल रहे हैं? क्या ये सुरक्षित हैं? आने-जाने के वक्त, और अस्पताल में भी कोविड 19 वायरस के संपर्क में आने का खतरा है। यह भी हो सकता है कि आपको अस्पताल जल्दी में जाना पड़े, और उस समय सब नियम और संसाधन ढूँढने का समय न हो, इसलिए पहले से क्या जानना होगा? इमरजेंसी यकायक कभी भी पैदा हो सकती । इसका पहले से नहीं पता। इन पहलूओं के लिए कुछ सुझाव नीचे देखें।

  • पहले से पहचान लें कि कौन से अस्पताल आपकी संभावित जरूरतों के लिए अधिक उपयुक्त हैं, और जिन में जाने से आपको लगता है कि ख़तरा कम है। कुछ अस्पतालों को अब कोविड अस्पताल घोषित कर दिया गया है। वे अन्य केस नहीं ले रहे। कुछ रिपोर्टों ने दावा किया कि कुछ अन्य अस्पताल भी सामान्य इमरजेंसी केस लेने से इनकार कर रहे हैं। कई अस्पताल केस लेने से पहले जिद्द कर रहे हैं कि आप हालिया टेस्ट रिपोर्ट देकर साबित करें कि व्यक्ति को कोविड नहीं है। इसलिए पहले से जानना अच्छा है कि कौन से अस्पताल सामान्य, यानि गैर कोविड आपात स्थिति के केस लेते हैं। यदि संभव हो, तो जाने से पहले अस्पताल को फ़ोन करके पुष्टि कर लें कि वे आपके प्रियजन जैसे केस ले रहे हैं या नहीं।
  • कोविड संबंधित हेल्पलाइन नंबर और गैर कोविड समस्याओं के लिए हेल्पलाइन नंबर को जानें। ये अलग-अलग हो सकते हैं। इसके अलावा, एम्बुलेंस या अस्पताल आने-जाने के लिए अन्य साधन, जैसे कि टैक्सी, भी कोविड और गैर-कोविड के लिए भिन्न हो सकते हैं। कुछ “आपातकालीन” कैब सेवाएं उपलब्ध हैं जो केवल अस्पतालों और घरों के बीच चलती हैं। एंबुलेंस और पुलिस सहायता भी संभव हैं। अस्पताल आने जाने के इन साधनों के बारे में सूचित रहें।
  • कुछ ज़ोन में , खासकर कंटेनमेंट ज़ोन में, आने-जाने के लिए अनुमति की आवश्यकता हो सकती है। यह इस पर निर्भर है कि आप किस जगह हैं और वहां इस समय कौन से प्रतिबन्ध और व्यवस्था लागू हैं। अनुमति लेने की प्रक्रियाएँ बदलती रहती हैं। इस बारे में नई सूचना प्राप्त करते रहें। नगर निगम और पुलिस आयुक्त के ट्विटर और फेसबुक अकाउंट ऐसी जानकारी के लिए विश्वसनीय स्रोत हैं। राज्य के कोविड वेबसाइट पर भी नवीनतम जानकारी मिल सकती है। इस तरह की सूचना खोज को इमरजेंसी के लिए नहीं छोड़ना चाहिए।
  • अस्पताल की तत्काल यात्रा के लिए तैयार रहें। महत्वपूर्ण मेडिकल डेटा अपने साथ तैयार रखें। इसके अलावा, आवश्यक फोन नंबर और हाथ सैनिटाइजर और मास्क जैसे सामान भी तैयार रखें।
  • एम्बुलेंस या टैक्सी या अन्य वाहन में आते जाते वक्त बीमारी न लगे, इस के लिए सावधानी बरतें। उदाहरण हैं, मास्क पहनना, हैण्ड सैनीटाइजर का इस्तेमाल, सतह पूछना, आँख/ मुंह/ नाक न छूना वगैरह। व्यक्ति के लिए भी और देखभाल कर्ता के लिए भी अस्पताल की तत्काल यात्रा के लिए तैयार रहें। महत्वपूर्ण मेडिकल डेटा और आवश्यक फोन नंबर और हाथ सैनिटाइजर और मास्क जैसे सामान ले जाना न भूलें।
  • इस बात पर विचार करें कि प्राथमिक देखभाल कर्ता अस्वस्थ हों तो डिमेंशिया वाले व्यक्ति की देखभाल कौन करेगा। इस के लिए उसे किस जानकारी और सामान की जरूरत होगी।

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इस सीरीज के अन्य भाग हैं: कोविड 19 से बचाव पर चर्चा: भाग 1: व्यक्ति को वायरस से बचाएं, देखभाल के बदलाव पर चर्चा: भाग 2: देखभाल कैसे एडजस्ट करें, और भाग 4: कारगर देखभाल और तनाव मुक्ति के लिए अन्य सुझाव, सहायता के लिए संसाधन, इत्यादि

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डिमेंशिया देखभाल और कोविड 19 (COVID19) (भाग 2) : देखभाल कैसे एडजस्ट करें

कोविड 19 महामारी से उत्पन्न स्थिति में डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति को इस वायरस से बचाना परिवार वालों के कार्यों का सिर्फ एक पहलू है (इस के लिए भाग 1 देखें)। व्यक्ति को देखभाल की जरूरत होती है, जैसे कि दैनिक कार्यों में सहायता देना, और उनको स्वस्थ और सक्षम रखने के लिए कदम उठाना, जैसे कि गतिविधियों का कारगर इस्तेमाल। पर कोविड 19 महामारी और सम्बंधित दिशानिर्देश कारण देखभाल में कुछ बदलाव की जरूरत है।

व्यक्ति की देखभाल सुचारू रूप से चलती रहे, इस के लिए अकसर परिवार वाले अपनी स्थिति के अनुसार एक व्यवस्था का इस्तेमाल करते हैं, पर कोविड 19 महामारी के कारण यह व्यवस्थाअस्त-व्यस्त हो गयी होगी। एक तरफ व्यक्ति को कोविड 19 से बचाने के लिए कई बदलाव जरूरी हैं, और ऊपर से नए एसओपी के कारण घर के सभी लोगों के आने-जाने और काम करने के तरीके बदल गए हैं। और ये बदलाव एक-दो दिन की बात नहीं। कोविड 19 से व्यक्ति को बचाना तो तब तक चलता रहेगा जब तक या तो कोविड 19 का खतरा ख़त्म हो जाए या कोई टीका उपलब्ध हो। और प्रतिबंधों के कारण और सम्बंधित सामाजिक और आर्थिक निर्णयों के कारण हुए परिवर्तन भी ख़त्म होने में समय लेंगे। हालांकि मई 30, 2020, और उसके बाद जारी दिशानिर्देशों के हर अवतार में बराबर चरणबद्ध तरीके से ढील दी जा रही है, पर साथ साथ कई मानक प्रचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी जारी हो रहे हैं। इन्फेक्शन का ख़तरा बरकरार है।पहले जैसी स्थिति के लौटने में समय लगेगा और देखभाल के तरीकों में बदलाव आवश्यक हैं।

यह जरूरी है कि परिवार वाले कोविड 19 उत्पन्न नई परिस्थिति के अनुसार देखभाल के तरीके को ऐसे बदलें ताकि जरूरी काम ठीक चलते रहें, व्यक्ति और बाकी परिवार वालों को परेशानी न हो, और लम्बे अरसे तक अपनाने पर भी इस नई व्यवस्था से थकान और तनाव न हो|

इस पृष्ठ पर:

कोविड 19 और सम्बंधित प्रतिबन्ध और एसओपी से उत्पन्न चुनौतियाँ

लॉकडाउन के कारण तो कई बदलाव नजर आ चुके हैं, और अनलॉक के लिए कदम उठाये जाने पर भी कुछ बदलाव रहेंगे – जैसे कि मास्क का इस्तेमाल, दूरी (सोशल डिस्टेंसिंग) बनाए रखने के निर्देश,कार्यस्थलों को भी निर्देश कि वे जहां तक संभव हो, वर्क फ्रॉम होम की प्रणाली अपनाएं, कार्य/ व्यवसाय में अलग-अलग समय का पालन करें, इत्यादि। इन सब से देखभाल का मौहौल बहुत बदल गया है।
कुछ उदाहरण:

  • घर में अधिक भीड़ और चहल-पहल: लागू दिशानिर्देशों के कारण और किसी जगह पर कोविड 19 की क्या स्थिति है, इस के अनुसार बाहर निकलने पर विभिन्न प्रकार के प्रतिबन्ध और एसओपी हैं। वैसे भी लोग अब घर से ही काम या पढ़ाई कर रहे हैं और कई परिवार के सदस्य अब दिन भर घर पर ही हैं। घर से काम करने वाले फ़ोन पर जोर जोर से बात कर रहे हैं, या एक दूसरे को चुप रहने के लिए बोल रहे हैं – बिना काम वाले लोग टीवी पर लगे रहते हैं या गप्पें मारते रहते हैं। शोर और गतिविधियों का स्तर बढ़ सकता है।
  • घर में तनाव का माहौल बढ़ सकता है, और प्राइवेसी कम हो सकती है :घर का साइज़ तो उतना ही है, पर अब दिन भर उसमें ज्यादा लोग हैं, और सब का पारा आसानी से चढ़ने लगता है। आपस में बात-बेबात बहस हो सकती है। काम ज्यादा है पर काम बांटना शायद ठीक से न हो, और इस से भी परेशानी हो सकती है। कुछ हेल्पलाइन और विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह के माहौल में घरेलू संघर्ष, हिंसा, उत्पीड़न इत्यादि की घटनाएं भी बढ़ती हैं। आर्थिक कठिनाइयाँ भी हो सकती है, जिन के कारण तनाव और भी अधिक होगा।
  • सहायकों और सेवाओं/ साधनों की कमी: पहले की व्यवस्था में जिन साधनों और सहायकों का उपयोग होता था, वे साधन और सहायक अब शायद उपलब्ध न हों। जैसे कि, कुछ घरों में विभिन्न प्रतिबन्ध और एसओपी के कारण या वाहन (बस, मेट्रो, ऑटो) न चलने के कारण काम करने वाली बाई या ड्राईवर या डिमेंशिया देखभाल के लिए रखे गए सहायक/ आया अब अन्दर नहीं आ सकते। या जिस डे केयर में व्यक्ति पहले कुछ समय के लिए जाते थे, वह अब बंद है। घर का सामान्य काम और देखभाल का काम, शायद परिवार वालों के लिए दोनों का कार्यभार बढ़ सकता है|
  • डिमेंशिया देखभाल के तरीकों में बदलाव: सहायकों की कमी, घर में अधिक काम, हल-चल और उथल-पुथल होना, इन सब का दिनचर्या पर असर हो सकता है। नियमित गतिविधियाँ बदल सकती हैं। दिन का टाइम-टेबल फर्क हो सकता है। ऊपर से दैनिक कार्यों में मदद करने वाले व्यक्ति को कोविड 19 से बचाने के लिए जो सावधानियां लेते हैं (जैसे कि फेस मास्क, बार-बार हाथ धोना, सतहों को बार-बार पोंछना), उन से भी व्यक्ति को उलझन हो सकती है।

डिमेंशिया वाले व्यक्ति के लिए आम तौर पर किसी भी नई परिस्थिति से एडजस्ट करना कठिन होता है, और इतने सारे बदलावों, डिमेंशिया वाले व्यक्ति परेशान और विचलित हो सकते हैं। उनके मूड में उतार-चढ़ाव हो सकता है। उनका व्यवहार बदल सकता है और उनकी क्षमताएं भी कम हो सकती हैं। इस सब के कारण उनकी देखभाल अधिक मुश्किल हो जाती है, ऊपर से देखभाल करने वाले का कार्यभार और तनाव वैसे भी बढ़ सकता है

एक महत्वपूर्ण चुनौती है कि ऐसे में व्यक्ति की भटकने की संभावना बढ़ जाती है। कोविड 19 और सम्बंधित भय के माहौल में भटकना विशेष रूप से खतरनाक हो सकता है। लोग किसी अजनबी के पास आने में या उसकी मदद करने में संकोच कर सकते हैं। मौजूदा प्रतिबंधों के कारण परिवारों के लिए एक बड़ी खोज का अभियान शुरू करना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि मदद करने वाले भी शायद हिचकिचाएं । कंटेनमेंट जोन हो तो और भी मुश्किल है ।भटकने वाले व्यक्ति से पुलिस अगर पूछताछ करे तो उससे भी समस्या हो सकती है, क्योंकि व्यक्ति बाहर होने का कोई स्पष्ट और वैध कारण नहीं दे सकता है। अप्रैल के मध्य (भारत) में, कार चला रहे एक वरिष्ठ को पुलिस ने रोका। जब पूछताछ की गई, तो वरिष्ठ को लॉकडाउन या ई-पास के बारे में पता नहीं था। वरिष्ठ के तौर-तरीके, अस्वीकार्य भाषा और प्रतिक्रियाओं के कारण वरिष्ठ के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। यह घटना दर्शाती है कि डिमेंशिया वाले व्यक्ति को विभिन्न प्रतिबंधों का अनुपालन करवाना बहुत चुनौतीपूर्ण है।

सच तो यह है, इतने सारे बदलावों के साथ,व्यक्ति का परेशान होना और बदले हुए व्यवहार दिखाना स्वाभाविक है। परिवारों को चिंताजनक व्यवहार कम करने की कोशिश करनी होगी। उन्हें यह ध्यान देना होगा कि घर में सीमित रहने से और घर के बदले माहौल के कारण व्यक्ति का मूड खराब न हो, बोरियत न हो, और अकेलापन न हो। ये सब डिमेंशिया वाले व्यक्ति के लिए शारीरिक या संज्ञानात्मक गिरावट का कारण बन सकते हैं। बदलाव लॉकडाउन के अलग अलग अवतारों के कारण हों या अनलॉक की ढील के अलग अलग चरणों के कारण हों, इन दिनोदिन हो रहे बदलाव के माहौल में एडजस्ट करना डिमेंशिया वाले व्यक्ति (और देखभाल करने वाले के लिए) मुश्किल हो सकता है।

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देखभाल के तरीके एडजस्ट करने के लिए कुछ सुझाव|

ऐसी स्थिति में कई स्रोतों से एकत्रित कुछ देखभाल टिप्स:

  • सबसे जरूरी है कि अब तक चली आ रही दैनिक व्यवस्था और नई परिस्थिति की सच्चाई, दोनों के आधार पर एक उपयुक्त दैनिक दिनचर्या बनाएं। एक नियमित दिनचर्या डिमेंशिया व्यक्ति की देखभाल का एक जरूरी अंग है, क्योंकि इस से व्यक्ति को आगे क्या होगा उसका पूर्वानुमान रहता है और व्यक्ति अधिक सहज महसूस करते हैं। दिनचर्या व्यावहारिक बनाएं। इस में सब जरूरी कार्य शामिल करें। इस कार्यक्रम का रोज इस्तेमाल करने से व्यक्ति को और देखभाल करने वाले को, किसी को भी तनाव या नाराजगी या थकान नहीं होनी चाहिए। दिनचर्या बदलने का काम ऐसी गति से करें जो व्यक्ति को परेशान न करे और सभी को मान्य हो
  • उपयुक्त शारीरिक और संज्ञानात्मक गतिविधियों को शामिल करें। उन चीजों की तलाश करें जो व्यक्ति का मन लगाएं और उन्हें व्यस्त रखे, उनकी बेचैनी कम करे, और उनकी मानसिक क्षमता बढ़ाए। उन गतिविधियों के बारे में सोचें जो उन्हें पहले करने में मज़ा आया था, और जो उनकी वर्तमान रुचि और क्षमता के अनुकूल हैं। ऐसे कार्यों से दूर रहें जिन से उन्हें असहजता हो या चिड़चिड़ाहट हो। खयाल रहे कि ऐसे काम ही चुनें जो देखभाल करने वाले बिना मुश्किल के कर पायें। उदाहरण के लिए, यदि देखभाल करने वालों के पास इसके लिए समय और ऊर्जा है (और यदि व्यक्ति इसे पसंद करता है) तो देखभाल करने वाले व्यक्ति को अपनी पुरानी यादों, व्यंजनों की विधि आदि का टेप करने या लिखने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं। या कुछ ऑनलाइन व्यायाम प्रोग्राम का चयन करें जहां व्यक्ति वीडियो में उन लोगों के साथ “भाग” ले सकते हैं। कई अन्य उपयोगी ऑनलाइन कार्यक्रम भी हैं जैसे कि कुर्सी ताइ-ची, कुर्सी योग, कुर्सी सूर्यनमस्कार आदि जो वरिष्ठों के लिए बनाए गए हैं, और डिमेंशिया वाले व्यक्ति के लिए भी उपयुक्त हैं। ये वरिष्ठ नागरिकों के साथ काम करने वाले संगठनों या डिमेंशिया या पार्किंसंस रोग सम्बंधित संस्थाओं से मिल सकते हैं। उपयोग करने से पहले जाँच करें कि इन में दिखाए गए व्यायाम सुरक्षित और सरल हैं।
  • व्यक्तियों का मनोरंजन करने के लिए उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करें। व्यक्ति को व्यस्त रखने की और उनका मन लगाए रखने की कोशिश करें (पर उन्हें अधिक उत्तेजित न होने दें)। ऐसे तरीके खोजें जिन से देखभाल करने वालों का कार्यभार न बढ़े। उदाहरण के लिए, पुराने टीवी सीरियल जो अब दोबारा दिखाए जा रहे हैं (भारत में कुछ ऐसे टीवी शो प्रसारित किए जा रहे हैं)। या पुरानी फिल्म क्लिप और गाने, भजन आदि। देखभाल कर्ता के पास समय है तो वे व्यक्ति के साथ बैठ कर कुछ पुरानी यादों को ताजा करने वाले काम भी कर सकते हैं, पर उदास या उत्तेजित करने वाली यादों से दूर रहें । ऐसे तरीके चुनें जो व्यक्ति की पसंद के हिसाब से हैं और उन्हें खुश करती हैं पर थकाती नहीं हैं।
  • कुछ मेलजोल वाली गतिविधियों को जरूर शामिल करें। अपना घर का बाग़ न हो तो बाहर टहलना संभव नहीं (कोविड 19 से बचाव के कारण और प्रतिबंधों के कारण) । घर में मेहमान का आना भी नहीं होता। इसलिए व्यक्ति को अकेलापन महसूस हो सकता है। मूड पर भी इस का असर हो सकता है । व्यक्ति को अलगाव न महसूस हो और वे सामाजिक रूप से औरों से जुड़े रहें, इस के लिए उपलब्ध तरीकों का उपयोग करें। परिवार के लोग रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ जुड़े रहने के लिए फेसटाइम, जूम, स्काइप, व्हाट्सएप आदि जैसे प्लेटफार्मों का उपयोग कर रहे हैं। ये डिमेंशिया वाले व्यक्तियों के लिए भी कनेक्शन रखने में मददगार हो सकते हैं। कुछ सरल, गैर-तकनीकी चीज़ें भी कारगर हो सकती हैं, जैसे कि बालकनी में बैठकर आसपास की चहल-पहल देखना।
  • व्यक्ति भटकें नहीं, इस के लिए अधिक सतर्क रहें। परिवार के सभी सदस्यों को सावधान रहना चाहिए कि वह व्यक्ति बाहर न भटके और न ही खुद को चोट पहुंचाए।
  • व्यक्ति को ज्यादा उत्तेजित न होने दें, अधिक उकसाहट से बचें। व्यक्ति को अधिक शोर से, अधिक गतिविधियों और हलचल से दूर रखें – इस तरह की अत्यधिक चहल-पहल, शोर-शराबे से उनकी उत्तेजना बढ़ सकती है। कुछ उदाहरण जिन से उन्हें बचाना अच्छा होगा: हिंसक फिल्में, टीवी पर लूप करती हुई तनाव-पूर्ण खबरें, परिवार के सदस्यों की जोरदार बातचीत। इस के लिए सभी परिवार के सदस्यों को सहयोग देना होगा क्योंकि घर में कौन कहाँ क्या कर रहा है, उस में सब को कुछ एडजस्ट करने की जरूरत हो सकती है ।
ध्यान दें कि लॉकडाउन /अनलॉक किस जगह किस तरह लागू करा जाएगा यह इस पर निर्भर है कि आप जहां हैं वहां स्थानीय प्रशासन के अनुसार कोविड की क्या स्थिति है। दिन-प्रतिदिन के काम को संभालने के लिए यह जानना जरूरी है कि किस क्षेत्र को किस प्रकार का “जोन” माना जा रहा है। इस के लिए नगरपालिका और पुलिस साइटों के माध्यम से सूचित रहें ।

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इस सीरीज के अन्य भाग: कोविड-19 से बचाव पर चर्चा: भाग 1: व्यक्ति को वायरस से बचाएं, चिकित्सीय सलाह पर चर्चा: भाग 3: दवा खरीदना, टेस्ट करवाना, टेलीमेडिसिन से सलाह लेना, अस्पताल जाना और भाग 4: कारगर देखभाल और तनाव मुक्ति के लिए अन्य सुझाव, सहायता के लिए संसाधन, इत्यादि

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डिमेंशिया देखभाल और कोविड 19 (COVID 19) (भाग 1): व्यक्ति को वायरस से बचाएं

कोविड 19 (नोवल कोरोनावायरस) एक नया संक्रमण (इनफ़ेक्शन) है जो महामारी का रूप ले चुका है – विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे “पैनडेमिक” (वैश्विक महामारी) के रूप में पहचाना है। भारत में भी कोविड 19 के फैलाव को सीमित करने के लिए और संक्रमित लोगों को इलाज दे पाने के लिए बहुत से कदम उठाए गए हैं। इनमें शामिल हैं स्वास्थ्य संसाधनों का क्षमता निर्माण, कोविड 19 के रोगियों को जल्द पहचान पाना और अलग रखकर उनका इलाज करना। इस इनफ़ेक्शन से बचने के लिए उचित आदतें अपनानी होंगी, जैसे मास्क पहनना और एक दूसरे से दूरी रखना। गतिविधियों और आवागमन पर प्रतिबंध भी लागू करे गए हैं। इन सब से लोगों के दैनिक जीवन में अनेक बदलाव हुए हैं और चुनौतियाँ भी पैदा हो रही हैं। लोगों को जानकारी और सुझावों की जरूरत है।

कोविड 19 (नोवल कोरोनावायरस) एक नया वायरस है जिसके बारे में जानकारी अभी भी बहुत कम है। वैज्ञानिक इसे समझने के लिए, इसका फैलाव रोकने के लिए और उचित इलाज कर पाने के लिए भरपूर प्रयास कर रहे हैं। कोविड 19 के क्या लक्षण हैं, डॉक्टर के पास कब और कैसे जाना होगा, इसका इलाज क्या है, इस से कैसे बचें, इस के लिए हेल्पलाइन कौन सी हैं, यह भारत में कितना फैल रहा है, इत्यादि, इन सब विषयों पर जानकारी का सबसे विश्वसनीय स्रोत है स्वास्थ्य मंत्रालय का वेबसाइट। इस साईट पर हिंदी के डॉक्यूमेंट, पोस्टर और वीडियो के लिंक भी हैं।

अब तक उपलब्ध सभी जानकारी के अनुसार कोविड 19 वायरस बुजुर्गों के लिए ज्यादा खतरनाक है, ख़ास तौर से उन बुजुर्गों के लिए जो पहले से ही अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं, जैसे कि उच्च रक्तचाप, दमा, दिल की समस्याएं या मधुमेह। इसलिए जिन परिवारों में बुज़ुर्ग हैं, उनको बहुत सावधान रहना होगा। डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति अकसर बड़ी उम्र के होते हैं और उन्हें अन्य बीमारियाँ भी हो सकती हैं। इसलिए कोविड 19 होना उनके लिए अधिक खतरनाक है। ऊपर से, यदि किसी डिमेंशिया वाले व्यक्ति को कोविड 19 हो जाए (या उन्हें क्वारंटाइन की जरूरत हो), तो अस्पताल में रहना उनके लिए अधिक समस्या पैदा कर सकता है। उन्हें अस्पताल के माहौल से तालमेल बिठा पाने में अधिक दिक्कत होगी। उनके प्रियजन उनके साथ नहीं रह पायेंगे। व्यक्ति के आस-पास सब स्वास्थ्य कर्मचारी मास्क और PPE (personal protective equipment, व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण) पहने होंगे, और उनके चेहरे भी ठीक से नजर नहीं आ रहे होंगे। कल्पना कीजिये कि पहले से ही अपने माहौल में दिक्कत महसूस करने वाले लोगों के लिए यह सब कितना डरावना होगा! वे समझ नहीं पायेंगे कि उनके चारों ओर यह सब क्यों हो रहा है, और न ही अपनी परेशानी बता पायेंगे। पूछ भी पाए तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिल पायेगा। वे अपनी ज़रूरतें और समस्याएं व्यक्त करने में भी दिक्कत महसूस करेंगे।

इस पोस्ट में डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति को कोविड 19 से बचाने पर फोकस है। अन्य पोस्ट में इस स्थिति के अन्य देखभाल सम्बंधित विषयों पर विस्तार होगा, जैसे कि लॉकडाउन या अन्य प्रतिबंधों की स्थिति में (या लॉकडाउन में ढील से उत्पन्न स्थिति में) देखभाल और दैनिक दिनचर्या की चुनौतियों को कैसे संभालें ( भाग 2: देखभाल कैसे एडजस्ट करें), चिकित्सकीय सलाह और सेवाएं कैसे प्राप्त करें (भाग 3: दवा खरीदना, टेस्ट करवाना, टेलीमेडिसिन से सलाह लेना, अस्पताल जाना), और डिमेंशिया देखभाल समर्थक सेवाएं कैसे प्राप्त करें और सब कार्यों में संतुलन कैसे बैठाएं इत्यादि (भाग 4: कारगर देखभाल और तनाव मुक्ति के लिए अन्य सुझाव, सहायता के लिए संसाधन, इत्यादि । हालांकि यह पोस्ट डिमेंशिया वाले परिवारों पर केन्द्रित है, यह किसी भी ऐसे परिवार के लिए मददगार है जिस में बुज़ुर्ग हैं। (नोट: इस पृष्ठ पर या इस वेबसाइट के किसी भी अन्य पृष्ठ पर सिर्फ देखभाल संबंधी चर्चा और संसाधन हैं – इन पर कोई चिकित्सा सलाह नहीं है)

एक चेतावनी: हर अनलॉक के साथ कोविड संबंधी प्रतिबन्ध कम होते जा रहे हैं। लोग घर से बाहर अधिक कामों के लिए और अधिक समय के लिए निकल रहे हैं। घरों में काम करने वाले और मेहमान भी अधिक आ रहे हैं। कोविड का फैलाव काफी ज्यादा है, और कई लोग, जिन्हें कोविड है, उनमें लक्षण नजर नहीं आते हैं। इस सब को देखते हुए स्पष्ट है कि इन्फेक्शन होने का खतरा अब अधिक है। डिमेंशिया वाले व्यक्ति को कोविड से बचाए रखने के कदम में बिलकुल भी ढील नहीं होनी चाहिए , बल्कि पहले से अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।

इस पृष्ठ पर:

कोविड 19 पर विश्वसनीय जानकारी और बचाव के लिए आधिकारिक स्रोत.

कोविड 19 क्या है, और इस से बचाव के तरीकों को समझने के लिए सबसे अच्छा और विश्वसनीय स्रोत हैं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का वेबसाइट Opens in new window। इस पर अनेक हिंदी संसाधन भी हैं। पेश हैं कुछ ख़ास तौर से उपयोगी संसाधन के लिंक,आपकी सुविधा के लिए।

बुजुर्गों के लिए कोविड 19 अधिक खतरनाक है। इसे पहचानते हुए, भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने एक दस्तावेज़ जारी किया है: कोविड 19 (COVID 19) के दौरान वरिष्ठ नागरिकों के लिए सलाह Opens in new window। अन्य बातों के अलावा, इस में यह सलाह दी गयी है कि वरिष्ठ नागरिकों को घर के भीतर ही रहना चाहिए, आगंतुकों से बचना चाहिए, स्वच्छता बनाए रखने वाली आदतें अपनानी चाहिए, और अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए। यह भी सलाह है कि उनकी देखरेख करने वाले व्यक्तियों को मदद करने से पहले हाथ धोना चाहिए, देखभाल के काम करते समय नाक-मुंह ढके रहना चाहिए, और जिन सतहों का अकसर उपयोग होता है, उन्हें साफ़ करते रहना चाहिए। वरिष्ठ नागरिकों के उचित पोषण और पानी का सेवन सुनिश्चित करना चाहिए। यह डॉक्यूमेंट इस बात पर भी जोर देता है कि देखभाल करने वाले किसी भी लक्षण से पीड़ित हों तो उन्हें वरिष्ठ व्यक्ति के पास नहीं जाना चाहिए। पूरा डॉक्यूमेंट देखें Opens in new window

एक अन्य पहलू है प्रतिरक्षक क्षमता (इम्युनिटी) को मजबूत करना, ताकि कोविड 19 होनी की संभावना कम हो। प्रतिरक्षा में सुधार करने के लिए आयुष मंत्रालय के सुझावों को यहाँ पढ़ें Opens in new window। उनके यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध अनेक वीडियो देखें: Opens in new window

कोई भी प्रश्न हो या लगे की शायद आपको या किसी प्रियजन को कोविड जैसे कुछ लक्षण हैं, तो बिना देर करे नि:संकोच राष्ट्रीय हेल्पलाइन: 91-11-2397 8046 या टोल फ्री नंबर: 1075 डायल करें। इ-मेल संपर्क है: ncov2019@gov.in, और ncov2019@gmail.com या अपने राज्य की हेल्पलाइन पर संपर्क करें। सभी राज्यों की हेल्पलाइन की सूची यहाँ देखें Opens in new window

सबसे नवीनतम लॉकडाउन/ अनलॉक दिशानिर्देश Opens in new window में स्पष्ट रूप से यह सलाह दी गयी है कि वरिष्ठ नागरिक घर पर रहें, और आवश्यकता होने पर ही घर से निकलें। निर्देश से एक अंश: “65 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों, अन्य रोगों से ग्रस्त व्यक्तियों, गर्भवती महिलाओं और 10 वर्ष की आयु के बच्चों को, आवश्यक सेवाओं और स्वास्थ्य प्रयोजनों को छोड़ कर, घर पर रहने की सलाह दी जाती है।”

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डिमेंशिया वाले व्यक्तियों को कोविड 19 से बचाने की ख़ास चुनौतियों पर चर्चा

कोविड 19 से डिमेंशिया वाले व्यक्तियों की रक्षा करने में कुछ अतिरिक्त चुनौतियाँ हैं:

  • व्यक्ति को कोविड 19 के बारे में समझना अधिक मुश्किल है: कोविड 19 एक नया संक्रमण (यानि कि इन्फेक्शन) है, अन्य संक्रमणों से अधिक खतरनाक, और इस में अधिक सावधानी की जरूरत है। डिमेंशिया वाले व्यक्ति शायद इसे समझ न पायें या जानकारी याद न रख पायें। वे आस-पास के परिवर्तनों से विचलित या परेशान हो सकते हैं। कोविड 19 की जरूरी जानकारी को सरल तरीके से, बार-बार दोहराने की जरूरत हो सकती है। इसके लिए चित्रों / कार्टूनों के इस्तेमाल के बारे में सोचें। या शायद मोटे तौर पर सिर्फ इतना कहना पर्याप्त हो सकता है कि यह एक ऐसी समस्या है जिसके लिए कुछ अधिक सावधानियों की आवश्यकता है। ध्यान रखें, जानकारी से उन्हें टेंशन नहीं होना चाहिए। आप स्वास्थ्य मंत्रालय के वेबसाइट पर उपलब्ध साधनों में से कुछ ऐसे सरल लेख और चित्र चुन सकते हैं जो व्यक्ति के लिए उपयुक्त हैं। ऊपर दिए गए साधन देखें।
  • देखभाल करने के तरीकों में बदलाव स्वीकारने में दिक्कत – जैसे कि देखभाल कर्ता का मास्क पहनना, बार-बार हाथ धोना, सतह साफ़ करना इत्यादि : व्यक्ति को कोविड 19 से बचाने के लिए पास जाने पर देखभाल कर्ता को मास्क पहनना होगा। ख़ास तौर से दैनिक कार्यों में मदद करते समय – जैसे कि व्यक्ति को नहलाना, खाना खिलाना, इत्यादि। परन्तु मास्क पहनने के कारण देखभाल कर्ता का चेहरा अलग लगता है और शायद पहचाना न जाए, मुस्कराहट और अन्य भाव दिखाई नहीं देते हैं, और मास्क की बाधा के कारण बोली भी अस्पष्ट हों सकती है। इस तरह से ढके चेहरे वाले देखभाल कर्ता के साथ डिमेंशिया वाले व्यक्ति सहज हो पायें, इस के लिए क्या करना होगा, यह एक विषय है जिस पर देखभाल करने वाले अभी भी रचनात्मक समाधान की तलाश में हैं। कुछ सुझाव हैं कि व्यक्ति को बार-बार आश्वस्त करने और तालमेल बिठाए रखने पर अधिक ध्यान देना होगा। कार्य पूरा करने के लिए जल्द-बाज़ी न करें। सब्र रखें और जब-तब जरूरी हो, व्यक्ति को याद दिलाएं कि आप कौन हैं, और अगर वे पूछें तो बताएं कि यह मास्क उन की सुरक्षा के लिए है।
  • पूरे वक्त घर में रहने वाले डिमेंशिया व्यक्ति को कौन सी (और किस हद तक) नई स्वच्छता सम्बंधित आदतों को अपनाना होगा, इस पर विचार करें। : मास्क पहनना, बार-बार हाथ धोना, सतह साफ़ करना, क्या यह सब उन डिमेंशिया वाले व्यक्ति को भी करना होगा जो सिर्फ घर पर ही हैं? क्या वे यह सब समझेंगे और कर पायेंगे? या क्या बाकी परिवार वाले अधिक सतर्क रहें और पूरी सावधानी बरतें तो व्यक्ति को कोविड 19 से बचाने के लिए पर्याप्त होगा? इस विषय पर विशेषज्ञों की अलग-अलग राय है। कई लोगों को लगता है कि घर में सभी लोग अगर सब सावधानियों का पालन करें तो डिमेंशिया वाले व्यक्ति को अतिरिक्त सावधानी की आवश्यकता नहीं है। वैसे भी, डिमेंशिया वाले व्यक्ति मास्क पहनने के लिए शायद ही सहमत हों – क्योंकि यह एक नई बात है और असुविधाजनक भी। कई परिवारों का अनुभव है कि मास्क पहनने पर जोर देने से व्यक्ति उत्तेजित हो जाते हैं। वे बार-बार हाथ धोने से मना कर सकते हैं। इन दिक्कतों को नजर में रखते हुए उतनी ही कोशिश करें जितनी कारगर बचाव के लिए आवश्यक हो और जो व्यक्ति बिना उत्तेजित या परेशान हुए कर पायें। यह जरूर निश्चित करें कि सब परिवार वाले और अन्य घर में आने वाले दूसरे लोग पूरी सावधानी रख रहे हैं।
  • यदि व्यक्ति का घर से बाहर निकलना बहुत जरूरी हो, तो बहुत ही ध्यान रखना होगा। कुछ ऐसी परिस्थितियां हैं जहां डिमेंशिया वाले व्यक्ति को घर के बाहर जाना होगा। हाल में लागू दिशानिर्देशों में यह सलाह दी गयी है कि घर से बाहर तभी निकलें जब कोई जरूरी काम हो, या स्वास्थ्य के लिए निकलना जरूरी हो। फिलहाल लोगों से मिलने के लिए बाहर जाने को उचित नहीं माना जा रहा है। डिमेंशिया वाले व्यक्ति कोविड 19 से अधिक खतरे में हैं, और उनके लिए सावधानी बनाए रखना भी ज्यादा मुश्किल है। इसलिए उनका निकलना कम से कम रहे तो बेहतर है। पर यदि उन्हें बाहर निकलना है, तो बहुत ही सावधान रहना होगा। उनके साथ जा रहे लोगों को पूरे वक्त सतर्क रहना होगा। मास्क ठीक तरह से व्यक्ति के चेहरे पर बना रहे, व्यक्ति बेकार इधर उधर चीज़ें न छूएं, बार-बार उनके हाथों को सैनिटाइज़र से साफ़ करा जाए, इत्यादि। बाहर के माहौल से वे घबरा सकते हैं और उन्हें आश्वस्त करते रहना भी जरूरी होगा।

भारत में लॉकडाउन का सिलसिला मार्च 2020 में शुरू हुआ था इसके अंतर्गत जो प्रतिबन्ध लागू करे गए हैं, वे समय के साथ बदलते जा रहे हैं। शुरू में लॉकडाउन बहुत सख्त था, पर अब ढील दी जा रही है। खास तौर से उन इलाकों में ढील है जहां कोविड 19 संबंधी स्थिति अधिक नियंत्रण में है, जैसे कि कई दिनों से कोई नया केस न नज़र आना। मई 30 के दिशानिर्देश में चरणबद्ध तरीके से गतिविधियोँ को फिर से शुरू करने के लिए अनलॉक निर्देश जारी करे गए थे, और तब से जारी विभिन्न अनलॉक संबंधी निर्देश चरणबद्ध तरह से प्रतिबन्ध ढीले कर रहे हैं। परन्तु यह समझना बहुत जरूरी है कि कोविड 19 होने का खतरा अब भी मौजूद है। कोविड के केस की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। । बुजुर्गों और डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्तिओं को कोरोनावायरस से बचाव के तरीके अपनाना अब भी उतना ही जरूरी है। लॉकडाउन में ढील का मतलब यह नहीं कि अब सावधानी की जरूरत नहीं हैं। बल्कि जैसे जैसे प्रतिबन्ध कम हो रहे हैं और लोग अधिक मिल जुल रहे हैं और काम और अन्य कारणों से बाहर जा रहे हैं, लोग कम सावधान होने लगते हैं। इस से इन्फेक्शन का खतरा बढ़ता है। इसलिए यह न सोचें कि अब रिश्तेदारों, बेटा-बेटी, पोता-पोती, नाता-नाती और मेहमानों के आने जाने का सिलसिला बेझिझक लग सकता है। कृपया अपने सावधानी का स्तर बनाए रखें।

कुल मिलाकर यूं मानिए, डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति को कोविड 19 से बचाए रखना और उनकी उचित देखभाल भी करते रहना एक चुनौती है। अनेक परिवर्तनों की जरूरत है। इन सब बदलाव से व्यक्ति परेशान और उत्तेजित या मायूस न हों, इसके लिए भी कदम उठाने होंगे। दुनिया भर के डिमेंशिया परिवार इस समस्या का सामना कर रहे हैं। वे यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि उनकी स्थिति में क्या कारगर है, और क्या नहीं। अन्य परिवारों के अनुभव जानने के लिए कई फ़ोरम हैं, पर ऑनलाइन फोरम अंग्रेज़ी में हैं। हो सकता है आप किसी स्थानीय फोरम या संसाधन या सेवा से संपर्क कर पायें जो आपकी कुछ सहायता करें। सहायता के लिए सिर्फ डिमेंशिया संसाधन तक सीमित न रहें। वरिष्ठ नागरिकों की या मानसिक तनाव की हेल्पलाइन से भी शायद कुछ मदद मिले।

नोट: यदि डिमेंशिया व्यक्ति अकेले रहते हैं तो उनके लिए यह सब समझना और संभालना बहुत ही पेचीदा है। बेहतर यही होगा कि वे किसी रिश्तेदार के घर में रहें, ताकि वे कोविड 19 से बचे रहें, और साथ ही सम्बंधित प्रतिबंधों का अनुपालन भी कर पायें।

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इस सीरीज के अन्य भाग पढ़ें: देखभाल के बदलाव पर चर्चा – भाग 2: देखभाल कैसे एडजस्ट करें, चिकित्सीय सलाह पर चर्चा – भाग 3: दवा खरीदना, टेस्ट करवाना, टेलीमेडिसिन से सलाह लेना, अस्पताल जाना, और भाग 4: कारगर देखभाल और तनाव मुक्ति के लिए अन्य सुझाव, सहायता के लिए संसाधन, इत्यादि

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